Wednesday, August 26, 2015

स्वच्छ भारत अभियान

साथियों
स्वच्छ भारत अभियान हम सभी का अभियान हो, ऐसी कामनाएं .

हम सब मिलकर अपने आस पास गंदगी न होने दें । 

Monday, August 24, 2015

अवैध हथियारों का कारोबार जोर पकड़ने लगा

प्रदेश में पंचायत चुनाव की दस्तक के साथ ही अवैध हथियारों का कारोबार जोर पकड़ने लगता है। यहां सरधना में गुरुवार को एक ही समुदाय को दो गुटों के बीच जमकर खूनी संघर्ष हुआ। पुलिस का कहना है कि इस संघर्ष में अवैध हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। पंचायत चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं अवैध हथियारों के सप्लायर एक्टिव होते जा रहे हैं।
तय है सेफ एरिया : खुफिया विभाग को जानकारी मिली थी कि मेरठ शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में देसी तमंचे, रिवॉल्वर और राइफल धड़ल्ले से तैयार किए जा रहे हैं। मौत के इस सामान की खरीद फरोख्त के लिए गंगा से लगे खादर क्षेत्रों के सुरक्षित माना जाता है। कहा जाता है कि अवैध हथियारों के धंधे में शामिल इस एरिया के लोग सौदा करने के लिए सबसे विश्वसनीय होते हैं। खुफिया विभाग ने पंचायत चुनावों को लेकर यूपी में अलर्ट जारी कर दिया है।
दूर तक फैला है कारोबार : यूपी से लेकर बिहार तक फैली चुनावी सरगर्मी से हथियारों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। जानकारों के मुताबिक यूपी में तमंचा बनाने का कारोबार करोड़ों रुपये का है। यह कारोबार वेस्ट यूपी में सहारनपुर, शामली, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़, अलीगढ़ और गाजियाबाद में फैला हुआ है। इस कारोबार से गौतमबुद्धनगर, बदायूं, बरेली, एटा, आगरा, मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर भी पीछे नहीं है। यहां हथियार तैयार करने वाली फैक्ट्रियां चुनाव से पहले ऑर्डर सप्लाई करने की कोशिश में लगी हुई हैं।
सॉलिड है नेटवर्क : एक महीने पहले खरखौंदा पुलिस ने हुमायूं नगर में छापेमारी की थी। इस दौरान पुलिस ने उधम सिंह गैंग के दो शार्प शूटर्स को अरेस्ट किया था। पुलिस के अनुसार ये शूटर्स गैंग के लिए हथियारों की खेप लेने आए थे। लेकिन इसके बावजूद इस एरिया से मुकीम काला, बदन सिंह बद्दो जैसे कुख्यात बदमाशों की गैंग के लिए लगातार हथियार सप्लाई किए जाते रहे हैं। एरिया में फैक्ट्री मालिक और उनके गुर्गों का नेटवर्क इतना तेज है कि वे पुलिस और प्रशासन के तमाम दावों को खोखला साबित करते हुए, जमकर हथियारों की सप्लाई कर रहे हैं।
सप्लाई है अहम : इस कारोबार में ऑर्डर की सप्लाई एक अहम कड़ी है। हथियारों की खेप को कस्टमर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी तमंचा बनाने वालों की होती है। इस दौरान सप्लायर्स नदी पार करके ऑर्डर ठिकानों तक पहुंचाते हैं। आमतौर पर पुलिस रोडवेज बसों व ट्रकों में बैठी सवारियों की चेकिंग नहीं करती है। ऐसे में बाइ रोड हथियारों के सप्लाई के लिए गुर्गे रोडवेज बसों व ट्रकों का भी खूब इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए हथियार बनाने वाले अलग से रुपये वसूलते हैं।
हथियार और कारतूस : कुछ समय पहले तक फैक्ट्रियां केवल गन को ही तैयार करती थीं। लेकिन चुनाव को देखते हुए कारतूस की भी डिमांड तेजी से बढ़ी है। फैक्ट्रियों में कारतूस तेजी से बनने लगा है। कारतूस के ऑर्डर को तैयार करने के बाद फैक्ट्री के ही गुर्गे इसे तय समय पर ठिकाने तक पहुंचाते हैं। पुलिस इस धंधे पर लगाम लगाने की बार-बार कोशिश कर रही है। पुलिस ने हाल ही में कई आरोपियों को अरेस्ट किया है। लेकिन पुलिस धंधे में शामिल सरगनाओं तक नहीं पहुंच पाईं हैं।
वर्जन
पंचायत चुनावों को देखते हुए पुलिस पहले से ही सतर्क है। अवैध हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों के लिए दबिश दी जा रही है। इस कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - कैप्टन एमएम बेग, कार्यवाहक एसएसपी
इन दामों पर मिल जाते हैं
कीमत - हथियार
4000 रुपये - 12 बोर, लंबी नाल
1500-2000 रुपये - 12 बोर, छोटी नाल
2000-5000 रुपये - 15 बोर
8000-10000 रुपये - 38 बोर, देसी रिवॉल्वर
15,000-22,000 रुपये - पिस्टल
सस्ते दामों पर कारतूस
120 रुपये 315 बोर
100 रुपये 12 बोर
80 रुपये 32 बोर

130 रुपये पिस्टल का कारतूस

Wednesday, August 19, 2015

उत्तर प्रदेश में 2014 में 63 किसानों ने आत्महत्या की

हाल ही में जारी नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 2014 में 63 किसानों ने आत्महत्या की थी। वहीं, किसानों के एक ग्रुप का दावा है कि इस साल कुछ जिलों में ही आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या पिछले साल पूरे राज्य में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या को पार कर गया है। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के जिला अध्यक्ष विनोद जटोली का कहना है कि हमारे कार्यकर्ता लगातार उन किसानों के परिजनों के संपर्क में हैं, जिन्होंने इस साल आत्महत्या की। हम उन किसानों का भी पता लगा रहे हैं जिन्होंने इस साल आत्महत्या की। यह डेटा हमारे कार्यकर्ताओं की ओर से कलेक्ट किया गया है।
विनोद का दावा है कि इस साल मेरठ में 20, हापुड़ में 14, गाजियाबाद में 10, बागपत में 3 और मुजफ्फरनगर में 2 किसानों ने आत्महत्या की। इन 5 जिलों को मिलाकर ही आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 49 है। वहीं, पिछले साल 75 जिले में 63 किसानों ने आत्महत्या की थी। अभी अगस्त का महीना चल रहा है, लेकिन यह डेटा बहुत ज्यादा है। अगर हम वेस्टर्न यूपी के कुछ और जिलों को जोड़ दें तो इस साल आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या पिछले साल पूरे प्रदेश में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या को पार कर जाएगी। फाइनल स्टेट वाइज फिगर और डरावना है। विनोद का कहना है कि ये डेटा किसी भी सरकार को जगाने के लिए काफी हैं। एसडीएम (फाइनेंस) गौरव वर्मा इस मसले पर कमेंट करने के लिए मौजूद नहीं थे।
गौरतलब है कि मार्च 2015 में खबर छपी थी कि एक महीने में ही मेरठ, आगरा और अलीगढ़ में लगभग 25 किसानों ने आत्महत्या की। हालांकि इसमें उन किसानों के आंकड़े भी शामिल हैं जिनकी मौत हार्ट अटैक से हुई। इन मौतों में ज्यादातर संख्या आत्महत्या करने वाले किसानों की है। अकेले मेरठ में ही मार्च महीने में 5 किसानों ने आत्महत्या की। इन मौतों का सबसे बड़ा कारण मार्च में बिन सीजन बरसात थी। मौसम विभाग का दावा है कि 2015 का मार्च इस सदी का सबसे आर्द्र (नम) महीना रहा।
बहरहाल उत्तर प्रदेश और बिहार क्षेत्रफल व जनसंख्या के मामले में 2 बड़े राज्य हैं। यहां आत्महत्या करने वाले किसानों की दर 10000 पर एक है, जो महाराष्ट्र, केरल और पुडुचेरी से दस गुना कम है। वहीं नैशनल औसत 1.36 की तुलना में यूपी में आत्महत्या करने वाले किसानों की औसत 0.36 है जो कि बहुत कम है, फिर भी ये आंकड़े चिंताजनक हैं।
भारतीय किसान आंदोलन (बीकेए) के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी का कहना है कि किसान हाशिए पर हैं। मार्च में हुई बारिश ने कई किसानों की जिंदगी छीन ली। किसानों की फसल बर्बाद होने से कई किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। जो किसान इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए उन्होंने अपनी लाइफ खत्म कर ली। त्यागी का कहना है कि किसानों की आत्महत्या करने की दूसरी वजह यह है कि इस साल राज्य की शुगर मिलों ने गन्ना खरीदने से मना कर दिया। इसका मतलब यह है कि लगभग 40 लाख किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कोई जगह नहीं मिली। सरकार को इस आपदा से सीख लेनी चाहिए और फ्यूचर में इस तरह की आपदा आने पर इससे बचने के उपाय अभी से करने चाहिए।

Tuesday, August 18, 2015

कृष्णपाल की बेटी की सुरक्षा

कृष्णपाल बेटी की सुरक्षा के साथ-साथ खुद की सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं। मेरठ में कृष्णपाल की बेटी को छेड़छाड़ से बचाते हुए फौजी वेदमित्र शहीद हो गए थे। कृष्णपाल का कहना था कि गुंडे उन्हें और उनकी बेटी को नहीं छोड़ेंगे। वहीं सोमवार को फौजी की हत्या के मामले में सर्वसमाज ने कमिश्नरी पार्क पहुंच कर प्रदर्शन किया और हत्यारों को फांसी और शहीद के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा दिए की भी मांग की।
वहीं कृष्णपाल का कहना है कि मेरी बेटी को गुंडे कुछ दिनों से छेड़ रहे थे। गुरुवार को गुंडे मेरी डेयरी के सामने उसे छेड़ने की कोशिश कर रहे थे इसलिए हमारा धैर्य टूट गया और हम उनसे भिड़ गए। हालांकि उसके बाद जो हुआ वह बेहद दुखद था। मुझे नहीं पता उस स्टोर में हमारे लिए अब क्या संभवना है। मैं अपने परिवार को लेकर बहुत डरा हुआ हूं खास तौर पर अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर।

गौरतलब है कि फौजी की हत्या के आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, लेकिन पुलिस अभी तक अज्ञात युवकों को तलाश नहीं कर पाई। इसी को लेकर कमिश्नरी पार्क पर सर्व समाज के लोग एकत्र हुए। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने हत्यारोपियों पर रासुका लगाने की मांग की। साथ ही फौजी की पत्नी को सरकारी नौकरी व उसके दोनों बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार द्वारा उठाए जाने की मांग की।

Friday, August 14, 2015

स्वंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें


स्वंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें
9 अगस्त की रात तेल लेने के बहाने कारोबारी के घर घुसे बदमाशों ने परिवार को बंधक बना लिया। कारोबारी साहस दिखाते हुए बदमाशों से भिड़ गया। एक बदमाश को कारोबारी ने चाटा मार दिया तो बदमाशों चाकू से कारोबारी की हत्या कर दी। बाद में मकान से गाड़ी सहित 34 लाख का सामान लूट कर ले गए। गुरुवार को पुलिस ने दो बदामशों को गिरफ्तार कर केस का खुलासा किया।
चेतन्यपुरम में 9 अगस्त की रात तेल कारोबारी रामगोपाल अग्रवाल की हत्या और 34 लाख की लूट का पुलिस ने गुरुवार को खुलासा कर दिया। पुलिस ने लिसाड़ीगेट के मजीदनगर के अबजाल और अहमदनगर के नौशाद को गिरफ्तार कर लिया। बदमाशों की निशानदेही पर कारोबारी की लूटी हुई कार, कैश और दो तमंचे, कारतूस, चाकू आदि बरामद हुआ है। पुलिस ने बताया कि गिरोह का सरगना उल्ला कासिम उसके साथी शहनवाज, गुलफाम और तीन अज्ञात बदमाश फरार हैं। जिनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस ने बताया कि 9 अगस्त की रात अबजाल और उल्ला कासिम तेल लेने के बहाने कारोबारी के मकान में घुस गए। उसके बाद परिवार को बंधक बना लिया। बाद में उनके साथी अंदर आ गए। कारोबारी ने विरोध करते हुए अबजाल के चाटा मार दिया। जिसके बाद बदमाशों ने चाकू से कई वार किए। कारोबारी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। बाद में बदमाश मकान से कार, सोने, चांदी के जेवरात नगदी समेत 34 लाख का सामान लूट ले गए।

Thursday, August 13, 2015

दिल्ली-मेरठ के बीच इलेक्ट्रिक ट्रेन

दिल्ली से मेरठ के बीच यात्रा करने वालों के लिए एक खुशखबरी है। सरकार अक्टूबर से दिल्ली-मेरठ के बीच इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने जा रही है। अभी रेलवे सेफ्टी के कमिश्नर द्वारा ट्रैक की जांच कराई जा रही है और जांच का परिणाम आने के बाद जल्द ही ट्रेन सेवा शुरू कर दी जाएगी।
इसके अलावा एक बार जब इस ट्रैक को इलेक्ट्रिफाई कर दिया जाएगा तो अन्य ट्रेनों के आवागमन में भी सहूलियत हो जाएगी। रेलवे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक निरीक्षण का काम जुलाई के अंत तक समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से इसमें कुछ देरी हो गई।
रेलवे के डेप्युटी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर आरके सिंह ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को जानकारी देते हुए कहा, 'मेरठ से गाजियाबाद के रेलवे स्टेशन के बीच इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य पूरा कर लिया गया है और हम जांच के लिए दस्तावेज सीआरएस को सौंप रहे हैं। सीआरएस दिल्ली-मेरठ रूट पर जांच करेंगे।'
समय-सीमा के बारे में बात करते हुए आरके सिंह ने कहा कि पहले उनके सामने अगस्त के अंत तक ट्रेन संचालित करने की चुनौती थी, लेकिन तकनीकी कारणों से यह पूरा नहीं किया जा सका। अब इस रूट को अक्टूबर तक चालू करने का प्रयास किया जा रहा है। 

अधिकारी आराम से एसी में

मेरठ के 500 सरकारी प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के छात्र पिछले 2 सालों से भीषण गर्मी में बिना बिजली के पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। वजह है कि इन स्कूलों ने 2 सालों से बिजली का बिल जमा नहीं किया, इसलिए कनेक्शन काट दिए गए हैं। लेकिन दूसरी ओर बेसिक शिक्षा विभाग के ऑफिसों ने भी पिछले कई महीनों से बिजली बिल नहीं जमा किया, लेकिन इनकी बिजली नहीं काटी गई। यहां अधिकारी आराम से एसी में काम कर रहे हैं।
सरकार ने नहीं जारी किया फंड
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि 1342 स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने पिछले 2 सालों से बिजली बिल जमा नहीं किया। लगभग एक करोड़ रुपये बिजली बिल बकाया है। इन स्कूलों ने बिजली विभाग को बिजली काटने के लिए मजबूर किया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी मोहम्मद इकबाल ने बताया कि पिछले 2 सालों से सरकारी स्कूलों के बिजली बिल इसलिए जमा नहीं हुए, क्योंकि सरकार ने इसके लिए फंड जारी नहीं किया। सरकार सभी स्कूलों को 10 माह के लिए 350 रुपये प्रति महीने के हिसाब से बिजली बिल का फंड जारी करती है। लेकिन ज्यादातर स्कूलों में इससे कहीं ज्यादा बिल आता है। इन स्कूलों का बिजली बिल एक करोड़ से ज्यादा हो गया है। मुझसे पहले के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी जिवेंद्र सिंह ने इस मसले पर कई बार सरकार को पत्र लिखा, लेकिन इसके लिए कोई ग्रांट पास नहीं हुआ। मैंने पिछले महीने ही जॉइन किया है। मैं फिर से इस मसले पर सरकार को पत्र लिखूंगा। जिला प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि सरकारी स्कूलों का बिजली बिल सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग ही जारी करता है। हम पहले ही इस मसले पर सरकार को पत्र लिख चुके हैं। इस मामले में और कुछ नहीं किया जा सकता।
स्टूडेंट्स की मुसीबत

शहर के पूर्व माध्यमिक स्कूल के क्लास 5वीं के छात्र दीपक कुमार का कहना है कि ठंड में जब हमारी छमाही परीक्षा हुई, स्कूल में बिजली नहीं थी। हमने अंधेरे में अपने एग्जाम दिए। अधिकांश मौकों पर हम अपने साथ कैंडल लेकर आते थे। उसी की रोशनी में हमने पेपर लिखे। हमने गर्मी बिना बिजली के बिताई। हमें भीषण गर्मी में बिना पंखे और लाइट के पढ़ाई करनी पड़ी। हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है इसलिए हम बिना पंखे और लाइट के अंधेरे में पढ़ने के लिए मजबूर हैं। राशिद नगर के रहने वाले इलयास अहमद जिनके बच्चे पास के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, उनका कहना है कि अभी तो कांवड़ यात्रा की वजह से 12 अगस्त तक स्कूल बंद हैं। लेकिन उसके बाद हमारे बच्चे बिजली न होने की वजह से बिना पंखे और लाइट के ही पढ़ाई करेंगे। अधिकारी सरकारी स्कूलों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अगर हालात नहीं बदले तो मजबूरी में हमें अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में शिफ्ट करना पड़ेगा।