Friday, February 7, 2014

शामली के झिंझाना थाना क्षेत्र में अवैध खनन का विरोध

 शामली के झिंझाना थाना क्षेत्र में अवैध खनन का विरोध कर रहे किसानों और बीकेयू नेताओं पर खनन माफियाओं ने गुरुवार को तमंचों, तलवारों और राइफलों से हमला बोल दिया। वारदात की कवरेज कर रहे पत्रकारों पर भी जान से मारने की नीयत से फायरिंग की गई। कई पत्रकारों के कैमरे तोड़े और कुछ पत्रकारों के कैमरे छीन भी लिए गए। खनन माफिया घंटों तक वहां खूनीव मचाते रहे। इस वारदात में 6 लोग घायल हो गए, जिनमें 2 की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को जिले के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलने के बावजूद पुलिस घटना के करीब डेढ़ घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची। 
शामली के खनन माफिया खुलेआम प्रशासन की नाक के नीचे भारी भरकम जेसीबी मशीन से यमुना का सीना चीरकर अखिलेश सरकार को करोड़ों का चूना लगा रहे है। इन माफियाओं ने क्षेत्रीय किसानों की हजारों एकड़ जमीन को खनन से बरबाद कर दिया है। मामला शामली के झिंझाना थाना क्षेत्र के यमुना किनारे स्थित गांव बडोली सादान का है। किसान अपना दुखडा डीएम को सुना चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
 
गुरुवार को इस मामले में स्थानीय किसान भारतीय किसान यूनियन के साथ पंचायत कर अवैध खनन का विरोध कर रहे थे तो खनन माफियाओं ने सैकड़ों गुर्गों ने अवैध तंमचों, राइफलों और तलवारों से किसानों और बीकेयू नेताओं पर हमला कर दिया।
 

दरअसल शामली में खनन माफियाओं की यह पहली करतूत नहीं है। करीब 4 महीने पहले इन माफियाओं ने पुलिस टीम पर गोली चलाई थी, जिसमें थानाध्यक्ष बीपी सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके अलावा भी यहां दर्जनों ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें कई लोगों की जानें जा चुकी है। 
सत्ता के इशारे पर खनन का खेल
 
सत्ता के ही इशारों पर ही चलता है। सूत्रों की माने तो खनन के कारोबार में प्रतिदिन करोड़ों के खेल में खाकी और खादी दोनों ही गोते लगाती है। खनन से यमुना नदी को भारी नुकसान होता है और उसके तटबंध कमजोर हो रहे है, जिससे हर साल यहां बाढ़ आ जाती है, दर्जनों गांव उसकी चपेट में आ जाते है। जिससे जान और माल दोनों की हानि होती है

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