Wednesday, October 23, 2013

नाबालिग लड़की का शव मंगलवार की सुबह शताब्दी नगर में एक खेत में पड़ा मिला

थाना लिसाड़ी गेट इलाके से सोमवार को लापता हुई एक नाबालिग लड़की का शव मंगलवार की सुबह शताब्दी नगर में एक खेत में पड़ा मिला। शव की अस्त-व्यस्त हालत को देखकर आशंका जताई जा रही है कि लड़की के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या की गई है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। संदेह के आधार पर इलाके की 2 युवतियों को हिरासत में लेकर वारदात के बाबत उनसे पूछताछ की जा रही है। 
न्यू इस्लामनगर निवासी एक नाबालिग लड़की (14) सोमवार को संदिग्ध हालत में लापता हो गई थी। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चला। सोमवार देर रात लड़की के पिता ने थाना लिसाड़ीगेट में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मंगलवार की सुबह शताब्दी नगर स्थित एक खेत में लोगों ने एक किशोरी का शव पड़ा देखा। शव के गले में चुन्नी बंधी हुई थी और उसके कपड़े अस्त व्यस्त थे। शव मिलने की सूचना पर थाना लिसाड़ी गेट पुलिस लापता लड़की के परिजनों को लेकर घटनास्थल पर पहुंची।
 
परिजनों ने शव की शिनाख्त अपनी बेटी के रूप में की। शिनाख्त के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। वहीं, थाना लिसाड़ी गेट पुलिस ने लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट को हत्या के मामले में तब्दील कर दिया है। शव की स्थिति को देखते हुए आशंका व्यक्त की जा रही है कि बलात्कार के बाद उसकी हत्या की गई है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिर्पोट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। वहीं परिजनों द्वारा क्षेत्र की दो युवतियों पर शक जताए जाने पर पुलिस ने दोनो युवतियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।
 

Friday, October 18, 2013

राहत शिविर में पीड़ितों ने कहा, जब 2 वक्त की रोटी को मोहताज, तो ईद का कोई मतलब नहीं

मुजफ्फरनगर के दंगो ने जिन मुस्लिम परिवारों को बेघर कर दिया था, ईद की खुशियां भी उनके चेहरे की रंगत नहीं बदल पा रही हैं। दंगों के बाद से राहत शिविरों में रह रहे इन लोगों का कहना है कि आज हम दो वक्त की रोटी के लिए दूसरों पर मोहताज हैं, ऐसे में ईद का हमारे लिए कोई मतलब नहीं है। उनके चेहरे और आंखों से झांकती बेबसी उनके दिल का दर्द बयान कर रही है। कुछ सामाजिक संगठनों ने उनके जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश की है। राहत शिविर में कपड़े और कुर्बानी की व्यवस्था उनकी ओर से की गई। लेकिन उनका यह प्रयास भी राहत शिविर में रह रहे लोगों को ईद की खुशी का अहसास नहीं करा पा रहा है। 

'जो बेघर हो, उसके लिए कैसी ईद?' 
मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद से राहत शिविर में रह रहे मुस्लिम परिवारों को इस बार ईद की खुशी महसूस नही हो रही है। शाहपुर राहत शिविर की देखभाल कर रहे हाजी मोहम्मद इकबाल का कहना है कि जो लोग महीनों पहले से ईद की तैयारी करने में जुट जाते थे, आज वह सारे दिन एक दूसरे से अपना दुखड़ा रोकर वक्त काट रहे हैं। राहत शिविर में रह रहा कुटबा गांव का यामीन कारपेंटर है। वह कहता है कि ईद तो खुशी का त्यौहार है। लेकिन जो घर से ही बेघर हो गया हो, उसकी कैसी ईद। काकड़ गांव का इलियास अपने आंसू रोकने की कोशिश करते हुए कहता है कि कभी स्कूल तो कभी मस्जिद के बरामदे में उनका परिवार अपनी रात गुजरता है, ऐसे में वह ईद के बारे में कैसे सोच सकते हैं।
 
'बच्चे भूखे हैं, ईद कैसे मनाएं'
 
वहीं इलियास का कहना है कि जिनके बच्चे भूख से रो रहे हैं, उसके माता-पिता को ईद की खुशी क्या होगी। शाहपुर, जौला, लोई, बशी, विज्ञाना समेत कुल 28 राहत शिविर अभी भी मुजफ्फनगर में चल रहे है। इनमें अभी भी 11,500 लोग रह रहे हैं। सभी कैंपों में उदासी का माहौल है। किसी भी कैंप में रह रहे लोगों के चेहरे पर खुशी नहीं है।
 
गम
 बांटने की कोशिश 
कुछ
 सामाजिक संस्थाओं ने इनका गम बांटने की कोशिश की है। कुछ कैंप में संस्थाओं की ओर से नए कपड़े औरकुर्बानी के लिए जानवर की व्यवस्था की गई है। जमीयत - उलेमा -  - हिंद के उपाध्यक्ष अजीर्जुर रहमान बतातेहैं कि उनकी संस्था ने भी कैंप में कुर्बानी की व्यवस्था की है। उनके अनुसार एक कुर्बानी सात लोगों पर जायजहोती है। हालांकि वह भी इस बात से इनकार नहीं करते कि उनके इस प्रयास के बावजूद कैंप में रह रहे लोगों मेंईद को लेकर कोई उत्साह नहीं आया है। उन्होंने बताया कि ईद पर कैंप में रह रहे सभी लोग पास की मस्जिद मेंनमाज पढ़ेगे और अमन की दुआ करेंगे। 
16
 हजार घर लौटे : डीएम 
डीएम
 मुजफफरनगर का कहना है कि राहत शिविरों में रह रहे 27 हजार 5 सौ लोगों में से 16 हजार लोग अपनेघर लौट गए हैं। ईद के बाद शेष को भी जल्द ही उनके घर भेजने की कोशिश की जा रही है। उन्होने बताया किईद पर शासन की ओर से कोई विशेष व्यवस्था नही की  ई है। 

Tuesday, October 15, 2013

सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान दर्ज

विशेष जांच दल (एसआइटी) ने मुजफ्फरनगर दंगों में शामली जिले के कांधला में दंगों के समय लापता लोगों के परिवारों के बयान दर्ज किए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज झा की अगुवाई में एसआइटी शनिवार को राहत शिविर पहुंची। टीम ने लिसाढ़ गांव में पिछले महीने दंगे के समय से लापता लोगों के सिलसिले में सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान दर्ज किए।
दंगे के बाद से करीब 13 लोग लापता बताए जा रहे थे। बाद में 2 लापता लोगों के शव भी मिले, लेकिन 11 लोग अब भी लापता हैं। आशंका जताई जा रही है कि दंगों के दौरान उन्हें लिसाढ़ गांव में मार दिया गया। इन लापता 11 लोगों में 2 लड़कियां भी शामिल हैं। इसी बीच विभिन्न संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जो लोग लापता हैं, उन्हें प्रशासन को मृत घोषित कर देना चाहिए, जैसा उत्तराखंड में आपदा के बाद किया गया।
न्यायमूर्ति सी. जोसेफ और पुलिस महानिदेशक कंवल देवल के नेतृत्व में आयोग की एक टीम ने दंगा प्रभावित मुजफ्फरनगर और शामली का दौरा किया था, तब इन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसके समक्ष अपनी मांग रखी थी।
 

Friday, October 11, 2013

दो युवकों की हत्याओं ने फिजा में एक बार फिर दहशत और तनाव

 दंगे से उबर रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दो युवकों की हत्याओं ने फिजा में एक बार फिर दहशत और तनाव घोल दिया है। मुजफ्फरनगर में नई मंडी कोतवाली क्षेत्र में नाई की दुकान करने वाले युवक को बाइक सवार दो लोगों ने गोली मार दी। अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। वारदात के बाद शहर में अफवाहों से दुकानों के शटर धड़ाधड़ गिरने शुरू हो गए। हत्या के विरोध में जाम और हंगामा कर रही भीड़ पर पुलिस ने लाठियां भांजी।
हत्या की दूसरी वारदात मेरठ में हुई। लावड़ के पास तीन बदमाशों ने दो सगे भाइयों पर नाम पूछकर जानलेवा हमला कर दिया। एक भाई की मौत हो गई। दूसरा भाई किसी तरह जान बचाकर भाग निकला। गुस्साए लोगों ने पुलिस चौकी में खड़े वाहनों में तोड़फोड़ कर दी और आगजनी का भी प्रयास किया।
मुजफ्फरनगर में पचेंडा रोड पर 28 वर्षीय आबिद हेयर ड्रेसर की दुकान करता था। बुधवार देर रात वह दुकान बंद कर रहा था, उसी समय बाइक पर आए दो युवक आबिद पर फायरिंग कर फरार हो गए। लहूलुहान आबिद सड़क पर गिर गया। आसपास के दुकानदार खून से लथपथ आबिद को जिला अस्पताल के लिए लेकर गए, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद पचेंडा रोड के बाजार बंद हो गए और आबिद के गांव गढ़ी गांव में तनाव फैल गया।

लोग जिला अस्पताल में पहुंच गए और संप्रदाय विशेष के लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। तनातनी के चलते आरएएफ, सीआरपीएफ और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। तहरीर देने के बाद भीड़ नारेबाजी करते हुए अस्पताल से बाहर निकल गई। इसके बाद इन लोगों ने सरवट चौक पर जाम लगा दिया। एक टीवी पत्रकार के कैमरे को तोड़ दिया और गाड़ियों पर पथराव किए। पुलिस ने लाठियां भांजकर उग्र भीड़ को तितर-बितर किया। तनाव के चलते शहर और गढ़ी में पुलिस की गश्त तेज कर दी गई है। एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना ने लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने का अनुरोध किया है।
उधर, मेरठ के मोदीपुरम में फर्नीचर की दुकान चलाने वाले जमालपुर के मोहसिन और शौकीन बुधवार देर शाम बाइक से लौट रहे थे। इसी दौरान लावड़ के पास जमालपुर रोड पर पांच बदमाशों ने दोनों भाइयों पर चाकुओं से हमला बोल दिया। मोहसिन की मौके पर मौत हो गई, शौकीन जान बचाकर गांव की ओर भागा। उसकी चीख सुनकर परिजन और ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। खून से लथपथ मोहसिन को लावड़ में एक डॉक्टर से पास ले जाया गया, जहां उसने मौत की पुष्टि कर दी।
गुस्साए ग्रामीणों ने चौराहे पर जाम लगाकर हंगामा किया और लावड़ चौकी में तोड़फोड़ कर आगजनी का प्रयास किया। मामला सांप्रदायिक होने का पता लगते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। एसपी देहात एमएम बेग पीएसी, अर्द्धसैनिक बल और कई थानों की पुलिस के साथ लावड़ पहुंचे। एसएसपी ओंकार सिंह ने मौके पर जाकर पीड़ित परिवार को सरकार से आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन देकर शांत कराया। अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। 

Tuesday, October 8, 2013

मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक सौहार्द की उम्मीद

 दंगों की आग में झुलसे मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक सौहार्द की उम्मीद जगा रहे हैं शामली के रिटायर्ड फौजी सतेंद्र मलिक। उन्होंने शुक्रवार को गांव के ही दूसरे संप्रदाय की लड़की का न केवल निकाह करवाया, बल्कि उसकी विदाई भी अपनी बेटी की तरह अपने घर से कराई। मलिक ने इस शादी का पूरा खर्च भी खुद ही उठाया है।
शामली का कुड़ाना गांव भी दंगों की चपेट में आ गया था। इस कारण गांव के कुछ लोग वहां से पलायन कर गए थे। गांव के ही रिटायर्ड फौजी सतेन्द्र मलिक ने अपने दोस्त रहीसु की बेटी अनवरी की शादी कराने का फैसला किया। इसमें मलिक के परिवार ने भी उसका बखूबी साथ दिया। अनवरी की शादी मुजफफरनगर के थाना बुढ़ाना क्षेत्र के नई बस्ती निवासी वसीम पुत्र अख्तर से 4 अगस्त को तय हुई थी। बिगड़े माहौल के कारण शुक्रवार को दुल्हे के साथ 15 बराती कुड़ाना गांव पहुंचे और निकाह संपन्न हुआ।
इस पाक मौके पर सतेन्द्र की पत्नी मनोज देवी और बेटा अनिल भी साथ में जुटे रहे। सतेन्द्र ने बारात की दावत के लिए खानपान का इंतजाम भी संप्रदाय के अनुसार ही किया। निकाह के बाद जब दुल्हन को विदा करने का समय आया तो सतेन्द्र ने रहीसु से बेटी को अपने घर से विदा करने की बात कही। सतेन्द्र की इच्छा पर अनवरी को उसके घर से विदा किया गया।

Thursday, October 3, 2013

अदालती कार्रवाई विडियो कांफ्रेंसिंग से कराने का अनुरोध

 जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े मामले में जेल में बंद बीजेपी विधायकों संगीत सोम और सुरेश राणा के खिलाफ अदालती कार्रवाई विडियो कांफ्रेंसिंग से कराने का अनुरोध किया है। दंगों में शामिल होने के आरोप में सोम और राणा के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया है। सोम को उरई जिला जेल में रखा गया है, जबकि सुरेश बांदा जिला जेल में बंद हैं। इन दंगों में 49 लोगों की मौत हो गयी थी।
डीएम कौशल राज शर्मा ने कहा कि कानून व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अदालत से अनुरोध किया है कि विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उनके मामले की सुनवाई की अनुमति दी जाए। बांदा और उरई दोनों जेलों में यह सुविधा उपलब्ध है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के. पी. सिंह प्रशासन के इस अनुरोध पर फैसला करेंगे। दोनों विधायकों के मामले की सुनवाई 4 अक्टूबर को होनी है। बीजेपी विधायक संगीत सोम को फर्जी विडियो अपलोड किए जाने के मामले में शामिल होने और भडकाऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जबकि सुरेश राणा को भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
 

Tuesday, October 1, 2013

इस कोशिश में एक दो जानें ही क्यों न चली जाएं

 समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल ने यूपी दंगों पर हैरान कर देने वाला बयान दिया है। राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार को दंगों पर सख्ती बरतनी ही चाहिए, भले ही इस कोशिश में एक दो जानें ही क्यों न चली जाएं। सूबे में सत्ता संभाल रही सरकार के बड़े नेता का यह बयान राज्य की राजनीति में नया बवाल पैदा कर सकता है।
अग्रवाल ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार उनके खिलाफ कड़ाई कर रही है, ऐसा करते वक्त अगर एक दो लोग मर भी जाते हैं तो सरकार उसकी चिंता नहीं करेगी लेकिन किसी को भी सांप्रदायिक माहौल खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। एसपी के महासचिव ने सरकार से अनुरोध किया कि इस तरह की महापंचायत लगाने का मौका ही नहीं दिया जाना चाहिए।
दरअसल, बीजेपी एमएलए संगीत सोम की गिरफ्तारी और उसपर एनएसए लगाए जाने के विरोध में खेड़ा गांव में रविवार को प्रस्तावित महापंचायत पर जिला प्रशासन की तरफ से प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद हजारों की संख्या में लाठी, डंडे व हथियारों से लैस महिलाएं, पुरुष व बच्चे गांव के पंचायत स्थल पर पहुंच गए। इसी दौराना जिले के सारे आला अधिकारी भी वहां पहंच कर स्कूल के कार्यालय में बैठ गए।

दो घंटे तक चली पंचायत के बाद डीएम को मौके पर आकर ज्ञापन लेने के लिए कहा गया। डीएम ने पंचायत को अवैध बताते हुए वहां आने से इनकार कर दिया। इस पर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण जिसमें महिलाएं भी शामिल थीं, डीएम को ज्ञापन देने कॉलेज के कार्यालय पहंचे। वहां पुलिस के साथ धक्कामुक्की के दौरान कुछ सिपाहियों ने गांव वालों पर लाठी चला दी।
इससे ज्ञापन देने आए लोग वहां से महापंचायत स्थल की ओर भाग लिए। उन्हें भाग कर आता देख हजारों की संख्या में मौजूद लोग उत्तेजित हो गए और उन्होंने स्कूल के अंदर घुसकर पुलिस पर हमला बोल दिया। पुलिसवाले जान बचाने के लिए इधर-उधर छिप गए। अधिकारियों ने कॉलेज के कार्यालय का चैनल बंद करा लिया। गुस्साई भीड़ ने वहां खड़े कमिश्नर, डीएम व अन्य वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। उन्होंने पुलिस के दो वाहनों को आग के हवाले कर दिया।
इसी बीच वहां बड़ी संख्या में पैरा मिलिटरी फोर्स के जवान भी आ गए। उन्होंने हवाई फायर किए। मामला सुलझता न देख उन्होने रबड़ की गोलियां भी दागी। बताया जा रहा है कि भीड़ की ओर से भी फायर हुआ। गांववालों ने काफी देर तक पुलिस से लोहा लिया। फायरिंग होने पर वे वहां से भाग कर खेतों में छिप गए। इस घटना ने दो लोग घायल हुए हैं। जिसमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है। मेरठ के डीएम रनदीप रिणवा ने रविवार देर शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस मे बताया कि खेड़ा गांव की घटना में पुलिस व पैरा मिलिटरी फोर्स के 15 जवानों को चोटें आई हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।