विशेष जांच दल (एसआइटी)
ने मुजफ्फरनगर दंगों में शामली जिले के कांधला में दंगों के समय लापता लोगों के
परिवारों के बयान दर्ज किए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज झा की अगुवाई में एसआइटी
शनिवार को राहत शिविर पहुंची। टीम ने लिसाढ़ गांव में पिछले महीने दंगे के समय से
लापता लोगों के सिलसिले में सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान दर्ज किए।
दंगे के बाद से करीब 13 लोग लापता बताए जा रहे थे। बाद में 2 लापता लोगों के शव भी मिले, लेकिन 11 लोग अब भी लापता हैं। आशंका जताई जा रही है कि दंगों के दौरान उन्हें लिसाढ़ गांव में मार दिया गया। इन लापता 11 लोगों में 2 लड़कियां भी शामिल हैं। इसी बीच विभिन्न संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जो लोग लापता हैं, उन्हें प्रशासन को मृत घोषित कर देना चाहिए, जैसा उत्तराखंड में आपदा के बाद किया गया।
न्यायमूर्ति सी. जोसेफ और पुलिस महानिदेशक कंवल देवल के नेतृत्व में आयोग की एक टीम ने दंगा प्रभावित मुजफ्फरनगर और शामली का दौरा किया था, तब इन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसके समक्ष अपनी मांग रखी थी।
दंगे के बाद से करीब 13 लोग लापता बताए जा रहे थे। बाद में 2 लापता लोगों के शव भी मिले, लेकिन 11 लोग अब भी लापता हैं। आशंका जताई जा रही है कि दंगों के दौरान उन्हें लिसाढ़ गांव में मार दिया गया। इन लापता 11 लोगों में 2 लड़कियां भी शामिल हैं। इसी बीच विभिन्न संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जो लोग लापता हैं, उन्हें प्रशासन को मृत घोषित कर देना चाहिए, जैसा उत्तराखंड में आपदा के बाद किया गया।
न्यायमूर्ति सी. जोसेफ और पुलिस महानिदेशक कंवल देवल के नेतृत्व में आयोग की एक टीम ने दंगा प्रभावित मुजफ्फरनगर और शामली का दौरा किया था, तब इन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसके समक्ष अपनी मांग रखी थी।
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