Wednesday, October 14, 2009

फरार अंकित चौहान की मां उमा देवी मित्तल किडनैपिंग केस में कश्मीरी गेट पुलिस की वॉन्टिड

क्रिकेटर गगनदीप सिंह के मेरठ में शुक्रवार रात हुए मर्डर के मामले में फरार अंकित चौहान की मां उमा देवी मित्तल किडनैपिंग केस में कश्मीरी गेट पुलिस की वॉन्टिड है। पुलिस ने बताया कि किडनैपिंग केस में फिरौती के दो करोड़ रुपयों में उसे भी रकम मिली थी। उसकी भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। क्रिकेटर मर्डर केस में गिरफ्तार राहुल सिरोही की तलाश भी कश्मीरी गेट पुलिस ने की थी। शुक्रवार आधी रात को मेरठ के लालकुर्ती क्षेत्र में एक कबाब की दुकान पर कार से आए युवकों के ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने के कारण वहां आए यूपी अंडर 22 क्रिकेट टीम के खिलाड़ी गगनदीप सिंह समेत दो लोगो की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने हत्या के आरोप मे स्थानीय सीबीसीआईडी में कार्यरत एक महिला के बेटे को गिरफ्तार कर हत्या मे प्रयुक्त पिस्टल बरामद कर लिया है। गगनदीप का शव पोस्टमॉर्टम के बाद कानपुर से आए उसके परिजनों को सौंप दिया गया। घटना के विरोध मे इलाके का बाजार बंद रहा। लालकुर्ती के फव्वारा चौक पर शाहनवाज की कबाब की मशहूर दुकान है जहां अकसर भीड़ रहती है। शुक्रवार की रात भी यहां काफी भीड़ थी। कानपुर से सी. के. नायडू क्रिकेट टूर्नामेंट में शामिल होने आई टीम का सदस्य गगनदीप सिंह भी अपने दोस्त के साथ वहां कबाब खा रहा था। तभी एक कार वहां आकर रुकी और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। सीने पर गोली लगने के कारण खून से लथपथ गगनदीप और शाहनवाज जमीन पर गिर गए। पास की दुकान से चायवाला अपने गिलास लेने आया था, वह भी पैर में गोली लगने से घायल हो गया। गोलियों की आवाज से भगदड़ भगदड़ मच गई। हमलावर कार मे बैठ कर वहां से फरार हो गए। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गगनदीप और शाहनवाज को मृत घोषित कर दिया। मौके पर पहले से मौजूद लोगों का कहना है कि वारदात में शामिल एक युवक करीब आधे घंटे पहले दुकान पर आया था और जल्दी ऑर्डर पूरा करने के लिए कह रहा था। शाहनवाज ने कहा था कि वह पहले आए ग्राहकों को देने के बाद उसे कबाब देगा। इस पर वह पैर पटकता हुआ चला गया था। बाद में साथियों के साथ आया और घटना को अंजाम देकर फरार हो गया। घटना की सूचना मिलने पर गगनदीप सिंह के परिजन भी मेरठ पहुंच गए। पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया, जिसे लेकर वे कानपुर चले गए।

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