Thursday, August 30, 2012

तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर खासी चर्चा


सीनियर पीसीएस अधिकारी की शिकायत को अनदेखा करना एमडीए के तीन अधिकारियों को महंगा साबित हुआ है। कमिश्नर की रिपोर्ट पर प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन ने इग्जेक्युटिव इंजीनियर जगराम, असिस्टेंट इंजीनियर प्रवीण गुप्ता और जेई प्रदीप गोयल को सस्पेंड कर दिया है। एमडीए (मेरठ डिवेलपमेंट अथॉरिटी) के इतिहास में पहली बार तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर खासी चर्चा है। 
बच्चा पार्क स्थित जॉइंट डिवेलपमेंट कमिश्नर के ऑफिस के पास बिना नक्शा मंजूर कराए अवैध रूप से नौ दुकानों का निर्माण किया जा रहा था। करीब आठ माह पहले जॉइंट डिवेलपमेंट कमिश्नर कर्ण सिंह चौहान ने एमडीए को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की थी। लेकिन एमडीए ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मामला मंडल कमिश्नर तक पहुंचा। कमिश्नर ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए। जांच के दौरान एमडीए ने 24 अगस्त को इन दुकानों को सील कर दिया। एमडीए के वीसी तनवीर जफर अली की रिपोर्ट के आधार पर पहली नजर में इग्जेक्युटिव इंजीनियर जगराम, असिस्टेंट इंजीनियर प्रवीण गुप्ता और जेई प्रदीप गोयल को इस मामले में दोषी पाया गया। इस पर कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण ने तीनों को सस्पेंड करने की सिफारिश शासन से कर दी। शासन ने तीनों अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। एमडीए के वीसी तनवीर जफर अली ने इसकी पुष्टि कर दी है। एमडीए के इतिहास में यह अपने तरह की पहली घटना है। इस खबर की जानकारी के बाद सभी अधिकारी पूरे दिन इसी पर चर्चा करते दिखे

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