रविवार को कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं के हर-हर गंगे के उद्घोष गढ़ गंगा मेला परिसर गूंज उठा। इस पावन मौके पर करीब 30 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में श्रद्धा की डुबकी लगाई। मेले में रेकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने से प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था चरमरा गई। व्यवस्था संभालने के लिए जिला पंचायत के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। श्रद्धालुओं को भी भारी भीड़ की वजह से परेशान होना पड़ा। मान्यता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। इसी कामना से गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र तक से श्रद्धालु गंगा मेले में आए थे। रविवार को कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य स्नान तड़के 4:30 बजे से था लेकिन श्रद्धालुओं ने शनिवार रात 12 बजे के बाद ही स्नान करना शुरू कर दिया। गंगा में पुरुषों के अलावा महिलाओं और बच्चों ने भी श्रद्धा की डुबकी लगाई। सवेरे 6:36 बजे सूर्य उदय के साथ ही श्रद्धालुओं में पहला अर्घ्य देने की होड़ सी लग गई। कई श्रद्धालुओं ने उगते सूरज को गंगाजल के साथ दूध चढ़ाया। उन्होंने धूप-दीप दिखाकर मां गंगा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। प्रशासन का अनुमान था कि गंगा स्नान के लिए 20 से 25 लाख की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। यह अनुमान गलत साबित हुआ। शनिवार देर शाम तक यह संख्या 30 लाख क्रॉस कर गई। प्रशासन के प्रवक्ता एन. के. तिवारी के मुताबिक, श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ होने से व्यवस्था में कमी आई परंतु प्रशासन ने घाट पर पुलिस और पीएसी के साथ सामाजिक संगठनों की मदद से व्यवस्था बनाए रखी। आधा किमी. बना डेंजर पॉइंट 9 किमी. क्षेत्र में फैले गंगा मेले में करीब आधा किमी. क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से डेंजर घोषित कर दिया गया। डीएम हृदयेश कुमार के मुताबिक, गंगा का जलस्तर घटने से करीब आधा किमी. क्षेत्र में मिट्टी की ढांग तैयार हो गई थी। ढांग गिरने से दुर्घटना का खतरा पैदा हो गया था। इस वजह से प्रशासन ने इस क्षेत्र में लोहे की टीन लगाकर डेंजर घोषित कर दिया। कोई श्रद्धालु गलती से उस ओर न आ जाए, इसे देखते हुए पुलिस और पीएसी के जवानों के कैंप लगा दिए गए थे।
Monday, November 22, 2010
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