Friday, February 7, 2014

सत्यपाल सिंह

सत्यपाल सिंह साहित्य पढ़ने और लेखन में भी रुचि रखते हैं। उनकी पुस्तक 'तलाश इंसान की' अब तक एक लाख से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी है। सिंह के अनुसार उनकी पुस्तक का उर्दू में भी अनुवाद कराया गया है, जिसका विमोचन 14 अक्टूबर को अमिताभ बच्चन और जावेद अख्तर ने किया था। इस पुस्तक के लिए उन्हे काका कालेलकर साहित्य पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।
31 जनवरी 2013 को मुंबई के पुलिस कमिशनर पद से त्यागपत्र देकर बीजेपी का दामन थामने वाले सत्यपाल सिंह का जन्म 29 नवंबर 1955 को बड़ौत के एक छोटे से गांव बासौली में हुआ था। किसान परिवार में जन्मे सिंह की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही स्कूल में हुई। बड़ौत के जैन कॉलेज से एमएससी करने के बाद उन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी की। राजनीति से जुड़ने और अन्य सवालों पर प्रेमदेव शर्मा से हुई बातचीत।

आजकल सभी राजनैतिक दलों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहें हैं। ऐसे समय में आपने मुंबई पुलिस कमिश्नर का पद छोड़ कर राजनीति में आने का फैसला क्यों लिया?
प्लूटो ने अपनी पुस्तक 'द रिपब्लिक' में लिखा है कि देश के लोगों का जीवन अच्छा बनाना है तो पॉलिटिक्स में अच्छे लोगों को आना पड़ेगा। सिर्फ आलोचना से कुछ नही होगा। कौटिल्य ने कहा है कि सभी धर्म राजधर्म में प्रविष्ट हो जाते हैं। यदि राजधर्म ठीक है तो सभी धर्म अपने आप ठीक हो जाते हैं। इसलिए मैंने राजनीति मे आने का मन बनाया।
क्या आप पुलिस विभाग में कुछ घुटन महसूस कर रहे थे, जो राजनीति में आए?
ऐसा नहीं है। हां, अब मेरा दायरा जरूर बढ़ गया है। पुलिस की नौकरी में इतनी आजादी नहीं मिलती है।
आपने राजनीति के लिए भाजपा का ही क्यों चुना। आप मोदी से प्रभावित थे या भाजपा की नीतियों से?
बचपन से जो विचार मुझे संस्कार में मिले थे वे भाजपा की नीतियों के काफी नजदीक थे- जैसे राष्ट्र निर्माण, शिक्षा व्यवस्था भारतीय संस्कृति आदि। देश में मुख्य दो ही पार्टियां हैं। कांग्रेस व भाजपा। हमारे क्षेत्र में वैसे भी आजकल कांग्रेस का कोई जनाधार नहीं है।
भविष्य में राजनीति को लेकर आपकी क्या योजनाएं हैं?
राजनीति में एक आर्दश उदाहरण पेश करना चाहता हूं। मैं यह साबित करना चाहता हूं कि राजनीति में ईमानदारी से भी सेवा की जा सकती है। मैंने जैसे पुलिस में सेवा की है वैसी ही राजनीति में करना चाहता हूं।
यदि पार्टी ने आपको चुनाव लड़ने के लिए कहा तो आपका क्या जवाब होगा?
पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसका पूरा निष्ठा के साथ पालन करूंगा।
यह क्षेत्र आपकी जन्मभूमि है, जबकि महाराष्ट आपकी कर्मभूमि। क्या आपको लगता है कि चुनाव में खड़े होने पर यहां की जनता आपको स्वीकार करेगी?
आईपीएस बनने के बाद भी मेरा अपने क्षेत्र से नाता टूटा नही हैं। हमारे गांव में कन्याओं के लिए कोई स्कूल नही था। मैंने अपने पिता स्व. श्री रामकिशन जी के सहयोग से उनके लिए स्कूल खोला है। पिता के देहांत के बाद अपने पैतृक निवास में श्री रामकिशन संस्कार एकेडेमी खोली है। जोहड़ी रायफल क्लब का मैं प्रारंभ से ही पैटर्न रहा हूं। इसलिए मैं मानता हूं कि लोग आज भी मुझसे जुड़े हैं। वैसे भी आजकल लोग अच्छे लोगों को ही राजनीति में चाहते हैं।
राजनीति में आने के लिए आपने भाजपा से संपर्क साधा था, या फिर भाजपा ने आपसे?
हंसते हुए- भाजपा के एक शीर्ष नेता ने मुझसे संपर्क किया था, लेकिन उसका नाम मैं नहीं बता सकता।

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