दो रोज पहले दो टेंपो चालकों की रेस में सनबीम स्कूल के छात्र प्रणब की जान
चली गई पर जिम्मेदार विभाग पर कोई असर दिखाई नहीं देता। परिवहन विभाग और यातायात
पुलिस के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वाहनों का नियम विरुद्ध संचालन थम नहीं
रहा। टेंपो-ऑटो तो बेधड़क दौड़ ही रहे हैं, अब तो हजारों की संख्या
में ई-रिक्शा सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। ऐसे में हादसे लगातार हो रहे हैं।
चीत्कारों पर भी साहबों का सन्नाटा नहीं टूट रहा।
नियम-कायदों की नहीं परवाह
सड़कों पर नियम-कायदों को ठेंगा दिखाते टेंपो और आटो दौड़ रहे हैं। न तो इनकी
फिटनेस की जांच होती है न ही कोई और शिकंजा कसा जाता है। देखने में आता है कि
टेंपो-आटो चालक भीड़ में यातायात नियमों को धता बताते हुए बेधड़क निकल जाते हैं।
ई-रिक्शा के रूप में एक नई मुसीबत और खड़ी हो चुकी है।
ई-रिक्शा में जान हथेली पर
अगर ई-रिक्शा में कोई सवार है तो समझिए कि उसकी जान हथेली पर है। ई-रिक्शा
वैसे तो बैट्री से चलता है। इसे चलाना भी आसान है। इसमें कोई विशेष खर्चा भी नहीं
होता। शहर के अधिकांश हाथ रिक्शा चालकों ने इसे अपना भी लिया है। अब सड़क पर जिधर
देखो ई-रिक्शा नजर आता है। एक साल के भीतर शहर की सड़कों पर दस से 15 हजार
के बीच ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं।
एक भी पंजीकरण नहीं
केंद्र सरकार ने बैट्री से चलने वाले ई-रिक्शा को वातावरण का मित्र मानते
हुए इसके संचालन की अनुमति दी थी, लेकिन पंजीकरण और चालक का ड्राइविंग
लाइसेंस आवश्यक किया था। सचाई यह है कि शहर में आज तक एक भी ई-रिक्शा का पंजीकरण
नहीं हुआ है। मात्र एक व्यक्ति ने ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया है। अनट्रेंड
लोगों के हाथ में ई-रिक्शा का स्टेय¨रग होता है।
सरकार की सहूलियत पर अमल नहीं
ई-रिक्शा चालकों को ड्राइविंग लाइसेंस की शर्तो में तमाम छूट देते हुए
सरकार ने विशेष लाइसेंस जारी करने की तैयारी की। स्पेशल सॉफ्टवेयर पूरे प्रदेश में
उपलब्ध कराया गया, लेकिन सब कुछ बेकार। कोई चालक लाइसेंस लेने के लिए नहीं आ
रहा है।
ई-रिक्शा वालों को ये है छूट
- कोई
शैक्षिक योग्यता की जरूरत नहीं।
- एक
साल पुराना लाइसेंस भी नहीं चाहिए।
- उम्र
बीस वर्ष से कम न हो।
- ड्राइविंग
स्कूल से प्रशिक्षण के स्थान पर केवल 10 दिन का प्रशिक्षण
जरूरी।
डीलर भी कर रहे मनमानी
प्रदेश में ई-रिक्शा की बिक्री के लिए अभी तक मात्र छह कंपनियों ने परिवहन
आयुक्त से अनुमति प्राप्त की है। इन कंपनियों से डीलरशिप लेने वाले पांच शोरूम
मालिकों ने आरटीओ मेरठ में पंजीकरण कराकर ट्रेड सर्टिफिकेट प्राप्त किया है। नियम
है कि कोई भी वाहन परिवहन विभाग से रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त करने से पहले सड़क पर
नहीं उतरेगा लेकिन सभी डीलर धड़ाधड़ ई-रिक्शा की बिक्री कर रहे हैं और बिना पंजीकरण
ही उन्हें सौंप रहे हैं। यह ट्रेड सर्टिफिकेट की शर्तो का उल्लंघन है।
न रूट बनाए, न डंडा चलाया
ई-रिक्शा चालक और डीलर सभी मनमानी पर उतारू हैं। परिवहन विभाग और यातायात
पुलिस के कंधे पर जिम्मेदारी है कि वे इस मनमानी के खिलाफ डंडा चलाएं और जनता को
सुरक्षित यातायात की सुविधा उपलब्ध कराएं। लेकिन दोनों विभागों के अफसर कुंभकर्णी
नींद में हैं।
घोषणा हवाई रह गई
आरटीओ ने अवैध रूप से चलने वाले ई-रिक्शा संचालकों के खिलाफ अगस्त से
अभियान चलाने की घोषणा की थी लेकिन वह सब हवा-हवाई रहा। जबकि 22 जुलाई
को आरटीए की बैठक में कमिश्नर की अध्यक्षता में ई-रिक्शा के लिए शहर में 17
रूट निर्धारित करके, सभी को पंजीकरण और
लाइसेंस के साथ विशेष रूट का परमिट जारी करने का फैसला लिया गया था।
छह कंपनियों का ही बिक सकता है ई-रिक्शा
ब्रांड का नाम कंपनी
1. यात्री
वाई सी इलेक्ट्रिकल व्हीकल मुंडका दिल्ली
2. हावेल
हावेल सिलेंडर प्राइवेट लि.
3. विक्टरी
विक्टरी इलेक्ट्रिक इंटरनेशनल बहादुरगढ़ हरियाणा
4. मैक्सी
निखिल फर्नीचर नागपुर
5. सारथी
चेंपियन पॉलीप्लास्ट नई दिल्ली
6. ठुकराल
ठुकराल इलेक्ट्रिक बाइक प्रा. लि.
मेरठ में ये डीलर हैं पंजीकृत
1. आदि
शक्ति ई रिक्शा गंगानगर
2. मेरठ
एंटरप्राइजेज जमुनानगर हापुड़ रोड
3. मै.
वर्मा एंटरप्राइजेज जाग्रति विहार
4. सतगुरु
एंटरप्राइजेज कृष्णा विहार भोला रोड
5. मित्तल
एंटरप्राइजेज बागपत रोड
हंगामे से डरते हैं अफसर
परिवहन अफसर अवैध रूप से चल रहे ई-रिक्शा के खिलाफ कार्रवाई करने से इसलिए
डरते हैं कि रिक्शा चालकों की भीड़ इसके खिलाफ हंगामा करेगी। परिवहन अफसरों का कहना
है कि ग्राम पंचायत चुनाव के बाद इस संबंध में कोई कार्रवाई की योजना तैयार की
जाएगी।