Wednesday, March 5, 2014

परेशान गन्ना किसान आत्महत्या करने पर मजबूर

शुगर मिलों की तरफ से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान न किए जाने से वेस्ट यूपी की आर्थिक व्यवस्था चरमरा रही है। परेशान गन्ना किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहा है, या फिर अपने गन्ने के खेतों को आग के हवाले कर रहा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से गन्ना मिलों को एक हफ्ते में भुगतान की चेतावनी बेअसर साबित हुई। 
सीएम के आदेशों की परवाह नहीं
 
28 जनवरी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुगर मिलों की समीक्षा की थी। मुख्यमंत्री ने सभी शुगर मिलों को एक हफ्ते में किसानों का भुगतान करने की हिदायत दी थी। लेकिन शुगर मिलें अभी भी भुगतान के मूड में दिखाई नहीं दे रही हैं। मेरठ के उप गन्ना आयुक्त वीबी सिंह का कहना है कि एक तरफ शुगर मिलें अपने उत्पाद बेचने में जुटी है, वहीं किसानों को भुगतान के नाम पर वे घाटे का रोना रोने लगती हैं। इसलिए अब शुगर मिलों से उनके आय व व्यय का हिसाब लेने का फैसला लिया गया है। इस बारे में उनके क्षेत्र में आने वाली शुगर मिलों के अधिकारियों को दस्तावेजों के साथ बुलाया गया है।
 
जेबें भरने में लगे हैं मिल
 
किसानों की परेशानी का एक बड़ा कारण यह भी है कि इस साल शुगर मिलें एक माह देर से शुरू हुई। इससे किसानों के गन्ने के जो खेत गेंहू की बुवाई के लिए नवंबर तक खाली हो जाते थे, वे जनवरी तक खाली हो पाए। जिससे कई किसान अब तक अपने खेतों में गेहूं की बुवाई नहीं कर पाए हैं। दूसरी तरफ शुगर मिलें चीनी समेत अपने दूसरे उत्पाद जैसे शीरा, बगास, एथेनॉल व बिजली मार्केट में बेच कर अपनी जेबें भरने में लगे हैं। किसानों के अंदोलन व सरकार के आदेश का उन पर कोई फर्क पड़ता नही दिख रहा है।
 

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