Friday, March 28, 2014

नगमा ने एक युवक को थप्पड़ जड़ दिया

मेरठ-हापुड़ से कांग्रेस कैंडिडेट नगमा को एक बार फिर भीड़ की बदसलूकी का सामना करना पड़ा। गुरुवार देर रात को मेरठ के नगमा जली कोठी में प्रचार कर रही थीं कि अचानक भीड़ बेकाबू हो गई। पहले तो उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की, मगर नाकाम रहने पर उन्हें वहां से जाना पड़ा। इसी दौरान भीड़ से चारों तरफ से घिरी नगमा ने एक युवक को थप्पड़ जड़ दिया। बाद में हंगामा इतना बढ़ गया कि लोगों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी।
अपने प्रचार अभियान के दौरान नगमा बीती रात साढ़े नौ बजे के करीब जली कोठी पहुंची थीं। उन्हें देखने के लिए जली कोठी चौराहे पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। ये लोग नगमा के करीब जाने और फोटो खींचने के लिए धक्कामुक्की कर रहे थे। जैसे-तैसे नगमा मंच तक पहुंचीं, लेकिन शोर-शराबा नहीं थमा। उन्होंने मंच से अपील करते हुए भीड़ से शांत रहने के लिए कहा, मगर इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने लोगों से कहा कि आप मुझे बहन-बेटी समझें और शांत रहें ताकि मैं बार-बार आपके बीच आ सकूं। इसके बाद भी जब लोग नहीं माने तो नगमा ने वहां से जाना ही ठीक समझा।
जिस दौरान सुरक्षा कर्मी नगमा मंच से बाहर की ओर ले जा रहे थे, वह चारों तरफ से लोगों से घिर गईं। इस बीच उन्होंने अपनी तरफ बढ़ रहे एक युवक को तमाचा जड़ दिया। उन्हें बड़ी मुश्किल से वहां से बाहर निकालकर ले जाया गया। नगमा के जाने के बाद भी हंगामा नहीं थमा और लोगों ने तोड़-फोड़ शुरू कर दी। कुछ लोगों के बीच मारपीट हो गई तो कुछ कुर्सियां तोड़ते नजर आए। स्थानीय काग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने सुरक्षा के सही इंतजाम नहीं किए थे, जिस वजह से ऐसे हालात पैदा हुए।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही हापुड़ के एमएलए पर नगमा से छेड़छाड़ का आरोप लगा था। एक विडियो में गजराज सिंह नगमा को अपनी तरफ खींचते नजर आ रहे थे और नगमा ने उनका हाथ झटक दिया था। इस विडियो को इंटरनेट पर यह बताते हुए शेयर किया जा रहा था कि गजराज ने नगमा को किस करने की कोशिश की है। मगर बाद में नगमा और गजराज दोनों ने ही इन बातों को गलत बताया था।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इस्तीफे की मांग

मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से अखिलेश सरकार को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद अन्य विपक्षी पार्टियां एसपी पर हमलावर हो गई हैं। सभी विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इस्तीफे की मांग करनी शुरू कर दी है। बीजेपी के तेवर ज्यादा तीखे हैं।
इस मामले में बीजेपी के तेवर सबसे तीखे है। बीजेपी के नेता भी अखिलेश सरकार से तत्काल त्यागपत्र देने की मांग कर रहे हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद अब शक की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है। दंगे के जिम्मेदार लोग अब बेनकाब हो गए हैं। कैराना लोकसभा सीट से बीजेपी के प्रत्याशी हुकुम सिंह और थाना भवन विधायक सुरेश राणा ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। हुकुम सिंह ने कहा कि दंगे के असली आरोपी तो मुलायम सिंह और राज्य की एसपी सरकार है। हमारे नेताओं को बिनावजह दंगों का आरोपी बनाकर जेल भेजा गया। जबकि हमारे विधायक सुरेश राणा और संगीत सोम पूरी तरहा से पाक साफ हैं।

उन्होंने कहा कि यह नैतिकता कि लड़ाई थी, जिसमे हमने अपने लोगों का साथ दिया। विधायक सुरेश राणा ने कहा कि नैतिकता के आधार पर राज्य सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए। क्योंकि दंगे की असली साजिश राज्य सरकार ने रची थी। उनका कहना है कि राज्य सरकार ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए हमारे साथ-साथ हजारों लोगों पर फर्जी मुकदमे कायम किए। यह दंगा पूर्व नियोजित था, इसमें राज्य सरकार के बड़े मंत्री का हाथ था।
मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद विरोधी पार्टियों को एक बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है। चुनाव के दौरान हाथ आए इस हथियार का विपक्ष पूरा फायदा उठाने पर जुट गया है। मुजफ्फरनगर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष तेगबहादुर सैनी का कहना है कि अब एसपी सरकार बेनकाब हो गई है। उनका कहना है कि दंगों के बाद से ही कांग्रेस कह रही थी कि मुजफ्फरनगर के दंगे एसपी और बीजेपी की देन है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद एसपी की भूमिका साफ हो गई है। ऐसे में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। वहीं राष्टीय लोकदल के जिलाध्यक्ष अजित राठी भी दंगों के लिए एसपी और बीजेपी को दोषी मानते हैं। उनका कहना है कि दोनों की मिलीभगत के कारण ही यहां दंगा हुआ था। राठी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद एसपी सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नही है।
मलकपुर राहत शिविर में रह रहे शरणार्थी सोकीन, इकबाल और समीना ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अगर सरकार चाहती तो दंगे रुक सकते थे। राज्य सरकार पूरी तरह कसूरवार है। सरकार के साथ-साथ आला अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर में कवाल कांड के बाद वहां का माहौल गरमाने लगा था। उसके बाद खालापार की पंचायत व नंगला मंदौड़ में 31 अगस्त को हुई शोकसभा के बाद हालात और बिगड़ गए थे। 7 अगस्त की महापंचायत के बाद दंगा भड़क गया था। तभी से सभी सियासी दल दंगों की आग पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते आ रहे हैं।
 

Monday, March 24, 2014

बीजेपी प्रदेश में कहीं नहीं है- आरएलडी सुप्रीमो अजित सिंह

आरएलडी सुप्रीमो अजित सिंह ने कहा कि एसपी-बीएसपी के चक्कर से निकलने पर ही प्रदेश का विकास संभव है। बीजेपी प्रदेश में कहीं नहीं है। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने भी गठबंधन को जिताने की अपील की। अजित ने कहा कि हमारी नजर आगामी विधानसभा चुनाव 2017 पर भी है। मुंबई के पूर्व कमिश्नर और बागपत से बीजेपी प्रत्याशी पर निशाना साधते हुए अजित ने कहा कि मुंबई में डंडा चलाने वाले यहां फेल हो जाएंगे। 
आरएलडी सुप्रीमो और बागपत लोकसभा क्षेत्र से नौंवी बार चुनाव लड़ रहे अजित सिंह ने बुधवार को खेकडा में चुनावी सभा को संबोधित किया। प्रदेश में विकास ठप होने और क्षेत्र में बदहाल सडकों के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मोदी को आरएलडी ही रोकेगा। मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 56 इंच का सीना रखने की बात कहने वालों को पता नहीं कि यह क्षेत्र पहलवानों का है और यहां हर पहलवान का सीना 56 इंच है। मोदी बागपत में घुसपैठ नहीं कर सकेंगे। मुजफ्फरनगर दंगा सांप्रदायिक नहीं एसपी-बीजेपी की ओर से मिलकर कराया गया राजनीतिक दंगा था। सदियों से चले आ रहे जाट-मुस्लिम गठजोड को पलीता लगाने की साजिश थी। उन्होंने कहा कि इस सभा की भीड़ बता रही है कि यह साजिश नाकाम रही। कहा कि यूपी सरकार लूटपाट में लगी है। प्रदेश में कानून व्यवस्था ठप है। इस क्षेत्र के लोग पुलिस से नहीं डरते। मुंबई में डंडा चलाने वाले फेल हो जाएंगे।
 
इस मौके पर मथुरा के सांसद जयंत चैधरी ने कहा कि चरण सिंह ने बागपत को देश-विदेश में पहचान दिलाई। साउथ में बागपत का नाम आते ही लोगो के जहन में चरण सिंह का चेहरा आ जाता है। यूपी देश की आबादी का छठा हिस्सा है। यहां वेस्ट यूपी में हाइकोर्ट बेंच के लिए प्रदेश सरकार उदासीन रही। आरएलडी वेस्ट में हाइकोर्ट बेंच के लिए प्रयासरत रही चाहे वह मेरठ, आगरा, मथुरा या कहीं ओर बने। प्रदेश सरकार ने 35 लाख विद्यार्थियों को टेबलेट देने का सपना दिखाया, लेकिन पूरा नहीं किया। चीनी मिलों को गन्ना मूल्य भुगतान के लिए केंद्र सरकार ने 6700 करोड का पैकेज घोषित किया। निर्यात में सब्सिडी घोषित की गई। प्रदेश सरकार ने इसे भी उलझा दिया।
 

Friday, March 21, 2014

राजेंद्र अग्रवाल को टक्कर देने की पूरी तैयारी

बीजेपी से मेरठ लोकसभा का टिकट पाने की होड़ में लगे दिग्गजों को पटखनी दे राजेंद्र अग्रवाल ने यह तो साबित कर दिया कि उनकी पार्टी और आरएसएस पर जबरदस्त पकड़ है। लेकिन उनकी असली परीक्षा अभी बाकी है। एक ओर टिकट को लेकर पार्टी के स्थानीय नेताओं के बीच आई कड़वाहट से उन्हें निबटना है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस, एसपी और बीएसपी के प्रत्याशी भी उन्हे कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है। 
बीजेपी की लहर और मोदी की लोकप्रियता के दावों के कारण इस बार बीजेपी से मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के लिए टिकट पाने के लिए कई दिग्गजों ने अपनी ताकत लगा रखी थी। बीजेपी के सूत्रों के अनुसार प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेई, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल और बीजेपी नेता विनित शारदा समेत कई धुरंधर टिकट पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए थे। सुधांशु मित्तल का नाम भी चर्चा में था। राजेंद्र अग्रवाल की क्षेत्र में सक्रियता को लेकर सवाल भी खड़े किए जा रहे थे। लेकिन पार्टी ने उनपर दोबारा विश्वास जताते हुए आखिरकार उन्हें ही फिर से टिकट दे दिया। ठाकुर अमरपाल के बाद वे बीजेपी के ऐसे दूसरे उम्मीदवार बन गए जिसे पार्टी ने दो बार यहां से टिकट दिया है।
 
जानकारों का मानना है कि टिकट मिलने से राजेंद्र अग्रवाल ने एक बड़ी बाधा जरूर पार कर ली है, लेकिन असली चुनौती का सामना उन्हें अभी करना है। उनका मानना है कि टिकट की दौड़ में पार्टी के जो अन्य दिग्गज शामिल थे, उनके मन से टिकट न मिलने की कसक दूर करना राजेंद्र अग्रवाल के लिए आसान नहीं होगा। पिछली बार भी राजेंद्र अग्रवाल की जीत का कारण पार्टी के पूरे कैडर का एकजुट होकर काम करना था। इसलिए अगर राजेंद्र अग्रवाल को दुबारा संसद पहुंचना है तो उसे पार्टी के सभी नेताओं को एकजुट करना होगा।
 
इसके अलावा विपक्षी पार्टियां भी राजेंद्र अग्रवाल को टक्कर देने की पूरी तैयारी में हैं। कांग्रेस ने नगमा को मेरठ से उतारकर राजेंद्र अग्रवाल की परेशानी और बढ़ा दी है। फिल्मी सितारा होने के कारण नगमा का अपना ग्लैमर है। वह इस लोकसभा सीट से अभी तक एकमात्र महिला उम्मीदवार हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वह राजेंद्र अग्रवाल के लिए राह का रोड़ा साबित हो सकती हैं। वहीं, बीएसपी से शाहिद अखलाक भी पूरे दमखम से जुटे हुए हैं। बीएसपी का कैडर वोट तो उनके साथ है ही, अगर वे मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा पाने में कामयाब रहे, तो राजेंद्र अग्रवाल के लिए वे सिर दर्द बन सकते हैं। एसपी से प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर भी मैदान में है। वे भी लोकसभा में पहुंचने के लिए जोर लगा रहे हैं। हालांकि उनकी पार्टी की छवि उनके आड़े आ रही है।
 

Tuesday, March 18, 2014

आरएलडी की मुश्किलें और बढ़ गईं

मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से आरएलडी की सबसे बड़ी ताकत उसके पारंपरिक जाट वोट बैंक में खासी नाराजगी देखा जा रही थी। इस मौके का फायदा उठा कर अन्य विरोधी दल जाटों पर डोरे डालने में जुट गए थे। इससे आरएलडी की मुश्किलें और बढ़ गईं। तब से आरएलडी मुखिया चौधरी अजित सिंह और उनके बेटे जयंत डैमेज कंट्रोल में जुट गए। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद जाटों का गुस्सा दूर न होता देख अजित सिंह ने जाट आरक्षण का अपना आखिरी दांव चला। लेकिन लगता है कि अपनी इस कवायद के बावजूद आरएलडी मुखिया अभी पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हो पाए।
उन्हें लगा कि जाटों और किसानों को रिझाने के लिए अभी और कुछ किया जाना बाकी है। राकेश टिकैत को अमरोहा से टिकट देना इसी कड़ी का हिस्सा है।। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैट के बेटे नरेश टिकैत की जाटों व किसानों में गहरी पैठ है। उनके भाई और बीकेयू के सुप्रीमो राकेश टिकैत का भी उन्हे समर्थन हासिल है। 17 साल तक आरएलडी और बीकेयू एक दूसरे से दूर रहने के बाद अब नजदीक आए हैं। आरएलडी का मानना है कि इससे अमरोहा ही नहीं पूरे वेस्ट यूपी की सीट पर आरएलडी को लाभ मिलेगा।

राष्ट्रीय लोकदल का फोकस सिर्फ जाट वोट बैंक तक ही नही था। उसकी नजर क्षेत्र के ठाकुर वोट बैंक पर भी थी। अमर सिंह से हाथ मिलाकर उसने एक तीर से दो शिकार कर लिए। अमर सिंह को अपने साथ लेकर उन्होने क्षेत्र के ठाकुरों को पर तो निशाना साधा ही, साथ ही बिजनौर की सीट के लिए उन्हे जयाप्रदा के रूप में स्टार कैंडिडेट मिल गई। अब आरएलडी क्षेत्र के मुस्लिमों को भी लुभाने के प्रयास में जुटी है। गौरतलब है कि आरएलडी का जनाधार वेस्ट यूपी में ही है। यहीं के दम पर चौधरी अजित सिंह अपने राजनीतिक दांव पेंच खेलते हैं। इसलिए इस बार भी वे यह साबित करने में जुटे हैं कि क्षेत्र में उनका जनाधार मजबूत है। यहां से जीतने वालें उम्मीदवारों की संख्या पर भी अजित सिंह का राजनीतिक भविष्य निर्भर करेगा।

Friday, March 14, 2014

यूपी बोर्ड के क्वेश्चन पेपर लूटने के लिए आधा दर्जन हथियारबंद बदमाशों ने धावा बोल दिया।

थाना जानी क्षेत्र के अरनावाली गांव स्थित इंटर कॉलेज में बुधवार देर रात यूपी बोर्ड के क्वेश्चन पेपर लूटने के लिए आधा दर्जन हथियारबंद बदमाशों ने धावा बोल दिया। वहां मौजूद दो गार्ड को बदमाशों ने बंधक बनाकर उनकी जमकर पिटाई की। भागते हुए बदमाश गार्ड से उसकी बाइक और 12 सौ रुपये लूट कर ले गए। पुलिस अधिकारियों ने एग्जाम होने तक कॉलेज में पुलिस तैनात करने का आदेश दिया है। 
अरनावली गांव के मेरठ-बड़ौत मार्ग पर महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज है। कॉलेज में यूपी बोर्ड का सेंटर है। बुधवार रात वहां गार्ड मनोज निवासी गढ़ी दबथुआ और वीरेंद्र निवासी छज्जूपुर पहरे पर थे। बताया जाता है कि रात करीब 11 बजे हथियारों से लैस आधा दर्जन बदमाश कॉलेज की चारदीवारी लांघ कर अंदर घुस आए। गार्ड के अनुसार बदमाशों ने कॉलेज में आते ही बोर्ड के क्वेश्चन पेपर के बारे में उनसे जानकारी मांगी। साथ ही कहा कि वे प्रिंसिपल के कमरे की चाबी उन्हें दें। इस पर गार्ड ने उन्हें बताया कि क्वेश्चन पेपर के बारे में उन्हें पता नहीं है। न ही उनके पास ऑफिस की चाबी है। इस पर बदमाश भड़क गए। उन्होंने दोनों गार्डों को हाथ-पैर बांधकर बंधक बना लिया और उनकी पिटाई शुरू कर दी। इसी दौरान बदमाशों ने क्वेश्चन पेपर की तलाश में कमरे का ताला भी तोड़ना चाहा। जब बदमाश को सफलता नहीं मिली तो वे दोनों गार्ड से 12 सौ रुपये और उनकी बाइक लूटकर वहां से फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद दोनों गार्ड ने कॉलेज के मैनेजर संदीप कुमार को घटना की सूचना दी। मैनेजर की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस का कहना है कि गार्ड की ओर से लूट की कोशिश के बारे में दिए गए बयान की सत्यता की जांच की जा रही है। वहीं, गुरुवार को आला अधिकारी स्कूल पहुंचे। उन्होंने बोर्ड परीक्षा के होने तक कॉलेज में पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। इस घटना के पीछे छात्रों का हाथ तो नहीं था, इसकी भी जांच की जा रही है। 

Wednesday, March 12, 2014

जांच में निर्दोष पाए जाने पर ही विश्वविद्यालय में प्रवेश देने के बारे में निर्णय

मेरठ सुभारती विश्वविद्यालय ने सस्पेंड कश्मीरी छात्रों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है और जांच में निर्दोष पाए जाने पर ही उन्हें फिर से विश्वविद्यालय में प्रवेश देने के बारे में निर्णय किया जाएगा। 
विश्वविद्यालय के कुलपति मंजूर अहमद ने सोमवार को कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन आरोपी कश्मीरी छात्रों के पुन: प्रवेश पर कोई निर्णय लेगा। 

उन्होंने उन खबरों का खंडन किया है जिसमें कहा गया है कि पाक जिंदाबाद के नारे लगाने के आरोपी छात्रों को यूनिवर्सिटी उसी सूरत में दोबारा प्रवेश देगी, जब वह और उनके अभिभावक माफीनामा शपथ पत्र के रूप में देंगे। मंजूर अहमद ने उन खबरों को भी गलत बताया जिसमें कहा गया है कि यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट के द्वारा घटना की जांच के लिए गठित कमिटी हॉस्टल के सभी छात्रों के बयान के बाद कश्मीर जाकर सस्पेंड छात्रों के बयान दर्ज करेगी।