केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन
गडकरी ने भरोसा दिलाया है कि मेरठ से दिल्ली के बीच का 75 किमी
का सफर दो वर्ष में महज 40 मिनट में तय होने लगेगा। दैनिक
जागरण की ओर से गुरुवार को आयोजित जागरण फोरम में गडकरी ने कहा कि दिल्ली-मेरठ
एक्सप्रेस वे की तैयारियां भी पूरी हो गई हैं। इस पर जनवरी से काम शुरू हो जाएगा।
मौजूदा समय में मेरठ से दिल्ली के सफर में आमतौर पर ढाई से तीन घंटे का समय लग
जाता है और जनता को जाम और भारी प्रदूषण आदि से जूझना पड़ता है।
जागरण फोरम के विशेष सत्र में सवालों के जवाब में गडकरी ने कहा कि दिल्ली
के जाम में मैं पहली बार नहीं फंसा। रोज फंसता हूं। खासकर एयरपोर्ट जाते वक्त
धौलाकुआं से गुड़गांव के बीच। इसलिए एनएचएआइ से डिजाइन देने को कहा है। दिल्ली के
ट्रैफिक के अध्ययन के आदेश भी दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट मंगलवार
को मिलेगी। भूरेलाल समिति की रिपोर्ट पर 13 हजार करोड़ रुपये
का प्रोजेक्ट भी तैयार कर दिया है। लेकिन वास्तविक समाधान ईस्टर्न व वेस्टर्न
पेरीफेरल एक्सप्रेसवे बनने पर होगा। इन्हें 400 दिन में पूरा
करेंगे। दिल्ली जयपुर हाईवे के बारे में गडकरी का कहना था कि 87 फीसद काम पूरा हो चुका है। 55 फ्लाईओवर में से 50
पूरे हो गए हैं। बाकी भी मार्च तक पूरे हो जाएंगे।
दिल्ली स्थित निजामुद्दीन ब्रिज से डासना तक एक्सप्रेस वे और हाईवे को
मिलाकर कुल 14 लेन की सड़क बनेगी। इसमें छह लेन का एक्सप्रेस-वे होगा
जबकि आठ लेन का हाईवे। यह दूरी लगभग 30 किमी की होगी। इसके
बाद एक्सप्रेस वे डासना से मेरठ परतापुर तिराहे तक छह लेन का आएगा। यहां से बच्चा
पार्क के निकट एनएच-235 को कनेक्ट करेगा।
ये हैं चुनौतियां
प्रोजेक्ट के लिए मेरठ के 14 गांव की 108.36 हेक्टेयर भूमि जबकि गाजियाबाद के 19 गांव की 333
हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। अधिग्रहण को लेकर पेच अब भी
फंसा है। किसानों की मांग है कि उन्हें मुआवजा 10 हजार रुपये
प्रति वर्ग मीटर की दर से दिया जाए, लेकिन जो सरकारी रेट है,
वह एक तिहाई से भी कम बताई जा रही है, जो
किसानों को मान्य नहीं है। वैसे भी मेरठ में अब तक 10 गांव
की भूमि के अधिग्रहण की ही प्रक्रिया पूरी हुई है।
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