Thursday, April 30, 2015

नवोदय स्कूल में ब्रेकफास्ट करते ही 21 स्टूडेंट्स की हालत बिगड़ गई

सरधना स्थित जवाहर नवोदय स्कूल में ब्रेकफास्ट करते ही 21 स्टूडेंट्स की हालत बिगड़ गई। उन्हें उल्टी और दस्त होने लगा। सभी को सीएचसी ले जाया गया। 19 छात्रों को इलाज के बाद वापस स्कूल भेज दिया गया, जबकि दो का इलाज चल रहा है। सीडीओ नवनीत चाहल ने स्कूल से पानी और खाद्य साम्रागी के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए भिजवा दिया है। वहीं प्रिसिंपल ने स्कूल को खाना सप्लाई करने वाले के खिलाफ केस दर्ज कराई है।

सरधना की नवाबगढ़ी में केंद्र सरकार की योजना के तहत जवाहर नवोदय विद्यालय खोला गया था। यहां 12 वीं कक्षा तक के छात्र व छात्राएं हॉस्टल में रह कर पढ़ते हैं। सोमवार सुबह छात्रों को ब्रेकफास्ट में पोहा दिया गया था। पोहा खाते ही 21 छात्र- छात्राओं की तबीयत खराब हो गई। उन्हें उल्टियां और दस्त होने लगा। इसकी जानकारी होते ही एंबुलेंस बुला कर छात्र- छात्राओं को पास की सीएचसी ले जाया गया। ये सभी बच्चे 12 से 16 के हैं। डॉक्टरों ने 19 बच्चों को इलाज के बाद वापस स्कूल जाने की इजाजत दे दी। सीडीओं नवनीत चाहल स्कूल पहुंचे। उनके साथ डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक निगम, नगर निगम की वाटर सैंपलिंग टीम और फूड इंस्पेक्टर भी थे। छात्रों के मेस के पास गंदगी देख उन्होंने स्कूल प्रशासन को फटकार लगाई और अच्छी तरह सफाई कराने के आदेश दिए। सीडीओ ने बताया की उनके साथ गई टीम ने स्कूल से पानी और खाद्य साम्रगी के सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल के प्रिंसपल ने खाना सप्लाई करने वाले के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया है।

Tuesday, April 28, 2015

रबर प्लांट में बॉयलर फटने से आग लगी

खरखौदा थाना क्षेत्र के नौगजा पीर के पास स्थित रबर प्लांट में बॉयलर फटने से आग लगी गई। आग इतनी भयंकर थी कि उसकी लपटें आसमान छू रही थीं। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को आग पर काबू पाने में पूरा दिन लग गया। इस आग से लाखों का नुकसान हुआ। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

मुजफ्फरनगर के नीरज तायल का रबर प्रोसेसिंग प्लांट है। यहां पर पुराने टायरों को जला कर उनमें काला तेल मिलाकर कैमिकल तैयार किया जाता है। जिसका सड़क बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। शनिवार सुबह 9 बजे प्लांट का बॉयलर फटने से वहां रखे टायरों के स्क्रेप में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप घारण कर लिया। लोगों ने घटना की जानकारी फायर ब्रिगेड को दी। 8 गाड़ियां मौके पर पहुंची और प्लांट में लगी आग पर काबू पाने का प्रयास किया। लेकिन आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि काबू पाने में पूरा दिन लग गया। हादसे से प्लांट में रखा लाखों का स्क्रेप जल कर राख हो गया।

Monday, April 27, 2015

पुलिस भी मौन

सरधना थाना क्षेत्र के कुशावली गांव में एक किसान का शव रविवार की सुबह अपने ही खेत में पेड़ से लटका मिला। घरवालों का कहना है कि किसान ने आत्महत्या की है। परिजनों के अनुरोध पर पुलिस ने किसान का शव बिना पोस्टमॉर्टम कराए उनके घरवालों को सौंप दिया। मौके पर पहुंचे राजस्व अधिकारियों ने परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलवाने का आश्वासन दिया है। कुशावली निवासी 36 साल के किसान राजकुमार शनिवार की शाम से ही लापता था। देर रात तक घर न पहुंचने पर उसके परिजनों ने तलाश शुरू की। रविवार सुबह उसका शव उसके ही खेत में एक पेड से लटका मिला। घरवालों ने पुलिस को बताया कि किसान ने आत्महत्या की है और वे उसका पोस्टमॉर्टम नहीं कराना चाहते हैं। परिजनों के लिखित अनुरोध पर पुलिस ने शव को पीएम कराए बिना ही उनको सौंप दिया। परिजनों ने शव का दाह संस्कार कर दिया। इस घटना की सूचना पर एसडीएम सरधना और तहसीलदार गांव पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी ली। उन्होंने मरने वाले किसान के परिजनों से मिलकर उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। इस घटना की सबसे अहम बात यह है कि घरवाले यह तो स्वीकार कर रहे हैं कि राजकुमार ने आत्महत्या की है, लेकिन किस कारण से आत्महत्या की है इस विषय पर कोई कुछ नहीं बोल रहा है। पुलिस भी इस पर मौन है।

Friday, April 24, 2015

यही वह जगह है जहां सालों पहले मैंने अपने बेटे को खो दिया

करीब तीन फाइव स्टार होटल के मालिक सादिक भारती की पहचान एक संपन्न और मशहूर कैटरर के तौर पर है। उनके 3 बेटे एक अच्छा शेफ बनने की उम्मीद में दिल्ली और राजस्थान में फैंसी रेस्टोरेंट चेन में काम कर रहे हैं। लेकिन, भारती का चौथा बेटा उनसे बिछड़ चुका है। अपने इसी बेटे को पाने की आस लिए सादिक 1992 से लगातार ठीक उसी जगह पर अपना फूड स्टॉल लगाते आ रहे हैं, जहां से करीब 23 साल पहले उनका बेटा युसुफ खो गया था।
बेटे की बात आते ही उनकी आंखों में आंसू भर जाते हैं। वह कहते हैं कि यह जो कुछ भी आप देख रहे हैं, वह पैसों के लिए नहीं है। यही वह जगह है जहां सालों पहले मैंने अपने बेटे को खो दिया था। अब तो वह 26 साल का नौजवान हो गया होगा। 55 साल के हो चुके भारती कहते हैं कि जब तक हो सकेगा, ऐसे ही अपने बेटे को खोजता रहूंगा। शायद वह कभी वापस आ जाए। इसी जगह से कोई उसे (यूसुफ) उठा ले गया था। अगर वह कभी वापस आया, तो सिर्फ इसी जगह मिलेगा। मैं तब तक उसका इंतजार करूंगा।
हालांकि, भारती मानते हैं कि तीन साल के बच्चे को यह चीजें इतने लंबे समय तक याद नहीं रह सकती। लेकिन, उनकी जिद है कि वह उम्मीद नहीं छोड़ेंगे। वह हर हफ्ते नौचंदी पुलिस स्टेशन भी जरूर जाते हैं। इसी थाने में उन्होंने बच्चे के खोने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नारी निकेतन और जुवेनाइल जेल के वह अब तक अनगिनत चक्कर काट चुके हैं। हर साल मेले के दौरान आने वाले बंजारों के टच में भी बने रहते हैं।
भारती कहते हैं कि ऊपरवाले में उनका पूरा विश्वास है। वह बेटे को वापस पाने की दुआ मांगने राजस्थान की अजमेर शरीफ और दिल्ली स्थित निजामुद्दीन की दरगाह पर भी बहुत बार जा चुके हैं। वह बताते हैं, लोगों के कहने पर मैं कई ज्योतिषियों से भी मिला। उनपर अपनी मेहनत से कमाए हुए ढेर सारे पैसे लुटा दिए। उनमें से एक ने बताया कि मुझे मेरा बेटा लखनऊ में मिल जाएगा। मैंने एक पल के लिए भी दोबारा नहीं सोचा, तुरंत ट्रेन पकड़ी और लखनऊ पहुंच गया। सड़कों पर इधर से उधर भटकता रहा। लेकिन, सब बेकार गया। जिगर का टुकड़ा नहीं मिला।

सादिक भारती पिछले एक दशक से मेला देखने आने वालों को फ्री में पानी पिला रहे हैं और दान भी कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद किसी दिन अल्लाह उनके अच्छे कामों को देखें और उन्हें उनका बेटा लौटा दें। बेटे से बिछड़ने की तकलीफ आज भी उनके दिल को कचोटती है।

Thursday, April 16, 2015

अनुसूचित जाति के लोगों पर प्रदेश की पुलिस गुंडा एक्ट लगाकर उन्हें गुंडा घोषित कर रही है

मेरठ मंडल के शिकायतों की समीक्षा करने आए अनुसूचित जाति-जन जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया ने बताया कि मंडल के 6 जिलों में मेरठ से सबसे ज्यादा शिकायतें उन्हें मिली हैं। इनमें से अधिकांश शिकायतें पुलिस के खिलाफ हैं। देश के अन्य प्रदेश के मुकाबले यूपी से आयोग को सबसे ज्यादा शिकायतें मिलती हैं। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों के मामले में अधिकारी उतने संवेदनशील नहीं है, जितना उन्हें होना चाहिए। मंडलस्तर पर उनके द्वारा की जा रही समीक्षा बैठक को उन्होंने बहुत प्रभावी कदम बताया।
पूनिया ने बताया कि मीटिंग में कुल 82 मामले थे। इनमें से 38 मेरठ, 20 बुलंदशहर, 12 गौतम बुद्धनगर, 4 गाजियाबाद, 3 हापुड़ और 5 बागपत के थे। इनमें से अधिकांश मामले पुलिस के खिलाफ थे। पीड़ितो की एफआईआर न लिखे जाने की शिकायत सबसे ज्यादा मिली। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि एफआईआर लिखाने के लिए पीड़ितो को आयोग के पास आना पड़ता है। उन्होंने बताया कि आज मंडल के अधिकांश मामलों का निस्तारण हो गया है। अध्यक्ष ने यह भी बताया कि पूरे देश में सबसे ज्यादा शिकायतें उन्हें यूपी से मिलती हैं, जबकि सबसे ज्यादा रेप के मामले मध्यप्रदेश से आते हैं।
पूनिया ने कहा कि उनके संज्ञान में यह बात भी आई है कि अनुसूचित जाति के लोगों पर प्रदेश की पुलिस गुंडा एक्ट लगाकर उन्हें गुंडा घोषित कर रही है। उन्होंने इस संदर्भ में भी अधिकारियेां को निर्देश दिए हैं कि फर्जी गुंडे न बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि हर जिले में एक विजिलेंस कमेटी के गठन किए जाने का प्रावधान है। बुलंदशहर जनपद में अभी तक कमेटी गठित नहीं की गई है। और जहां कमेटी गठित है वहां भी नियमानुसार उनकी बैठके नहीं हो रही हैं। उन्होंने बताया कि मंडल में गाजियाबाद के थाना लोनी के विजयनगर, मोदीनगर और गौतमबुद्धनगर के गांव कनावनी और शादपुर को संवेदनशील मानते हुए वहां से अनुसूचित जाति से संबंधित शिकायतों पर अधिक संवेदनशीलता से काम करने को कहा गया है।
रामपुर में बाल्मिकियों के धर्मांतरण की धमकी पर उन्होंने कहा कि पीड़ित उनसे मिले थे। उन्होंने रामपुर के डीएम सीपी तिवारी से फोन पर बात की थी। डीएम ने उन्हें बताया है कि किसी का भी उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। पूनिया ने बताया कि उन्होंने डीएम से पूरे मामले की रिपोर्ट भी तलब की है।

बीजेपी के सरधना विधायक संगीत सोम के पिता ओेमवीर सोम और उनके साथियों द्वारा भट्टा ठेकेदार धर्मेंद्र की पिटाई के मामले में आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि वे अस्पताल में धर्मेंद्र से मिलने गए थे। उनका परिवार अभी भी डरा हुआ है। पुनिया ने बताया कि इस बारे में उनकी एसएसपी और डीआईजी से बात हुई है। उन्होंने फरार चल रहे ओमवीर सोम को गिरफ्तार करने का भरोसा दिया है। आयोग इस कार्रवाई पर अपनी नजर रखेगा और पीड़ित को न्याय दिलवाएगा।

Wednesday, April 15, 2015

रबी की फसल (गेहूं, सरसों) चौपट

इस समय पूरे प्रदेश के किसान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल रहे हैं। उनकी रबी की फसल (गेहूं, सरसों) चौपट हो चुकी है। इस वजह से कई किसान खुदकुशी कर चुके हैं और कई की सदमे से मौत हो गई है। ऐसे में उनके लिए पारंपरिक खेती की जगह बागवानी या फूलों की खेती ज्यादा सुरक्षित और लाभदायक विकल्प के तौर पर सामने आ सकती है। लेकिन, जाट बेल्ट में ज्यादातर किसान इसे अपनाना नहीं चाहते। पारंपरिक फसलों को वे अपने सम्मान से जोड़कर देखते हैं। उन्हें लग रहा है कि खेत में फूल उगाने से उनकी 'मूंछ' कट जाएगी। क्योंकि, उनकी नजर में सब्जी और फूल की खेती छोटी जाति के किसान करते हैं।
दरअसल, जाट बेल्ट में खेती और फसलें किसानों के लिए रोजी-रोटी के साधन से कहीं ज्यादा प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि फसल को बदलने की बात आते ही मामला उनकी 'मूंछों' का हो जाता है। वहीं, एक तथ्य यह भी है कि इस एरिया में फूलों की डिमांड बहुत है। इसे उगाने में फायदा भी ज्यादा है। लेकिन, गेहूं और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलें लगाते चले आए किसान इन्हें छोड़ना नहीं चाहते, फिर भले ही उन्हें कितना भी नुकसान क्यों न उठाना पड़े।
इसकी वजह इस क्षेत्र में मौजूद सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था का कनेक्शन है। आमतौर पर सब्जियों और फूलों की खेती निचली जाति के किसान करते रहे हैं। मेरठ शहर से 30 किलोमीटर दूर नायडू गांव के किसान विकास नायडू का कहना है कि अगर हमने उनकी (निचली जाति के किसानों) तरह खेती करना शुरू कर दिया, तो यह हमारे लिए बड़े शर्म की बात होगी। मवाना खुर्द गांव के प्रधान अजय त्यागी नायडू की बातों से सहमत हैं। उनका कहना है कि आमतौर पर सब्जी और फूल उगाने वाले लोग लेबर क्लास के हैं। वे किसान नहीं हैं। उनका कहना है कि इस बार बारिश से हमारी फसलों को नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हम ऐसी फसलों की खेती करने लग जाएं, जो हमारे स्टेटस को सूट नहीं करता हो।
जिला बागवानी अधिकारी अरुण कुमार इसे अलग ही नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है कि इसमें सम्मान की कोई बात नहीं है। जो लोग इसे 'मूंछ' की लड़ाई बता रहे हैं, यह उनके आलसीपन को दिखाता है। अगर बड़े किसान वैकल्पिक खेती जैसे सब्जी और बागवानी नहीं करना चाहते हैं, तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि इसमें बहुत मेहनत की जरूरत पड़ती है। हर रोज देखरेख की जरूरत होती है। वहीं, गन्ने या अन्य फसलों में उतनी ज्यादा देखरेख की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा ये किसान बहुत लंबे समय से पारंपरिक खेती करते आ रहे हैं, तो यह उनके लिए सहज और सुविधाजनक लगने लगा है। वे इस कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर अतिरिक्त मेहनत नहीं करना चाहते। यही वजह है कि वे इस तरह के बहाने बना रहे हैं।
फूलों का बिजनेस करने वाले राकेश प्रधान का कहना है कि जब मैंने पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी शुरू की थी, तब अन्य किसानों ने मेरा मजाक उड़ाया था। लेकिन मैं लगा रहा और मुझे खुशी है कि मैं इसमें कामयाब भी हुआ। फूलों का पेमेंट मुझे कैश में मिल जाता है। पेमेंट कभी लेट भी नहीं होता। जबकि, अन्य फसलों का भुगतान लेट से ही मिलता था। यही नहीं, मौसम की मार से उनमें भारी नुकसान भी होता था। भारतीय किसान यूनियन के नरेश टिकैत कहते हैं कि यह मुद्दा किसानों के सम्मान से नहीं जुड़ा है। मुझे लगता है कि अगर सही गाइडेंस मिले, तो किसान वैकल्पिक खेती अपनाने के लिए तैयार हैं। किसानों की आलोचना करने वाले तो बहुत हैं, लेकिन उन्हें टेक्निकल सपोर्ट देने के लिए बहुत कम लोग आगे आते हैं।

Monday, April 13, 2015

मारपीट व एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज

सरधना क्षेत्र से बीजेपी विधायक संगीत सोम के पिता ओमवीर सोम, मुनीम धर्मपाल और 4 अज्ञात के खिलाफ गुरुवार देर रात पुलिस ने मारपीट व एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुनीम को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। ओमवीर सोम के भट्टे पर काम करने वाले धर्मेंद्र ने एसपी से मिलकर आरोपियों की ओर से बुरी तरह पीटने और जातिसूचक शब्द कह कर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।
एसओ सरधना मेहर सिंह ने बताया कि धर्मेंद्र की तहरीर पर ओमवीर सोम, धर्मपाल और 4 अज्ञात के खिलाफ मारपीट और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। अन्य अरोपियों की तलाश की जा रही है।

गौरतलब है कि गुरुवार को धर्मेंद्र ने एसपी आरए से मिलकर अपने शरीर पर आए चोट के निशान दिखाए थे। धर्मेंद्र ने बताया था कि संगीत सोम के पिता ओमवीर सोम के ईंट के भट्टे के मुनीम धर्मपाल और 4 अन्य उसे जबरन जीप में डालकर फार्म हाउस ले गए। वहां आरोपियों ने बुरी तरह पीटा। वह बेहोश हो गया तो उसे नहर के किनारे फेंक दिया गया। होश आने पर वह एफआईआर दर्ज कराने सरधना थाने गया, लेकिन पुलिस ने उसे वहां से भगा दिया।
एसपी आरए एमएम बेग ने सीओ सरधना को इस घटना की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। घायल धर्मेंद्र को शुक्रवार को जिला अस्पताल ले जाया गया। आरोप है कि वहां पहले से खड़े कुछ लोगों ने धर्मेंद्र को मुकदमा वापस लेने के लिए कहा। यह भी आरोप है कि मना करने पर उसे परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। हालांकि पुलिस अभी ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार कर रही है। धर्मेंद्र की हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है।