Monday, December 30, 2013

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक पार्टियां इसे सियासी रंग देने में जुटी

उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में दंगों पर जारी सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। कोई राजनैतिक पार्टी ऐसी नहीं है, जो मुजफ्फरनगर दंगों पर अपनी सियासी रोटियां नहीं सेंक रही हो, जबकि दंगा पीड़ितों की शिकायतों का कहीं निपटारा नहीं हो रहा है और आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक पार्टियां इसे सियासी रंग देने में जुटी हैं। 
मुजफ्फरनगर दंगों में 50 हजार से ज्यादा लोग बेघर हुए। उन्हें 38 शरणार्थी शिविरों में रखा गया। इन शिविरों में कुव्यवस्था और सुविधाओं का अभाव देखा गया। मुलायम ने हाल में कहा था कि शिविरों में कुछ दलों से जुड़े साजिशकर्ता रह रहे हैं। बीजेपी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने आरोप लगाया कि मुजफ्फरनगर दंगा 'सेकुलर सूरमाओें' का सियासी संग्राम है। उनके अनुसार दंगों के बाद राहुल गांधी 'सेकुलर टुरिज्म' कर रहे हैं, वहीं मुलायम सिंह दंगा पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। कुछ दिन पहले दंगा शिविरों का दौरा करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि जिन लोगों ने दंगा कराया, वे नहीं चाहते कि दंगा पीड़ित अपने घर लौटें। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा था कि शरणार्थी शिविरों में स्थिति काफी खराब है। बच्चे मर रहे हैं। राज्य में एक युवा मुख्यमंत्री हैं।
 
उत्तरप्रदेश मानवाधिकार आयोग को मुजफ्फरनगर दंगे के सिलसिले में 4 दिसंबर 2013 तक 8 शिकायतें प्राप्त हुई और सभी शिकायतें निपटारे की प्रक्रिया में है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत आयोग ने बताया कि आयोग में अध्यक्ष और कुछ सदस्यों के पद कुछ समय तक रिक्त थे, जिन पर अब नियुक्ति हो गई है और इन शिकायतों पर विचार शुरू हो गया है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने मुजफ्फरनगर दंगों के बारे में सूचना मांगने पर कहा कि आप जो सूचना मांग रहे हैं, वह 346 पन्नों की है, जिसे प्राप्त करने के लिए 692 रुपये की फीस भेजें।
 

मुजफ्फरनगर दंगों के बारे में राष्ट्रपति कार्यालय को प्राप्त शिकायतों और कार्यवाही पर राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा कि सचिवालय में प्रतिवेदनों का रिकार्ड विषयवार नहीं रखा जाता है। रिकार्ड के अनुसार मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित बीजेपी का एक एप्लीकेशन 27 सितंबर 2013 को प्राप्त हुई, जिसे विशेष कार्य अधिकारी और पीएमओ को रेफर किया गया है। इस बीच यूपी सरकार ने पहली बार स्वीकार किया कि दंगा पीडितों में 15 साल से कम उम्र के 34 बच्चों की मौत हुई है। 
राष्ट्रीय
 अल्पसंख्यक आयोग की एक सदस्य ने कहा कि दंगे के सिलसिले में अपराधियों को गिरफ्तार नहीं कियागया है , जिसके कारण समुदाय के लोगों में भरोसा नहीं जाग पा रहा है  भय के आलम में वे अपने घरों को नहींलौटना चाहते हैं और इस समय भीषण ठंड से जद्दोजहद कर रहे हैं। मुरादाबाद स्थित आरटीआई कार्यकर्ता सलीमबेग ने सरकार और विभागों से दंगों के बारे में जानकारी मांगी थी। वहीं , राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार गुप्ता ने कहा था कि राहत शिविरों में ठंड से किसी कीमौत नहीं हुई है  ठंड से कभी कोई नहीं मरता है , अगर ठंड से किसी की मौत होती तो दुनिया के सबसे ठंडेइलाके साइबेरिया में कोई जिंदा नहीं बचता। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विवादास्पद बयान देनेवाले गृह विभाग के प्रमुख सचिव का लगभग बचाव करते हुए कहा कि ' टीवी चैनलों के जमाने में ' अधिकारियोंको अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए। सरकार की कोशिश है कि मुजफ्फरनगर का मसला खत्म हो औरविस्थापित लोग अपने घर वापस जाएं। आरएलडी नेता जयंत चौधरी ने कहा कि कानून और व्यवस्था देखनाराज्य सरकार की जिम्मेदारी है और मुजफ्फरनगर दंगा लापरवाही का परिणाम है। 

Friday, December 27, 2013

सख्ती बरतनी शुरू

राहत शिविरों में रह रहे लोगों को लेकर समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के तल्ख बयान के बाद प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। मुजफ्फरनगर के लोई राहत शिविर से लोगों को भेजने का काम तेज हो गया है। पिछले दो दिनों में तीस परिवारों को कैंप से भेजा जा चुका है। इस बीच, सांझक में कब्रिस्तान की जमीन पर तंबू लगाकर रह रहे 30 शरणार्थी परिवारों के खिलाफ सरकारी जमीन कब्जाने की रिपोर्ट लिखाई गई है। इस बीच, राज्य सरकार ने माना है कि दंगा प्रभावित परिवारों के लिए मुजफ्फरनगर और शामली में स्थापित शिविरों के कुल 34 बच्चों की मौत हुई है।
समाजवादी पार्टी सितंबर में हुए दंगों के आम चुनाव पर प्रभाव को लेकर आशंकित है। इन दंगों में 60 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग विस्थापित हो गए थे, जो मुजफ्फरनगर और शामली के राहत कैंपों में रह रहे हैं। अखिलेश सरकार जल्द से इन लोगों को कैंपों से हटाना चाहती है। इस दिशा में प्रशासन भी निरंतर प्रयास कर रहा है, लेकिन दहशत के चलते विस्थापित फिलहाल इन कैंपों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
प्रशासन का कहना है कि तीन-चार दिनों में लोई शिविर से लोग सुरक्षित स्थान पर भेज दिए जाएंगे। डीएम कौशलराज शर्मा ने बताया कि लोई शिविर से बुधवार को 20 लोग गांव चले गए थे। गुरुवार को नौ और लोग शिविर से भेज दिए गए हैं। उनका कहना है कि सर्दी बढ़ने के कारण हालात बिगड़ सकते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। एडीएम प्रशासन इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि शुक्रवार को मुआवजा पा चुके सौ लोगों को कैंप से हटाया जाएगा। उनका कहना है कि इस कैंप में रहने वाले 167 परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है।
प्रशासन भले ही लोगों को राहत कैंपों से हटाने में जुटा है लेकिन इन्हें फिर से गांव या किसी सुरक्षित जगह पर बसाने की कोई योजना उसके पास नहीं है। बुढ़ाना के एसडीएम मुनीश चंद्र शर्मा, जिनके अंदर लोई गांव आता है, का कहना है कि कैंप से निकले लोगों के लिए हमारे पास कोई योजना नहीं है। कुछ विस्थापितों ने मुआवजे की राशि से जमीन खरीदी है।
मुआवजे के वितरण को लेकर भी शिकायतें हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि मुआवजा उन्हें ही दिया जा रहा है जिनके पास या तो राशन कार्ड है या रिश्वत दे रहे हैं। लोई कैंप में रहने वाले याकूब शेख का कहना है कि समस्या यह है कि संयुक्त परिवारों में से भी किसी एक को मुआवजा दिया जा रहा है। यासीन शेख का कहना है कि अधिकारी हमें बाहर निकल रहे हैं, लेकिन हमें नहीं पता कि यहां से कहां जाएंगे। गांव में हमारे घर और जमीन पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर लिया है।
इस बीच, राज्य सरकार ने माना है कि दंगा प्रभावित परिवारों के लिए मुजफ्फरनगर और शामली में स्थापित राहत कैंपों के कुल 34 बच्चों की मौत हुई। प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता ने समिति की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सभी बच्चों की मौत अलग-अलग कारणों से हुई है। उन्होंने दावा किया कि शिविर में सिर्फ 10-12 बच्चों की मौत हुई। शेष बच्चों की मौत शिविर से बाहर जाने के बाद हुई। इनमें से अधिकतर बच्चों की बीमारी का इलाज उनके परिवार के सदस्यों ने बाहर के डॉक्टरों से कराई थी। उन्होंने कहा कि शिविर में रह रहे परिवारों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर है
पत्रकारों ने जब प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता से पूछा कि ज्यादातर बच्चों की ठंड से मौत होने की बात सामने आ रही है, तब उन्होंने जवाब दिया कि ऐसी भी ठंड अभी नहीं पड़ी है। वह बोले कि बच्चों की मौत सितंबर से दिसंबर के दौरान हुई है वह भी विभिन्न कारणों से। ठंड से बच्चों की मौत का मुद्दा फिर से उठने पर उन्होंने उल्टा सवाल किया कि ठंड तो साइबेरिया में पड़ती है, तो क्या वहां लोग मर जाते हैं।

Monday, December 23, 2013

राहुल गांधी दंगा पीड़ितों का हाल जानने मुजफ्फरनगर पहुंचे

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दंगा पीड़ितों का हाल जानने मुजफ्फरनगर पहुंचे लेकिन भारी विरोध के चलते इस दौरे को वह पूरी तरह कामयाब नहीं बना सके। राहुल का 'आईएसआई पर दिया बयान' मुजफ्फरनगर में उनके लिए मुसीबत बन गया। राहुल राहत शिविरों का जायजा लेने रविवार को अचानक मुजफ्फरनगर आए थे लेकिन अपने बयान के चलते उन्हें लोगों की नाराजगी और विरोध का सामना करना पड़ा। राहुल को कई जगहों पर काले झंडे दिखाए गए।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन. सिंह के साथ राहुल सबसे पहले शामली स्थित मलकपुरा पहुंचे, यहां उन्होंने राहत शिविर में रहे शरणार्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। राहुल ने राहत शिविर में भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली।
मलकपरा के बाद राहुल मुजफ्फरनगर जिले के बसीकला और लोई इलाकों में लगे राहत शिविर में भी जाना चाहते थे, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और नाराजगी के चलते वह नहीं जा सके। बाद में राहुल मुजफ्फरनगर शहर आते समय अचानक काकड़ा गांव पहुंच गए और हिंसा प्रभावित इस गांव के लोगों का उन्होंने दर्द सुना।
काकड़ा जाते समय बुढ़ाना के पास लोगों ने राहुल को काले झंडे दिखाए। लोगों का कहना था कि जब राहुल हम लोगों को आईएसआई का एजेंट बताते हैं तो अब हमसे मिलने क्यों आए हैं।
गौरतलब है कि पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनाव के प्रचार के समय राहुल ने एक जनसभा में कहा था कि उन्हें पता चला है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी- इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) मुजफ्फरनगर के हिंसा पीड़ित मुस्लिम युवाओं से संपर्क साध रही है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शामली में राहत कैंपों में रह रहे मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों से मिले। राहुल ने पीड़ितों से कहा कि उन्हें अपने घर लौट जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दंगा कराने वाले उन्हें (पीड़ितों) कैंपों में ही रहने देना चाहते हैं क्योंकि ऐसी स्थिति उन्हें 'फायदा' पहुंचाती है। उन्होंने अपील की कि दंगाइयों के मंसूबे न पूरे होने दें।
राहुल ने पीड़ितों से कहा, 'जो लोग दंगे कराते हैं, वे चाहते हैं कि आप वापस नहीं लौटें। इससे उन्हें फायदा पहुंचता है। वे आपको आपके गांवों से दूर रखना चाहते हैं। मैं जानता हूं कि यह मुश्किल है और वहां डर भी है, लेकिन हमें इससे परे होकर सोचना चाहिए। यह लंबे समय के लिए ठीक नहीं रहेगा।'

Friday, December 20, 2013

अरविन्द केजरीवाल ने अन्ना के खिलाफ जाकर गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन नहीं किया

योग गुरु बाबा रामदेव ने बुधवार को कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने अन्ना के खिलाफ जाकर गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन नहीं किया है। वह यहां एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे। यहां पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में योग गुरु बाबा राम देव ने यह भी कहा कि दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल जिस तरह सरकार बनाने से पीछे हट रहे हैं वह ठीक नही है।

उन्होंने कहा कि ऐसा करके केजरीवाल अपने कर्तव्यों का निर्वहन नही कर रहे हैं। रामदेव ने यह भी कहा कि समलैंगिकों को लेकर वह अपने बयान पर आज भी कायम हैं। उन्होंने मंगलवार को कहा था, 'लगता है अधिकांश कांग्रेसी समलैंगिक हैं, इसलिए समलैंगिकता का समर्थन कर रहे हैं।' उनके इस बयान पर काफी हंगामा भी हुआ था। उन्होंने कहा कि काग्रेंस ने समलैंगिकों का समर्थन करके जनता का समर्थन खो दिया है।

Tuesday, December 17, 2013

बीएसपी सांसद कादिर राणा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

तीन महीने से अधिक समय तक गिरफ्तारी से बचने के बाद मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों के एक आरोपी बीएसपी सांसद कादिर राणा ने मंगलवार को यहां एक लोकल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया।मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट के.पी सिंह ने राणा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। उनकी जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। इससे पहले कोर्ट ने राणा सहित 16 नेताओं के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था।
गौरतलब है कि इस साल सितंबर में मुजफ्फरनगर और इसके आस पास के क्षेत्रों में सांप्रदायिक झड़पों को भड़काने के आरोपी नेताओं में राणा भी शामिल हैं। इन झड़पों में 60 से अधिक लोग मारे गये थे और 40 हजार से अधिक विस्थापित हुए थे।
जिले के कवाल गांव में 27 अगस्त को सांप्रदायिक विवाद के कारण तीन युवकों की मौत के बाद जनसभाओं पर पाबंदी लगाने के बावजूद 30 अगस्त को राणा ने शहर के खलापाड क्षेत्र में भड़काउ भाषण दिया था जिसे लेकर उन पर मामला दर्ज हुआ था।

Monday, December 9, 2013

संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर परिजनों में भारी गुस्सा

युवती के कथित अपहरण के मामले में पिछले दो दिन से अवैध रूप से दौराला थाने की हवालात में बंद युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर परिजनों में भारी गुस्सा है। परिजनों का इल्जाम है कि पुलिस ने युवती के परिजनों के ईशारे पर युवक को हवालात में थर्ड डिग्री देकर उसकी हत्या की है। इस मामले में इंस्पेक्टर दौराला का कहना है कि युवक ने हवालात में फांसी लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मैजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम कराया गया। एसएसपी ने थाना दौराला के इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिस कर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। मृतक की मां की तहरीर पर थाने के स्टाफ के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया गया है। 
पल्लवपुरम फेस टू डबल स्टोरी निवासी नितिन उर्फ अप्पू पुत्र चिंताशंकर का पड़ोस में रहने वाली एक युवती से अफयेर था। अप्पू सेनेट्री का काम करता था, जबकि लड़की अपनी मां के साथ सिलाई का काम करती थी। बताया जा रहा है कि 2 दिसंबर को अप्पू प्रेमिका के साथ फरार हो गया था। 3 दिसंबर को युवती के परिजनों ने थाने में युवती के अपहरण की लिखित तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने तहरीर पर केस दर्ज नहीं किया था। इसी दौरान युवती के परिजनों को कहीं से सूचना मिली कि वे दोनों गाजियाबाद में हैं। आरोप है कि इस सूचना के बाद परिजनों ने 7 दिसंबर को दौराला पुलिस की मदद से अप्पू और उसकी प्रेमिका को गाजियाबाद में दबोच लिया था। वे युवती को साथ ले गए और अप्पू को पुलिस के हवाले कर दिया। तभी से अप्पू दौराला थाने की हवालात में अवैध रूप से बंद था। सोमवार सुबह अप्पू का शव हवालात के टॉयलेट की खिड़की से लटका मिला। फंदा कंबल को काट कर उसे रस्सी की तरह बटकर तैयार किया था। शव को देखते ही थाने में खलबली मच गई। शव को अस्पताल ले जाकर भर्ती दिखाने का प्रयास किया गया, लेकिन चिकित्सकों ने पुलिस से यह कहते हुए साफ इनकार कर दिया कि वह मर चुका है। अप्पू के परिजनों ने युवती के परिजनों पर आरोप लगाया। परिजनों का यह भी आरोप था कि पुलिस अप्पू को छोड़ने के लिए 20 हजार रुपये की मांग कर रही थी। गुस्साए परिजनों ने क्षेत्रवासियों के साथ सड़क पर पल्हैड़ा के पास जाम लगा कर हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दे जाम खुलवाया। मैजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पंचनामा कराकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस के सूत्रों के अनुसार, मौत लटकने के कारण हुई है। 

Thursday, December 5, 2013

रोकना चाहा तो उनकी पुलिस से भिडंत हो गई

मुंडाली थाना क्षेत्र के गांव कबूलपुर के एक युवक के हत्या के आरोपी को थाने से छोड़े जाने से गुस्साए गांव वाले युवक का शव लेकर मंगलवार की रात एसएसपी से मिलने चल दिए। रास्ते में गढ़ रोड पर पुलिस ने उन्हे रोकना चाहा तो उनकी पुलिस से भिडंत हो गई। पुलिस ने लाठियां फटकारी तो गांववालों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया। पुलिस की कई गाड़ियां टूट गई। इस घटना में एसओ मेडिकल चोटिल हो गए। सूचना पर भारी मात्रा में फोर्स मौके पर पहंुच गई। उसके बाद पुलिस ने गांववालों को दौड़ा- दौड़ा कर पीटा, जिसमें चार महिलाओं समेत एक दर्जन गांववाले घायल हो गए। 
मुंडाली थाना क्षेत्र के गांव कबूलपुर का रहने वाला 25 वर्षीय अवधेश पुत्र हरिशचंद्र राजमिस्त्री का काम करता था। उसकी कुछ दिनों पहले अपने गांव के ही हरिओम से कहासुनी हो गई थी। 26 नवंबर को हरिओम उसे अपने साथ काम के बहाने गाजियाबाद के भोपुरा गांव ले गया था। दो दिन बाद हरिओम लौट आया, लेकिन अवधेश नहीं लौटा। शक होने पर अवधेश के परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने हरिओेम को तीन दिन तक अपनी कस्टडी में रखने के बाद छोड़ दिया। सोमवार को मोदीनगर के कादराबाद बंबे के पास अवधेश का शव पड़ा मिला। सूचना पर अवधेश के परिजन गाजियाबाद पहंचे और पोस्टमार्टम के बाद उसका शव गांव लेकर आ गए। उसका शव मंगलवार को गांव पहंुचते ही पूरे गांव में उत्तेजना फैल गई। गावंवालों का आरोप था कि हत्या हरिओम ने की है, लेकिन पुलिस ने उसे थाने से छोड़ दिया। आक्रोशित गांववाले मंगलवार की रात करीब 10 बजे अवधेश के शव को लेकर एसएसपी से मिलने चल दिए। रास्तें में गढ़ रोड तक्षशिला कॉलोनी के सामने पुलिस ने गांववालों को रोकने का प्रयास किया। इस पर पुलिस व गांववाले आमने सामने आ गए। पुलिस ने डंडा फटकार तो गांववालों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव से पुलिस की कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई। एसओ मेडिकल बच्चन सिह चोटिल हो गए। सूचना मिलते ही भारी मात्रा में फोर्स मौके पर पहुंच गई और उसने गांववालों पर लाठी चार्ज कर दिया। पुलिस ने गांववालें को दौड़ा दौड़ा कर पीटा। इस घटना में चार महिलाओं समेत करीब एक दर्जन ग्रामीण घायल हो गए। इसके बाद गांववाले शव को लेकर अपने गांव लौट आए।