रमेश चंद्र त्रिपाठी ने विवाद को बातचीत से सुलझाने और फैसला टालने के लिए अर्जी दाखिल की थी। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अखिल भारत हिंदू महासभा ने इस पर आपत्ति दाखिल की थी। अर्जी को खारिज करते हुए तीन जजों की बेंच ने कोर्ट से बाहर सुलह की इस कोशिश को गलत मंशा से की गई कोशिश माना और 50 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया। बेंच में जस्टिस एस.यू. खान, सुधीर अग्रवाल और डी.वी. शर्मा हैं। बेंच ने कहा, विभिन्न पक्षों से जो वकील पेश हुए, चाहे वे वादी के हों या प्रतिवादी पक्ष के, गंभीरता से इस याचिका का विरोध किया है। हमें इस अर्जी को खारिज करने में कोई हिचक नहीं है। जजों ने कहा कि आवेदक ने बिना किसी विधिसम्मत तर्क या कारण के अर्जी दाखिल की है। हम इस कोशिश को गलत मंशा से की गई मानते हैं और इस पर हर्जाना देगा होगा। अर्जी खारिज करने के पहले जजों ने इस मामले से जुड़े पक्षों से पूछा कि क्या वे समझौते के लिए बात करना चाहते हैं, इस पर किसी ने रुचि नहीं दिखाई।
Saturday, September 18, 2010
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