कांग्रेस उपाध्यक्ष
राहुल गांधी दंगा पीड़ितों का हाल जानने मुजफ्फरनगर पहुंचे लेकिन भारी विरोध के
चलते इस दौरे को वह पूरी तरह कामयाब नहीं बना सके। राहुल का 'आईएसआई पर दिया
बयान' मुजफ्फरनगर में उनके लिए मुसीबत बन गया। राहुल राहत
शिविरों का जायजा लेने रविवार को अचानक मुजफ्फरनगर आए थे लेकिन अपने बयान के चलते
उन्हें लोगों की नाराजगी और विरोध का सामना करना पड़ा। राहुल को कई जगहों पर काले
झंडे दिखाए गए।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन. सिंह के साथ राहुल सबसे पहले शामली स्थित मलकपुरा पहुंचे, यहां उन्होंने राहत शिविर में रहे शरणार्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। राहुल ने राहत शिविर में भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली।
मलकपरा के बाद राहुल मुजफ्फरनगर जिले के बसीकला और लोई इलाकों में लगे राहत शिविर में भी जाना चाहते थे, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और नाराजगी के चलते वह नहीं जा सके। बाद में राहुल मुजफ्फरनगर शहर आते समय अचानक काकड़ा गांव पहुंच गए और हिंसा प्रभावित इस गांव के लोगों का उन्होंने दर्द सुना।
काकड़ा जाते समय बुढ़ाना के पास लोगों ने राहुल को काले झंडे दिखाए। लोगों का कहना था कि जब राहुल हम लोगों को आईएसआई का एजेंट बताते हैं तो अब हमसे मिलने क्यों आए हैं।
गौरतलब है कि पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनाव के प्रचार के समय राहुल ने एक जनसभा में कहा था कि उन्हें पता चला है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी- इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) मुजफ्फरनगर के हिंसा पीड़ित मुस्लिम युवाओं से संपर्क साध रही है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शामली में राहत कैंपों में रह रहे मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों से मिले। राहुल ने पीड़ितों से कहा कि उन्हें अपने घर लौट जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दंगा कराने वाले उन्हें (पीड़ितों) कैंपों में ही रहने देना चाहते हैं क्योंकि ऐसी स्थिति उन्हें 'फायदा' पहुंचाती है। उन्होंने अपील की कि दंगाइयों के मंसूबे न पूरे होने दें।
राहुल ने पीड़ितों से कहा, 'जो लोग दंगे कराते हैं, वे चाहते हैं कि आप वापस नहीं लौटें। इससे उन्हें फायदा पहुंचता है। वे आपको आपके गांवों से दूर रखना चाहते हैं। मैं जानता हूं कि यह मुश्किल है और वहां डर भी है, लेकिन हमें इससे परे होकर सोचना चाहिए। यह लंबे समय के लिए ठीक नहीं रहेगा।'
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन. सिंह के साथ राहुल सबसे पहले शामली स्थित मलकपुरा पहुंचे, यहां उन्होंने राहत शिविर में रहे शरणार्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। राहुल ने राहत शिविर में भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली।
मलकपरा के बाद राहुल मुजफ्फरनगर जिले के बसीकला और लोई इलाकों में लगे राहत शिविर में भी जाना चाहते थे, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और नाराजगी के चलते वह नहीं जा सके। बाद में राहुल मुजफ्फरनगर शहर आते समय अचानक काकड़ा गांव पहुंच गए और हिंसा प्रभावित इस गांव के लोगों का उन्होंने दर्द सुना।
काकड़ा जाते समय बुढ़ाना के पास लोगों ने राहुल को काले झंडे दिखाए। लोगों का कहना था कि जब राहुल हम लोगों को आईएसआई का एजेंट बताते हैं तो अब हमसे मिलने क्यों आए हैं।
गौरतलब है कि पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनाव के प्रचार के समय राहुल ने एक जनसभा में कहा था कि उन्हें पता चला है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी- इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) मुजफ्फरनगर के हिंसा पीड़ित मुस्लिम युवाओं से संपर्क साध रही है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शामली में राहत कैंपों में रह रहे मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों से मिले। राहुल ने पीड़ितों से कहा कि उन्हें अपने घर लौट जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दंगा कराने वाले उन्हें (पीड़ितों) कैंपों में ही रहने देना चाहते हैं क्योंकि ऐसी स्थिति उन्हें 'फायदा' पहुंचाती है। उन्होंने अपील की कि दंगाइयों के मंसूबे न पूरे होने दें।
राहुल ने पीड़ितों से कहा, 'जो लोग दंगे कराते हैं, वे चाहते हैं कि आप वापस नहीं लौटें। इससे उन्हें फायदा पहुंचता है। वे आपको आपके गांवों से दूर रखना चाहते हैं। मैं जानता हूं कि यह मुश्किल है और वहां डर भी है, लेकिन हमें इससे परे होकर सोचना चाहिए। यह लंबे समय के लिए ठीक नहीं रहेगा।'

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