गुरु पूर्णिमा से कांवड़ियों ने हरिद्वार,
गंगोत्री से गंगाजल लेकर अपने श्रद्घा केंद्र
शिवालयों की और कूच करना शुरू कर दिया। फिलहाल राजस्थान और हरियाणा के दूरदराज
इलाके के कांवड़िये ही अपने मिशन पर निकल रहे हैं। हरिद्वार और खतौली के बीच
कांवड़िये दिल्ली-हरिद्वार
नेशनल हाइवे पर नजर आ रहे हैं। दो दिन बाद उनकी संख्या में खासा इजाफा हो जाएगा। एनएच पर बोल बम की गूंज सुनाई दे
रही है। दूसरी और अब तक मंगलौर से लेकर गाजियाबाद जिले निवाड़ी तक पूरी तरह से
कांवड़ रोड़ गड्ढा मुक्त नहीं हुई है।
गुरु पूर्णिमा के बाद करीब एक हफ्ते तक दिल्ली-हरिद्वार एनएच और कांवड़ रोड़ राजस्थान के और हरियाणा के दूरदराज इलाके कांवडिय़ों की ही भरमार रहती है। दो दिन बाद दिल्ली में भी खासी संख्या में कांवड़िये नजर आने लगेंगे। राजस्थान और हरियाणा के कांवड़ियों को मंगलौर से कांवड़ रोड़ ही ज्यादा सूट कर करता है। उसमें दूरी भी कम तय करनी पड़ती है। यह लोग मुरादनगर पहुंचने के बाद गंगनहर की पटरी से दिल्ली को गंगाजल की सप्लाई के लिए पाइप लाइन रोड़ पकड लेते हैं। वहां से भजनपुरा होते हुए अपनी आगे की यात्रा तय करते हैं।
कांवडियों की सेवा के लिए के लिए कांवड़ रोड़ पर जगह कांवड़ शिविर लग गए हैं। वहां कांवडिय़ों की सेवा के लिए कच्चा और पक्का दोनों तरह के खाने के अलावा फल, दूध और चाय की व्यवस्था तो है ही, साथ ही पैरों में पड़े छालों को ठीक रकने के लिए और ठंडक पहुंचाने के लिए मेहंदी की भी हर शिविर में व्यवस्था है। एलोपैथिक दवाइयां भी शिविर संचलाक अपने यहां रखे हैं। उधर दिल्ली की सीमा से लेकर मुजफ्फरनगर बाईपास पर जगह जगह कांवड़ शिविर लगाए जाने का काम तेजी चल रहा है। इस बार इस प्रकार की खबरें मिल रही हैं कि कांवड़ शिवरों की संख्या में इजाफा होगा। दो दिन बाद इस हाइवे पर भी कांवडिय़ों की संख्या में इजाफा होगा। कांवड़ लेने जाने वाले श्रद्घालुओं की संख्या आज काफी बढ़ोतरी हुई है। कांवडिय़ों को हरिद्वार लेकर जाने वाली बसों का इस हाइवे पर काफी दबाव बढ़ा है। ट्रेनों से भी कांवड़िये जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन बोल बम की गूंज सुनाई देने लगी है। हाइवे स्थित शहरों और कस्बों में कांवड़ियों के लिए ड्रेस की दुकानें सज गई हैं।
गुरु पूर्णिमा के बाद करीब एक हफ्ते तक दिल्ली-हरिद्वार एनएच और कांवड़ रोड़ राजस्थान के और हरियाणा के दूरदराज इलाके कांवडिय़ों की ही भरमार रहती है। दो दिन बाद दिल्ली में भी खासी संख्या में कांवड़िये नजर आने लगेंगे। राजस्थान और हरियाणा के कांवड़ियों को मंगलौर से कांवड़ रोड़ ही ज्यादा सूट कर करता है। उसमें दूरी भी कम तय करनी पड़ती है। यह लोग मुरादनगर पहुंचने के बाद गंगनहर की पटरी से दिल्ली को गंगाजल की सप्लाई के लिए पाइप लाइन रोड़ पकड लेते हैं। वहां से भजनपुरा होते हुए अपनी आगे की यात्रा तय करते हैं।
कांवडियों की सेवा के लिए के लिए कांवड़ रोड़ पर जगह कांवड़ शिविर लग गए हैं। वहां कांवडिय़ों की सेवा के लिए कच्चा और पक्का दोनों तरह के खाने के अलावा फल, दूध और चाय की व्यवस्था तो है ही, साथ ही पैरों में पड़े छालों को ठीक रकने के लिए और ठंडक पहुंचाने के लिए मेहंदी की भी हर शिविर में व्यवस्था है। एलोपैथिक दवाइयां भी शिविर संचलाक अपने यहां रखे हैं। उधर दिल्ली की सीमा से लेकर मुजफ्फरनगर बाईपास पर जगह जगह कांवड़ शिविर लगाए जाने का काम तेजी चल रहा है। इस बार इस प्रकार की खबरें मिल रही हैं कि कांवड़ शिवरों की संख्या में इजाफा होगा। दो दिन बाद इस हाइवे पर भी कांवडिय़ों की संख्या में इजाफा होगा। कांवड़ लेने जाने वाले श्रद्घालुओं की संख्या आज काफी बढ़ोतरी हुई है। कांवडिय़ों को हरिद्वार लेकर जाने वाली बसों का इस हाइवे पर काफी दबाव बढ़ा है। ट्रेनों से भी कांवड़िये जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन बोल बम की गूंज सुनाई देने लगी है। हाइवे स्थित शहरों और कस्बों में कांवड़ियों के लिए ड्रेस की दुकानें सज गई हैं।
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