मेरठ
लोकसभा सीट पर कभी कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था। 60 के दशक तक कांग्रेस के प्रत्याशी यहां से सांसद चुने
जाते रहे हैं। उस समय जनसंघ को लोग खास अहमियत नहीं देते थे। 80 के दशक में एसपी और बीएसपी के उदय के बाद समीकरण बदले।
कांग्रेस के दलित सर्मथकों ने मायावती का हाथ थाम लिया। मुस्लिम भी धीरे-धीरे कांग्रेस से दूर होने लगे। सामान्य वर्ग के लोगों का झुकाव जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी में बदल चुकी पार्टी की ओर होने लगा। इसके बाद बीजेपी की इस क्षेत्र में पैठ बनने लगी और कांग्रेस हाशिये पर चली गई। बीजेपी के अमरपाल लगातार तीन बार यहां से सांसद चुने गए। उसके बाद कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना ने यहां के लोगों को कुछ ऐसा लुभाया कि उन्होंने उसे सांसद बना दिया। लेकिन उसके बाद से फिर बीजेपी ने अपना खोया रसूख वापस पा लिया। 2009 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के राजेंद्र अग्रवाल को मौका मिला। बीजेपी के कैंट विधान सभा क्षेत्र को उसकी छपरौली कहा जाने लगा।
2014 लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र के मतदाता क्षेत्र के विकास की अनदेखी को लेकर नाराज था। उसका मानना है कि शहर के शाहिद मंजूर के प्रदेश की एसपी सरकार में मंत्री होने के बावजूद विकास का कोई काम नही हो रहा है इसलिए उसकी एसपी से नाराजगी है। उसका गुस्सा क्षेत्र के बीजेपी सांसद को लेकर भी है।
उनका मानना था कि बीजेपी के सांसद ने भी क्षेत्र के विकास के लिए कोई काम नहीं किया है। कांग्रेस का कोई वजूद नजर नहीं आ रहा था। दयानंद गुप्ता का टिकट काटकर कांग्रेस ने फिल्म स्टार नगमा को मैदान में उतार दिया। इसके बाद अचानक यहां का चुनाव ग्लैमरस हो गया। युवा वर्ग नगमा के आसपास मंडराने लगा। नगमा ने भी अपना फोकस मुस्लिम वर्ग पर बनाया। जिससे एसपी और बीएसपी को लगने लगा कि उनका खेल नगमा बिगाड़ सकती है।
चुनाव की घोषणा और नगमा के मैदान में उतरने के बाद अब मेरठ हापुड़ लोकसभा क्षेत्र का चुनावी गणित बदलने लगा है। मुस्लिम वोट तीन खेमों में बंटता नजर आ रहा है। एसपी से शाहिद मंजूर, बीएसपी से शाहिद अखलाक और कांग्रेस से नगमा के बीच मुस्लिम वोटों का बंटवारा होता दिखाई दे रहा है। बीएसपी का वोटर भी केंद्र की सरकार के मामले में अलग ढंग से सोचता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव में हाथी से चिपका रहने वाला उसका वोट बैंक केंद्र के लिए मोदी को चुनने की बात कर रहा है।
बीजेपी के प्रत्याशी राजेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ लोगों में अभी भी नाराजगी है। कई जगह उनके बहिष्कार के पोस्टर लगाकर लोग अपने गुस्से का इजहार भी कर रहे हैं। लेकिन उनकी मजबूरी यह है कि मतदाता इस बार मोदी को प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते हैं। मुजफ्फरनगर के दंगों से भी इस लोकसभा क्षेत्र के मतदाता प्रभावित नजर आते हैं। इसके परिणाम भी धर्म के आधार पर वोटों का पोलराइजेशन हो सकता है।
इस क्षेत्र में अब तक स्टार प्रचारक के रूप में बीजेपी की ओर से नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय लोकदल-कांग्रेस गठबंधन की ओर से जयंत चौधरी यहां प्रचार के लिए आ चुके हैं। मोदी की रैली शताब्दी नगर में हुई गई थी। राजनीति के जानकारों ने इस रैली को सफल बताया था। जयंत अपना कोई खास जादू यहां नही दिखा पाए थे। जल्द ही एसपी के मुखिया मुलायम सिंह और बीएसपी से मायावती यहां रैली कर अपने प्रत्यशियों के लिए वोट मांगेगे। कांग्रेस की ओर से फिल्मी सितारों को लाने की बात कही जा रही है।
कांग्रेस के दलित सर्मथकों ने मायावती का हाथ थाम लिया। मुस्लिम भी धीरे-धीरे कांग्रेस से दूर होने लगे। सामान्य वर्ग के लोगों का झुकाव जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी में बदल चुकी पार्टी की ओर होने लगा। इसके बाद बीजेपी की इस क्षेत्र में पैठ बनने लगी और कांग्रेस हाशिये पर चली गई। बीजेपी के अमरपाल लगातार तीन बार यहां से सांसद चुने गए। उसके बाद कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना ने यहां के लोगों को कुछ ऐसा लुभाया कि उन्होंने उसे सांसद बना दिया। लेकिन उसके बाद से फिर बीजेपी ने अपना खोया रसूख वापस पा लिया। 2009 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के राजेंद्र अग्रवाल को मौका मिला। बीजेपी के कैंट विधान सभा क्षेत्र को उसकी छपरौली कहा जाने लगा।
2014 लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र के मतदाता क्षेत्र के विकास की अनदेखी को लेकर नाराज था। उसका मानना है कि शहर के शाहिद मंजूर के प्रदेश की एसपी सरकार में मंत्री होने के बावजूद विकास का कोई काम नही हो रहा है इसलिए उसकी एसपी से नाराजगी है। उसका गुस्सा क्षेत्र के बीजेपी सांसद को लेकर भी है।
उनका मानना था कि बीजेपी के सांसद ने भी क्षेत्र के विकास के लिए कोई काम नहीं किया है। कांग्रेस का कोई वजूद नजर नहीं आ रहा था। दयानंद गुप्ता का टिकट काटकर कांग्रेस ने फिल्म स्टार नगमा को मैदान में उतार दिया। इसके बाद अचानक यहां का चुनाव ग्लैमरस हो गया। युवा वर्ग नगमा के आसपास मंडराने लगा। नगमा ने भी अपना फोकस मुस्लिम वर्ग पर बनाया। जिससे एसपी और बीएसपी को लगने लगा कि उनका खेल नगमा बिगाड़ सकती है।
चुनाव की घोषणा और नगमा के मैदान में उतरने के बाद अब मेरठ हापुड़ लोकसभा क्षेत्र का चुनावी गणित बदलने लगा है। मुस्लिम वोट तीन खेमों में बंटता नजर आ रहा है। एसपी से शाहिद मंजूर, बीएसपी से शाहिद अखलाक और कांग्रेस से नगमा के बीच मुस्लिम वोटों का बंटवारा होता दिखाई दे रहा है। बीएसपी का वोटर भी केंद्र की सरकार के मामले में अलग ढंग से सोचता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव में हाथी से चिपका रहने वाला उसका वोट बैंक केंद्र के लिए मोदी को चुनने की बात कर रहा है।
बीजेपी के प्रत्याशी राजेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ लोगों में अभी भी नाराजगी है। कई जगह उनके बहिष्कार के पोस्टर लगाकर लोग अपने गुस्से का इजहार भी कर रहे हैं। लेकिन उनकी मजबूरी यह है कि मतदाता इस बार मोदी को प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते हैं। मुजफ्फरनगर के दंगों से भी इस लोकसभा क्षेत्र के मतदाता प्रभावित नजर आते हैं। इसके परिणाम भी धर्म के आधार पर वोटों का पोलराइजेशन हो सकता है।
इस क्षेत्र में अब तक स्टार प्रचारक के रूप में बीजेपी की ओर से नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय लोकदल-कांग्रेस गठबंधन की ओर से जयंत चौधरी यहां प्रचार के लिए आ चुके हैं। मोदी की रैली शताब्दी नगर में हुई गई थी। राजनीति के जानकारों ने इस रैली को सफल बताया था। जयंत अपना कोई खास जादू यहां नही दिखा पाए थे। जल्द ही एसपी के मुखिया मुलायम सिंह और बीएसपी से मायावती यहां रैली कर अपने प्रत्यशियों के लिए वोट मांगेगे। कांग्रेस की ओर से फिल्मी सितारों को लाने की बात कही जा रही है।
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