Monday, April 13, 2015

मारपीट व एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज

सरधना क्षेत्र से बीजेपी विधायक संगीत सोम के पिता ओमवीर सोम, मुनीम धर्मपाल और 4 अज्ञात के खिलाफ गुरुवार देर रात पुलिस ने मारपीट व एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुनीम को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। ओमवीर सोम के भट्टे पर काम करने वाले धर्मेंद्र ने एसपी से मिलकर आरोपियों की ओर से बुरी तरह पीटने और जातिसूचक शब्द कह कर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।
एसओ सरधना मेहर सिंह ने बताया कि धर्मेंद्र की तहरीर पर ओमवीर सोम, धर्मपाल और 4 अज्ञात के खिलाफ मारपीट और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। अन्य अरोपियों की तलाश की जा रही है।

गौरतलब है कि गुरुवार को धर्मेंद्र ने एसपी आरए से मिलकर अपने शरीर पर आए चोट के निशान दिखाए थे। धर्मेंद्र ने बताया था कि संगीत सोम के पिता ओमवीर सोम के ईंट के भट्टे के मुनीम धर्मपाल और 4 अन्य उसे जबरन जीप में डालकर फार्म हाउस ले गए। वहां आरोपियों ने बुरी तरह पीटा। वह बेहोश हो गया तो उसे नहर के किनारे फेंक दिया गया। होश आने पर वह एफआईआर दर्ज कराने सरधना थाने गया, लेकिन पुलिस ने उसे वहां से भगा दिया।
एसपी आरए एमएम बेग ने सीओ सरधना को इस घटना की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। घायल धर्मेंद्र को शुक्रवार को जिला अस्पताल ले जाया गया। आरोप है कि वहां पहले से खड़े कुछ लोगों ने धर्मेंद्र को मुकदमा वापस लेने के लिए कहा। यह भी आरोप है कि मना करने पर उसे परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। हालांकि पुलिस अभी ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार कर रही है। धर्मेंद्र की हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है।

Friday, April 10, 2015

मामले की निष्पक्ष जांच हो

सरधना से बीजेपी के विधायक संगीत सोम के पिता पर ईंट भट्टे पर काम करने वाले युवक धर्मेंद्र सिंह (28) को बुरी तरह पीटने का आरोप है। शरीर पर लगे चोट के निशान दिखाते हुए धर्मेंद्र ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। एसपी आरए एमएम बेग ने सीओ सरधना को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। वहीं, संगीत सोम ने इसे एसपी नेताओं की साजिश बताई है। उनका कहना है कि एसपी नेता बदले की राजनीति में परिवार पर भी हमला करने से नहीं चूक रहे हैं।
सरधना के बीजेपी विधायक संगीत सोम के पिता ओमवीर सिंह का ईंट भट्टा है। एसएसपी ऑफिस पहुंचे धर्मेंद्र ने बताया कि एक साल पहले ओमवीर ने काम करने के लिए कुछ और मजदूर लाने को कहा था। उनके कहने पर 20 युवक भट्टे पर काम करने आए थे। उस समय उनसे अच्छा वेतन और रहने के लिए जगह देने का वादा किया गया था। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें वेतन के नाम पर मामूली रकम थमा दी गई और कहा गया कि उन्हें बाद में और रुपये दिए जाएंगे। यह सिलसिला करीब एक साल तक चलता रहा, लेकिन मजदूरों को उनके वेतन का बकाया पैसा नहीं दिया गया। इस पर 4 मजदूर काम छोड़ जाने लगे। धर्मेंद का आरोप है कि ओमवीर के लोगों ने मजदूरों से उनके पास जो पैसे थे वह भी छीन लिए। धर्मेंद्र को जब इस बात की जानकारी मिली तो उसने इसका विरोध किया। आरोप है कि बुधवार सुबह ओमवीर का अकाउंटेंट अपने साथ 3- 4 लोगों को लेकर उसके घर आया और उसे जबरन जीप में डालकर ओमवीर के फार्महाउस में ले गए। वहां उसकी बुरी तरह से पिटाई की गई। इतना ही नहीं उसपर जातिगत कमेंट भी किए गए। बेहोश होने के बाद उसे नहर के किनारे फेंक दिया गया। धर्मेंद्र के अनुसार थाना सरधना पुलिस ने उसकी एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया और उसे वहां से भगा दिया।

बीजेपी के विधायक संगीत सोम ने इसे समाजवादी पार्टी के नेताओं की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि एसपी के कुछ लोग राजनीतिक दुश्मनी के कारण अनावश्यक रूप से उनके पिता का नाम इस मामले में घसीट रहे हैं। हकीकत यह है कि धर्मेंद्र भट्टे पर मजदूर सप्लाई करने वाला ठेकेदार है। मेरे पिता अपने पार्टनर राम कुमार के साथ मिलकर भट्टा चलाते हैं। धर्मेंन्द्र ने उस भट्टे के लिए कुछ मजदूर भेजे थे। बाद में वह रामकुमार से और मजदूर भेजने के नाम पर 5 हजार रुपये ले गया था और मजदूर भी नहीं भेजे। पहले वाले मजदूर भी काम छोड़ कर जाने लगे। यह मामला रामकुमार और धर्मेंद्र के बीच का है। लेकिन राजनीतिक कारणों से मेरे पिता का नाम इसमें घसीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो।

Thursday, April 9, 2015

गायिका के नौकर और उसके दोस्त को गिरफ्तार कर आज जेल भेज दिया

रागिनी गायिका और उसके पति की हत्या के मामले में पुलिस ने गायिका के नौकर और उसके दोस्त को गिरफ्तार कर आज जेल भेज दिया। मेरठ के एसएसपी सुभाष सिंह बघेल ने आज बताया कि सलमान (30) और आदिल (25) को कल शाम गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से धारदार हथियारों के साथ ही 61 हजार 500 रुपये और लाखों के जेवरात बरामद किए गए हैं। उन्हें आज जेल भेज दिया गया।

गिरफ्तार अभियुक्तों से की गई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने बताया कि हत्या की वजह लूटपाट के साथ ही ललिता का अपने नौकर के साथ बुरा व्यवहार था।
उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह शहर की पॉश कालोनी में ललिता शर्मा (30) और उसके पति मोनू शेख (33) की धारदार हथियार से गला काट कर हत्या कर दी गई थी। मृतका आठ माह की गर्भवती थी।
पुलिस ने मृतका और उसके पति के बारे में जानकारी की तो मालूम हुआ कि ललिता शर्मा रागिनी गायिका थी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में अपने कार्यक्रम करती रहती थी।
हरियाणा के हांसी क्षेत्र की निवासी ललिता शर्मा ने करीब दस साल पहले पड़ोसी मोनू शेख से प्रेम विवाह किया था। विवाह उपरान्त उसने अपना नाम नाजिया रख लिया था। तभी से उसे ललिता शर्मा उर्फ नाजिया के नाम से जाना जाने लगा था।
विवाह परिवार वालों की इच्छा के खिलाफ किया था इसलिए दोनों मेरठ आकर रहने लगे थे। विवाह के दो साल बाद ललिता ने अयान को जन्म दिया था। अब ललिता दोबारा मां बनने वाली थी। आठ माह की गर्भवती होने के चलते इन दिनों ललिता कार्यक्रमों में भाग ना लेकर घर पर ही रह रही थी।

Tuesday, April 7, 2015

जख्मों पर एक बार फिर नमक छिड़कने का काम

1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान शहीद हुए सेना के जवानों की विधवाओं के जख्मों पर मेरठ कैंट बोर्ड ने एक बार फिर नमक छिड़कने का काम किया है। 43 साल से कैंट क्षेत्र के एक हाउसिंग कॉम्पलेक्स विडोज कॉलोनी के 10 मकानों में रह रही शहीदों की विधवाओं के घरों की बिजली तो कैंट बोर्ड ने 2013 में ही काट दी थी, अब उनके नाम कैंट बोर्ड के होने जा रहे इलेक्शन की लिस्ट से भी हटा दिए गए हैं। मेरठ कैंट बोर्ड के इस रवैये से शहीदों की विधवाएं आहत हैं। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद यूपी में शहीदों की विधवाओं को कुल 47 मकान आवंटित किए गए थे। इनमें से 10 मेरठ में (विडोज कॉलोनी) 16 लखनऊ में,10 बरेली में 6 आगरा में और 5 लैंस डाउन में जो कि अब उत्तराखंड में है मिला था।
मेरठ में आवंटित 10 मकानों मे से एक में रह रही राजमुमारी देवी (67) कहती हैं कि मेरठ कैंट बोर्ड ने अब तो उन्हे टार्चर करने की सभी सीमाएं तोड़ दी हैं। 2013 में सभी दस परिवारों को तीन-तीन लाख का बिजली काट दिया। 12 अगस्त 2013 को उन सभी की बिजली काट दी गई। अब कैंट बोर्ड ने उन्हे टार्चर करने का नया तरीका निकाला है। इस बार उन्होंने कैंट बोर्ड के होने जा रहे चुनाव के लिए बनाई गई वोटर लिस्ट से उनके नाम हटा दिए हैं।

इसी कॉलोनी में रहने वाले 1971 युद्ध के अकेले सेनानी धर्मवीर सिंह कहते हैं कि यह कैंट बोर्ड की सोची समझी चाल है। वह वोटर लिस्ट से हमारे नाम हटा कर इसे सबूत के रूप मे हमारे खिलाफ कोर्ट में पेश करना चाहते हैं। वे बताते हैं कि कैंट बोर्ड द्वारा उनके मकानों के बिजली के कनेक्शन काटे जाने के बाद उन लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट मे एक रिट दायर की गई है। इसमें अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। जब मेरठ कैंट बोर्ड के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर एमए जफर से बात की गई तो उनका कहना था कि हर इलेक्शन से पूर्व कैंट क्षेत्र में रहने वालों को वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने के लिए एक आवेदन देना होता हैं। विडोज कॉलोनी में रहने वालो ने आवेदन नहीं किया है। इसलिए उनके नाम लिस्ट में नहीं है। अखबार में वोटर लिस्ट छपने के बाद भी इस कॉलोनी के किसी भी व्यकि ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। हालांकि धर्मवरी सिंह का कहना है कि 43 सालों से कैंट बोर्ड के लोग ही उनके पास आकर चेक किया करते थे कि उनका नाम लिस्ट में है या नहीं। इससे पहले उन्होंने कभी भी वोटर लिस्ट में नाम लिखवाने के लिए कोई आवेदन नहीं किया। एक ओर जहां विडोज कॉलोनी के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, वहीं इस लिस्ट में 2623 नए वोटरों के नाम जोड़े भी गए है।

Monday, April 6, 2015

दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत

मेरठ के लोहिया नगर में सोमवार सुबह हुई एक दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे हैं।
एक अन्य मृतक बच्चों की मौसी थी। सुबह करीब 5:30 बजे यहां की एक चार मंजिला इमारत में आग लग गई। उसमें परवेज (37) अपनी पत्नी शाजिया (32) और बच्चों-10 साल के फराज, 8 साल के अदनान और 7 महीने की बेटी जोया के साथ किराए पर रह रहे थे। उनके घर शाजिया की छोटी बहन रेशमा (22) भी सरधना से आई हुई थी।
तड़के जब सभी नींद में थे, तभी आग ने इमारत को चपेट में ले लिया। जब तक इसका पता चलता और फायर ब्रिगेड, पुलिस और दूसरी मदद पहुंचती, ये 6 और कुछ अन्य जख्मी हो गए।
अस्पताल ले जाए जाने पर इन 6 को मृत घोषित कर दिया गया। मौके पर सुबह 10 बजे तक फायर और पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे। आग पर काबू पा लिया गया था। हालांकि आग लगने का कारण अभी पता नहीं चल सका है, पर पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि इसमें किसी की शरारत या दुश्मनी जैसी कोई बात तो नहीं है।

Saturday, April 4, 2015

नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने का आरोप

मसूरी के आईएएस ट्रेनिंग कॉलेज में कथित तौर पर सात महीने तक आईएएस अधिकारी बनकर रहने वाली रूबी चौधरी के गांव कुटबी (मुजफ्फरनगर) में उत्तराखंड पुलिस के साथ अकैडमी के कई आईएएस अधिकारी की टीम पहुंची। टीम के गांव में पहुंचते ही हड़कंप मच गया। टीम के सदस्यों ने रूबी के परिजनों से मुलाकात कर पूछताछ की और कई जानकारियां हासिल की।
पुलिस की तीन लोगों की टीम यादवेंद्र सिंह चावला और शरद सिंह नेगी की अगुवाई में यहां पहुंची थी। कुटबी में उन्होंने रूबी के भाई सहित कई लोगों के बयान दर्ज किए। टीम ने रूबी के भाइयों से पूछा कि जब वो अपनी बहन के पास मंसूरी गए तो क्या वो अकैडमी के अंदर गए थे और वहां उसका रुतबा कैसा था। कई जानकारियां हासिल कर इस टीम ने कई लोगों के देर शाम तक बयान दर्ज किए। इस मामले में रूबी चौधरी पहले ही खुद को निर्दोष बताते हुए आईएएस अकैडमी के डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन सहित कई अधिकारियों पर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने का आरोप लगा चुकी है।
रूबी के दो भाई गांव में ही खेती करते हैं, जबकि मेरठ में छोटी बहन मधु चौधरी बीए की पढ़ाई कर रही है। हालांकि इससे पहले रूबी की मां उमेश देवी ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी को गलत फंसाया जा रहा है और जबान बंद करने के लिए धमकी भी दी गई है। बताया जा रहा है कि रूबी चौधरी एक महत्वाकांक्षी युवती थी। वह आईएएस बनना चाहती थी। उसने खुद को आईएएस बताकर नोएडा के एक बड़े प्रॉपर्टी डीलर से शादी की थी। 21 फरवरी को मेरठ के गंगानगर में रूबी की शादी हुई थी।
बहन मानने से किया इनकार

रूबी चौधरी के भाई रोहित बालियान से जब इस बारे में बात की गई तो पहले तो उसने रूबी को अपनी बहन मानने से ही इनकार कर दिया। लेकिन बाद में उसने कहा कि जब उसे रूबी की जॉब के बारे में पता चला था, तभी उसे शक हुआ था। उसने रूबी से अपने रिश्ते खत्म कर लिए थे। वह काफी दिनों से उसके संर्पक में नहीं था। वहीं, रूबी के पैरंट्स से फोन पर बात की गई तो उन्होंने भी अपनी बेटी की इस हरकत पर शर्मिंदगी जताई। उन्होंने कहा अगर वह गलत है तो उनका उससे कोई नाता नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

Thursday, April 2, 2015

हाई कोर्ट बेंच की मांग

वेस्ट यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों ने सिटी स्टेशन पहुंच कर रेल रोक दी। अपनी मांगों के सर्मथन में नारेबाजी करते हुए कुछ वकील ट्रेन के इंजन पर चढ़ गए, जबकि उनके बाकी साथी पटरी पर खड़े हो गए। इस दौरान यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे वकीलों ने केंद्रीय संघर्ष समिति वेस्ट यूपी की बैठक कर मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर व अलीगढ़ मंडल के सभी जिलों में दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक रेल रोकने का ऐलान किया गया था। बुधवार को मेरठ सिटी स्टेशन पंहुचे वकीलों ने करीब 12 बजकर 25 मिनट पर स्टेशन पहुंची बलसाड़-हरिद्वार एक्सप्रेस सिटी का रास्ता रोक दिया। पुलिस ने वकीलों को पटरी से हटने के लिए कहा, तो उनके बीच नोकझोंक हुई। इस दौरान करीब आधे घंटे तक रेल रुकी रही और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। संघर्ष समिति के अध्यक्ष डीडी शर्मा ने बताया कि मेरठ समेत हापुड़, गाजियाबाद, सहारनपुर व मुजफ्फरनगर में भी वकीलों ने ट्रेन रोक कर पूरे वेस्ट यूपी मे दो घंटे के लिए रेल सेवा ठप कर दी थी। उन्होंने कहा कि अपनी मांग पूरी होने तक वकील अपना संर्घष जारी रखेंगे। डीडी शर्मा ने बताया कि छह अप्रैल को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने वकीलों को अशोक रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर बुलाया है। इसकी सूचना उन्हें बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ़ लक्ष्मीकांत बाजपेयी व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री संजीव बालियान से मिली है। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का प्रतिनिधमंडल अमित शाह से मिलने जाएगा।