Monday, December 30, 2013

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक पार्टियां इसे सियासी रंग देने में जुटी

उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में दंगों पर जारी सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। कोई राजनैतिक पार्टी ऐसी नहीं है, जो मुजफ्फरनगर दंगों पर अपनी सियासी रोटियां नहीं सेंक रही हो, जबकि दंगा पीड़ितों की शिकायतों का कहीं निपटारा नहीं हो रहा है और आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक पार्टियां इसे सियासी रंग देने में जुटी हैं। 
मुजफ्फरनगर दंगों में 50 हजार से ज्यादा लोग बेघर हुए। उन्हें 38 शरणार्थी शिविरों में रखा गया। इन शिविरों में कुव्यवस्था और सुविधाओं का अभाव देखा गया। मुलायम ने हाल में कहा था कि शिविरों में कुछ दलों से जुड़े साजिशकर्ता रह रहे हैं। बीजेपी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने आरोप लगाया कि मुजफ्फरनगर दंगा 'सेकुलर सूरमाओें' का सियासी संग्राम है। उनके अनुसार दंगों के बाद राहुल गांधी 'सेकुलर टुरिज्म' कर रहे हैं, वहीं मुलायम सिंह दंगा पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। कुछ दिन पहले दंगा शिविरों का दौरा करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि जिन लोगों ने दंगा कराया, वे नहीं चाहते कि दंगा पीड़ित अपने घर लौटें। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा था कि शरणार्थी शिविरों में स्थिति काफी खराब है। बच्चे मर रहे हैं। राज्य में एक युवा मुख्यमंत्री हैं।
 
उत्तरप्रदेश मानवाधिकार आयोग को मुजफ्फरनगर दंगे के सिलसिले में 4 दिसंबर 2013 तक 8 शिकायतें प्राप्त हुई और सभी शिकायतें निपटारे की प्रक्रिया में है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत आयोग ने बताया कि आयोग में अध्यक्ष और कुछ सदस्यों के पद कुछ समय तक रिक्त थे, जिन पर अब नियुक्ति हो गई है और इन शिकायतों पर विचार शुरू हो गया है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने मुजफ्फरनगर दंगों के बारे में सूचना मांगने पर कहा कि आप जो सूचना मांग रहे हैं, वह 346 पन्नों की है, जिसे प्राप्त करने के लिए 692 रुपये की फीस भेजें।
 

मुजफ्फरनगर दंगों के बारे में राष्ट्रपति कार्यालय को प्राप्त शिकायतों और कार्यवाही पर राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा कि सचिवालय में प्रतिवेदनों का रिकार्ड विषयवार नहीं रखा जाता है। रिकार्ड के अनुसार मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित बीजेपी का एक एप्लीकेशन 27 सितंबर 2013 को प्राप्त हुई, जिसे विशेष कार्य अधिकारी और पीएमओ को रेफर किया गया है। इस बीच यूपी सरकार ने पहली बार स्वीकार किया कि दंगा पीडितों में 15 साल से कम उम्र के 34 बच्चों की मौत हुई है। 
राष्ट्रीय
 अल्पसंख्यक आयोग की एक सदस्य ने कहा कि दंगे के सिलसिले में अपराधियों को गिरफ्तार नहीं कियागया है , जिसके कारण समुदाय के लोगों में भरोसा नहीं जाग पा रहा है  भय के आलम में वे अपने घरों को नहींलौटना चाहते हैं और इस समय भीषण ठंड से जद्दोजहद कर रहे हैं। मुरादाबाद स्थित आरटीआई कार्यकर्ता सलीमबेग ने सरकार और विभागों से दंगों के बारे में जानकारी मांगी थी। वहीं , राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार गुप्ता ने कहा था कि राहत शिविरों में ठंड से किसी कीमौत नहीं हुई है  ठंड से कभी कोई नहीं मरता है , अगर ठंड से किसी की मौत होती तो दुनिया के सबसे ठंडेइलाके साइबेरिया में कोई जिंदा नहीं बचता। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विवादास्पद बयान देनेवाले गृह विभाग के प्रमुख सचिव का लगभग बचाव करते हुए कहा कि ' टीवी चैनलों के जमाने में ' अधिकारियोंको अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए। सरकार की कोशिश है कि मुजफ्फरनगर का मसला खत्म हो औरविस्थापित लोग अपने घर वापस जाएं। आरएलडी नेता जयंत चौधरी ने कहा कि कानून और व्यवस्था देखनाराज्य सरकार की जिम्मेदारी है और मुजफ्फरनगर दंगा लापरवाही का परिणाम है। 

Friday, December 27, 2013

सख्ती बरतनी शुरू

राहत शिविरों में रह रहे लोगों को लेकर समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के तल्ख बयान के बाद प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। मुजफ्फरनगर के लोई राहत शिविर से लोगों को भेजने का काम तेज हो गया है। पिछले दो दिनों में तीस परिवारों को कैंप से भेजा जा चुका है। इस बीच, सांझक में कब्रिस्तान की जमीन पर तंबू लगाकर रह रहे 30 शरणार्थी परिवारों के खिलाफ सरकारी जमीन कब्जाने की रिपोर्ट लिखाई गई है। इस बीच, राज्य सरकार ने माना है कि दंगा प्रभावित परिवारों के लिए मुजफ्फरनगर और शामली में स्थापित शिविरों के कुल 34 बच्चों की मौत हुई है।
समाजवादी पार्टी सितंबर में हुए दंगों के आम चुनाव पर प्रभाव को लेकर आशंकित है। इन दंगों में 60 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग विस्थापित हो गए थे, जो मुजफ्फरनगर और शामली के राहत कैंपों में रह रहे हैं। अखिलेश सरकार जल्द से इन लोगों को कैंपों से हटाना चाहती है। इस दिशा में प्रशासन भी निरंतर प्रयास कर रहा है, लेकिन दहशत के चलते विस्थापित फिलहाल इन कैंपों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
प्रशासन का कहना है कि तीन-चार दिनों में लोई शिविर से लोग सुरक्षित स्थान पर भेज दिए जाएंगे। डीएम कौशलराज शर्मा ने बताया कि लोई शिविर से बुधवार को 20 लोग गांव चले गए थे। गुरुवार को नौ और लोग शिविर से भेज दिए गए हैं। उनका कहना है कि सर्दी बढ़ने के कारण हालात बिगड़ सकते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। एडीएम प्रशासन इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि शुक्रवार को मुआवजा पा चुके सौ लोगों को कैंप से हटाया जाएगा। उनका कहना है कि इस कैंप में रहने वाले 167 परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है।
प्रशासन भले ही लोगों को राहत कैंपों से हटाने में जुटा है लेकिन इन्हें फिर से गांव या किसी सुरक्षित जगह पर बसाने की कोई योजना उसके पास नहीं है। बुढ़ाना के एसडीएम मुनीश चंद्र शर्मा, जिनके अंदर लोई गांव आता है, का कहना है कि कैंप से निकले लोगों के लिए हमारे पास कोई योजना नहीं है। कुछ विस्थापितों ने मुआवजे की राशि से जमीन खरीदी है।
मुआवजे के वितरण को लेकर भी शिकायतें हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि मुआवजा उन्हें ही दिया जा रहा है जिनके पास या तो राशन कार्ड है या रिश्वत दे रहे हैं। लोई कैंप में रहने वाले याकूब शेख का कहना है कि समस्या यह है कि संयुक्त परिवारों में से भी किसी एक को मुआवजा दिया जा रहा है। यासीन शेख का कहना है कि अधिकारी हमें बाहर निकल रहे हैं, लेकिन हमें नहीं पता कि यहां से कहां जाएंगे। गांव में हमारे घर और जमीन पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर लिया है।
इस बीच, राज्य सरकार ने माना है कि दंगा प्रभावित परिवारों के लिए मुजफ्फरनगर और शामली में स्थापित राहत कैंपों के कुल 34 बच्चों की मौत हुई। प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता ने समिति की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सभी बच्चों की मौत अलग-अलग कारणों से हुई है। उन्होंने दावा किया कि शिविर में सिर्फ 10-12 बच्चों की मौत हुई। शेष बच्चों की मौत शिविर से बाहर जाने के बाद हुई। इनमें से अधिकतर बच्चों की बीमारी का इलाज उनके परिवार के सदस्यों ने बाहर के डॉक्टरों से कराई थी। उन्होंने कहा कि शिविर में रह रहे परिवारों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर है
पत्रकारों ने जब प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता से पूछा कि ज्यादातर बच्चों की ठंड से मौत होने की बात सामने आ रही है, तब उन्होंने जवाब दिया कि ऐसी भी ठंड अभी नहीं पड़ी है। वह बोले कि बच्चों की मौत सितंबर से दिसंबर के दौरान हुई है वह भी विभिन्न कारणों से। ठंड से बच्चों की मौत का मुद्दा फिर से उठने पर उन्होंने उल्टा सवाल किया कि ठंड तो साइबेरिया में पड़ती है, तो क्या वहां लोग मर जाते हैं।

Monday, December 23, 2013

राहुल गांधी दंगा पीड़ितों का हाल जानने मुजफ्फरनगर पहुंचे

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दंगा पीड़ितों का हाल जानने मुजफ्फरनगर पहुंचे लेकिन भारी विरोध के चलते इस दौरे को वह पूरी तरह कामयाब नहीं बना सके। राहुल का 'आईएसआई पर दिया बयान' मुजफ्फरनगर में उनके लिए मुसीबत बन गया। राहुल राहत शिविरों का जायजा लेने रविवार को अचानक मुजफ्फरनगर आए थे लेकिन अपने बयान के चलते उन्हें लोगों की नाराजगी और विरोध का सामना करना पड़ा। राहुल को कई जगहों पर काले झंडे दिखाए गए।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन. सिंह के साथ राहुल सबसे पहले शामली स्थित मलकपुरा पहुंचे, यहां उन्होंने राहत शिविर में रहे शरणार्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। राहुल ने राहत शिविर में भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली।
मलकपरा के बाद राहुल मुजफ्फरनगर जिले के बसीकला और लोई इलाकों में लगे राहत शिविर में भी जाना चाहते थे, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और नाराजगी के चलते वह नहीं जा सके। बाद में राहुल मुजफ्फरनगर शहर आते समय अचानक काकड़ा गांव पहुंच गए और हिंसा प्रभावित इस गांव के लोगों का उन्होंने दर्द सुना।
काकड़ा जाते समय बुढ़ाना के पास लोगों ने राहुल को काले झंडे दिखाए। लोगों का कहना था कि जब राहुल हम लोगों को आईएसआई का एजेंट बताते हैं तो अब हमसे मिलने क्यों आए हैं।
गौरतलब है कि पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनाव के प्रचार के समय राहुल ने एक जनसभा में कहा था कि उन्हें पता चला है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी- इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) मुजफ्फरनगर के हिंसा पीड़ित मुस्लिम युवाओं से संपर्क साध रही है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शामली में राहत कैंपों में रह रहे मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों से मिले। राहुल ने पीड़ितों से कहा कि उन्हें अपने घर लौट जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दंगा कराने वाले उन्हें (पीड़ितों) कैंपों में ही रहने देना चाहते हैं क्योंकि ऐसी स्थिति उन्हें 'फायदा' पहुंचाती है। उन्होंने अपील की कि दंगाइयों के मंसूबे न पूरे होने दें।
राहुल ने पीड़ितों से कहा, 'जो लोग दंगे कराते हैं, वे चाहते हैं कि आप वापस नहीं लौटें। इससे उन्हें फायदा पहुंचता है। वे आपको आपके गांवों से दूर रखना चाहते हैं। मैं जानता हूं कि यह मुश्किल है और वहां डर भी है, लेकिन हमें इससे परे होकर सोचना चाहिए। यह लंबे समय के लिए ठीक नहीं रहेगा।'

Friday, December 20, 2013

अरविन्द केजरीवाल ने अन्ना के खिलाफ जाकर गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन नहीं किया

योग गुरु बाबा रामदेव ने बुधवार को कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने अन्ना के खिलाफ जाकर गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन नहीं किया है। वह यहां एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे। यहां पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में योग गुरु बाबा राम देव ने यह भी कहा कि दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल जिस तरह सरकार बनाने से पीछे हट रहे हैं वह ठीक नही है।

उन्होंने कहा कि ऐसा करके केजरीवाल अपने कर्तव्यों का निर्वहन नही कर रहे हैं। रामदेव ने यह भी कहा कि समलैंगिकों को लेकर वह अपने बयान पर आज भी कायम हैं। उन्होंने मंगलवार को कहा था, 'लगता है अधिकांश कांग्रेसी समलैंगिक हैं, इसलिए समलैंगिकता का समर्थन कर रहे हैं।' उनके इस बयान पर काफी हंगामा भी हुआ था। उन्होंने कहा कि काग्रेंस ने समलैंगिकों का समर्थन करके जनता का समर्थन खो दिया है।

Tuesday, December 17, 2013

बीएसपी सांसद कादिर राणा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

तीन महीने से अधिक समय तक गिरफ्तारी से बचने के बाद मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों के एक आरोपी बीएसपी सांसद कादिर राणा ने मंगलवार को यहां एक लोकल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया।मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट के.पी सिंह ने राणा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। उनकी जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। इससे पहले कोर्ट ने राणा सहित 16 नेताओं के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था।
गौरतलब है कि इस साल सितंबर में मुजफ्फरनगर और इसके आस पास के क्षेत्रों में सांप्रदायिक झड़पों को भड़काने के आरोपी नेताओं में राणा भी शामिल हैं। इन झड़पों में 60 से अधिक लोग मारे गये थे और 40 हजार से अधिक विस्थापित हुए थे।
जिले के कवाल गांव में 27 अगस्त को सांप्रदायिक विवाद के कारण तीन युवकों की मौत के बाद जनसभाओं पर पाबंदी लगाने के बावजूद 30 अगस्त को राणा ने शहर के खलापाड क्षेत्र में भड़काउ भाषण दिया था जिसे लेकर उन पर मामला दर्ज हुआ था।

Monday, December 9, 2013

संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर परिजनों में भारी गुस्सा

युवती के कथित अपहरण के मामले में पिछले दो दिन से अवैध रूप से दौराला थाने की हवालात में बंद युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर परिजनों में भारी गुस्सा है। परिजनों का इल्जाम है कि पुलिस ने युवती के परिजनों के ईशारे पर युवक को हवालात में थर्ड डिग्री देकर उसकी हत्या की है। इस मामले में इंस्पेक्टर दौराला का कहना है कि युवक ने हवालात में फांसी लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मैजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम कराया गया। एसएसपी ने थाना दौराला के इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिस कर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। मृतक की मां की तहरीर पर थाने के स्टाफ के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया गया है। 
पल्लवपुरम फेस टू डबल स्टोरी निवासी नितिन उर्फ अप्पू पुत्र चिंताशंकर का पड़ोस में रहने वाली एक युवती से अफयेर था। अप्पू सेनेट्री का काम करता था, जबकि लड़की अपनी मां के साथ सिलाई का काम करती थी। बताया जा रहा है कि 2 दिसंबर को अप्पू प्रेमिका के साथ फरार हो गया था। 3 दिसंबर को युवती के परिजनों ने थाने में युवती के अपहरण की लिखित तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने तहरीर पर केस दर्ज नहीं किया था। इसी दौरान युवती के परिजनों को कहीं से सूचना मिली कि वे दोनों गाजियाबाद में हैं। आरोप है कि इस सूचना के बाद परिजनों ने 7 दिसंबर को दौराला पुलिस की मदद से अप्पू और उसकी प्रेमिका को गाजियाबाद में दबोच लिया था। वे युवती को साथ ले गए और अप्पू को पुलिस के हवाले कर दिया। तभी से अप्पू दौराला थाने की हवालात में अवैध रूप से बंद था। सोमवार सुबह अप्पू का शव हवालात के टॉयलेट की खिड़की से लटका मिला। फंदा कंबल को काट कर उसे रस्सी की तरह बटकर तैयार किया था। शव को देखते ही थाने में खलबली मच गई। शव को अस्पताल ले जाकर भर्ती दिखाने का प्रयास किया गया, लेकिन चिकित्सकों ने पुलिस से यह कहते हुए साफ इनकार कर दिया कि वह मर चुका है। अप्पू के परिजनों ने युवती के परिजनों पर आरोप लगाया। परिजनों का यह भी आरोप था कि पुलिस अप्पू को छोड़ने के लिए 20 हजार रुपये की मांग कर रही थी। गुस्साए परिजनों ने क्षेत्रवासियों के साथ सड़क पर पल्हैड़ा के पास जाम लगा कर हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दे जाम खुलवाया। मैजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पंचनामा कराकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस के सूत्रों के अनुसार, मौत लटकने के कारण हुई है। 

Thursday, December 5, 2013

रोकना चाहा तो उनकी पुलिस से भिडंत हो गई

मुंडाली थाना क्षेत्र के गांव कबूलपुर के एक युवक के हत्या के आरोपी को थाने से छोड़े जाने से गुस्साए गांव वाले युवक का शव लेकर मंगलवार की रात एसएसपी से मिलने चल दिए। रास्ते में गढ़ रोड पर पुलिस ने उन्हे रोकना चाहा तो उनकी पुलिस से भिडंत हो गई। पुलिस ने लाठियां फटकारी तो गांववालों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया। पुलिस की कई गाड़ियां टूट गई। इस घटना में एसओ मेडिकल चोटिल हो गए। सूचना पर भारी मात्रा में फोर्स मौके पर पहंुच गई। उसके बाद पुलिस ने गांववालों को दौड़ा- दौड़ा कर पीटा, जिसमें चार महिलाओं समेत एक दर्जन गांववाले घायल हो गए। 
मुंडाली थाना क्षेत्र के गांव कबूलपुर का रहने वाला 25 वर्षीय अवधेश पुत्र हरिशचंद्र राजमिस्त्री का काम करता था। उसकी कुछ दिनों पहले अपने गांव के ही हरिओम से कहासुनी हो गई थी। 26 नवंबर को हरिओम उसे अपने साथ काम के बहाने गाजियाबाद के भोपुरा गांव ले गया था। दो दिन बाद हरिओम लौट आया, लेकिन अवधेश नहीं लौटा। शक होने पर अवधेश के परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने हरिओेम को तीन दिन तक अपनी कस्टडी में रखने के बाद छोड़ दिया। सोमवार को मोदीनगर के कादराबाद बंबे के पास अवधेश का शव पड़ा मिला। सूचना पर अवधेश के परिजन गाजियाबाद पहंचे और पोस्टमार्टम के बाद उसका शव गांव लेकर आ गए। उसका शव मंगलवार को गांव पहंुचते ही पूरे गांव में उत्तेजना फैल गई। गावंवालों का आरोप था कि हत्या हरिओम ने की है, लेकिन पुलिस ने उसे थाने से छोड़ दिया। आक्रोशित गांववाले मंगलवार की रात करीब 10 बजे अवधेश के शव को लेकर एसएसपी से मिलने चल दिए। रास्तें में गढ़ रोड तक्षशिला कॉलोनी के सामने पुलिस ने गांववालों को रोकने का प्रयास किया। इस पर पुलिस व गांववाले आमने सामने आ गए। पुलिस ने डंडा फटकार तो गांववालों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव से पुलिस की कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई। एसओ मेडिकल बच्चन सिह चोटिल हो गए। सूचना मिलते ही भारी मात्रा में फोर्स मौके पर पहुंच गई और उसने गांववालों पर लाठी चार्ज कर दिया। पुलिस ने गांववालें को दौड़ा दौड़ा कर पीटा। इस घटना में चार महिलाओं समेत करीब एक दर्जन ग्रामीण घायल हो गए। इसके बाद गांववाले शव को लेकर अपने गांव लौट आए। 

Monday, November 18, 2013

आजाद हिंद फौज के सिपाही शामली निवासी ओमप्रकाश (91) का देहांत

 नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के सिपाही शामली निवासी ओमप्रकाश (91) का शुक्रवार को देहांत हो गया। प्रशासन ने राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया। देश को आजाद कराने के लिए लड़ाई लड़ने वाले इस सैनिक का स्वराज का सपना तो पूरा हो गया, लेकिन अपनी ही नौकरानी से शादी करने की उनकी अंतिम ख्वाहिश अधूरी ही रह गई। अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए वह 16 साल तक सामाजिक व कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। इससे पहले की वह अपने इरादों में कामयाब होते, बीमारी की वजह से उनकी मौत हो गई। 
जनपद शामली के कस्बा गढ़ी पुख्ता के मुहल्ला चौधरान निवासी ओमप्रकाश स्वतंत्रता सेनानी थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में सिपाही रहे ओमप्रकाश ने अंग्रेजों को देश से खदेड़ने के लिए जंग लड़ी थी। वह करीब एक महीने से बीमार चल रहे थे। शुक्रवार को उनका देहांत हो गया। बताया जा रहा है कि ओमप्रकाश अपनी नौकरानी गासिया के साथ शादी करना चाहते थे। गासिया की सेवा से प्रभावित होकर उन्होंने 1997 में उससे विवाह करने का निर्णय लिया था। उनके इस निर्णय का परिजनों और कुछ रिश्तेदारों ने विरोध किया।
किसी की परवाह न करते हुए 26 मार्च 2010 को उन्होंने गासिया से विवाह करने के लिए विशेष विवाह अधिकारी के यहां अर्जी दी। इस अर्जी को कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि गासिया शादीशुदा है और उसका अपने पति मुनीर से तलाक नहीं हुआ है। इस पर गासिया ने 16 नवंबर 2012 को लखीमपुर खीरी के सिविल जज जूनियर डिविजन के यहां से अपने पति से तलाक ले लिया। 
गासिया के तलाक की खबर मिलते ही ओमप्रकाश के बेटों व कुछ अन्य लोगों ने उनकी विशेष विवाह अधिकारी के यहां दी गई अर्जी पर आपत्ति लगा दी। ओमप्रकाश ने उन आपत्तियों का जबाव दाखिल किया। इस मामले में फैसला हो पाता इससे पहले ही शुक्रवार को ओमप्रकाश का बीमारी के कारण निधन हो गया और उनकी अंतिम इच्छा उनके साथ ही समाप्त हो गई।

Wednesday, November 13, 2013

यूपी सरकार से 6 महीने का अतिरिक्त समय मांगा

मुजफ्फरनगर दंगों पर एक सदस्यीय जांच आयोग ने रिपोर्ट सौंपने के लिए यूपी सरकार से 6 महीने का अतिरिक्त समय मांगा है। बता दें कि रिपोर्ट सौंपने की 2 महीने की समय सीमा सोमवार को समाप्त हो गई है। मुजफ्फरनगर दंगों में 60 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) विष्णु सहाय ने कहा कि आयोग ने अपनी जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इस संदर्भ में प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। मुजफ्फरनगर हिंसा की जांच के लिए न्यायाधीश विष्णु सहाय वाले एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 सितंबर को किया था ।
 
मुजफ्फरनगर हिंसा 27 अगस्त को कवाल की घटना से शुरू होकर 9 सितंबर तक चली थी। आयोग को यह भी कहा गया था कि यदि हिंसा को नियंत्रित करने में प्रशासन की ओर से कोई खामी रही हो तो उसकी भी जांच की जाए। यह रिपोर्ट सरकार को 2 महीने में सौंपी जानी थी, जिसकी समय सीमा सोमवार को खत्म हो गई।
 
2 महीने के दौरान न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) विष्णु सहाय आयोग ने दंगा पीड़ितों के बयान दर्ज किए। दंगा प्रभावित गांव कुतबा के निवासी रिजवान ने आयोग के सामने गवाही दी और यह आरोप लगाया कि एक महिला समेत 8 लोगों की हत्या के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के लोग गांव छोड़कर चले गए थे। पीड़ित ने आरोप लगाया कि उनके गांव छोड़ देने के बाद उनकी संपत्ति लूट ली गई।
 
न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) विष्णु सहाय आयोग को 350 से ज्यादा लिखित बयान मिले हैं। आयोग ने सितंबर में सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित रहे मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ और सहारनपुर जिलों का दौरा भी किया।

Friday, November 8, 2013

भुगतान नहीं मिलने से वेस्टर्न यूपी के किसान पूरी तरह से गुस्से में

गन्ने के दाम घोषित नहीं किए जाने, शुगर मिलों को चलाने में हो रही देरी और अबतक पिछले पेराई सत्र का पूरा बकाया भुगतान नहीं मिलने से वेस्टर्न यूपी के किसान पूरी तरह से गुस्से में है। इन्हीं मुद्दों को लेकर गुरूवार को यहां किसान पंचायत हुई। उसमें जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद केसी त्यागी ने केंद्र और यूपी की एसपी सरकार को जमकर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दोनों सरकारें किसानों का खुला शोषण और मानसिक उत्पीड़न कर रहीं हैं। अब तक गन्ने के दाम घोषित नहीं किया जाना और बकाया का भुगतान नहीं होना इस बात का सबूत है। 
इस पंचायत में करीब पांच दर्जन से भी अधिक गांवों सें आए किसान शामिल हुए। इसमें त्यागी को विशेष रूप से बुलाया गया था। त्यागी ने कहा की कैसी विडंबना है कि रात दिन महनत कर किसान अन्न और गन्ना पैदा करता है और उसे उसकी मेहनत का वाजिब दाम भी नहीं मिलता। शुगर मिलों को गन्ने देने के बाद किसान भुगतान के लिए दर-दर भटकता है। उसके उत्पाद के दाम सरकार तय करती है जबकि मिलों में बनने वाली चीजों के भाव खुद मिल मालिक तय करता है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में किसानों का करीब 2600 करोड़ रुपये बकाया है। 700 करोड़ रुपये तो मेरठ मंडल की 15 मिलों का ही है। 
त्यागी ने कहा कि गन्ना उत्पादक किसानों पर इस समय तिहरी मार पड़ रही है। एक तो उन्हें अबतक उन्हें गन्ने का बकाया भुगतान नहीं मिला जिसके चलते वह भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मिल न चलने से किसानों के सामने पशुओं के लिए चारा और खेत खाली नहीं होने से गेहूं बोने की समस्या खड़ी हो गई है। इसके अलावा अब तक गन्ने के रेट भी घोषित नहीं किए। 

Monday, November 4, 2013

मंगलवार को सिसौली में होने वाली पंचायत स्थगित

 यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में लागातार हो रही हिंसा को रोकने के लिए हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच मंगलवार को सिसौली में होने वाली पंचायत स्थगित हो गई है। अब इस पंचायत की नई तिथि की घोषणा आगे की जाएगी। 
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने मंगलवार को होने वाली पंचायत स्थगित कर दी है। पंचायत में हिंदू व मुस्लिम समाज के लोगों के बीच सुलह कराने की योजना है, ताकि आगे दंगे की आशंका पर रोक लगाई जा सके। 
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने बताया कि सिसौली में मंगलवार को होने वाली पंचायत स्थगित कर दी गई है। 

Sunday, November 3, 2013

शुभकामनायें

दीप पर्व की शुभकामनायें 

Thursday, October 31, 2013

फिर नफरत की आग फिर भड़क गई

 दंगे की आग में झुलस कर 60 लोगों की जान गंवाने वाले मुजफ्फरनगर जिले में एक बार फिर नफरत की आग फिर भड़क गई है। भौराकलां थाना क्षेत्र में बुधवार शाम दो समुदायों की भिड़ंत में दोनों तरफ से गोलियां चलीं, जिसमें हुसैनपुर कलां गांव के तीन युवकों की मौत हो गई। इलाके में टकराव के हालात को देखते हुए आसपास के जिलों से फोर्स बुलाई गई है। समुदाय विशेष के सैकड़ों लोगों ने तीनों मृतकों को बेकसूर बताते हुए बुढ़ाना कोतवाली का घेराव किया। दूसरी घटना फुगाना क्षेत्र के हसनपुर गांव में हुई, जहां बाइक से जा रहे दंपती पर नकाबपोश बदमाशों ने गोलियां चलाईं और चाकू से हमला किया। हमले में महिला की मौत हो गई और पति गंभीर रूप से घायल है।
पहली घटना में बुधवार शाम को करीब 6 बजे हुई। पुलिस के मुताबिक, मोहम्मदपुर रायसिंह गांव निवासी एक सेवानिवृत्त फौजी अपने खेत पर पानी चलाने गए थे। तभी गन्ने के खेत में पहले से छिपे 10-11 नकाबपोश हथियारबंद लोगों ने उन्हें दबोच लिया और मारपीट शुरू कर दी। मारपीट देख एक दूसरे किसान ने फोन पर हमले की सूचना गांव वालों को दे दी। सूचना मिलते ही दर्जनों ग्रामीण लाठी-डंडे और हथियारों से लैस होकर पीएसी के जवानों के साथ खेत की ओर दौड़े। नकाबपोश बदमाशों ने ग्रामीणों पर फायरिंग कर दी, जवाब में दूसरी तरफ से भी फायरिंग हुई। आमने-सामने हुई फायरिंग में हुसैनपुर कलां गांव के तीन युवकों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतक एक ही परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हमले में कई युवकों के घायल होने की भी सूचना है।
भौराकलां पुलिस स्टेशन के इनचार्ज ओपी चौधरी ने बताया कि दोनों गांव के कुछ लोग विवाद के बाद हिंसा पर उतारू हो गए और एक-दूसरे को निशाना बनाते हुए हमले किए। वारदात की सूचना मिलते ही डीएम और एसएसपी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। मोहम्मदपुर राय सिंह में फौजी के घर से दो युवकों को हिरासत में लिया गया है। संवेदनशील थाना क्षेत्रों भौराकलां, फुगाना और शाहपुर इलाकों में सर्च अभियान चलाया गया। घटना के बाद से देहात क्षेत्र में तनाव है और टकराव के हालात बने हुए हैं। इसे देखते हुए मुख्य चौराहों और अतिसंवेदनशील इलाकों में चौकसी बढ़ा दी गई है। देर शाम सिटी मैजिस्ट्रेट ने फोर्स के साथ फ्लैग मार्च किया। आईजी मेरठ ब्रजभूषण शर्मा भी बुढ़ाना पहुंच गए हैं।

Tuesday, October 29, 2013

तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी

 ट्रैफिक पुलिस के एक सिपाही को सोमवार को अपने ही सहकर्मी की बेटी को होटल लेकर जाना महंगा साबित हुआ। जिस समय आरोपी सिपाही और युवती होटल के एक कमरे में थे, उसी समय उस लड़की की मां वहां आ गई। महिला ने सिपाही पर बेटी के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए होटल में जमकर हंगामा किया और आरोपी की जमकर पिटाई भी की। सूचना पर पुलिस दोनों को थाने ले गई। मामला विभागीय होने के कारण पुलिस ने इस पर लीपापोती कर दी। पुलिस का कहना है कि तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, ट्रैफिक पुलिस का सिपाही आफताब (बदला हुआ नाम) पुलिसलाइन में रहता है। उसके क्वॉर्टर से थोड़ी दूर पर ही एक अन्य सिपाही का परिवार रहता है। आरोप है कि सोमवार को मेहताब अपने सहकर्मी सिपाही की बेटी को थाना सदरबाजार क्षेत्र में रोडवेज बस स्टैंड के सामने एक होटल में ले गया। जब दोनों होटल के एक कमरे में थे, उसी समय लड़की की मां वहां पहुंच गई। दोनों को होटल के कमरे में देखकर युवती की मां गुस्से में आग बबूला हो गई। उसने होटल में हंगामा शुरू कर दिया।
देखते ही देखते वहां तमाशबीनों की भीड़ जुट गई। बताया जाता है कि गुस्से से बेकाबू महिला ने आरोपी सिपाही की चप्पलों से पिटाई भी की। मामले की सूचना मिलते ही थाना पुलिस वहां पहुंची और सभी को थाने ले आई। सूचना पाकर एसपी सिटी भी थाने पहुंच गए। मामला विभागीय होने के कारण पुलिस ने बड़े ही गोपनीय ढंग से पूछताछ की और उसके बाद दोनों पक्षों को समझाबुझाकर घर भेज दिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि महिला बार-बार आरोपी सिपाही पर अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा रही थी। वहीं आरोपी सिपाही का कहना था कि वे आपस में प्रेम करते हैं। इस मामले को लेकर पुलिस ने यह कहकर बात टाल दी कि उन्हें महिला की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर दिए जाने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।

Monday, October 28, 2013

बीजेपी विधायक संगीत सोम को बम से उड़ाने की धमकी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के आरोप में गिरफ्तार बीजेपी विधायक संगीत सोम को जम्मू-कश्मीर से भेजे गए पत्र में कथित तौर पर बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। सोम के पर्सनल असिस्टेंट ने पुलिस महानिदेशक को याचिका देकर सुरक्षा की मांग की। चंद्रशेखर ने पुलिस महानिदेशक को लिखे पत्र में दावा किया है कि बीजेपी विधायक के मेरठ में सरधना स्थित घर पर 18 अक्तूबर को उर्दू में लिखा एक खत प्राप्त हुआ था। 14 अक्तूबर को भेजे गए उस पत्र पर जम्मू की मुहर लगी हुई है। 
चंद्रशेखर के अनुसार अनुवाद कराने पर पता लगा है कि उस पत्र में विधायक सोम को जेल से बाहर आने पर उनके परिवार के साथ बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। पुलिस महानिदेशक को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि वह खत हासिल होने के बाद सोम का पूरा परिवार डरा हुआ है। विधायक मुजफ्फरनगर जेल में बंद हैं इसलिए उनके परिवार को जान-माल का खतरा बना हुआ है। चंद्रशेखर ने गुजारिश की है कि पत्र की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा के संबंध में उचित कार्रवाई के आदेश दिए जाएं। गौरतलब है कि सरधना से बीजेपी विधायक संगीत सोम मुजफ्फरनगर में पिछले महीने हुए साम्प्रदायिक दंगों के मामले में जेल में बंद हैं। उनको राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरुद्ध किया गया है। 

Wednesday, October 23, 2013

नाबालिग लड़की का शव मंगलवार की सुबह शताब्दी नगर में एक खेत में पड़ा मिला

थाना लिसाड़ी गेट इलाके से सोमवार को लापता हुई एक नाबालिग लड़की का शव मंगलवार की सुबह शताब्दी नगर में एक खेत में पड़ा मिला। शव की अस्त-व्यस्त हालत को देखकर आशंका जताई जा रही है कि लड़की के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या की गई है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। संदेह के आधार पर इलाके की 2 युवतियों को हिरासत में लेकर वारदात के बाबत उनसे पूछताछ की जा रही है। 
न्यू इस्लामनगर निवासी एक नाबालिग लड़की (14) सोमवार को संदिग्ध हालत में लापता हो गई थी। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चला। सोमवार देर रात लड़की के पिता ने थाना लिसाड़ीगेट में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मंगलवार की सुबह शताब्दी नगर स्थित एक खेत में लोगों ने एक किशोरी का शव पड़ा देखा। शव के गले में चुन्नी बंधी हुई थी और उसके कपड़े अस्त व्यस्त थे। शव मिलने की सूचना पर थाना लिसाड़ी गेट पुलिस लापता लड़की के परिजनों को लेकर घटनास्थल पर पहुंची।
 
परिजनों ने शव की शिनाख्त अपनी बेटी के रूप में की। शिनाख्त के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। वहीं, थाना लिसाड़ी गेट पुलिस ने लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट को हत्या के मामले में तब्दील कर दिया है। शव की स्थिति को देखते हुए आशंका व्यक्त की जा रही है कि बलात्कार के बाद उसकी हत्या की गई है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिर्पोट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। वहीं परिजनों द्वारा क्षेत्र की दो युवतियों पर शक जताए जाने पर पुलिस ने दोनो युवतियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।
 

Friday, October 18, 2013

राहत शिविर में पीड़ितों ने कहा, जब 2 वक्त की रोटी को मोहताज, तो ईद का कोई मतलब नहीं

मुजफ्फरनगर के दंगो ने जिन मुस्लिम परिवारों को बेघर कर दिया था, ईद की खुशियां भी उनके चेहरे की रंगत नहीं बदल पा रही हैं। दंगों के बाद से राहत शिविरों में रह रहे इन लोगों का कहना है कि आज हम दो वक्त की रोटी के लिए दूसरों पर मोहताज हैं, ऐसे में ईद का हमारे लिए कोई मतलब नहीं है। उनके चेहरे और आंखों से झांकती बेबसी उनके दिल का दर्द बयान कर रही है। कुछ सामाजिक संगठनों ने उनके जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश की है। राहत शिविर में कपड़े और कुर्बानी की व्यवस्था उनकी ओर से की गई। लेकिन उनका यह प्रयास भी राहत शिविर में रह रहे लोगों को ईद की खुशी का अहसास नहीं करा पा रहा है। 

'जो बेघर हो, उसके लिए कैसी ईद?' 
मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद से राहत शिविर में रह रहे मुस्लिम परिवारों को इस बार ईद की खुशी महसूस नही हो रही है। शाहपुर राहत शिविर की देखभाल कर रहे हाजी मोहम्मद इकबाल का कहना है कि जो लोग महीनों पहले से ईद की तैयारी करने में जुट जाते थे, आज वह सारे दिन एक दूसरे से अपना दुखड़ा रोकर वक्त काट रहे हैं। राहत शिविर में रह रहा कुटबा गांव का यामीन कारपेंटर है। वह कहता है कि ईद तो खुशी का त्यौहार है। लेकिन जो घर से ही बेघर हो गया हो, उसकी कैसी ईद। काकड़ गांव का इलियास अपने आंसू रोकने की कोशिश करते हुए कहता है कि कभी स्कूल तो कभी मस्जिद के बरामदे में उनका परिवार अपनी रात गुजरता है, ऐसे में वह ईद के बारे में कैसे सोच सकते हैं।
 
'बच्चे भूखे हैं, ईद कैसे मनाएं'
 
वहीं इलियास का कहना है कि जिनके बच्चे भूख से रो रहे हैं, उसके माता-पिता को ईद की खुशी क्या होगी। शाहपुर, जौला, लोई, बशी, विज्ञाना समेत कुल 28 राहत शिविर अभी भी मुजफ्फनगर में चल रहे है। इनमें अभी भी 11,500 लोग रह रहे हैं। सभी कैंपों में उदासी का माहौल है। किसी भी कैंप में रह रहे लोगों के चेहरे पर खुशी नहीं है।
 
गम
 बांटने की कोशिश 
कुछ
 सामाजिक संस्थाओं ने इनका गम बांटने की कोशिश की है। कुछ कैंप में संस्थाओं की ओर से नए कपड़े औरकुर्बानी के लिए जानवर की व्यवस्था की गई है। जमीयत - उलेमा -  - हिंद के उपाध्यक्ष अजीर्जुर रहमान बतातेहैं कि उनकी संस्था ने भी कैंप में कुर्बानी की व्यवस्था की है। उनके अनुसार एक कुर्बानी सात लोगों पर जायजहोती है। हालांकि वह भी इस बात से इनकार नहीं करते कि उनके इस प्रयास के बावजूद कैंप में रह रहे लोगों मेंईद को लेकर कोई उत्साह नहीं आया है। उन्होंने बताया कि ईद पर कैंप में रह रहे सभी लोग पास की मस्जिद मेंनमाज पढ़ेगे और अमन की दुआ करेंगे। 
16
 हजार घर लौटे : डीएम 
डीएम
 मुजफफरनगर का कहना है कि राहत शिविरों में रह रहे 27 हजार 5 सौ लोगों में से 16 हजार लोग अपनेघर लौट गए हैं। ईद के बाद शेष को भी जल्द ही उनके घर भेजने की कोशिश की जा रही है। उन्होने बताया किईद पर शासन की ओर से कोई विशेष व्यवस्था नही की  ई है।