Monday, May 12, 2014

प्रभावित क्षेत्र को तो पूरी तरह छावनी में तब्दील

: शनिवार की घटना के बाद रविवार को पूरा शहर खौफ के साए में दिखा। प्रभावित क्षेत्र केबाजार आधे अधूरे खुले , लेकिन शहर का सर्राफा बाजार पूरी तरह बंद रहा। सड़कों पर लोगों की मौजूदगी नके बराबर रही। जानकारों का मानना है कि रविवार को करीब 5 करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ है। प्रभावितघटनास्थल छावनी में तब्दील दिखा। वहीं , खौफजदा लोग घर से बाहर निकलने से बचे। जिन सड़को पर चलनाभी दुश्वार होता था , आज वहां गाड़ियां फर्राटे से निकल रही थीं। खैरनगर , घंटाघर  वैलीबाजार इलाके कीदुकानें कुछ खुली , कुछ बंद नजर आईं। खुली दूकानों पर कस्टमर नजर नहीं आए। शहर के हर चौराहे पर पुलिसका अमला नजर आया। प्रभावित क्षेत्र को तो पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया है। हर गली में पुलिस ,पीएसी और आरएएफ तैनात दिखी। जानकारों का मानना है कि आज मेरठ के बाजार में दंगे का प्रभाव होने केकारण करीब 5 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। 
शनिवार
 को मुहल्ला तीरगरान में दो पक्षों के बीच हुए बवाल के मामले में देर रात लगभग दो बजे पांच लोगों नेअलग  अलग तहरीर देकर एक पार्टी के नेताओं समेत करीब 200 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। यहमुकदमें एक पक्ष के लोगों की तरफ से दर्ज कराए गए हैं। इनमें करीब 15 लोगों को नामजद किया गया है।मीडियाकर्मियों की ओर से भी मारपीट , लूटपाट की धराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। सभी मुकदमे थानाकोतवाली में दर्ज कराए गए हैं। वहीं , दूसरे पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। उनके पक्ष का एक शख्सघटना के बाद से गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है , जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। 
मेरठ
 में हुई घटना की जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कहना है प्रदेश के प्रमुखसचिव ( होम )  . के . गुप्ता का। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को घटना के दौरान हुई चल अचल संपत्ति केनुकसान का जायजा लेकर रिर्पोट देने के लिए कहा गया है। जिनका नुकसान हुआ है , उन्हें मुआवजा दियाजाएगा। वहीं , प्रदेश के डीजीपी ने माना कि पुलिस की कमी के कारण प्रशासन को दिक्कतें आईं। लेकिन अब पूराफोर्स तैनात कर दिया गया है। साथ ही मेरठ में पुलिस पिकेटिंग की पुरानी व्यवस्था को भी तत्काल प्रभाव सेलागू कर दिया गया है। 
प्रदेश
 के प्रमुख सचिव ( होम )  के गुप्ता और डीजीपी आनंद लाल बनर्जी रविवार सुबह यहां पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक अमले के साथ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। बाद में वे मेडिकल कॉलेज में घायलों से मिलने पहुंचेसर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए गुप्ता ने कहा कि चूक कहां हुई , घटना के दौरान क्या कमियां रहीं औरभविष्य में ऐसी घटना  हो इसके लिए क्या किया जाना जरूरी है , इस पर भी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसघटना के दौरान चलअचल संपत्ति का जो नुकसान हुआ है , उसका ब्यौरा जिला प्रशासन से मांगा गया है। उन्हेंसरकार की ओर से मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वे चार में तीन घायलों से मिले हैं। उनकी हालतठीक है। जबकि एक घायल की हालत नाजुक बनी हुई है। 
डीजीपी
 आनंद लाल बनर्जी ने माना कि चुनाव के कारण जिले का फोर्स बाहर गया हुआ था , जिस कारण घटनाको कंटोल करने में दिक्कत आई। अब फोर्स यहां  चुका है। शहर शांत है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।मेरठ में तत्काल प्रभाव से पुलिस पिकेटिंग की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने के आदेश दे दिए हैं। 

कुएं को लेकर दो पक्ष कई बार आमने-सामने

पिछले साल वेस्ट यूपी में हुए सांप्रदायिक दंगों से अगर मेरठ जिला प्रशासन ने सीख ली होती तो शायद शानिवार को हुए मजहबी बवाल को रोका जा सकता था। मुहल्ला तीरगरान में कई दिनों से प्याउ को लेकर चल रहे दो पक्षों के बीच तनाव की जानकारी प्रशासन को थी। इसके बावजूद जिला प्रशासन विवाद की सूचना मिलने पर उसके परिणाम का आकलन करने में असफल रहा। सूचना के बावजूद पुलिस का मौके पर देर से पहुंचना भी बलवे का बड़ा कारण रहा। मौके पर थोड़ी संख्या में पहुंची पुलिस खुद अपना बचाव करने के लिए गलियों में छिपती दिखी। इससे दंगाइयों का मनोबल बढ़ गया और वे उत्पात मचाते रहे। सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि इस घटना के पीछे सोची समझी साजिश तो नहीं थी? 
थाना कोतवाली के मुहल्ला तीरगरान स्थित धार्मिक स्थल के पास कुंए का विवाद वर्षों पुराना है। कुएं को लेकर दो पक्ष कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। उनमें समझौते भी हुए। लेकिन हल नहीं निकल पाया। चार दिन पहले भी यहां विवाद हुआ था। इसकी जानकारी थाना पुलिस को भी थी। फिर शानिवार को जब यहां एक पक्ष के लोगों ने प्याउ बनाने का काम शुरू करना चाहा तो दूसरे पक्ष ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी। लेकिन पुलिस अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। थोड़ी प्रतीक्षा के बाद दूसरे पक्ष ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। कुछ देर के लिए लगा कि मामला शांत हो गया है। लेकिन थोड़ी देर बाद ही दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। जमकर पथराव व फायरिंग हुई। दर्जनों लोग घायल हो गए। चार को गोली लगी जिसमें से एक की हालत नाजुक बनी हुई है। बलवाईयों ने दुकानें लूटीं, वाहनों को आग के हवाले किया और थोड़ी संख्या में मौके पर पहुंची पुलिस लाचार देखती रही। बाद में आईजी आलोक शर्मा भारी पुलिस बल लेकर पहुंचे और फिर पुलिस अपने रंग में नजर आई।
 
शानिवार को प्याउ को लेकर हुए विवाद के बाद दोनो पक्ष वापस चले गए थे। इस घटना के कुछ देर बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आए और पथराव व फायरिंग हुई। इससे ऐसा आभास मिलता है कि उन्हें किसी के द्वारा उकसाया या भड़काया गया था। पुलिस के सूत्र इसके पीछे किसी सुनियोजित साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं कर रहे हैं। घटना के बाद जिस तरह बड़ी संख्या में दोनों पक्षों की ओर से फायरिंग की गई है, उससे भी आखिर यह सवाल खड़ा हो रहा है कि इतनी बड़ संख्या में अवैध हथियार लोगों के पास कहां से आए। हाल ही में क्षेत्र में चुनाव हुए हैं। ऐसे में क्या पुलिस को इन हथियारों की कोई जानकारी नहीं थी। खुफिया विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है।
 

Thursday, May 8, 2014

मुजफ्फरनगर के कस्बा बुढ़ाना में ऑनर किलिंग मामला



 मुजफ्फरनगर के कस्बा बुढ़ाना में ऑनर किलिंग मामला सामने आया है। यहां की एक युवती को अपने ममेरे भाई से प्रेम करना मंहगा पड़ा। परिजनों के समझाने पर भी जब उसने अपना रास्ता नहीं बदला तो आरोप है कि उसकी हत्या कर दी गई। जैसे ही यह जानकारी उसके प्रेमी को मिली अगले दिन उसने जंगल में पेड़ से झूलकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। लड़की का नाम नगमा और युवक नाम मुबारक बताया गया है।
नगमा और मुबारक के बीच काफी समय से प्रेम संबंध चले आ रहे थे। युवती के परिजन को जब यह पता चला तो वह आपा खो बैठे उन्होंने उसे काफी डांट फटकार लगाई और बढ़ते कदम पीछे खींचने की हिदायत दी। यह शिकायत उन्होंने मुबारक के परिजनों से भी की। लेकिन जब दोनों ने मिलना-जुलना बंद नहीं किया तो आरोप है कि नगमा की गला दबाकर हत्या कर दी गई। परिजन उसका चुपचाप अंतिम संस्कार करना चाहते थे लेकिन इसी बीच यह भनक पुलिस को लग गई। पुलिस ने युवती के शव को कब्जे में ले उसका पोस्टमॉर्टम कराया। उसकी रिपोर्ट से यह बात सामने आई कि उसकी हत्या गला घोंट कर की गई।
उधर प्रेमिका की हत्या की खबर मिलने के बाद कल जंगल में मुबारक ने गले में फंदा लगा पेड़ से लटकर आत्महत्या कर ली। नगमा की हत्या के आरोप में पुलिस ने उसके दो भाइयों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

Monday, May 5, 2014

कश्मीरियों के अंदर से निकालने का बढ़िया तरीका

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे न लगाने की वजह से कश्मीरी छात्रों की पिटाई की सख्त आलोचना की है। ग्रेटर नोएडा में हुई इस घटना पर आक्रोश जताते हुए उमर अब्दुल्ला ने राज्य सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने ट्वीट कर कटाक्ष किया, 'क्यों न देशभक्ति को कश्मीरी स्टूडेंट्स में पीट-पीट कर भर दें। अलग-थलग कर दिए जाने के डर को कश्मीरियों के अंदर से निकालने का बढ़िया तरीका है!'
उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा, 'अगर विश्वविद्यालय और राज्य सरकारें अपने यहां आए कश्मीरी छात्रों को सुरक्षा नहीं दे पा रही हैं तो उन्हें अपनी असमर्थता और अनिच्छा स्वीकार करनी चाहिए।'
 
ग्रेटर नोएडा के पाई सेक्टर के नेहा अपार्टमेंट में कई कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के छात्र रहते हैं। शनिवार को अपार्टमेंट में रहने वाले एक कॉलेज के करीब 6 छात्रों ने शराब के नशे में जमकर हंगामा किया। आरोपियों ने एक यूनिवर्सिटी के 3 कश्मीरी छात्रों के कमरे में घुसकर उनके साथ मारपीट की और उनसे जबर्दस्ती 'हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद' के नारे लगवाए। एक छात्र ने मीडिया को बताया, 'रात के वक्त नशे में धुत कुछ छात्रों ने जबरन हमारे कमरे का दरवाजा खुलवाया और पूछा कि कश्मीरी कौन है। फिर उन्होंने हमसे भारत जिंदाबाद का नारा लगाने को कहा। हमने लगा दिया। उसके बाद उन्होंने हमसे पाकिस्तान मुर्दाबाद बोलने को कहा। हमारे इनकार करने पर उन्होंने हमारे साथ मारपीट की और हमें आतंकवादी कहा।'
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि उन्हें फिलहाल इस घटना की जानकारी नहीं है। यादव ने कहा, 'कश्मीरी छात्रों की पिटाई मामले के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। यह गंभीर मसला है मैं इसकी जांच कराऊंगा।'
 
उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में तैनात अपने राज्य के रेजिडेंट कमिश्नर को मामले की जानकारी लेने के लिए ग्रेटर नोएडा भेजा है। नोएडा में इससे पहले भी ऐसी ही एक घटना हो चुकी है जब भारत-पाकिस्तान मैच में पाकिस्तान का समर्थन करने की वजह से एक निजी यूनिवर्सिटी से कश्मीरी छात्रों को सस्पेंड कर दिया था। तब राज्य पुलिस ने उन छात्रों पर देशद्रोह का केस भी दर्ज कर दिया था। हालांकि बाद में मुकदमा वापस ले लिया गया था।

Friday, May 2, 2014

1925 से लेकर 1970 तक यातायात में आए बदलाव पर रिसर्च

जर्मनी की गैटिनियन यूनिवर्सिटी का एक छात्र स्टीफन टेट जलाफ भारत में 1925 से लेकर 1970 तक यातायात में आए बदलाव पर रिसर्च करने के लिए इन दिनों भारत में हैं।
देश के कई हिस्सों में शोध करने के बाद स्टीफन आजकल मेरठ और मुजफ्फरनगर में अपने रिसर्च के काम में लगे हुए हैं। मेरठ में रिसर्च करने के बाद गुरुवार को वे मुजफ्फरनगर पहुंचे। उनका कहना है कि जर्मनी की कुल जनसंख्या भारत के कई राज्यों से कम है। इसके बावजूद जर्मनी की सड़कों की चौड़ाई ज्यादा है। टेट को हिंदी का भी अच्छा ज्ञान है।
 
मुजफ्फरनगर के डीएम कार्यालय पहुंचे स्टीफन ने डेप्युटी कलक्टर मुनीष चंद शर्मा से मिलकर अपने रिसर्च के बारे में जानकारी दी और सहयोग की अपील की। स्टीफन ने मुलाकात के दौरान बताया कि उन्होंने जेएनयू से इतिहास का अध्ययन किया है। यूं तो वे जर्मनी की गैटिनियन यूनिवर्सिटी के प्रफेसर रवि आहूजा के अंडर में शोध कर रहे हैं, लेकिन भारत में उनके सेकंड गाइड की भूमिका प्रो. राधिका सिंह निभा रही हैं।
 
उन्होंने बताया कि भारत में शिक्षा का स्तर अच्छा है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं अच्छी नहीं हैं। उनका मानना है कि यहां शिक्षा के प्राइमरी और सेकंडरी लेवल को ऊंचा उठाने की आवश्यकता है। वह भारत में 1925 से लेकर 1970 के बीच मोटर परिवहन के इतिहास में हुए बदलावों पर शोध कर रहे हैं और अब तक दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर, आगरा और मेरठ का भ्रमण कर चुके हैं।
 
उन्होंने बताया कि जब वह सामाजिक कार्य के लिए 2002 में श्रीलंका गए थे, तभी यह शोध करने का विचार उनके मन में आया था। यह अलग तरह का शोध है, जिसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ रही है।
 
उन्होंने बताया कि जर्मनी में जहां सड़कें चौड़ी होती हैं, वहीं भारत में ये काफी संकरी हैं। जर्मनी की जनसंख्या भारत के दिल्ली, कोलकाता, कानपुर की जनसंख्या से भी कम है। भारत में मिल रही मेहमानवाजी से स्टीफन काफी खुश हैं। स्टीफन मुजफ्फरनगर के अपर जिलाधिकारी प्रशासन इंद्रमणि त्रिपाठी से भी मिले। त्रिपाठी ने उन्हें ईआरके के पास पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए भेज दिया। स्टीफन यूं तो इन दिनों मेरठ में रह रहे हैं और वहीं से ही मुजफरनगर आते-जाते रहेंगे।