आईएएस बनने की आस लगाए राज्य सिविल सेवा के अधिकारी को आज
भी उम्मीद है कि उनके अच्छे दिन आएंगे। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण
मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पीएमओ कार्यालय को इस मामले में
सकारात्मक सिफारिश तो की है, लेकिन साथ ही उसने इसे 1 जनवरी 2015 से लागू करने की बात
कही है। इस कदम ने उन अधिकारियों के न्याय से वंचित रखने का इंतजाम भी कर दिया है, जो छह साल से प्रमोशन
पाकर आईएएस बनने के लिए सरकार से लेकर कोर्ट तक के दरवाजे खटखटा रहे हैं। इन
अधिकारियों की आखिरी उम्मीद अब पीएमओ कार्यालय है।
राज्यों में सिविल सेवा
के पदों पर कार्यरत अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र पहले 55 साल थी। साल 1979 में इसे बढ़ाकर 58 साल और 1998 में 60 साल कर दिया गया। जब
रिटायरमेंट की उम्र 55 से
58 हुई
तो प्रमोशन पाकर आईएएस कैडर पाने की उम्र 54 से 56 साल कर दिया गया। जो आज
तक नहीं बदली है। 56 वर्ष
से अधिक उम्र के अधिकारी आईएएस की प्रमोशन के लिए हकदार नहीं थे। रिटायरमेंट की
उम्र तो बढ़कर 60 साल
हो गई, लेकिन
प्रमोशन पाकर आईएएस कैडर पाने की उम्र 56 साल ही रही।
इससे देश के विभिन्न
राज्यों में काम कर रहे सिविल सेवा के अधिकारियों में रोष फैलने लगा। उन्होंने
पहले सरकार से गुहार लगाई। कोई सुनवाई न होने पर 2008 में सुप्रीम कोर्ट में
पहला मुकदमा दर्ज कर न्याय की मांग की गई। इसी तरह के करीब 20 मामले कोर्ट में
पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त
2014 को अपना निर्णय सुनाते हुए भारत सरकार को इस मामले पर
सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के निर्देश दिए। उन्होने वादी से सरकार के सामने 4 हफ्ते में अपना
प्रत्यावेदन देने और भारत सरकार को उस पर 4 माह में निर्णय लेने के
लिए कहा। गौरतलब है कि आईएएस के 33 प्रतिशत पद ही सिविल सेवा के
अधिकारियों को प्रमोशन देकर भरे जाते हैं। बाकी पदों पर लोकसेवा आयोग की ओर से चयन
होता है।
केंद्र सरकार को
सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिया गया समय अब खत्म हो चुका हैं। केंद्रीय कार्मिक और
प्रशिक्षण मंत्रालय के सूत्र बता रहे हैं कि उनके विभाग से इस मामले में सकारात्मक
सिफरिश के साथ अंतिम निर्णय के लिए फाइल पीएमओ कार्यालय को भेज दी गई है। सूत्र यह
भी बता रहे हैं कि इस निर्णय को 1 जनवरी 2015 से लागू करने की सिफारिश भी की गई
है। उनकी इसी सिफारिश से अपनी मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे राज्य सिविल सेवा के
अधिकारियों में भारी निराशा है।
यूपी के एक पीसीए
अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारे प्रदेश में सिविल सेवा के
अधिकारियों की प्रमोशन में काफी मिसमैनेजमेंट है। इस कारण 1976-77 बैच के अधिकारियों को 2012 में प्रमोशन मिल पाया
है। अब अगर केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय की सिफारिश मानकर प्रमोशन में
उम्र बढ़ाने का फैसला 1 जनवरी
2015 से लागू किया गया, तो इसके लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे सारे अधिकारी इस लाभ से
वंचित रह जाएंगे। इससे कैडर में हताशा बढ़ेगी और कई काबिल अधिकारी अपने हक से वंचित
रह जाएंगे। अब इन अधिकारियों को पीएमओ कार्यालय से ही उम्मीद है। उनका मानना है कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें न्याय मिलेगा और उनके भी अच्छे दिन आएंगे।
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