फीफा वर्ल्ड की पूरी दुनिया में धूम मची हुई
है। इसके कारण देश-विदेश में फुटबॉल की मांग काफी बढ़ गई है। एक ओर जहां खिलाड़ियों
की किक पर उछलती गेंद को देख फुटबाल प्रेमी रोमांचित हो रहे हैं, वहीं इसके पीछे की एक कड़वी सचाई यह भी है
कि इन फुटबॉल को तैयार करने की कड़ी प्रक्रिया में महिलाओं के साथ उनके मासूम बच्चे
अहम भूमिका निभा रहे हैं।
वैसे तो फुटबाल तैयार करने से संबंधित अधिकांश सामान फैक्ट्रियों में तैयार किया जाता है। लेकिन इसके बाहर के लेदर खोल की सिलाई ठेकेदारों के माध्यम से कराई जाती है। ठेकेदार फैक्ट्रियों से खोल का कच्चा माल लेकर देहात क्षेत्र की महिलाओं और नाबालिग बच्चों से इस काम को कराते हैं। महिलाओं और नाबालिग बच्चों से सिलाई कराने के पीछे कारण बताया जाता है कि इनकी उंगलियां पतली व नाजुक होती है, इससे सिलाई साफ और एक समान होती है। गांवों मे यह काम कुटीर उद्योग के रूप में चल रहा है। आजकल गांवों में फुटबाल के लेदर के बाहरी कवर को सिलने का काम तेजी से चल रहा है।
इस काम में जुटे एक परिवार के मुखिया का कहना है कि इससे परिवार को अतिरिक्त आय हो जाती है। नाबालिग बच्चों से सिलाई कराने के मामले में वे कहते हैं कि आजकल बच्चों की स्कूल से छुटिट्यां चल रही हैं, इसलिए वे अपनी मां को सहयोग दे रहे हैं। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि कवर की सिलाई जितनी अच्छी होती है, उन्हें काम उतना ज्यादा मिलता है।
वैसे तो फुटबाल तैयार करने से संबंधित अधिकांश सामान फैक्ट्रियों में तैयार किया जाता है। लेकिन इसके बाहर के लेदर खोल की सिलाई ठेकेदारों के माध्यम से कराई जाती है। ठेकेदार फैक्ट्रियों से खोल का कच्चा माल लेकर देहात क्षेत्र की महिलाओं और नाबालिग बच्चों से इस काम को कराते हैं। महिलाओं और नाबालिग बच्चों से सिलाई कराने के पीछे कारण बताया जाता है कि इनकी उंगलियां पतली व नाजुक होती है, इससे सिलाई साफ और एक समान होती है। गांवों मे यह काम कुटीर उद्योग के रूप में चल रहा है। आजकल गांवों में फुटबाल के लेदर के बाहरी कवर को सिलने का काम तेजी से चल रहा है।
इस काम में जुटे एक परिवार के मुखिया का कहना है कि इससे परिवार को अतिरिक्त आय हो जाती है। नाबालिग बच्चों से सिलाई कराने के मामले में वे कहते हैं कि आजकल बच्चों की स्कूल से छुटिट्यां चल रही हैं, इसलिए वे अपनी मां को सहयोग दे रहे हैं। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि कवर की सिलाई जितनी अच्छी होती है, उन्हें काम उतना ज्यादा मिलता है।
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