Thursday, August 12, 2010

समाज के डर से अपनी शादी को रजिस्टर करा कर कानूनी रूप देने का साहस नहीं जुटा पाते।

घर से भागकर सात जन्मों तक साथ रहने का वादा तो प्रेमी युगल कर लेते हैं, शादी भी रचा लेते हैं, लेकिन परिवार वालों या समाज के डर से अपनी शादी को रजिस्टर करा कर कानूनी रूप देने का साहस नहीं जुटा पाते। जनवरी से अब तक केवल 23 जोड़ों ने ही अपनी शादी को रजिस्टर कराने का आवेदन किया है। इनमें से एक शादी शहर में काफी दिनों तक चर्चा का विषय रही। मुस्लिम परिवार की एमए पास युवती ने अपने अनपढ़ प्रेमी के साथ मैरिज को रजिस्टर कराने के लिए आवेदन किया था। लड़की के पैरंट्स ने भारी विरोध किया। खुद एडीएम सिटी ने लड़की की मां को समझाया, तब जाकर यह शादी रजिस्टर हो पाई। पिछले सात महीनों में 118 प्रेमी जोड़े घरवालों के बर्ताव से आजिज आकर घर छोड़ चुके हैं। घर से भाग जाने के बावजूद घर वाले उनका पीछा नहीं छोड़ते हैं। अधिकांश मामलों मे लड़की के घर वाले अपनी लड़की को नाबालिग बताते हुए लड़के पर उसे किडनैप करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर कर देते हैं। जनपद के 28 थानों का रेकॉर्ड इस बात का गवाह है। पुलिस भी ऐसे मामलों मे घरवालों की बात पर यकीन कर प्रेमियों को गिरफ्तार करने में जुट जाती है। कानूनी झमेलों से बचने के लिए वह मंदिर जाकर शादी भी रचा लेते हे, लेकिन जटिल कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए मैरिज का रजिस्टे्रशन कराने के लिए एडीएम सिटी के दफ्तर जाने से बचते हैं। मैरिज के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रार्थना पत्र के साथ प्रेमी युगलों के मूल निवास का प्रमाण पत्र भी लिया जाता है। इसके अलावा उम्र के लिए प्रमाण पत्र के साथ ऐफिडेविट भी देना पड़ता है। मैरिज रजिस्ट्रेशन में पुलिस यह भी पता लगाती है कि आवेदकों में कहीं खून का रिश्ता तो नहीं हैं। दोनों के परिजनों को नोटिस भेज कर पूछा जाता है कि इस शादी पर उन्हें कोई ऐतराज तो नहीं हैं। बस यही प्रक्रिया घरवालों के लिए हथियार साबित होती है। इसी के चलते प्रेमी जोड़े मैरिज का रजिस्ट्रेशन कराने से डरते हैं।

No comments:

Post a Comment