Saturday, January 31, 2015

अच्छे दिन आएंगे

आईएएस बनने की आस लगाए राज्य सिविल सेवा के अधिकारी को आज भी उम्मीद है कि उनके अच्छे दिन आएंगे। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पीएमओ कार्यालय को इस मामले में सकारात्मक सिफारिश तो की है, लेकिन साथ ही उसने इसे 1 जनवरी 2015 से लागू करने की बात कही है। इस कदम ने उन अधिकारियों के न्याय से वंचित रखने का इंतजाम भी कर दिया है, जो छह साल से प्रमोशन पाकर आईएएस बनने के लिए सरकार से लेकर कोर्ट तक के दरवाजे खटखटा रहे हैं। इन अधिकारियों की आखिरी उम्मीद अब पीएमओ कार्यालय है।
राज्यों में सिविल सेवा के पदों पर कार्यरत अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र पहले 55 साल थी। साल 1979 में इसे बढ़ाकर 58 साल और 1998 में 60 साल कर दिया गया। जब रिटायरमेंट की उम्र 55 से 58 हुई तो प्रमोशन पाकर आईएएस कैडर पाने की उम्र 54 से 56 साल कर दिया गया। जो आज तक नहीं बदली है। 56 वर्ष से अधिक उम्र के अधिकारी आईएएस की प्रमोशन के लिए हकदार नहीं थे। रिटायरमेंट की उम्र तो बढ़कर 60 साल हो गई, लेकिन प्रमोशन पाकर आईएएस कैडर पाने की उम्र 56 साल ही रही।
इससे देश के विभिन्न राज्यों में काम कर रहे सिविल सेवा के अधिकारियों में रोष फैलने लगा। उन्होंने पहले सरकार से गुहार लगाई। कोई सुनवाई न होने पर 2008 में सुप्रीम कोर्ट में पहला मुकदमा दर्ज कर न्याय की मांग की गई। इसी तरह के करीब 20 मामले कोर्ट में पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त 2014 को अपना निर्णय सुनाते हुए भारत सरकार को इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के निर्देश दिए। उन्होने वादी से सरकार के सामने 4 हफ्ते में अपना प्रत्यावेदन देने और भारत सरकार को उस पर 4 माह में निर्णय लेने के लिए कहा। गौरतलब है कि आईएएस के 33 प्रतिशत पद ही सिविल सेवा के अधिकारियों को प्रमोशन देकर भरे जाते हैं। बाकी पदों पर लोकसेवा आयोग की ओर से चयन होता है।
केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिया गया समय अब खत्म हो चुका हैं। केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय के सूत्र बता रहे हैं कि उनके विभाग से इस मामले में सकारात्मक सिफरिश के साथ अंतिम निर्णय के लिए फाइल पीएमओ कार्यालय को भेज दी गई है। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि इस निर्णय को 1 जनवरी 2015 से लागू करने की सिफारिश भी की गई है। उनकी इसी सिफारिश से अपनी मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे राज्य सिविल सेवा के अधिकारियों में भारी निराशा है।

यूपी के एक पीसीए अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारे प्रदेश में सिविल सेवा के अधिकारियों की प्रमोशन में काफी मिसमैनेजमेंट है। इस कारण 1976-77 बैच के अधिकारियों को 2012 में प्रमोशन मिल पाया है। अब अगर केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय की सिफारिश मानकर प्रमोशन में उम्र बढ़ाने का फैसला 1 जनवरी 2015 से लागू किया गया, तो इसके लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे सारे अधिकारी इस लाभ से वंचित रह जाएंगे। इससे कैडर में हताशा बढ़ेगी और कई काबिल अधिकारी अपने हक से वंचित रह जाएंगे। अब इन अधिकारियों को पीएमओ कार्यालय से ही उम्मीद है। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें न्याय मिलेगा और उनके भी अच्छे दिन आएंगे।

Thursday, January 29, 2015

प्रस्तावित दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे का शिलान्यास

केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर प्रस्तावित दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे का शिलान्यास करने जा रही है। यह दावा करते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई ने बताया कि यह जानकारी उन्हें केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दी है। उन्होंने बताया कि इस काम में आ रही सबसे बड़ी बाधा भूमि अधिग्रहण की समस्या को भी जल्द दूर कर लिया जाएगा। 6 हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के परवान चढ़ने से वेस्ट यूपी समेत उतराखंड के लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
दिल्ली से मेरठ को जोड़ने वाले एनएच-58 पर वाहनों के बढ़ते दबाव के कारण जाम की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। हालत यह है कि दिल्ली से मेरठ के बीच की 65 किमी की दूरी को तय करने में लोगों को तीन घंटे से ज्यादा समय लग रहा है। इस समस्या से निबटने के लिए कई वर्षों से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे बनाए जाने के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था। बाजपेई का कहना है कि उन्होंने इस मसले पर नितिन गडकरी से बात की है। गडकरी ने आश्वासन दिया है कि तीन माह के अंदर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे का शिलान्यास कर दिया जाएगा। साथ ही गडकरी ने बताया कि साल के अंत तक यूपी के हाइवे पर 50 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बाजपेई ने बताया कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट पर 6 हजार करोड़ का खर्च आएगा और इस प्रोजेक्ट को 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा।
भूमि अधिग्रहण की समस्या
इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी बाधा किसानों से उनकी भूमि अधिग्रहण करने को लेकर आ रही थी। इस प्रोजेक्ट के लिए गाजियाबाद के 19 गांव की 333 हेक्टेयर और मेरठ के 16 गांव की 123 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी है। बाजपेई का कहना है कि जल्द ही इस समस्या का भी हल निकाल लिया जाएगा। इस योजना के परवान चढ़ने से मेरठ समेत वेस्ट यूपी के लोगों को लाभ मिलेगा। मेरठ से दिल्ली की दूरी महज एक घंटे भर में पूरी की जा सकेगी। दिल्ली से हरिद्वार, देहरादून समेत उत्तराखंड के अन्य शहरों तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा।
यह है प्रोजेक्ट
-दिल्ली-मेरठ प्रस्तावित एक्सप्रेस वे की कुल लंबाई 75 किमी होगी
-दिल्ली के निजामुद्दीन से शुरू होकर एनएच-24 के साथ डासना तक पहुंचेगा
-एनएच-24 और एक्सप्रेस वे को मिलाकर 14 लेन की सड़क बनेगी
-इसमें एक्सप्रेस वे 6 लेन का होगा और हाइवे 8 लेन का होगा
-निजामुद्दीन पुल से डासना तक इसकी लंबाई 30 किमी होगी
-डासना से एक्सप्रेस वे एनएच-24 से अलग होकर मेरठ की ओर मुड जाएगा
-डासना से मेरठ - परतापुर तिराहे तक सड़क छह लेन की होगी
-मेरठ के बच्चा पार्क तक छह लेन की सड़क प्रस्तावित है

-इस प्रोजेक्ट पर 6 हजार करोड़ रूपए का खर्च आएगा

Tuesday, January 27, 2015

मेरठ में 4 बच्चों सहित 6 लोगों की हत्या का मामला

मेरठ में 4 बच्चों सहित 6 लोगों की हत्या का मामला सामने आया है। इनमें से एक महिला और उसके चार बच्चे हैं  छठे शख्स की पहचान नहीं हो पाई है। आशंका है कि प्रॉपर्टी विवाद में वारदात को अंजाम दिया गया है। चारों बच्चों के शव सुहेल गार्डन के एक निर्माणाधीन मकान के कमरे से मिले, जबकि महिला और एक युवक का शव गुर्जर चौक के पास मिला। सभी की हत्या चाकू से गला रेतकर की गई है। एसएसपी ने बताया कि मरने वाले 5 लोग एक ही परिवार के हैं।
एसएसपी ने प्रॉपर्टी विवाद में हत्या की आशंका से इनकार नहीं किया है। महिला के पास में मिले अज्ञात युवक की लाश की वजह से मामले को प्रेम प्रसंग से भी जोड़कर देखा जा रहा है। एसएसी ने बताया कि हर ऐंगल से मामले की जांच की जा रही है। एसएसपी ओंकार सिंह ने बताया कि मरने वालों में पांच की पहचान कर ली गई है। गुर्जर चौक के पास जिस महिला का शव मिला है उसका नाम रुखसाना पत्नी नावेद निवासी मुजफ्फरनगर है। सुहेल गार्डन के कमरे में मिले चारों शव उसके बच्चों के है। जिनमें से तीन शव उनकी बेटियों 20 साल की रिंशा, जूली (8) व गूंगी (6) का है। चौथा शव उसके 12 साल के बेटे सोहेल का है।
एसएसपी ने बताया कि रूखसाना का पति नावेद डेढ़ साल से मुजफ्फरनगर जेल में बंद है। उसके भाइयों के साथ उसका संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। उसके भाई ने नावेद के खिलाफ हत्या की कोशिश करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। एसएसपी ने बताया कि महिला के साथ गुर्जर चौक पर जिस युवक का शव मिला था, उसकी अभी शिनख्त नहीं हो पाई है। उन्होंने इस हत्याकांड के पीछे प्रॉपर्टी विवाद की आशंका से इनकार नहीं किया है। प्रेम संबंध में हत्या के सवाल पर उन्होंने कहा कि युवक की शिनाख्त और मरने वाली महिला के परिजनों से जानकारी मिलने के बाद ही इस बारे में जानकारी मिल पाएगी।
सोमवार को सूचना पर पुलिस लिसाड़ी गेट क्षेत्र में सुहेल गार्डन कॉलोनी के एक निर्माणाधीन मकान में गई थी। जहां पुलिस को 4 बच्चों की लाश मिली। हत्या की खबर पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। घटनास्थल पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। लोगों की बढ़ती संख्या और आक्रोश को देखते हुए अधिकारियों ने गंणतंत्र दिवस पर शहर की सुरक्षा में तैनात आईटीबीपी के जवानों को बुला लिया।
कमरे से पुलिस को सफेद रंग का पाउडर, चार बरतन और एक चारपाई मिली है। थोड़ी देर बाद घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर गुर्जर चौक के पास एक महिला और युवक के शव होने की सूचना मिली। आम के पेड़ के नीचे महिला (40) और युवक (28) का शव मिला। दोनों की हत्या भी गला रेतकर की गई थी और उनके शरीर पर चाकू से गोदने के कई निशान थे।

Thursday, January 22, 2015

बच्चों को दूध के साथ चना और चीनी देना शुरू किया

मेरठ के शामली जिले में एक  किसान  120 बच्चों  को  मुफ्त दूध पिलाने  का  काम कर  रहा है। इस किसान ने एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के 10 दर्जन कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया है और रोज उन्हें अपने घर से उबला हुआ दूध लाकर पिलाता है। इस किसान की बच्चों को एक साल तक दूध पिलाने की योजना है।
रमेश चंद्र नंबरदार करीब एक हफ्ते से 25 लीटर उबला और चीनी मिला दूध एक स्कूल में पहुंचा रहे हैं। रमेश ने हमारे सहयोगी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से बातचीत में कहा, 'मैं यह सुनकर बड़ा हुआ कि हमारे देश में दूध की नदियां बहती थीं। आज बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने हर एमपी के एक गांव को गोद लेने की योजना शुरू की तो मुझे लगा कि मैं भी बच्चों की मदद कर सकता हूं।'

रमेश का कहना था, 'कुछ लोग गर्म कपड़े बांटते हैं, कुछ किताबें बांटते हैं। मैं चाहता था कि बच्चे मजबूत बनें। मेरे पास सीमित साधन थे लेकिन मैंने बच्चों को दूध के साथ चना और चीनी देना शुरू किया। यह 120 बच्चों के लिए काफी है।'
माजरा रोड के पास बने इस स्कूल के हेडमास्टर नीरज गोयल ने कहा, 'पहले तो हमें लगा कि रमेश खास मौकों, जैसे गणतंत्र दिवस पर बच्चों को दूध पिलाएंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि वह रोज ऐसा करना चाहते हैं। हमें शक था कि वह रोज ऐसा कर पाएंगे, लेकिन वह लगातार दूध दे रहे हैं। दूध काफी अच्छी क्वॉलिटी का है। अगर ऐसे ही और लोग सामने आएं तो बच्चों का जीवन बदल सकता है।'
रमेश का कहना है कि उनके पास अच्छी नस्ल की गायें हैं। वे रोजाना 45 लीटर दूध देती हैं। उनकी एक साल तक बच्चों को दूध पिलाने की योजना है। उन्होंने अपने आइडिए के साथ शामली के डीएम नरेंद्र प्रसाद सिंह से भी मुलाकात की थी और उन्होंने भी रमेश का उत्साहवर्धन किया।

Tuesday, January 20, 2015

कॉलेज कैंपस में एक छात्र ने कथित तौर पर खुद को गोली मार ली

मुजफ्फरनगर में कॉलेज कैंपस में एक छात्र ने कथित तौर पर खुद को गोली मार ली। छात्र को प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। मामला नई मंडी कोतवाली इलाके के गांव का है। जनता इंटर कॉलेज परिसर में 11वीं के छात्र ने खुद को गोली मार ली। टीचर और उसके परिजन घायल स्टूडेंट को इलाज के लिए एक प्राइवेट अस्पताल ले गए। घटना के पीछे की वजह परिजनों की ओर से छात्र को डांटना बताया जा रहा हैं। बताया जा रहा है इस बात को लेकर छात्र रविवार शाम को लापता हो गया था। सोमवार को वह कॉलेज पहुंचा। उस वक्त रोजाना की तरह प्रेयर चल रही थी। इसी दौरान अचानक छात्र ने खुद को गोली मार ली। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

Saturday, January 17, 2015

अवैध रूप से इंटरनैशनल कॉल करने के मामले का भंडाफोड़

डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन (डीओटी) और मेरठ क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने यहां एक मकान पर छापा मारकर वहां से अवैध रूप से इंटरनैशनल कॉल करने के मामले का भंडाफोड़ किया है। टीम को यहां से हाईपावर के ट्रांसमीटर के अलावा संचार माध्यम में प्रयोग होने वाले अन्य आधुनिक उपकरण मिले हैं। क्राइम ब्रांच की टीम मकान मालिकन, उसके बेटे और मकान के पास ही साइबर कैफे चलाने वाले युवक से पूछताछ कर रही है। इस मामले से जुड़े दो छात्रों की पुलिस तलाश कर रही है।
बताया जा रहा है कि यहां से इंटरनेट के जरिए विदेशों में सस्ती कॉल कराने का धंधा चल रहा था। इसके लिए एक प्राइवेट टेलिकॉम कंपनी से इंटरनेट की लीज लाइन ली गई थी। डीओटी के अधिकारी एके वर्मा ने बताया कि यह अवैध कॉल का मामला है। इससे अधिक जानकारी देने से उन्होंने इनकार कर दिया।

केंद्रीय संचार मंत्रालय के तहत काम करने वाली दिल्ली स्थित डीओटी सेल को मेरठ से अवैध इंटरनैशनल कॉलिंग की जानकारी मिली थी। अधिकारी मेरठ स्थित ब्रह्मापुरी स्थित डीओटी सेल की शाखा पहुंचे। मेरठ डीओटी के अधिकारी एके वर्मा और मेरठ क्राइम ब्रांच ने गंगानगर स्थित मकान संख्या ए-271 पर छापा मारा। मकान की पहली मंजिल पर हाईपावर के ट्रांसमीटर के अलावा दूरसंचार में प्रयोग होने वाले आधुनिक उपकरण रखे थे। मकान मालिकन ने अधिकारियों को बताया कि उसके पति की मौत हो चुकी है। वह अपने बेटे के साथ नीचे के हिस्से में रहती है। मकान की पहली मंजिल को उसने किराए पर उठा रखा है। बताया जा रहा है कि पास ही गंगा प्लाजा में साइबर कैफे चलाने वाले शख्स ने बीटेक के दो छात्रों को यह मकान किराए पर दिलाया था। उन छात्रों ने एक प्राइवेट कंपनी की इंटरनेट की लीज लाइन ली थी। टीम ने इनसे घंटों पूछताछ की। उसके बाद उन्होंने वहां रखे सभी उपकरणों को सील कर दिया और अपने साथ ले गए। टीम ने पूरे मकान और उसकी छत की भी बारीकी से जांच की। इस दौरान फॉरेसिंक विभाग की टीम भी वहां मौजूद रही। क्राइम ब्रांच मकान मालकिन, उसके बेटे को अपने साथ ले गई। पुलिस बीटेक के दो छात्रों की तलाश कर रही है।

Thursday, January 15, 2015

न्यू टांसपोर्टनगर बनाने के प्रस्ताव को झटका

पांचली में करीब 100 एकड़ में न्यू टांसपोर्टनगर बनाने के प्रस्ताव को शासन से बड़ा झटका लगा है। शासन ने न्यू टांसपोर्टनगर के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव में खामियां बताते हुए इसे वापस कर दिया है। एमडीए ने इन कमियों को दूर करने के लिए फाइल एक बार फिर से अर्जन विभाग को भेज दी है।
मेरठ को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए मेरठ महायोजना-2021 के तहत की गई प्लानिंग में शहर के बीच स्थित टांसपोर्ट नगर को शहर से बाहर ले जाने की योजना तैयार की गई थी। 3 सालों से इस पर काम चल रहा है। इसके लिए पांचली खर्द में करीब 100 एकड़ जमीन चिन्हित की गई थी। इस संबंध में एमडीए और जिला प्रशासन की ओर से एक प्रस्ताव 26 दिसंबर 2014 को शासन को भेजा गया था। शासन में राजस्व परिषद के स्तर पर प्रस्ताव की गहन समीक्षा की गई। प्रस्ताव में कई खामिया मिलीं। जिला राजस्व विभाग ने न्यू टीपी नगर के लिए भूमि अधिग्रहित किए जाने के लिए जो प्रस्ताव भेजा है, वह ठीक नहीं है। शासन के अनुसार यह प्रस्ताव नई भूमि अधिग्रहण नीति के हिसाब से तैयार नहीं किया गया है। प्रस्ताव में अन्य कमियां भी पाई गई हैं। इन कमियों के कारण उप भूमि व्यवस्था आयुक्त हरीश चंद्र ने प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी और इसे वापस भेज दिया।

गौरतलब है कि दिल्ली रोड स्थित ट्रांसपोर्टनगर को बागपत रोड पर पांचली खुर्द में ले जाने का फैसला 3 साल पहले लिया गया था। तभी से लगातार कागजी कार्रवाई चल रही है। इसमें 37 खसरों की करीब 100 एकड़ जमीन पर न्यू टांसपोर्ट नगर विकसित करने की योजना है, इसमें करीब 5000 वाहन खड़े किए जा सकेंगे। योजना अमली जामा पहन लेती है तो इससे शहर को जाम की समस्या से निजात मिल सकती है।