मुजफ्फरनगर के दंगो
ने जिन मुस्लिम परिवारों को बेघर कर दिया था, ईद की खुशियां भी उनके चेहरे की रंगत
नहीं बदल पा रही हैं। दंगों के बाद से राहत शिविरों में रह रहे इन लोगों का कहना
है कि आज हम दो वक्त की रोटी के लिए दूसरों पर मोहताज हैं, ऐसे
में ईद का हमारे लिए कोई मतलब नहीं है। उनके चेहरे और आंखों से झांकती बेबसी उनके
दिल का दर्द बयान कर रही है। कुछ सामाजिक संगठनों ने उनके जख्मों पर मरहम लगाने की
कोशिश की है। राहत शिविर में कपड़े और कुर्बानी की व्यवस्था उनकी ओर से की गई।
लेकिन उनका यह प्रयास भी राहत शिविर में रह रहे लोगों को ईद की खुशी का अहसास नहीं
करा पा रहा है। 
'जो बेघर हो,
उसके लिए कैसी ईद?'
मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद से राहत शिविर में रह रहे मुस्लिम परिवारों को इस बार ईद की खुशी महसूस नही हो रही है। शाहपुर राहत शिविर की देखभाल कर रहे हाजी मोहम्मद इकबाल का कहना है कि जो लोग महीनों पहले से ईद की तैयारी करने में जुट जाते थे, आज वह सारे दिन एक दूसरे से अपना दुखड़ा रोकर वक्त काट रहे हैं। राहत शिविर में रह रहा कुटबा गांव का यामीन कारपेंटर है। वह कहता है कि ईद तो खुशी का त्यौहार है। लेकिन जो घर से ही बेघर हो गया हो, उसकी कैसी ईद। काकड़ गांव का इलियास अपने आंसू रोकने की कोशिश करते हुए कहता है कि कभी स्कूल तो कभी मस्जिद के बरामदे में उनका परिवार अपनी रात गुजरता है, ऐसे में वह ईद के बारे में कैसे सोच सकते हैं।
'बच्चे भूखे हैं, ईद कैसे मनाएं'
वहीं इलियास का कहना है कि जिनके बच्चे भूख से रो रहे हैं, उसके माता-पिता को ईद की खुशी क्या होगी। शाहपुर, जौला, लोई, बशी, विज्ञाना समेत कुल 28 राहत शिविर अभी भी मुजफ्फनगर में चल रहे है। इनमें अभी भी 11,500 लोग रह रहे हैं। सभी कैंपों में उदासी का माहौल है। किसी भी कैंप में रह रहे लोगों के चेहरे पर खुशी नहीं है।
गम बांटने की कोशिश
कुछ सामाजिक संस्थाओं ने इनका गम बांटने की कोशिश की है। कुछ कैंप में संस्थाओं की ओर से नए कपड़े औरकुर्बानी के लिए जानवर की व्यवस्था की गई है। जमीयत - उलेमा - ए - हिंद के उपाध्यक्ष अजीर्जुर रहमान बतातेहैं कि उनकी संस्था ने भी कैंप में कुर्बानी की व्यवस्था की है। उनके अनुसार एक कुर्बानी सात लोगों पर जायजहोती है। हालांकि वह भी इस बात से इनकार नहीं करते कि उनके इस प्रयास के बावजूद कैंप में रह रहे लोगों मेंईद को लेकर कोई उत्साह नहीं आया है। उन्होंने बताया कि ईद पर कैंप में रह रहे सभी लोग पास की मस्जिद मेंनमाज पढ़ेगे और अमन की दुआ करेंगे।
16 हजार घर लौटे : डीएम
डीएम मुजफफरनगर का कहना है कि राहत शिविरों में रह रहे 27 हजार 5 सौ लोगों में से 16 हजार लोग अपनेघर लौट गए हैं। ईद के बाद शेष को भी जल्द ही उनके घर भेजने की कोशिश की जा रही है। उन्होने बताया किईद पर शासन की ओर से कोई विशेष व्यवस्था नही की ग ई है।
मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद से राहत शिविर में रह रहे मुस्लिम परिवारों को इस बार ईद की खुशी महसूस नही हो रही है। शाहपुर राहत शिविर की देखभाल कर रहे हाजी मोहम्मद इकबाल का कहना है कि जो लोग महीनों पहले से ईद की तैयारी करने में जुट जाते थे, आज वह सारे दिन एक दूसरे से अपना दुखड़ा रोकर वक्त काट रहे हैं। राहत शिविर में रह रहा कुटबा गांव का यामीन कारपेंटर है। वह कहता है कि ईद तो खुशी का त्यौहार है। लेकिन जो घर से ही बेघर हो गया हो, उसकी कैसी ईद। काकड़ गांव का इलियास अपने आंसू रोकने की कोशिश करते हुए कहता है कि कभी स्कूल तो कभी मस्जिद के बरामदे में उनका परिवार अपनी रात गुजरता है, ऐसे में वह ईद के बारे में कैसे सोच सकते हैं।
'बच्चे भूखे हैं, ईद कैसे मनाएं'
वहीं इलियास का कहना है कि जिनके बच्चे भूख से रो रहे हैं, उसके माता-पिता को ईद की खुशी क्या होगी। शाहपुर, जौला, लोई, बशी, विज्ञाना समेत कुल 28 राहत शिविर अभी भी मुजफ्फनगर में चल रहे है। इनमें अभी भी 11,500 लोग रह रहे हैं। सभी कैंपों में उदासी का माहौल है। किसी भी कैंप में रह रहे लोगों के चेहरे पर खुशी नहीं है।
गम बांटने की कोशिश
कुछ सामाजिक संस्थाओं ने इनका गम बांटने की कोशिश की है। कुछ कैंप में संस्थाओं की ओर से नए कपड़े औरकुर्बानी के लिए जानवर की व्यवस्था की गई है। जमीयत - उलेमा - ए - हिंद के उपाध्यक्ष अजीर्जुर रहमान बतातेहैं कि उनकी संस्था ने भी कैंप में कुर्बानी की व्यवस्था की है। उनके अनुसार एक कुर्बानी सात लोगों पर जायजहोती है। हालांकि वह भी इस बात से इनकार नहीं करते कि उनके इस प्रयास के बावजूद कैंप में रह रहे लोगों मेंईद को लेकर कोई उत्साह नहीं आया है। उन्होंने बताया कि ईद पर कैंप में रह रहे सभी लोग पास की मस्जिद मेंनमाज पढ़ेगे और अमन की दुआ करेंगे।
16 हजार घर लौटे : डीएम
डीएम मुजफफरनगर का कहना है कि राहत शिविरों में रह रहे 27 हजार 5 सौ लोगों में से 16 हजार लोग अपनेघर लौट गए हैं। ईद के बाद शेष को भी जल्द ही उनके घर भेजने की कोशिश की जा रही है। उन्होने बताया किईद पर शासन की ओर से कोई विशेष व्यवस्था नही की ग ई है।

No comments:
Post a Comment