नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए शहर की सड़कों पर दौड़ने वाले विभिन्न
व्यावसायिक वाहनों के साथ-साथ 49 मदों में लाइसेंस जारी करके शुल्क
की वसूली की जाएगी। पार्षदों ने हाउस टैक्स की वसूली में भ्रष्टाचार का आरोप
लगाया। इसके लक्ष्य को 20 से बढ़ाकर 30 करोड़ कर दिया गया है। बोर्ड बैठक में 397 करोड़ रुपये
के पुनरीक्षित बजट को स्वीकृति दी गई तथा प्रत्येक वार्ड में 30 लाख के विकास कार्य कराने का निर्णय लिया गया।
शनिवार को टाउन हाल में आयोजित नगर निगम की पुनरीक्षित बजट में हंगामे के
बीच 397 करोड़ के पुनरीक्षित बजट को स्वीकृति दी गई। हालांकि इससे
पहले निगम की आय बढ़ाने पर महापौर के नेतृत्व में दो घंटे मंथन हुआ। सबसे ज्यादा
हंगामा हाउस टैक्स वसूली में अफसरों की लापरवाही तथा भ्रष्टाचार पर हुआ। पार्षद
गौरव नामदेव, शाहिद अब्बासी तथा विजय आनंद आदि ने वर्ष 2015-16
के बजट में हाउस टैक्स की प्रस्तावित आय को 27 करोड़ से घटाकर 20 करोड़ करने पर आपत्ति जताई। दीवानजी
शरीफ ने आरोप लगाया कि निगम के अफसर कर्मचारी हास्पिटल व विवाह मंडप समेत बड़े-बड़े
भवनों पर हाउस टैक्स न लगाकर उनसे अवैध वसूली करते हैं। प्रत्येक वार्ड में हजारों
मकान टैक्स से छूटे हैं। नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह ने भी माना की मेरठ में
स्थिति शर्मनाक है। शहर में पांच लाख से अधिक मकान हैं, जबकि
वसूली महज 2.54 लाख मकानों से हो रही है। उप नगर आयुक्त
दिनेश यादव ने बताया कि दिसंबर तक 21 करोड़ रुपये वसूले गए
हैं। महापौर ने हाउस टैक्स के लक्ष्य को बढ़ाकर 30 करोड़ करने
के साथ इसे सख्ती से वसूलने का आदेश दिया। पार्षदों से ऐसे भवनों की सूची भी
मांगी।
इधर, शाहिद अब्बासी ने कहा कि बड़ी संख्या में ऑटो, टेंपो व ई-रिक्शा सड़कों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन
लाइसेंस नहीं ले रहे। पंकज कतीरा ने बताया कि सात फरवरी 2003 के शासनादेश में निगम को ऑटो, टेंपो व रिक्शा-ठेले
समेत व्यावसायिक वाहनों, नर्सिग होमों, क्लीनिक तथा बरातघर समेत 49 मदों में लाइसेंस जारी
कर वार्षिक शुल्क वसूलने का अधिकार है। उप नगर आयुक्त ने बताया कि इनमें से 27
मदों में लाइसेंस की प्रक्रिया गत वर्ष से शुरू कर दी गई है। वाहनों
से शुल्क वसूली के लिए उन्हें स्टैंड की सुविधा देनी होगी, लेकिन
जमीन नहीं है। पार्षदों ने कहा कि तांगा स्टैंड की खाली पड़ी जमीनों को इसमें उपयोग
किया जाए। वाहनों को लाइसेंस जारी करने तथा वसूली के लिए ठेका देने का फैसला लिया
गया।
विज्ञापन शुल्क की वसूली का दो करोड़ का लक्ष्य था, लेकिन
मात्र 81 लाख वसूली पर पार्षद भड़क गए। विज्ञापन प्रभारी पर
कार्यकारिणी की बैठक में 1.11 करोड़ की वसूली का झूठा दावा
करने का आरोप लगाया। नगर आयुक्त ने कहा कि अब हम खुद इस वसूली की कमान संभालेंगे।
महापौर ने होर्डिग व विज्ञापन पटों से सख्ती से वसूली करके लक्ष्य पूरा करने का
आदेश दिया।
जब पार्षदों ने आरोप लगाया कि अभी तक 50 फीसदी भवनों को बिल तक
जारी नहीं किए गए हैं। महापौर ने इस पर नाराजगी जताई तथा तत्काल बिल वितरण का आदेश
दिया।
30-30 लाख
के विकास, सुधरेंगे पार्क
बैठक के दौरान पार्षदों ने बोर्ड फंड से सभी वार्डो में 30-30 लाख
के विकास कार्य कराने की मांग की। बाहरी वार्डो के पार्षदों ने यह राशि 60 लाख करने की मांग रखी।
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