Friday, April 25, 2014

डासना से मेरठ के परतापुर तक 35 किमी की सड़क छह लेन की

दिल्ली स्थित निजामुद्दीन ब्रिज से शुरू होकर डासना होते हुए मेरठ के लिए 75 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे की योजना अब परवान चढ़ती नजर आ रही है। यह एक्सप्रेस-वे कागजों से निकलकर जमीनी हकीकत बनने की तैयारी में है। इसके लिए जनपद मेरठ और गाजियाबाद के गांवों की भू-अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस प्रोजेक्ट के लिए एनएचएआई पहले ही जमीन का सर्वे कर चुका है। अधिग्रहण से संबंधित आपत्तियां जमा करने की अंतिम तारीख 29 अप्रैल तय की गई है।
6571 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली से मेरठ के बीच बनाए जाने वाले एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 75 किमी होगी। यह एक्सप्रेस वे दिल्ली स्थित निजामुद्दीन ब्रिज से शुरू होगा। ब्रिज से डासना तक प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे और वर्तमान हाइवे को मिलाकर 14 लेन की सड़क बनाने का प्रस्ताव है। डासना से मेरठ के परतापुर तक 35 किमी की सड़क छह लेन 
की  होगी। परतापुर तिराहे से यह दो भागों में बंट जाएगी। यहां से एक रोड दिल्ली रोड पर जागरण तिराहा, बिजली बंबा, हापुड़ रोड होते हुए बच्चा पार्क तक जाएगी। दूसरी रोड एनएच- 58 परतापुर बाइपास से जुड़ जाएगी। इस योजना के लिए मेरठ के घोसीपुर, हाजीपुर, शाकरपुर, ढिकौली, नरहेड़ा, सलेमपुर, चंदसारा, खानपुर, नंगलापटटू, अछरौंडा, भूडबराल और बराल परतापुर की कुल 12,32,468 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।
इस प्रोजेक्ट के लिए गाजियाबाद के 19 और मेरठ के 12 गांवों की 345 एकड़ जमीन का सर्वे किया जा चुका है। अब भूमि अधिग्रहण के लिए नैशनल हाइवे अधिनियम 1956 की धारा 3ए के प्रकाशन के बाद आपति और उसके निस्तारण के लिए 3जी का प्रकाशन कर दिया गया है। अधिग्रहित की जानी वाली जमीन के बारे में 29 अप्रैल तक आपत्ति मांगी गई है। जनपद मेरठ से संबंधित जमीन की आपत्तियों का निस्तारण 7 मई को और जनपद गाजियाबाद की आपत्तियों का निस्तारण 8 मई को किया जाएगा। उसके बाद अवॉर्ड घोषित करने की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से एक्सप्रेस-वे के काम को शुरू करने के लिए अंतिम तारीख 31 मार्च 2014 तय की गई थी। इस घोषणा के बाद ही एनएचएआई पीपीपी के तहत रिक्वेस्ट फॉर टेंडर पहले ही जारी कर चुकी है। लेकिन इसके लिए कंपनी का चयन अब तक नहीं हो पाया है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर केंद्र और राज्य सरकार की रजामंदी के बाद केन्द्रीय वित मंत्रालय भी अपनी सहमति प्रदान कर चुका है। इस प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली, नोएडा व गाजियाबाद की सीमा में बिजली लाइन शिफ्ट करने के लिए भी 580.70 करोड़ का टेंडर निकाला जा चुका है।

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