बागपत जिले का
विकास कृषि आधरित व्यवसाय से ही संभव है। उत्तराखंड और हरियाणा को जोड़ने वाला
दिल्ली-यमुनोत्री स्टेट हाइवे को नैशनल हाइवे का दर्जा मिलने से आवागमन आसान होगा।
इसके साथ ही व्यवसाय में भी बढ़ोतरी होगी और लोगों को रोजगार मिलेंगे। बागपत से
बीजेपी प्रत्याशी सत्यपाल सिंह ने कहा कि सगोत्रीय विवाह वैज्ञानिक दृष्टि से भी
अनुचित है। खाप पंचायतें यदि लोक अदालतों की तरह काम करें तो मंजूर है। छोटे राज्य
में प्रशासन और विकास चुस्त-दुरूस्त रहता है।
बागपत लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह ने शुक्रवार को एनबीटी से खास बातचीत में कहा कि खाप पंचायतें यदि लोक अदालतों की तरह काम करे तो समाज का हित होगा। सगोत्र विवाह साइंटिफिक नजरिए से भी अनुचित है। सड़कों के खस्ताहाल होने के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार बता कर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। यदि क्षेत्र की जनता ने मौका दिया तो दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग की पर्याप्त मरम्मत कराई जाएगी। इसे नैशनल हाइवे का दर्जा दिलाने की कोशिश की जाएगी। हरित प्रदेश की चर्चा पर उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र तो अंडरग्राउंड वॉटर लेवल और कृषि आधारित व्यवसाय घटने से सूखा बना दिया गया है। प्रदेश का बंटवारा होना चाहिए। वेस्ट यूपी को अलग प्रदेश बनने से प्रशासन चुस्त व विकास गति तेज होगी।
सत्यपाल ने कहा कि दिल्ली से महज 60 किमी दूर इस क्षेत्र में कृषि आधरित व्यवसाय जैसे पशु, मुर्गी पालन और सब्जी उत्पादन से इस क्षेत्र के किसान खुशहाल हो सकते हैं। इस व्यवसाय में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं में सब्सिडी का प्रावधान है। दिल्ली में गुजरात से प्रतिदिन 28 लाख लीटर दूध आता है। पशु पालन को बढ़ावा देकर इस क्षेत्र से भी दूध की भारी मात्रा में सप्लाई की जा सकती है। इस क्षेत्र में गन्ना उत्पादन का क्षेत्रफल अधिक है, लेकिन महाराष्ट्र में यहां से 2.5 से 3 प्रतिशत अधिक गन्ना का उत्पादन होता है। महाराष्ट्र में चीनी मिलें ही खेती से गन्ना छिलकर लाती हैं और औसत चीनी रिकवरी के आधार पर गन्ना मुल्य भुगतान किया जाता है। ऐसी ही तकनीक से गन्ना उत्पादन कर भुगतान सिस्टम यहां लागू करने से किसानों को राहत मिलेगी।
बागपत लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह ने शुक्रवार को एनबीटी से खास बातचीत में कहा कि खाप पंचायतें यदि लोक अदालतों की तरह काम करे तो समाज का हित होगा। सगोत्र विवाह साइंटिफिक नजरिए से भी अनुचित है। सड़कों के खस्ताहाल होने के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार बता कर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। यदि क्षेत्र की जनता ने मौका दिया तो दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग की पर्याप्त मरम्मत कराई जाएगी। इसे नैशनल हाइवे का दर्जा दिलाने की कोशिश की जाएगी। हरित प्रदेश की चर्चा पर उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र तो अंडरग्राउंड वॉटर लेवल और कृषि आधारित व्यवसाय घटने से सूखा बना दिया गया है। प्रदेश का बंटवारा होना चाहिए। वेस्ट यूपी को अलग प्रदेश बनने से प्रशासन चुस्त व विकास गति तेज होगी।
सत्यपाल ने कहा कि दिल्ली से महज 60 किमी दूर इस क्षेत्र में कृषि आधरित व्यवसाय जैसे पशु, मुर्गी पालन और सब्जी उत्पादन से इस क्षेत्र के किसान खुशहाल हो सकते हैं। इस व्यवसाय में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं में सब्सिडी का प्रावधान है। दिल्ली में गुजरात से प्रतिदिन 28 लाख लीटर दूध आता है। पशु पालन को बढ़ावा देकर इस क्षेत्र से भी दूध की भारी मात्रा में सप्लाई की जा सकती है। इस क्षेत्र में गन्ना उत्पादन का क्षेत्रफल अधिक है, लेकिन महाराष्ट्र में यहां से 2.5 से 3 प्रतिशत अधिक गन्ना का उत्पादन होता है। महाराष्ट्र में चीनी मिलें ही खेती से गन्ना छिलकर लाती हैं और औसत चीनी रिकवरी के आधार पर गन्ना मुल्य भुगतान किया जाता है। ऐसी ही तकनीक से गन्ना उत्पादन कर भुगतान सिस्टम यहां लागू करने से किसानों को राहत मिलेगी।
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