कभी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की खुशहाली का राज़ इस क्षेत्र
में पैदा होने वाले गन्ने को माना जाता था। लेकिन आज उसी गन्ने ने क्षेत्र के
किसानों के जीवन से मिठास छीन ली है। देश का शुगर बाउल समझे जाने वाले वेस्टर्न
यूपी के गन्ना उत्पादक किसान और गुड़ व्यापारी दोनों ही परेशान हैं।
बुधवार को राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं ने मेरठ कमिशनर कार्यालय पर प्रदर्शन कर कमिशनर को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें गन्ने का मूल्य शीघ्र घोषित कर चीनी मिलों को शुरू करने की मांग की गई है। मांगें शीघ्र पूरी न किए जाने पर सड़क व रेल मार्ग जाम करने की चेतावनी भी दी गई है।
प्रदेश सरकार ने गन्ने का मूल्य अभी तक घोषित नहीं किया है जिसके कारण चीनी मिलों का पेराई सत्र अभी तक शुरू नहीं किया है। चीनी मिलों में पेराई सत्र के शुरू न होने के कारण किसानों को गन्ना औने -पौने दामों पर कोल्हू में डालना पड़ रहा है। जो किसान प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य की घोषणा किए जाने के इंतजार में गन्ना खेत में रोके हुए हैं, उन्हें गेहूं की बुवाई का समय बीत जाने की चिंता सता रही है। वहीं जो थोड़ा बहुत गुड़ कोल्हूओं में बन रहा है, उसके देश की अन्य मंडियों में जाने के कारण मुज़फ्फरनगर स्थित एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी वीरान पड़ी है। इस कारण गुड़ व्यापारियों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
बुधवार को राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं ने मेरठ कमिशनर कार्यालय पर प्रदर्शन कर कमिशनर को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें गन्ने का मूल्य शीघ्र घोषित कर चीनी मिलों को शुरू करने की मांग की गई है। मांगें शीघ्र पूरी न किए जाने पर सड़क व रेल मार्ग जाम करने की चेतावनी भी दी गई है।
प्रदेश सरकार ने गन्ने का मूल्य अभी तक घोषित नहीं किया है जिसके कारण चीनी मिलों का पेराई सत्र अभी तक शुरू नहीं किया है। चीनी मिलों में पेराई सत्र के शुरू न होने के कारण किसानों को गन्ना औने -पौने दामों पर कोल्हू में डालना पड़ रहा है। जो किसान प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य की घोषणा किए जाने के इंतजार में गन्ना खेत में रोके हुए हैं, उन्हें गेहूं की बुवाई का समय बीत जाने की चिंता सता रही है। वहीं जो थोड़ा बहुत गुड़ कोल्हूओं में बन रहा है, उसके देश की अन्य मंडियों में जाने के कारण मुज़फ्फरनगर स्थित एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी वीरान पड़ी है। इस कारण गुड़ व्यापारियों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
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