Saturday, May 30, 2015

अपनी पत्नी सहित परिवार के 6 अन्य सदस्यों को एसिड फेंककर घायल कर दिया

शुक्रवार को मेरठ के शौकीन नगर इलाके में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी सहित परिवार के 6 अन्य सदस्यों को एसिड फेंककर घायल कर दिया। आधी रात के बाद की इस घटना में पीड़िता उस समय गहरी नींद में थी जब आरोपी साजिद ने अपने दोस्त वसीम के साथ उन पर एसिड से हमला किया। आरोपी की पत्नी उज्मा ने अब उसके खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करा दिया है।
थाना प्रभारी रवीन्द्र यादव ने बताया कि वसीम को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि मुख्य आरोपी साजिद अभी भी फरार है। साजिद के भाई को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है।
घायल लोगों को इलाज के लिए मेडिकल कालेज हास्पिटल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

Thursday, May 28, 2015

इलाज के दौरान मौत

सरधना थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ भर्ती के लिए चल रही दौड़ में हिस्सा ले रहा युवक रेसिंग के दौरान बेहोश हो गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात सैन्य अधिकारियों ने उसे इलाज के लिए ले जाने से रोक दिया था। आक्रोशित गांववालों को एसडीएम ने मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया, तब जाकर वे शांत हुए।
पाली गांव में रहने वाला गौरव (18) छह भाई-बहनों में सबसे छोटा था। मंगलवार को सीआरपीएफ में भर्ती होने के लिए वह अपने बड़े भाई गोविंद के साथ वेदव्यासपुरी स्थित आरएएफ हेडक्वॉर्टर पर दौड़ में शामिल हुआ था। गोविंद के अनुसार दौड़ते समय गौरव अचानक बेहोश होकर गिर गया। उसने और उसके साथियों ने उसे उठाना चाहा, तो वहां तैनात सैन्य अधिकारियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। उनका कहना था कि दौड़ का समय खत्म होने के बाद ही वे गौरव को उठा सकते हैं। दौड़ खत्म होने के बाद वे बेहोश गौरव को पास के अस्पताल ले गए और उसे वहां भर्ती करा दिया। देर रात इलाज के दौरान गौरव ने दम तोड़ दिया।

बुधवार सुबह गौरव का शव गांव पहुंचा तो परिजनों व गांववालों का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से पहले दाह संस्कार करने से इंकार कर दिया। सूचना पाकर एसडीएम सरधना शिवकुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को किसी तरह समझा-बुझा कर शांत किया। एसडीएम ने गौरव के परिजनों को प्रदेश सरकार से मुआवजा दिलवाने का आश्वासन भी दिया। एसडीएम के समझाने के बाद लोग गौरव के दाह संस्कार के लिए राजी हो गए।

Wednesday, May 27, 2015

अगर एतराज है तो घर छोड़ कर चला जाए

पिता की हत्या के आरोपी में पुलिस ने बेटे को अरेस्ट कर लिया है। पुलिस का दावा है कि वह एक महिला के साथ पिता के अवैध संबंधों को लेकर आरोपी नाराज था। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया बेसबॉल का बैट और खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं। 19 मई को शास्त्री नगर निवासी दवा कारोबारी अशोक सिंघल की हत्या कर दी गई थी।
मंगलवार को एसएसपी डीसी दूबे ने बताया कि बेटे अंकित ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। एसएसपी ने बताया कि अशोक सिंघल वैद्य होने के साथ-साथ दवाएं बेचने का काम भी करते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात बिजनौर के उमाकांत शुक्ला से हुई। उमाकांत ने अशोक को हर्बल लाइफ कंपनी की मेंबरशिप दिलाने में भी सहायता की और उसका परिचय इसी कंपनी में दवा बेचने का काम करने वाली किरन से कराया। इसके बाद अशोक और किरन एक साथ दवा बेचने जाने लगे। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। अंकित को इस बात की जानकारी अपने पिता के ड्राइवर से मिल गई। इस बात को लेकर बाप-बेटे में झगड़ा रहने लगा। कुछ दिन पहले अंकित अचानक बीमार पड़ गया, जिसके कारण उसे अस्पताल में एडमिट कराना पड़ा।

पुलिस के अनुसार जब अंकित अस्पताल में था, तभी उसे पता चला कि किरन उसके घर पर आकर रह रही है। अस्पताल से घर लौटने पर उसका अपने पिता से फिर झगड़ा हुआ। इस पर अशोक ने उससे साफ-साफ कह दिया कि वह किरन के साथ ही रहेगा, अगर उसे एतराज है तो घर छोड़ कर चला जाए। यह सुनकर अंकित का गुस्सा और भड़क गया। रात को उसने शराब पी और जब सभी लोग सो गए तो उसने बेसबॉल के बैट से हमला कर अपने पिता की हत्या कर दी। फिर खुद को बचाने के लिए हत्या को लूट का रंग देना चाहा। पिता के कमरे का सामना फैला दिया और आलमारी खोलकर उसका सामान भी बाहर डाल दिया। हत्या करते समय अंकित के कपड़ों पर भी खून लग गया था। उसने कपड़े बदले और रात तीन बजे अपनी कार से सूरजकुंड पहुंचा, वहां नाले में कपड़े फेंक दिए। चार बजे उसने अपनी पत्नी के फोन से पिता की हत्या की जानकारी पुलिस को दी थी। एसएसपी का कहना है कि अंकित के हाव-भाव से पुलिस को शुरू से ही उसपर शक था।

Monday, May 25, 2015

आलमगीरपुर गांव पर संकट के बादल

4 हजार साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता के पूर्व क्षेत्र की सीमा रेखा पर बसे आलमगीरपुर गांव पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। देश के 1400 हड़प्पाकालीन स्थलों में आलमगीरपुर का विशेष महत्व है। इस अनमोल ऐतिहासिक धरोहर को एएसआई ने सुरक्षित स्थल घोषित तो कर दिया, लेकिन इसके संरक्षण के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिसकी वजह से गांववाले अपने खेतों के क्षेत्रफल को बढ़ाने के लिए टीले को काट कर तेजी से समतल जमीन में तब्दील कर रहे हैं। टीले पर गोबर के बिटौरे बना लिए गए हैं। अवैध निर्माण हो रहे हैं। एएसआई के अधिकारी संशाधनों की कमी का रोना रोकर इस समस्या से आंखें मूंदे हुए हैं।

देश की राजधानी दिल्ली से महज 70 किमी की दूरी पर हिंडन नदी के किनारे आलमगीरपुर गांव बसा हुआ है। मोदीनगर स्थित एमएम कॉलेज के इतिहास विभाग के असोसिएट प्रोफेसर डॉ. केके शर्मा के अनुसार 2500 से 1700 बीसी के दौरान हड़प्पा सभ्यता अफगानिस्तान से गांव आलमगीर तक फैली थी। वह बताते हैं कि इतिहासकारों का मानना है कि आलमगीर हड़प्पा सभ्यता के पूर्व क्षेत्र का सबसे अंतिम गांव था। प्राचीन काल में हिंडन को हर नदी के नाम से जाना जाता था। उस समय लोग नदी के किनारे ही बसा करते थे। स्कूल की इतिहास की किताबों में भी आलमगीरपुर का जिक्र आता है।
डॉ. शर्मा के अनुसार आलमगीरपुर में सबसे पहले खुदाई का काम 1958 में एएसआई के अधिकारी वाईडी शर्मा के नेतृत्व में हुआ था। खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तन मिले थे, जिन पर सिंधु लिपी में लिखा हुआ था। इसके अलावा उस समय के मनके और खिलौने भी मिले थे, जिनसे यह पता चला था कि यह स्थल हड़प्पासभ्यता से जुड़ा हुआ है। इसके बाद चार साल पहले बीएचयू से इतिहास विभाग के कुछ लोग यहां आए थे और उन्होंने कुछ समय के लिए काम भी किया था।
आलमगीरपुर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए एएसआई ने इसे सुरक्षित जोन घोषित किया था। लेकिन, सुरक्षा के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जानकारी के नाम पर साईट के पास एएसआई का एक बोर्ड भर लगा है। जिस पर लिखा है कि टीले के 200 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य करना अवैध है। गांव के लोग इसके ऐतिहासिक महत्व से अंजान हैं। वे अपनी खेती की जमीन को बढ़ाने के लिए टीले को काटकर समतल करते जा रहे हैं। गांव के एक बुर्जग के अनुसार जब पहले इस टीले की खुदाई हुई थी, तब यह बहुत बड़ा था। अब इसका क्षेत्रफल घटकर आधा रह गया है। इस संबंध में एएसआई के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने संशाधनों की कमी का हवाला दिया। उनका कहना है कि संशाधनों के अभाव में वे यहां गार्ड नियुक्त नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन, जब भी निर्माण या टीले के कटान की सूचना मिलती है, तो वे जाकर उस पर रोक लगाते हैं।

Friday, May 22, 2015

पूर्व प्रधान के भतीजे की मौत

परतापुर थाना क्षेत्र में दिल्ली-मेरठ हाईवे पर बुधवार देर रात कार सवार बदमाशों ने जेवरी के पूर्व प्रधान की कार पर गोलियां बरसा दी। जिससे पूर्व प्रधान के भतीजे की मौत हो गई और उनका चचेरा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने इसके पीछे रंजिश की आशंका जताई है।

कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में स्थित जेवरी गांव के पूर्व प्रधान मान सिंह अपनी दो बेटियों को लेकर गांव जा रहे थे। उनके साथ उनका भतीजा कंवरपाल व चचेरा भाई गिरवर भी था। अपनी होंडा सिटी कार को खुद मान सिंह चला रहे थे। रात करीब 11 बजे पीछे से आई एक कार ने ओवरटेक करते हुए उन्हें रोक लिया। कार से उतरे बदमाशों ने रॉड मारकर उनकी कार की ड्राइविंग सीट का शीशा तोड़ दिया। इसके बाद उनपर फायरिंग शुरू कर दी। कंवरपाल व गिरवर गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। मान सिंह और उनकी बेटियां नीचे झुक जाने से बच गए। मान सिंह ने अपने लाइसेंसी पिस्टल से बदमाशों पर गोली चलाई, तो बदमाश भाग गए। सूचना पर एसपी सिटी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। घायलों को पास के अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान कंवरपाल ने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि बदमाशों की संख्या छह थी और वे करीब 5 किमी से मान सिंह का पीछा कर रहे थे। इन सभी तथ्यों को देखते हुए पुलिस को यह रंजिश का मामला लग रहा है। मामले की जांच की जा रही है।

Thursday, May 21, 2015

हाशिमपुरा जनसंहार में ज़िंदा बच गए पीड़ितों से मुलाकात

1987 के बहुचर्चित हाशिमपुरा जनसंहार मामले में पिछले दिनों आए फैसले के खिलाफ़ उत्तरप्रदेश सरकार ने दिल्ली हाइकोर्ट में अपील करने का फैसला किया है। इस फैसले से पीड़ितो और उनके परिजनों में न्याय की उम्मीद जगी है। 28 साल पुराने इस मामले में सामूहिक नरसंहार के 19 आरोपियों में से जीवित 16 पीएसी के जवानों को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया था।
पीड़ित जुल्फिकार नासिर का कहना है कि हमने 28 साल न्याय की उम्मीद में कैसे गुजारे यह तो हम ही जानते हैं। लेकिन अब उम्मीद है कि न्याय मिलेगा। मंगलवार को लखनऊ में इसी कांड के दूसरे पीड़ित नइम और तीन पीड़ितों के परिजनों के साथ एसपी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलकर लौटे जुल्फिकार का कहना है कि नेताजी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि केस की पैरवी में यूपी सरकार की ओर से कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। प्रदेश के महाअधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने भी अपने बयान से यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश सरकार 29 मई से अदालतों में शुरू हो रहे ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले ही इस अपील को कोर्ट में दाखिल करना चाहती है। संभवत 22 या 25 मई को हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर दी जाएगी। इसके लिए 15 मई को ही दिल्ली में संबंधित वकीलों के पास अपील से संबंधित मसविदा भेज दिया गया है। मेरठ में हुए 1987 के दंगों में पीएसी के जवानों पर 42 लोगों को मौत के घाट उतार कर उनके शव गंगनहर में बहा देने का आरोप लगा था। जुल्फिकार नासिर और नइम गोली लगने के बाद भी बच गए थे।

समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने हाल ही में अपने निवास स्थान पर हाशिमपुरा जनसंहार में ज़िंदा बच गए पीड़ितों से मुलाकात की थी। एसपी प्रमुख ने पीड़ितों के परिवारजनों को राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की सहायता देने का आश्वासन भी दिया। एसपी नेता आशु मलिक, जिनकी अगुवाई में हाशिमपुरा पीड़ितों के प्रतिनिधि दल ने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की, ने कहा कि हाशिमपुरा कांड में मारे गए ज़्यादातर लोग युवा थे, इसलिए उनके परिवार से रोज़ी-रोटी का सहारा भी छिन गया। इसी आधार पर राज्य सरकार ने पीड़ितों के परिवार को 5 लाख की मदद देने का निश्चय किया है। एसपी नेता आज़म ख़ान ने भी पिछले दिनों अलीगढ़ में यह घोषणा की थी कि राज्य सरकार हाशिमपुरा पीड़ितों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ने की मन बना चुकी है।

Tuesday, May 19, 2015

पांच महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने पर शासन सख्त

शाहजहांपुर के हरेवा गांव में दलित परिवार की पांच महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने की घटना को सीएम अखिलेश यादव ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस घटना में शामिल लोगों को बख्शा न जाए। उन्होंने डीजीपी एके जैन को जहां तत्काल सख्त एक्शन लेने को कहा है। वहीं पीड़ित परिवार की महिलाओं को एक-एक लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की है। इसके अलावा सोमवार को महिला आयोग की टीम अध्यक्ष जरीना उस्मानी की अगुवाई में गांव में पहुंची। उन्होंने पीड़ित परिवार से बात की और कहा कि जल्दी ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। शाहजहांपुर के जलालाबाद थाना क्षेत्र में आने वाले हरेवा गांव में सर्वेश कुमार पत्नी और 15 साल की बेटी पूजा के साथ शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे खेत पर जा रहे थे। रास्ते में तीन बाइक सवार युवकों ने उनकी बेटी का अपहरण कर लिया। उन्होंने थाने में शिकायत भी की पर एक्शन नहीं हुआ। इससे नाराज पीड़ित परिवार की महिलाएं आरोपी संतोष कुमार के घर में घुस गई। उन्होंने संतोष के घर की पांच महिलाओं को जमकर पीटा और कपड़े तक फाड़ दिए। आरोप है कि इसके बाद उन्होंने महिलाओं को निर्वस्त्र करके गांव में घुमाया था।