मेरठ के 500 सरकारी
प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के छात्र पिछले 2 सालों से भीषण गर्मी
में बिना बिजली के पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। वजह है कि इन स्कूलों ने 2 सालों से बिजली का बिल
जमा नहीं किया, इसलिए
कनेक्शन काट दिए गए हैं। लेकिन दूसरी ओर बेसिक शिक्षा विभाग के ऑफिसों ने भी पिछले
कई महीनों से बिजली बिल नहीं जमा किया, लेकिन इनकी बिजली नहीं
काटी गई। यहां अधिकारी आराम से एसी में काम कर रहे हैं।
सरकार
ने नहीं जारी किया फंड
एक
सरकारी अधिकारी ने बताया कि 1342 स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने पिछले 2 सालों से बिजली बिल जमा
नहीं किया। लगभग एक करोड़ रुपये बिजली बिल बकाया है। इन स्कूलों ने बिजली विभाग को
बिजली काटने के लिए मजबूर किया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी मोहम्मद इकबाल ने बताया
कि पिछले 2 सालों
से सरकारी स्कूलों के बिजली बिल इसलिए जमा नहीं हुए, क्योंकि सरकार ने इसके
लिए फंड जारी नहीं किया। सरकार सभी स्कूलों को 10 माह के लिए 350 रुपये प्रति महीने के
हिसाब से बिजली बिल का फंड जारी करती है। लेकिन ज्यादातर स्कूलों में इससे कहीं
ज्यादा बिल आता है। इन स्कूलों का बिजली बिल एक करोड़ से ज्यादा हो गया है। मुझसे
पहले के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी जिवेंद्र सिंह ने इस मसले पर कई बार सरकार को पत्र
लिखा, लेकिन
इसके लिए कोई ग्रांट पास नहीं हुआ। मैंने पिछले महीने ही जॉइन किया है। मैं फिर से
इस मसले पर सरकार को पत्र लिखूंगा। जिला प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि सरकारी
स्कूलों का बिजली बिल सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग ही जारी करता है। हम पहले ही इस
मसले पर सरकार को पत्र लिख चुके हैं। इस मामले में और कुछ नहीं किया जा सकता।
स्टूडेंट्स
की मुसीबत
शहर
के पूर्व माध्यमिक स्कूल के क्लास 5वीं के छात्र दीपक
कुमार का कहना है कि ठंड में जब हमारी छमाही परीक्षा हुई, स्कूल में बिजली नहीं
थी। हमने अंधेरे में अपने एग्जाम दिए। अधिकांश मौकों पर हम अपने साथ कैंडल लेकर
आते थे। उसी की रोशनी में हमने पेपर लिखे। हमने गर्मी बिना बिजली के बिताई। हमें
भीषण गर्मी में बिना पंखे और लाइट के पढ़ाई करनी पड़ी। हमारे पास कोई और विकल्प
नहीं है इसलिए हम बिना पंखे और लाइट के अंधेरे में पढ़ने के लिए मजबूर हैं। राशिद
नगर के रहने वाले इलयास अहमद जिनके बच्चे पास के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, उनका कहना है कि अभी तो
कांवड़ यात्रा की वजह से 12 अगस्त
तक स्कूल बंद हैं। लेकिन उसके बाद हमारे बच्चे बिजली न होने की वजह से बिना पंखे
और लाइट के ही पढ़ाई करेंगे। अधिकारी सरकारी स्कूलों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
अगर हालात नहीं बदले तो मजबूरी में हमें अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में
शिफ्ट करना पड़ेगा।
No comments:
Post a Comment