Saturday, May 30, 2015

अपनी पत्नी सहित परिवार के 6 अन्य सदस्यों को एसिड फेंककर घायल कर दिया

शुक्रवार को मेरठ के शौकीन नगर इलाके में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी सहित परिवार के 6 अन्य सदस्यों को एसिड फेंककर घायल कर दिया। आधी रात के बाद की इस घटना में पीड़िता उस समय गहरी नींद में थी जब आरोपी साजिद ने अपने दोस्त वसीम के साथ उन पर एसिड से हमला किया। आरोपी की पत्नी उज्मा ने अब उसके खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करा दिया है।
थाना प्रभारी रवीन्द्र यादव ने बताया कि वसीम को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि मुख्य आरोपी साजिद अभी भी फरार है। साजिद के भाई को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है।
घायल लोगों को इलाज के लिए मेडिकल कालेज हास्पिटल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

Thursday, May 28, 2015

इलाज के दौरान मौत

सरधना थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ भर्ती के लिए चल रही दौड़ में हिस्सा ले रहा युवक रेसिंग के दौरान बेहोश हो गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात सैन्य अधिकारियों ने उसे इलाज के लिए ले जाने से रोक दिया था। आक्रोशित गांववालों को एसडीएम ने मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया, तब जाकर वे शांत हुए।
पाली गांव में रहने वाला गौरव (18) छह भाई-बहनों में सबसे छोटा था। मंगलवार को सीआरपीएफ में भर्ती होने के लिए वह अपने बड़े भाई गोविंद के साथ वेदव्यासपुरी स्थित आरएएफ हेडक्वॉर्टर पर दौड़ में शामिल हुआ था। गोविंद के अनुसार दौड़ते समय गौरव अचानक बेहोश होकर गिर गया। उसने और उसके साथियों ने उसे उठाना चाहा, तो वहां तैनात सैन्य अधिकारियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। उनका कहना था कि दौड़ का समय खत्म होने के बाद ही वे गौरव को उठा सकते हैं। दौड़ खत्म होने के बाद वे बेहोश गौरव को पास के अस्पताल ले गए और उसे वहां भर्ती करा दिया। देर रात इलाज के दौरान गौरव ने दम तोड़ दिया।

बुधवार सुबह गौरव का शव गांव पहुंचा तो परिजनों व गांववालों का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से पहले दाह संस्कार करने से इंकार कर दिया। सूचना पाकर एसडीएम सरधना शिवकुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को किसी तरह समझा-बुझा कर शांत किया। एसडीएम ने गौरव के परिजनों को प्रदेश सरकार से मुआवजा दिलवाने का आश्वासन भी दिया। एसडीएम के समझाने के बाद लोग गौरव के दाह संस्कार के लिए राजी हो गए।

Wednesday, May 27, 2015

अगर एतराज है तो घर छोड़ कर चला जाए

पिता की हत्या के आरोपी में पुलिस ने बेटे को अरेस्ट कर लिया है। पुलिस का दावा है कि वह एक महिला के साथ पिता के अवैध संबंधों को लेकर आरोपी नाराज था। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया बेसबॉल का बैट और खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं। 19 मई को शास्त्री नगर निवासी दवा कारोबारी अशोक सिंघल की हत्या कर दी गई थी।
मंगलवार को एसएसपी डीसी दूबे ने बताया कि बेटे अंकित ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। एसएसपी ने बताया कि अशोक सिंघल वैद्य होने के साथ-साथ दवाएं बेचने का काम भी करते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात बिजनौर के उमाकांत शुक्ला से हुई। उमाकांत ने अशोक को हर्बल लाइफ कंपनी की मेंबरशिप दिलाने में भी सहायता की और उसका परिचय इसी कंपनी में दवा बेचने का काम करने वाली किरन से कराया। इसके बाद अशोक और किरन एक साथ दवा बेचने जाने लगे। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। अंकित को इस बात की जानकारी अपने पिता के ड्राइवर से मिल गई। इस बात को लेकर बाप-बेटे में झगड़ा रहने लगा। कुछ दिन पहले अंकित अचानक बीमार पड़ गया, जिसके कारण उसे अस्पताल में एडमिट कराना पड़ा।

पुलिस के अनुसार जब अंकित अस्पताल में था, तभी उसे पता चला कि किरन उसके घर पर आकर रह रही है। अस्पताल से घर लौटने पर उसका अपने पिता से फिर झगड़ा हुआ। इस पर अशोक ने उससे साफ-साफ कह दिया कि वह किरन के साथ ही रहेगा, अगर उसे एतराज है तो घर छोड़ कर चला जाए। यह सुनकर अंकित का गुस्सा और भड़क गया। रात को उसने शराब पी और जब सभी लोग सो गए तो उसने बेसबॉल के बैट से हमला कर अपने पिता की हत्या कर दी। फिर खुद को बचाने के लिए हत्या को लूट का रंग देना चाहा। पिता के कमरे का सामना फैला दिया और आलमारी खोलकर उसका सामान भी बाहर डाल दिया। हत्या करते समय अंकित के कपड़ों पर भी खून लग गया था। उसने कपड़े बदले और रात तीन बजे अपनी कार से सूरजकुंड पहुंचा, वहां नाले में कपड़े फेंक दिए। चार बजे उसने अपनी पत्नी के फोन से पिता की हत्या की जानकारी पुलिस को दी थी। एसएसपी का कहना है कि अंकित के हाव-भाव से पुलिस को शुरू से ही उसपर शक था।

Monday, May 25, 2015

आलमगीरपुर गांव पर संकट के बादल

4 हजार साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता के पूर्व क्षेत्र की सीमा रेखा पर बसे आलमगीरपुर गांव पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। देश के 1400 हड़प्पाकालीन स्थलों में आलमगीरपुर का विशेष महत्व है। इस अनमोल ऐतिहासिक धरोहर को एएसआई ने सुरक्षित स्थल घोषित तो कर दिया, लेकिन इसके संरक्षण के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिसकी वजह से गांववाले अपने खेतों के क्षेत्रफल को बढ़ाने के लिए टीले को काट कर तेजी से समतल जमीन में तब्दील कर रहे हैं। टीले पर गोबर के बिटौरे बना लिए गए हैं। अवैध निर्माण हो रहे हैं। एएसआई के अधिकारी संशाधनों की कमी का रोना रोकर इस समस्या से आंखें मूंदे हुए हैं।

देश की राजधानी दिल्ली से महज 70 किमी की दूरी पर हिंडन नदी के किनारे आलमगीरपुर गांव बसा हुआ है। मोदीनगर स्थित एमएम कॉलेज के इतिहास विभाग के असोसिएट प्रोफेसर डॉ. केके शर्मा के अनुसार 2500 से 1700 बीसी के दौरान हड़प्पा सभ्यता अफगानिस्तान से गांव आलमगीर तक फैली थी। वह बताते हैं कि इतिहासकारों का मानना है कि आलमगीर हड़प्पा सभ्यता के पूर्व क्षेत्र का सबसे अंतिम गांव था। प्राचीन काल में हिंडन को हर नदी के नाम से जाना जाता था। उस समय लोग नदी के किनारे ही बसा करते थे। स्कूल की इतिहास की किताबों में भी आलमगीरपुर का जिक्र आता है।
डॉ. शर्मा के अनुसार आलमगीरपुर में सबसे पहले खुदाई का काम 1958 में एएसआई के अधिकारी वाईडी शर्मा के नेतृत्व में हुआ था। खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तन मिले थे, जिन पर सिंधु लिपी में लिखा हुआ था। इसके अलावा उस समय के मनके और खिलौने भी मिले थे, जिनसे यह पता चला था कि यह स्थल हड़प्पासभ्यता से जुड़ा हुआ है। इसके बाद चार साल पहले बीएचयू से इतिहास विभाग के कुछ लोग यहां आए थे और उन्होंने कुछ समय के लिए काम भी किया था।
आलमगीरपुर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए एएसआई ने इसे सुरक्षित जोन घोषित किया था। लेकिन, सुरक्षा के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जानकारी के नाम पर साईट के पास एएसआई का एक बोर्ड भर लगा है। जिस पर लिखा है कि टीले के 200 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य करना अवैध है। गांव के लोग इसके ऐतिहासिक महत्व से अंजान हैं। वे अपनी खेती की जमीन को बढ़ाने के लिए टीले को काटकर समतल करते जा रहे हैं। गांव के एक बुर्जग के अनुसार जब पहले इस टीले की खुदाई हुई थी, तब यह बहुत बड़ा था। अब इसका क्षेत्रफल घटकर आधा रह गया है। इस संबंध में एएसआई के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने संशाधनों की कमी का हवाला दिया। उनका कहना है कि संशाधनों के अभाव में वे यहां गार्ड नियुक्त नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन, जब भी निर्माण या टीले के कटान की सूचना मिलती है, तो वे जाकर उस पर रोक लगाते हैं।

Friday, May 22, 2015

पूर्व प्रधान के भतीजे की मौत

परतापुर थाना क्षेत्र में दिल्ली-मेरठ हाईवे पर बुधवार देर रात कार सवार बदमाशों ने जेवरी के पूर्व प्रधान की कार पर गोलियां बरसा दी। जिससे पूर्व प्रधान के भतीजे की मौत हो गई और उनका चचेरा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने इसके पीछे रंजिश की आशंका जताई है।

कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में स्थित जेवरी गांव के पूर्व प्रधान मान सिंह अपनी दो बेटियों को लेकर गांव जा रहे थे। उनके साथ उनका भतीजा कंवरपाल व चचेरा भाई गिरवर भी था। अपनी होंडा सिटी कार को खुद मान सिंह चला रहे थे। रात करीब 11 बजे पीछे से आई एक कार ने ओवरटेक करते हुए उन्हें रोक लिया। कार से उतरे बदमाशों ने रॉड मारकर उनकी कार की ड्राइविंग सीट का शीशा तोड़ दिया। इसके बाद उनपर फायरिंग शुरू कर दी। कंवरपाल व गिरवर गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। मान सिंह और उनकी बेटियां नीचे झुक जाने से बच गए। मान सिंह ने अपने लाइसेंसी पिस्टल से बदमाशों पर गोली चलाई, तो बदमाश भाग गए। सूचना पर एसपी सिटी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। घायलों को पास के अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान कंवरपाल ने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि बदमाशों की संख्या छह थी और वे करीब 5 किमी से मान सिंह का पीछा कर रहे थे। इन सभी तथ्यों को देखते हुए पुलिस को यह रंजिश का मामला लग रहा है। मामले की जांच की जा रही है।

Thursday, May 21, 2015

हाशिमपुरा जनसंहार में ज़िंदा बच गए पीड़ितों से मुलाकात

1987 के बहुचर्चित हाशिमपुरा जनसंहार मामले में पिछले दिनों आए फैसले के खिलाफ़ उत्तरप्रदेश सरकार ने दिल्ली हाइकोर्ट में अपील करने का फैसला किया है। इस फैसले से पीड़ितो और उनके परिजनों में न्याय की उम्मीद जगी है। 28 साल पुराने इस मामले में सामूहिक नरसंहार के 19 आरोपियों में से जीवित 16 पीएसी के जवानों को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया था।
पीड़ित जुल्फिकार नासिर का कहना है कि हमने 28 साल न्याय की उम्मीद में कैसे गुजारे यह तो हम ही जानते हैं। लेकिन अब उम्मीद है कि न्याय मिलेगा। मंगलवार को लखनऊ में इसी कांड के दूसरे पीड़ित नइम और तीन पीड़ितों के परिजनों के साथ एसपी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलकर लौटे जुल्फिकार का कहना है कि नेताजी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि केस की पैरवी में यूपी सरकार की ओर से कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। प्रदेश के महाअधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने भी अपने बयान से यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश सरकार 29 मई से अदालतों में शुरू हो रहे ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले ही इस अपील को कोर्ट में दाखिल करना चाहती है। संभवत 22 या 25 मई को हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर दी जाएगी। इसके लिए 15 मई को ही दिल्ली में संबंधित वकीलों के पास अपील से संबंधित मसविदा भेज दिया गया है। मेरठ में हुए 1987 के दंगों में पीएसी के जवानों पर 42 लोगों को मौत के घाट उतार कर उनके शव गंगनहर में बहा देने का आरोप लगा था। जुल्फिकार नासिर और नइम गोली लगने के बाद भी बच गए थे।

समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने हाल ही में अपने निवास स्थान पर हाशिमपुरा जनसंहार में ज़िंदा बच गए पीड़ितों से मुलाकात की थी। एसपी प्रमुख ने पीड़ितों के परिवारजनों को राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की सहायता देने का आश्वासन भी दिया। एसपी नेता आशु मलिक, जिनकी अगुवाई में हाशिमपुरा पीड़ितों के प्रतिनिधि दल ने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की, ने कहा कि हाशिमपुरा कांड में मारे गए ज़्यादातर लोग युवा थे, इसलिए उनके परिवार से रोज़ी-रोटी का सहारा भी छिन गया। इसी आधार पर राज्य सरकार ने पीड़ितों के परिवार को 5 लाख की मदद देने का निश्चय किया है। एसपी नेता आज़म ख़ान ने भी पिछले दिनों अलीगढ़ में यह घोषणा की थी कि राज्य सरकार हाशिमपुरा पीड़ितों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ने की मन बना चुकी है।

Tuesday, May 19, 2015

पांच महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने पर शासन सख्त

शाहजहांपुर के हरेवा गांव में दलित परिवार की पांच महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने की घटना को सीएम अखिलेश यादव ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस घटना में शामिल लोगों को बख्शा न जाए। उन्होंने डीजीपी एके जैन को जहां तत्काल सख्त एक्शन लेने को कहा है। वहीं पीड़ित परिवार की महिलाओं को एक-एक लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की है। इसके अलावा सोमवार को महिला आयोग की टीम अध्यक्ष जरीना उस्मानी की अगुवाई में गांव में पहुंची। उन्होंने पीड़ित परिवार से बात की और कहा कि जल्दी ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। शाहजहांपुर के जलालाबाद थाना क्षेत्र में आने वाले हरेवा गांव में सर्वेश कुमार पत्नी और 15 साल की बेटी पूजा के साथ शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे खेत पर जा रहे थे। रास्ते में तीन बाइक सवार युवकों ने उनकी बेटी का अपहरण कर लिया। उन्होंने थाने में शिकायत भी की पर एक्शन नहीं हुआ। इससे नाराज पीड़ित परिवार की महिलाएं आरोपी संतोष कुमार के घर में घुस गई। उन्होंने संतोष के घर की पांच महिलाओं को जमकर पीटा और कपड़े तक फाड़ दिए। आरोप है कि इसके बाद उन्होंने महिलाओं को निर्वस्त्र करके गांव में घुमाया था।

नट समुदाय की महिलाओं को सौ कोड़े और एक लाख रुपये जुर्माने का ऐलान

हमारे आस-पास ऐसे वाकए होते रहते हैं जो हमें शर्मसार होने पर मजबूर देते हैं। कुछ ऐसी ही घटना मेरठ में हुई है। यहां पीपलीखेड़ा गांव में पंचायत ने नट समुदाय की महिलाओं को सौ कोड़े और एक लाख रुपये जुर्माने का ऐलान किया है। महिलाओं की 'गलती' बस इतनी थी कि उन्होंने घर से बाहर निकलकर मेहनत-मजदूरी की थी। पंचायत ने उनके बाहर निकलकर काम करने पर रोक भी लगा दी है।
बताया गया है कि थाना खरखौदा क्षेत्र की नट जाति की महिलाओं ने अपने परिवार का पेट पालने के लिए घर से बाहर निकलकर काम करने की कोशिश की तो, उनके ही समाज की पंचायत ने इसे गलत ठहराते हुए पाबंदी लगा दी। पंचायत का हुक्म न मामने पर सौ कोड़े और एक लाख का जुर्माना भी तय कर दिया। महिलाओं ने पुलिस से मदद चाही तो वहां से भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। हालांकि एसओ खरखौदा मनोज सिंह पंचायत के ऐसे किसी फरमान की जानकारी से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है नट जाति की महिलाओं के साथ उन्हीं के लोगों की लड़ाई की सूचना जरूर मिली थी, लेकिन उनके पास इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आई है।

खरखौदा थाना क्षेत्र के पीपलीखेड़ा गांव में नट जाति के करीब सौ परिवार रहते हैं। पहले ये लोग अपनी पारंपरिक कला का प्रर्दशन कर अपने परिवार को पेट पाला करते थे। लेकिन अब इनकी कला के कद्रदान नहीं रहे। जिससे इन लोगों को रोटी के भी लाले पड़ने लगे। इस पर नट जाति की महिलओं ने परिवार का पेट पालने के लिए घर से बाहर निकलकर मेहनत मजदूरी करने का निर्णय लिया। वे आसपास के क्षेत्र में स्थित फैक्ट्रियों में काम करने लगीं। उनके इस फैसले का समाज के ही कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उनकी ही जाति के कथित ठेकेदार उन्हें मजदूरी करने जाने से रोकने लगे। महिलओं की ओर से उनकी बात मानने से इनकार करने पर उन्होंने उनके चरित्र पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया। आरोप है कि इस मसले पर गांव में रविवार को नट जाति की पंचायत बैठी। पंचायत ने महिलाओं के घर से बाहर जाकर काम करने को गलत ठहराया और ऐसा करने वाली महिलओं को सौ कोड़े और एक लाख का जुर्माने का दंड सुना दिया। इस पर महिलओं ने पुलिस के सामने गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने भी उनकी कोई मदद नहीं की। इसके बाद पंचायत ने पुलिस से शिकायत करने पर भी 10 हजार रुपये जुर्माने का ऐलान कर दिया है। जुर्माना न दने पर बस्ती छोड़ने का भी फरमान सुना दिया है। अब पीड़ितों का परिवार बहुत डरा हुआ है।

Saturday, May 16, 2015

स्थानीय भाषा में इन कुलनाम को बौंक कहा जाता है

पीढ़ियों पहले किसी शख्स को उसकी आदत व शरीरिक बनावट के कारण मिला उपनाम आगामी पीढ़ी के लिए कुलनाम बन गया। बागपत में आज भी उन परिवारों के लोगों को उसी कुलनाम से जाना जाता है। तोता, भूत, घोड़ा, बिच्छू, गपोड, कुत्ते लड़ावा, चिड़िया आदि ऐसे कुलनाम हैं जिनसे आज भी ग्रामीण इनकी पहचान करते हैं। स्थानीय भाषा में इन कुलनाम को बौंक कहा जाता है। हर बौंक के पीछे उनके परिवार के किसी सदस्य की कोई न कोई कहानी जरूर जुड़ी हुई है।
गांव बिजरौल निवासी राजीव तोमर भूत कुल से जुड़े हैं। उनका कहना है कि उनके एक पूर्वज काफी लंबे थे। उनका शरीर वजनी था और उस पर बहुत बाल थे। एक दिन वे गेहूं निकाल रहे थे। इस प्रक्रिया में उनके शरीर के बालों में भूसा भर गया। उन्हें इस रूप में देख लोग भूत कहकर बुलाने लगे। तभी से यह नाम हमारे परिवारों के साथ जुड़ गया। बामनौली निवासी हेमंत कुमार का कहना है कि उनके एक पूर्वज धाराप्रवाह कई घंटों तक बोला करते थे। यह गुण तोते में पाया जाता है। इसलिए उन्हें तोता उपनाम मिल गया। जो अब उनके परिवार का कुलनाम है।
25 साल की अंजलि तोमर का मानना है कि बौंक के कारण ही वे लोग आज भी अपने पूवर्जो से जुड़े हैं। अंजलि बताती हैं कि उनके परबाबा दाताराम बहुत ही चतुर थे। शरीर से वे कमजोर थे, लेकिन वे अपनी योजनओं को बहुत ही गोपनीय रखा करते थे। उनके इसी रहस्यमय व्यवहार ने उन्हें बिच्छू की उपाधि दिला दी। आज उनसे जुड़े 15 परिवार इसी नाम से जाने जाते हैं। इसी प्रकार राकेश बावली बताते हैं कि उनके एक पूर्वज अपने तरीके से गांव के लोगों का मनोरंजन किया करते थे। वे गांववालों को हास्यासपद लघुकथाएं सुनाकर रात भर जगाए रखते थे। तभी से उन्हें गपोड़ की उपधि मिल गई। जो आगे चल कर कुलनाम हो गया। अब उनके परिवार के सदस्यों की पहचान है। दाहा गांव के सुधीर राणा बताते हैं कि इनके पुरखों को कुत्ते के पिल्लों को आपस में लड़वाने का शौक था इससे ही उन्हें यह उपनाम मिल गया था। इसके अलावा चिड़िया, हाथी, भेड़िया, बकरी आदि ऐसे कई कुलनाम भी इस क्षेत्र में प्रचलित हैं।

स्थानीय निवासी और आर्किलोजिस्ट अमित राय का कहना है कि बागपत-बड़ौत के 84 गांव ऐसे हैं जिनके निवासी अपना सरनेम तोमर लिखते हैं। उनका मानना है कि ऐसे में एक से अधिक एक जैसे नाम के व्यकि में से किसी एक की पहचान करने के लिए शायद बौंक का सिस्टम बनाया गया होगा। अमित का मानना है कि आज कि युवा पीढी जिस तरह अपने सामाजिक ताने-बाने को महत्व नहीं दे रही है, इससे लगता है कि जल्द ही लोग बौंक को भूल जाएगे। इसलिए वे इन बौंक की पहचान कर उनसे जुड़ी कहानियों का संकलन कर रहे हैं।

मुलायम 'धरती पुत्र' और अखिलेश 'धरती पौत्र' कैसे ?

केंद्र और राज्य सरकार के बीच किसानों को राहत के मुद्दे पर जुबानी जंग और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्र ने अगर हजारों करोड़ रुपये दिए हैं तो वह किसको दे दिए? मैंने तो अपनी जेब में नहीं रखे ; अब तो मैंने सदरी भी उतार दी है और जेबें कम हो गई हैं।
सीएम अखिलेश ने कहा कि केंद्र ही बताए कि किसको, कब और कितने रुपये दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि हम पहले ही कहते थे कि यह चालू पार्टी है।
सीएम ने शुक्रवार को अपने आवास पर एक कार्यक्रम में प्राकृतिक आपदा से हुई किसानों की मौतों पर उनके परिवारीजनों को मुआवजे के तौर पर सात-सात लाख रुपये के चेक बांटे। कुल 51 किसानों के परिवारों को यह चेक बांटे गए।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हम तो किसानों के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं, कई पाबंदियां होते हुए भी हमने आगे बढ़कर किसानों की मदद की। उन्होंने कहा कि केंद्र की सरकार तो बड़ी है, उसका खजाना भी बड़ा है और बहुमत भी काफी बड़ा मिला है, ऐसे में हमने सात लाख दिए तो केंद्र को 14 लाख या 20 लाख रुपये तो देने ही चाहिए।
वहीं दूसरी ओर हाथरस में रैली के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सीएम अखिलेश के आरोपों का जवाब दिया। शाह ने कहा कि आपदा के बाद भी सपा सरकार पीड़ित किसानों तक मुआवजा नहीं पहुंचा पा रही है।
सपा सरकार को किसान विरोधी बताते हुए शाह ने कहा कि मुलायम और अखिलेश किसानों के बीच नहीं पहुंचे। ऐसे में मुलायम 'धरती पुत्र' और अखिलेश 'धरती पौत्र' कैसे हो गए।
शाह ने कहा कि यूपी में बाप-बेटों का राज बहुत हो गया, आने वाले छह महीने में प्रदेश का पीड़ित किसान प्रदेश सरकार को हाथ में लाठी लेकर दौड़ाएगा।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह पिछले हफ्ते लखनऊ दौरे पर आए थे तो उन्होंने कहा था कि पीड़ित किसानों के मामले में राज्य सरकार के आरोप बेबुनियाद हैं।
केंद्र ने कर वसूली की एवज में राज्य को मिलने वाले हिस्से को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया है। इसके तहत 6000 करोड़ रुपये प्रदेश को दिए जा चुके हैं।

Friday, May 15, 2015

रिटायर्ड महिला लेक्चरार की गोली मारकर हत्या

नानकचंद एग्लों संस्कृत कॉलेज के निकट एक रिटायर्ड महिला लेक्चरार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। थाना प्रभारी इकबाल अहमद कलीम का कहना है कि घटना की शिकार बनी महिला के पति ने थाने में अपनी पहली पत्नी के खिलाफ हत्या की साजिश रचने और उसके बेटे के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।

चंद्रिका कॉलोनी में रिटायर्ड टीचर श्रीचंद चौहान की पत्नी कौशल रानी नानकचंद एंग्लो इंटर कॉलेज में हिंदी विभाग की लेक्चरार रही हैं। बताया गया कि गुरुवार को कौशल रानी घर से कॉलेज जा रही थीं। एनएएस कॉलेज के पास हमलावर ने कौशल रानी को दो गोलियां मारी और वहां से पैदल ही फरार हो गया। घायल महिला को स्थानीय लोग तुरंत हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें डेड घोषित कर दिया। बताया गया श्रीचंद चौहान की पहली शादी अंगूरी देवी के साथ हुई थी। अंगूरी देवी का बेटा अरुण कुमार है। दोनों बागपत में रहते हैं। श्रीचंद चौहान अपनी दूसरी पत्नी व बच्चों के साथ मेरठ में रह रहे हैं। श्रीचंद ने पुलिस को बताया कि उन्होंन अपनी प्रॉपर्टी पहली पत्नी अंगूरी देवी के नाम कर दी थी, इसके बावजूद उसका बेटा अरुण उनकी दूसरी पत्नी कौशल रानी से रंजिश रखता रहा। दो बार उसने कौशल पर हमला भी किया था। श्रीचंद का आरोप है कि कौशल रानी की अरुण ने हत्या की है। इस साजिश में अंगूरी देवी भी शामिल है। थाना प्रभारी निरीक्षक इकबाल अहमद का कहना है कि मामला दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।

Thursday, May 14, 2015

बेटे शगुन की फैंसी लाइट्स की शोरूम में सेंधमारी की कोशिश

 वेद प्रकाश शर्मा का नाम मशहूर अपराध कथा लेखकों में शुमार किया जाता है। चार दशकों के अपने करियर में उन्होंने क्राइम सीन्स के हजारों प्लॉट रचे होंगे लेकिन शायद ही कभी सोचा होगा कि अपने ही घर में उन्हें ऐसा कुछ देखना पड़ेगा।
बुधवार की सुबह मेरठ के शास्त्री नगर में उनके बेटे शगुन की फैंसी लाइट्स की शोरूम में सेंधमारी की कोशिश की गई। शोरूम शर्मा के घर से लगी हुई है। सेंधमारी की कोशिश में एक कम्प्यूटर सेट और कुछ फैंसी लाइट्स को नुकसान पहुंचा हालांकि चोर कोई भी सामान ले जा पाने में कामयाब नहीं हो पाया। 
इस घटना के बारे में वेद प्रकाश शर्मा टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'शोरूम में एक CCTV कैमरा लगा हुआ था। चोर को लगा होगा कि उसे रिकॉर्ड कर लिया गया है और इसकी रिकॉर्डिंग कम्प्यूटर में ही होगी इसलिए उसने जाने से पहले कम्प्यूटर में आग लगा दिया।' 
CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने अनाम चोर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। 'वर्दी वाला गुंडा' के मशहूर लेखर वेद प्रकाश शर्मा 'खिलाड़ी' सिरीज की बॉलिवुड फिल्मों 'सबसे बड़ा खिलाड़ी' और 'इंटरनैशनल खिलाड़ी' की कहानी लिख चुके हैं।

Wednesday, May 13, 2015

कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का कलैक्ट्रेट पर प्रदर्शन

मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल को पूरी तरह विफल बताते हुए कांग्रेसियों ने कलैक्ट्रेट पर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने मोदी का पुतला फूंका। अपनी मांगों के संबंध में राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन डीएम को सौंपा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले एक साल में मोदी सरकार का सांप्रदायिक चेहरा जनता के सामने आ गया है। यह सरकार किसानों की भूमि लेकर उसे उद्योगपतियों को देना चाहती है। इस सरकार में गरीब और अधिक गरीब होता जा रहा है, जबकि उद्योगपतियों के लिए सरकार ने अपना खजाना खोल रखा है। कांग्रेस शहर कमिटी के अध्यक्ष की अगुवाई में मंगलवार को कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने कलैक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने मंगलवार को यूपी के ब्लॉक मुख्यालयों पर भूमि अधिग्रहण संशोधन अध्यादेश की प्रतियां फूंक कर विरोध जताया। शहरों में विरोध प्रदर्शन जिला मुख्यालयों पर किया गया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सचिवों, यूपी अध्यक्ष डॉ़ निर्मल खत्री सहित प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारियों ने ब्लॉकों में आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं और किसानों का हौसला बढ़ाया। कांग्रेस ने किसानों को राहत देने के लिए उचित मुआवजा देने और आलू के निर्यात पर लगी रोक को खत्म करने की मांग की।

कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन सत्यदेव त्रिपाठी ने बताया कि डॉ़ खत्री ने कन्नौज के तालग्राम ब्लॉक और फर्रुखाबाद के कमालगंज ब्लॉकों में आंदोलन का नेतृत्व किया। प्रदेश सह प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव नसीब सिंह ने मथुरा के दो ब्लॉकों में आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके साथ कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता प्रदीप माथुर और विधायक बंशी पहाड़िया मौजूद रहे। वहीं लखनऊ के सभी आठ ब्लॉक मुख्यालयों पर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष गौरव चौधरी की अगुआई में कांग्रेस ने चिनहट ब्लॉक मुख्यालय पर अध्यादेश प्रतियां फूंकी। उनके साथ पूर्व विधायक विनोद चौधरी और जिला प्रभारी गणेश शंकर पाण्डेय सहित सैकड़ों कांग्रेसी और किसान मौजूद थे।

Monday, May 11, 2015

लड़की को एक सिरफिरे प्रेमी ने गोली मार दी

सोलह साल की लड़की को एक सिरफिरे प्रेमी ने इसलिए गोली मार दी क्योंकि उसने उसका प्रेम प्रस्ताव ठुकरा दिया।  घटना नरहेरा थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को 22 वर्षीय योगेंद्र ने आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली हिमांशी को तब गोली मार दी जब वह स्कूल से लौट रही थी।
परिजनों द्वारा दर्ज की गई शिकायत में पीड़िता के दादा बलजीत सिंह ने कहा है कि आरोपी लड़का एक ब्यूटी पार्लर का मालिक है। वह लड़की का पीछा किया करता था। लड़की ने परिवार से इसकी शिकायत भी की थी। 

लड़की के परिवार ने आरोपी लड़के के परिवार को इस बारे में आगाह किया था जिससे गुस्से में आकर लड़के ने लड़की की गोली मारकर हत्या कर दी। उन्होंने बताया कि लड़के के खिलाफ केस दर्ज कर आज उसे जेल भेज दिया गया।
पुलिस द्वारा की गई पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह लड़की से प्रेम करता था। लेकिन लड़की द्वारा उसका प्रेम प्रस्ताव ठुकराए जाने और शिकायत करने के बाद उसने उसको गोली मार दी।

Friday, May 8, 2015

क्या कोई कैलेंडर हजारों सालों तक चल सकता है?

क्या कोई कैलेंडर हजारों सालों तक चल सकता है? बिजनौर के जोहर अहमद ने एक ऐसा कैलेंडर बनाया है जिसे एक बार दीवार पर लगाने के बाद सदियों तक वहां से हटाने की जरूरत नहीं होगी।  हजारों सालों तक चलने वाले इस कैलेंडर को बनाने में जोहर को छह महीने का समय लगा। 

जोहर का कहना है कि कैलेंडरों को बार-बार बदलने की परेशानी को दूर करने के लिए उन्होंने यह अनोखा कैलेंजर बनाया है। उनका कहना है कि इससे 10-20 साल पुरानी किसी घटना का दिन पता लगाया जा सकता है। साथ ही आने वाले वर्षों के दिनों का भी पता लगाया जा सकता है।
जोहर ने इस बारे में राष्ट्रपति सचिवालय को भी पत्र भी भेजा है। सचिवालय ने यह पत्र केंद्र सरकार को दे दिया है और जोहर द्वारा बनाए गए कैलेंडर को सत्यापित कराने का कहा है। 

Wednesday, May 6, 2015

सुपरस्टार सलमान खान को 5 साल जेल की सजा

साल 2002 के हिट ऐंड रन केस में दोषी करार दिए गए बॉलिवुड सुपरस्टार सलमान खान को मुंबई की सेशंस कोर्ट ने 5 साल जेल की सजा सुनाई है। गैर इरादतन हत्या मामले में सलमान के खिलाफ लगे सभी आरोप कोर्ट ने सही पाए।
उतार चढ़ावों से भरे 12 साल पुराने इस मामले में न्यायाधीश डी डब्ल्यू देशपांडे ने 49 साल के ऐक्टर के खिलाफ फैसला सुनाया। इस मौके पर सलमान और उनका परिवार अदालत में मौजूद थे। अदालत ने कहा कि सलमान शराब पीकर गाड़ी चला रहे थे और उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था।
Bottom of Form

अदालत ने इस मामले का फैसला सुनाते हुए दिल्ली के बीएमडब्ल्यू निखिल नंदा और अलीस्टेयर परेरा मामले का अनुसरण करते हुए सलमान को दोषी ठहराया। अदालत ने सलमान से पूछा कि फैसले पर उन्हें क्या कहना है तो सलमान ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि हादसे के वक्त वह कार नहीं चला रहे थे।
वहीं, इस बीच मीडियाकर्मियों की भारी भीड़ के साथ पुलिसकर्मियों की झड़प भी हो गई। पुलिस ने इसके बाद मीडियाकर्मियों को बाहर कर कोर्ट रूम के दरवाजे को बंद कर दिया।
अदालत जिस समय अपना फैसला सुना रही थी, सलमान की आंखों में आंसू थे और वह चुपचाप खड़े थे। फैसले के बाद उनके वकील ने मामले की सजा की मात्रा पर जिरह शुरू की। इस महत्वपूर्ण मामले में आज फैसले को देखते हुए अदालत परिसर में और इसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई, जहां सलमान के भाई अरबाज, सोहेल, बहन अर्पिता खान सहित उनका परिवार आज सुबह ही पहुंच गया था।
28
सितंबर 2002 की रात को सलमान की टोयोटा लैंड कू्जर बांद्रा के उपनगरीय इलाके में पटरी पर सोए लोगों को कुचलती हुई एक बेकरी में घुस गई थी, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य घायल हुए थे। बांद्रा के मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट (जिन्होंने सलमान के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने के हल्के आरोप में सुनवाई की थी, जिसमें अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान है) ने 2012 में गैर इरादतन हत्या के अधिक गंभीर आरोप के साथ मामला सेशन कोर्ट को भेज दिया था।
जहां अभियोजन इस बात पर अडिग था कि हादसे के वक्त शराब पीकर सलमान ही लैंड क्रूजर चला रहे थे, वहीं सलमान का दावा था कि उस समय उनका ड्राइवर अशोक सिंह ड्राइविंग सीट पर था। सिंह ने भी बचाव पक्ष की इसी बात समर्थन किया। बचाव पक्ष ने यह दलील भी दी कि पुलिस ने स्टीयरिंग व्हील से उंगलियों के निशान नहीं उठाए थे, जिससे यह मालूम चले कि वाहन कौन चला रहा था।
अभियोजक प्रदीप घरात का आरोप था कि सलमान एक बार में 'बकार्डी रम' पीने के बाद गाड़ी चला रहे थे। हालांकि सलमान ने इस आरोप से इंकार करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ एक गिलास पानी पीया था। हादसे में नुरुल्लाह महबूब शरीफ की मौत हो गई थी, जबकि कलीम मोहम्मद पठान, मुन्ना मलाई खान, अब्दुल्लाह रौफ शेख और मुस्लिम शेख घायल हुए थे।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दाउंदकर ने एक अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने गलत डॉक्टरों से पूछताछ कर झूठे साक्ष्य पेश किए, जिससे मामले में तीन साल की देरी हुई। उन्होंने याचिका में पुलिस द्वारा मुख्य प्रत्यक्षदर्शी कमाल खान से पूछताछ नहीं किए जाने के संबंध में भी सवाल उठाए थे। सलमान खान को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग 2 (गैर इरादतन हत्या), 279 (लापरवाही से वाहन चलाना), 337 और 338 (गंभीर चोट पहुंचाना अथवा जीवन को खतरे में डालना) और 427 (संपति को नुकसान), के तहत आरोपित किया गया था। मोटर वाहन कानून के तहत खान के खिलाफ 34 (ए), (बी) पढ़ें 181 के साथ (नियमों के विरुद्ध वाहन चलाने) और 185 (शराब पीने के बाद तेज रफ्तार से वाहन चलाने) आरोप लगाए गए हैं। उनको बम्बई मद्यनिषेध कानून के तहत भी आरोपित किया गया, जो शराब के नशे में गाड़ी चलाने से जुड़ा है।
इससे पहले, सुबह नीली जींस और सफेद कमीज पहने सलमान एक सफेद कार से बांद्रा स्थित अपने आवास से दक्षिण मुंबई स्थित सेशंस कोर्ट पहुंचे। उनके साथ उनके बॉडीगार्ड थे। वहां बाहर लोगों का जमावड़ा था और एक तमिल समूह प्रदर्शन करते हुए ऐक्टर के लिए अधिकतम सजा की मांग कर रहा था जिन्होंने श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान महिन्दा राजपक्षे का समर्थन किया था।

Tuesday, May 5, 2015

धनतला गांव में किसानों ने महापंचायत बुलाई

खरखौदा के धनतला गांव में किसानों ने महापंचायत बुलाई। मोबाइल टावर से कूदकर आत्महत्या करने वाले किसान योगेंद्र के मामले में पुलिस ने गांव के किसानों पर मुकदमे दर्ज किए थे। इसके खिलाफ संघर्ष कर रहे किसानों ने महपंचायत में निर्णय लिया कि योगेंद्र के परिजनों को 15 लाख रुपये मुआवजा और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं होने तक राज्यमंत्री, सांसद और क्षेत्रीय विधायक को गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। साथ ही आने वाले पंचायत चुनाव का भी बहिष्कार किया जाएगा। पंचायत में किसान नेताओं के अलावा बीएसपी औऱ कांग्रेस के नेता भी शामिल हुए।

खरखौदा के धनतला में आयोजित महापंचायत में पूर्व जिला पंचायत सदस्य रविंद्र गुर्जर ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। एक ओर बर्बाद किसान अपनी जान दे रहे हैं, वहीं सरकारी अधिकारी किसानों पर ही मुकदमे दर्ज करा रहे हैं। डीएम की संस्तुति के बाद भी खरखौदा थाने के दरोगा को लाइन हाजिर नहीं किया गया। इसमें शामिल हुए कांग्रेस और बीएसपी के नेताओं ने भी एसपी सरकार पर किसानों की अनदेखी के आरोप लगाए।

Monday, May 4, 2015

खमियाजा मेरठ के एसएसपी को

ठेकेदार से मारपीट के आरोपी बीजेपी विधायक संगीत सोम के पिता ओमवीर सोम की गिरफ्तारी न कर पाने का खमियाजा मेरठ के एसएसपी को आखिर उठाना ही पड़ा। शासन ने शुक्रवार को उनका ट्रांसफर कर दिया है। मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद ओमवीर सोम की गिरफ्तारी न कर पाने के कारण यह तय माना जा रहा था कि एसएसपी सुभाष चंद बघेल पर गाज जल्द गिरेगी।
प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑडर मुकुल गोयल ने शुक्रवार को यहां मंडल की समीक्षा की थी। तब तक सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन शाम को शासन ने मेरठ के एसएसपी सुभाष चंद बघेल के तबादले के आदेश जारी कर दिए। राजनीतिक गलियारों में यह कयास कई दिनों से लगाए जा रहे थे। चर्चा थी कि ठेकेदार के साथ मारपीट करने के आरोपी बीजेपी विधायक संगीत सोम के पिता ओमवीर सोम को गिरफ्तार करने के आदेश खुद मुख्यमंत्री ने दिए थे। पुलिस की आठ टीमें गठित कर छापेमारी की गई, लेकिन ओमवीर पुलिस के हाथ नहीं लग पाए। इसी दौरान हाईकोर्ट से उनकी गिरफ्तारी पर स्टे के आदेश आ गए। इस पर एसपी के स्थानीय नेताओं ने लखनऊ में बैठे आकाओं से शिकायत की और यह बताया गया कि एसएसपी की संगीत सोम से नजदीकियों के कारण ही उनके पिता को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। बताया यह भी जा रहा है कि इस मामले में मुख्यमंत्री भी एसएसपी से नाराज थे। आखिरकार शुक्रवार को एसएसपी को उसका परिणाम भुगतना पड़ ही गया।