कुछ दिन पहले मेरठ यूनिवर्सिटी में एग्जाम से एक दिन पहले बीबीए व बीसीए का पेपर आउट हो गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने टीम बनाकर कई कॉलेजों में छापा मारा और पेपर को कैंसल कर दिया गया। इसका सीधा असर स्टूडेंट्स पर पड़ा। वे उत्तेजित भी हुए। इस मुद्दे पर यूथ की अलग-अलग राय है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्तर पर टाइट सिक्योरिटी बरतने के बावजूद पेपर कैसे आउट हो जाता है। यूथ की राय बता रहे हैं रानू पाठक : यूनिवर्सिटी अपने स्तर से एग्जाम पेपर को बनाती है। इसमें काफी सिक्योरिटी बरती जाती है। यहां तक मालूम नहीं होता कि पेपर कौन से टीचर्स फाइनल कर रहे हंै। इसके बाद भी पेपर आउट हो जाता है। कौन यह सब करते हंै, उनकी कितनी ऊंची पहुंच होती है कि वह इतनी सिक्योरिटी के बाद भी आसानी से यह काम कर देते है। जांच होती है, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं होता। पेपर कैंसल कर दिया जाता है। ऐसे में अंत मंे नुकसान स्टूडेंट्स का ही होता है। यह सब रुकना चाहिए। जो दोषी है वह सलाखांे के पीछे हो। एग्जाम प्रोसेस मंे पारदर्शिता होनी चाहिए।
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