Thursday, April 17, 2014

विरोध करने पर गोली मारकर किसान की हत्या

शामली में मंगलवार रात हथियारों से लैस करीब एक दर्जन डकैतों ने एक किसान के फार्महाउस पर डकैती डालने की कोशिश की। विरोध करने पर गोली मारकर किसान की हत्या कर दी। ये वारदात जनपद शामली के थाना कांधला इलाके के गांव आल्दी की है। पास ही के गांव ऊचांगाव निवासी जयपाल (65) का आल्दी गांव में एक फार्महाउस है। जिस पर उसके पशु रहते हैं। देखभाल के लिए उनके दो भाई और बेटे नेत्रपाल सिंह भी वारदात की रात मौके पर सो रहे थे। मामला रात के करीब 1 बजे के आसपास का है। बताया गया है कि एक दर्जन से अधिक हमलावरों ने फार्महाउस पर धावा बोल दिया। जैसे ही हमलावरों ने वहा पर मौजूद पशुओं को हथियारों के बल पर ले जाने की कोशिश करने लगे तो किसान जयपाल सिंह ने उनका विरोध किया। जिसके बाद हमलावरों ने जयपाल सिंह को गोली मार दी। गोली लगने के कारण जयपाल की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद हमलावर फायरिंग करते हुए फरार हो गए। पुलिस हमलावरों की तलाश कर रही है। 

Wednesday, April 9, 2014

मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों को अच्छी खासी राशि मदद के तौर पर

                         

समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को कहा कि जब दंगा-फसाद होता है तो सबसे ज्यादा नुकसान मुसलमानों का ही होता है, हिन्दुओं को कम नुकसान होता है। मुलायम सिंह ने यह भी कहा कि आतंकवाद के नाम पर बहुत से मुसलमानों को फंसा कर रखा गया है। हम इसकी जांच कराएंगे, जो बेगुनाह हैं, निर्दोष हैं, उन्हें जेल से रिहा कराएंगे।
मुलायम सोमवार को नौचंदी मैदान में आयोजित पार्टी की चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। मुलायम सिंह ने कहा कि एसपी सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों को अच्छी खासी राशि मदद के तौर पर दिए हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में आज तक इतनी बड़ी राशि मुआवजे के रूप में कभी नहीं दिए गए। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा कोई थाना नहीं है, जहां तीन से लेकर चार मुसलमान सिपाही ना हों।
मुलायम सिंह ने राज्य में वर्तमान बिजली संकट के लिए पिछली बीएसपी सरकार को दोषी बताते हुए कहा कि बीएसपी सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में एक यूनिट बिजली के लिए भी कहीं काम नहीं किया। अपनी सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि अगले डेढ़ साल के बाद उत्तर प्रदेश में इतनी बिजली पैदा होगी कि अपने प्रदेश को तो 24 घंटे बिजली मिलेगी ही, हम बिजली को दूसरे प्रदेशों को बेचने की स्थिति में भी होंगे।
 
उन्होंने कहा कि युवकों को अगर रोजगार नहीं दिलवा सके तो बेरोजगारी भत्ता बढ़ाया जाएगा। जाति कार्ड खेलते हुए ऊंची जाति के गरीब लोगों को पिछड़ा वर्ग में शामिल कराने का भी वादा कर दिया। मुलायम सिंह ने कहा कि 10-10 साल के बाद वकीलों को पेंशन दिलाई जाएगी और अगर 10 साल में वकील की मौत हो जाएगी तो पांच लाख रुपये देंगे।


Monday, April 7, 2014

जाट मतदाताओं को लेकर जबरदस्त होड़

लोकसभा चुनाव में जाट मतदाताओं पर सबकी नजरें लगी हैं। सभी दलों में जाट मतदाताओं को लेकर जबरदस्त होड़ मची है। कांग्रेस को जाट आरक्षण के साथ ही अजित सिंह के सहारे जाट मत मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में प्रथम चरण में लोकसभा की मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, अलीगढ़ समेत लोकसभा की जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, वहां जाट मतदाता बडी संख्या में हैं। 
आम चुनाव से ठीक पहले जाट समुदाय को अन्य पिछडा वर्ग की सूची में शामिल करने का केंद्र सरकार का निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे में आने के बाद कांग्रेस-आरएलडी गठबंधन की चिंता बढ़ गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को 9 अप्रैल को अगली सुनवाई करनी है। ऐसे में चिंता इस बात को लेकर है कि अगर आरक्षण का मसला खारिज हो गया तो जाट मतों में बिखराव का खतरा बढ़ सकता है। 10 अप्रैल को मेरठ, बागपत, सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, गाजियाबाद, गौतमबुद्घनगर, बुलंदशहर और अलीगढ़ की लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। इन इलाकों में जाट मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। 
पार्टियों की बात करें कांग्रेस ने आरक्षण का दांव खेला है। एसपी ने राजेन्द्र सिंह, कुलदीप उज्जवल, मुकेश चौधरी, राजपाल सिंह, ओमवीर तोमर समेत करीब आधा दर्जन नेताओं को लालबत्ती देकर जाटों को खुश करने की कोशिश की है। इनमें राजेन्द्र सिंह तो कैबिनेट मंत्री होने के साथ ही एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। इसके अलावा गाजियाबाद से सुधन रावत को पार्टी उम्मीदवार बनाया है। एसपी महासचिव शिवपाल यादव ने दिसंबर में पीएम को पत्र लिख कर चरण सिंह को भारत रत्न की उपाधि देने की मांग करके जाटों को रिझाने की एक और कोशिश की। 18 दिसंबर को प्रदेश सरकार ने चरण सिंह के जन्म दिवस को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया। वहीं, बीजेपी ने सत्यपाल सिंह को बागपत, पूर्व जनरल वीके सिंह को गाजियाबाद और संजीव बालियान को मुजफ्फरनगर सीट से टिकट देकर खुद को जाटों का हिमायती बताने की कोशिश की है। इनमें मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे सत्यपाल सिंह और सेना प्रमुख रहे वीके सिंह हाल ही में राजनीति में उतरे हैं लेकिन बीजेपी ने अपने स्थानीय नेताओं के विरोध को दरकिनार करते हुए इन दोनो नेताओं को मैदान में उतारा है। इसके पीछे वजह शायद जाटों को खुश करने की ही रही है। 

Friday, April 4, 2014

मेरठ लोकसभा सीट पर कभी कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था

मेरठ लोकसभा सीट पर कभी कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था। 60 के दशक तक कांग्रेस के प्रत्याशी यहां से सांसद चुने जाते रहे हैं। उस समय जनसंघ को लोग खास अहमियत नहीं देते थे। 80 के दशक में एसपी और बीएसपी के उदय के बाद समीकरण बदले।
कांग्रेस के दलित सर्मथकों ने मायावती का हाथ थाम लिया। मुस्लिम भी धीरे-धीरे कांग्रेस से दूर होने लगे। सामान्य वर्ग के लोगों का झुकाव जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी में बदल चुकी पार्टी की ओर होने लगा। इसके बाद बीजेपी की इस क्षेत्र में पैठ बनने लगी और कांग्रेस हाशिये पर चली गई। बीजेपी के अमरपाल लगातार तीन बार यहां से सांसद चुने गए। उसके बाद कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना ने यहां के लोगों को कुछ ऐसा लुभाया कि उन्होंने उसे सांसद बना दिया। लेकिन उसके बाद से फिर बीजेपी ने अपना खोया रसूख वापस पा लिया। 2009 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के राजेंद्र अग्रवाल को मौका मिला। बीजेपी के कैंट विधान सभा क्षेत्र को उसकी छपरौली कहा जाने लगा।
2014 लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र के मतदाता क्षेत्र के विकास की अनदेखी को लेकर नाराज था। उसका मानना है कि शहर के शाहिद मंजूर के प्रदेश की एसपी सरकार में मंत्री होने के बावजूद विकास का कोई काम नही हो रहा है इसलिए उसकी एसपी से नाराजगी है। उसका गुस्सा क्षेत्र के बीजेपी सांसद को लेकर भी है।

उनका मानना था कि बीजेपी के सांसद ने भी क्षेत्र के विकास के लिए कोई काम नहीं किया है। कांग्रेस का कोई वजूद नजर नहीं आ रहा था। दयानंद गुप्ता का टिकट काटकर कांग्रेस ने फिल्म स्टार नगमा को मैदान में उतार दिया। इसके बाद अचानक यहां का चुनाव ग्लैमरस हो गया। युवा वर्ग नगमा के आसपास मंडराने लगा। नगमा ने भी अपना फोकस मुस्लिम वर्ग पर बनाया। जिससे एसपी और बीएसपी को लगने लगा कि उनका खेल नगमा बिगाड़ सकती है।
चुनाव की घोषणा और नगमा के मैदान में उतरने के बाद अब मेरठ हापुड़ लोकसभा क्षेत्र का चुनावी गणित बदलने लगा है। मुस्लिम वोट तीन खेमों में बंटता नजर आ रहा है। एसपी से शाहिद मंजूर, बीएसपी से शाहिद अखलाक और कांग्रेस से नगमा के बीच मुस्लिम वोटों का बंटवारा होता दिखाई दे रहा है। बीएसपी का वोटर भी केंद्र की सरकार के मामले में अलग ढंग से सोचता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव में हाथी से चिपका रहने वाला उसका वोट बैंक केंद्र के लिए मोदी को चुनने की बात कर रहा है।
बीजेपी के प्रत्याशी राजेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ लोगों में अभी भी नाराजगी है। कई जगह उनके बहिष्कार के पोस्टर लगाकर लोग अपने गुस्से का इजहार भी कर रहे हैं। लेकिन उनकी मजबूरी यह है कि मतदाता इस बार मोदी को प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते हैं। मुजफ्फरनगर के दंगों से भी इस लोकसभा क्षेत्र के मतदाता प्रभावित नजर आते हैं। इसके परिणाम भी धर्म के आधार पर वोटों का पोलराइजेशन हो सकता है।
इस क्षेत्र में अब तक स्टार प्रचारक के रूप में बीजेपी की ओर से नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय लोकदल-कांग्रेस गठबंधन की ओर से जयंत चौधरी यहां प्रचार के लिए आ चुके हैं। मोदी की रैली शताब्दी नगर में हुई गई थी। राजनीति के जानकारों ने इस रैली को सफल बताया था। जयंत अपना कोई खास जादू यहां नही दिखा पाए थे। जल्द ही एसपी के मुखिया मुलायम सिंह और बीएसपी से मायावती यहां रैली कर अपने प्रत्यशियों के लिए वोट मांगेगे। कांग्रेस की ओर से फिल्मी सितारों को लाने की बात कही जा रही है।

Wednesday, April 2, 2014

सांसद राजेन्द्र अग्रवाल को लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा

यहां से बीजेपी प्रत्याशी और सांसद राजेन्द्र अग्रवाल को सोमवार को अपने चुनाव प्रचार के दौरान कुंडा गांव के लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उनके साथ प्रचार के लिए चल रहे बीजेपी विधायक और मेयर को भी लोगों ने नहीं बख्शा। विरोध कर रहे लोग सांसद व अन्य नेताओं की गाड़ी पर चढ गए और जमकर हंगामा किया। इस दौरान लोगों ने अग्रवाल की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। लोगों का कहना है कि सांसद से बार-बार मिलने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र की सड़कें ठीक नहीं कराई थी, इसलिए गांव के लोगों ने उनका बॉयकॉट करने का फैसला लिया है। वहीं बीजेपी प्रत्याशी का कहना है कि क्षेत्र के एसपी के सभासद के इशारे पर कुछ युवकों ने उनपर हमला किया है।
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के बीजेपी प्रत्याशी और सांसद राजेन्द्र अग्रवाल सोमवार को चुनाव प्रचार के लिए निकले थे। उनके साथ बीजेपी के विधायक रवींद्र भड़ाना, मेयर हरिकांत अहलूवालिया व अन्य नेता के अलावा उनके सर्मथक भी थे। बताया जाता है कि जब अग्रवाल का काफिला कुंडा रेलवे फाटक के पास पहुंचा तो वहां पहले से कुछ लोग उनके बॉयकॉट का बैनर लगाए बैठे थे। उनके काफिले के वहां पहुंचते ही लोगों ने अग्रवाल वापस जाओं के नारे लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कुछ लोग राजेंद्र अग्रवाल की गाड़ी के सामने लेट गए। बीजेपी नेताओं ने लोगों को समझाना चाहा तो लोगों ने आरोप लगाया कि वे सांसद से गांव की सड़क ठीक कराने के लिए कई बार मिले, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। इस पर दोनों ओर से नोकझोंक शुरू हो गई। थोड़ी ही देर में वहां अफरातफरी फैल गई। विरोध कर रहे कई युवक सांसद, मेयर व विधायक की गाड़ियों पर चढ़कर हंगामा करने लगे। उन्होंने गाड़ियों पर मुक्के मारे।
आरोप है कि युवकों ने कारों में तोड़फोड़ की और उनके शीशे तोड़ दिए। किसी तरह सांसद के सर्मथक उन्हें वहां से निकाल कर ले गए। बताया जाता है कि इस घटना से पहले रास्ते में रिठानी के पास इंदिरापुरम कॉलोनी और अछरौडा गांव की महिलओं ने भी बीजेपी प्रत्याशी राजेंद्र अग्रवाल का विरोध किया था। उनका आरोप था कि पांच सालों में सांसद कभी उनके क्षेत्र में नही आए हैं। वहां से सांसद का काफिला किसी तरह से शताब्दी नगर सेक्टर- 4 होता हुआ कुंडा के फाटक पर पहुंचा।
इस बारे में राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि एसपी के एक सभासद के इशारे पर उन पर यह हमला किया गया है। गांव की लोग उनके साथ हैं। उनका कहना है कि वे अपने एसपी के साथियों से कहना चाहते हैं कि जनतंत्र में यह तरीका ठीक नहीं है। साथ ही वे प्रशासन से भी कहेंगे की वह ज्यादा सर्तकता बरते। हमले के आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने के बारे में पूछे जाने पर अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल उसकी जरूरत नहीं है।

मुजफ्फरनगर के बीजेपी प्रत्याशी के काफिले पर सोमवार को पथराव की खबर

मुजफ्फरनगर के बीजेपी प्रत्याशी के काफिले पर सोमवार को पथराव की खबर है। सूचना मिलते ही आला अधिकारी भारी पुलिस बल लेकर मौके पर पहुंच गए। पुलिस घटना की छानबीन मे जुट गई है। बीजेपी प्रत्याशी संजीव बालियान अपने जनसम्पर्क अभियान के तहत सोमवार दोपहर क्षेत्र के गांव पुरबालियान के रास्ते किसी अन्य गांव मे जा रहे थे। इसी बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी गाडी पर पत्थर फेंक दिया। इस घटना में कार के ड्राइवर की साइड का शीशा टूट गया।
संजीव बालियान के काफिले पर पथराव की सूचना पर कई ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। मामले की गंभीरता को समझते हुए आला अधिकारी भी भारी पुलिसबल के साथ मौके पर पहुंच गए। चर्चा रही कि किसी बच्चे की ओर से फेंके गए पत्थर से वाहन का शीशा टूट गया है। जबकि क्षेत्र में अफवाह थी कि बालियान के काफिले पर कुछ लोगों ने हमला बोल दिया है। घटना की सूचना पर पहुंचे लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया।

खाप पंचायतें यदि लोक अदालतों की तरह काम करे तो समाज का हित होगा

बागपत जिले का विकास कृषि आधरित व्यवसाय से ही संभव है। उत्तराखंड और हरियाणा को जोड़ने वाला दिल्ली-यमुनोत्री स्टेट हाइवे को नैशनल हाइवे का दर्जा मिलने से आवागमन आसान होगा। इसके साथ ही व्यवसाय में भी बढ़ोतरी होगी और लोगों को रोजगार मिलेंगे। बागपत से बीजेपी प्रत्याशी सत्यपाल सिंह ने कहा कि सगोत्रीय विवाह वैज्ञानिक दृष्टि से भी अनुचित है। खाप पंचायतें यदि लोक अदालतों की तरह काम करें तो मंजूर है। छोटे राज्य में प्रशासन और विकास चुस्त-दुरूस्त रहता है।
बागपत लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह ने शुक्रवार को एनबीटी से खास बातचीत में कहा कि खाप पंचायतें यदि लोक अदालतों की तरह काम करे तो समाज का हित होगा। सगोत्र विवाह साइंटिफिक नजरिए से भी अनुचित है। सड़कों के खस्ताहाल होने के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार बता कर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। यदि क्षेत्र की जनता ने मौका दिया तो दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग की पर्याप्त मरम्मत कराई जाएगी। इसे नैशनल हाइवे का दर्जा दिलाने की कोशिश की जाएगी। हरित प्रदेश की चर्चा पर उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र तो अंडरग्राउंड वॉटर लेवल और कृषि आधारित व्यवसाय घटने से सूखा बना दिया गया है। प्रदेश का बंटवारा होना चाहिए। वेस्ट यूपी को अलग प्रदेश बनने से प्रशासन चुस्त व विकास गति तेज होगी।
सत्यपाल ने कहा कि दिल्ली से महज 60 किमी दूर इस क्षेत्र में कृषि आधरित व्यवसाय जैसे पशु, मुर्गी पालन और सब्जी उत्पादन से इस क्षेत्र के किसान खुशहाल हो सकते हैं। इस व्यवसाय में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं में सब्सिडी का प्रावधान है। दिल्ली में गुजरात से प्रतिदिन 28 लाख लीटर दूध आता है। पशु पालन को बढ़ावा देकर इस क्षेत्र से भी दूध की भारी मात्रा में सप्लाई की जा सकती है। इस क्षेत्र में गन्ना उत्पादन का क्षेत्रफल अधिक है, लेकिन महाराष्ट्र में यहां से 2.5 से 3 प्रतिशत अधिक गन्ना का उत्पादन होता है। महाराष्ट्र में चीनी मिलें ही खेती से गन्ना छिलकर लाती हैं और औसत चीनी रिकवरी के आधार पर गन्ना मुल्य भुगतान किया जाता है। ऐसी ही तकनीक से गन्ना उत्पादन कर भुगतान सिस्टम यहां लागू करने से किसानों को राहत मिलेगी।