Monday, March 10, 2014

चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि माने जाने वाली इस सीट को जीतना इस बार चौ. अजित सिंह के लिए भी आसान नहीं

जाट लैंड का सेंटर मानी जाने वाली वेस्ट यूपी की बागपत सीट आम वाले आम चुनावों में काफी महत्वपूर्ण रोल अदा करेगी। पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि माने जाने वाली इस सीट को जीतना इस बार चौ. अजित सिंह के लिए भी आसान नहीं है। राजनीतिक समीक्षक बताते हैं कि नए परिसीमन के हिसाब से मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र के बागपत में शामिल होने से समीकरण पूरी तरह से बदल सकते हैं। वहीं पड़ौस के जिले मुजफ्फरनगर में हुए दंगे की आंच भी बागपत सीट पर असर डाल सकती है। वहीं महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस कमिश्नर एस. पी. सिंह के बागपत से चुनाव लड़ने की खबर सही साबित होती है तो यह सभी पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती होगी। 
चौधरी परिवार का रहा है दबदबा : बागपत लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर डाले तो वर्ष-1967 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनसंघ के रघुवीर सिंह शास्त्री और 1971 में कांग्रेस के रामचंद्र विकल यहां से सांसद बने थे। इसके बाद 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरागांधी द्वारा इमरजेंसी लगाने के बाद यूपी की राजनीति में सक्रिय रहे चौधरी चरण सिंह ने भारतीय लोकदल के नाम से पार्टी बनाया और चुनाव में उतर गए। जाट होने के कारण उन्होंने क्षेत्र के जाटों को एकजुट किया और सबसे बड़े किसान नेता के रूप में खुद को स्थापित किया। वे क्षेत्र में इस प्रकार से स्थापित हो गए कि 1980,1984 के चुनाव में एकपक्षीय चुनाव जीता। 1980 में तो मोरारजी की सरकार जीतने पर कांग्रेस के सहयोग से उन्हें पीएम तक बनाया गया।
 
अजित बने राजनीतिक वारिस : 1987 में चौधरी चरण सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र चौधरी अजित सिंह ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभाल ली। इसका असर यह हुआ कि अजित सिंह 1989, 91, 96 में लगातार तीन बार बागपत सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। 1989 में जब राममंदिर मुद्दा बना तो बीजेपी के उम्मीदवार सोमपाल शास्त्री ने अजित को हरा कर उनकी परंपरगत सीट पर कब्जा कर लिया। हालांकि सोमपाल इस जीत को ज्यादा दूर तक नहीं ला पाए और 1999 के चुनाव में अजित सिंह दुबारा से लोकसभा सीट जीत गए। अजित सिंह की जीत का यह सिलसिला अब तक बरकरार है।
 
इस बार बदल सकते हैं समीकरण : चुनावी विश्लेषकों की मानें तो इस बार चौधरी अजित सिंह के लिए बागपत की सीट से जीतना आसान नहीं होगा। मुजफ्फरनगर दंगा इसका सबसे बड़ा कारण हो सकता है। वहीं जाट आरक्षण के मुद्दे को भी पूरी तरह अपने पक्ष में कर पाने में अजित सिहं विफल रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाते हुए अपना उम्मीदवार खड़ा किया है।
 
बीजेपी
 प्रत्याशी को लेकर संशय : गाजियाबाद लोकसभा की तरह बागपत की सीट पर भी उम्मीदवारी को लेकरसंशय हैं। यहां बीजेपी से महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह के चुनाव लड़ने की चर्चा हैं। जबकिआरएलडी से अजित सिंह की सीट होने के कारण कांग्रेस यहां उम्मीदवार नहीं उतारेगी। जबकि एसपी ने हाजीगुलाम मोहम्मद , बीएसपी ने एमएलसी प्रशांत गूर्जर और आप ने जोगेंद्र ढाका को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। 

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