Monday, October 26, 2015

मेरठ के दोनों पैर गंदगी में धंसे हुए

स्मार्ट सिटी की रेस भरने के लिए तैयार मेरठ के दोनों पैर गंदगी में धंसे हुए मिले। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट ने मेरठ की हकीकत से पर्दा हटा दिया। इसे देश के सबसे प्रदूषित शहरों में आंका गया है। सड़कों पर कूड़े के ढेर, बजबजाती नालियां और तमाम दुश्वारियों वाला मेरठ संक्रामक बीमारियों की भी राजधानी बन चुका है। सूची में मेरठ के साथ ही बुलंदशहर भी शामिल है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली ने मेरठ को गले तक गंदगी में डुबो दिया। जो शहर स्मार्ट सिटी की रेस में तमाम बड़े शहरों को मात देने का दावा कर रहा है, उसमें शहर के दामन पर गंदगी कोढ़ बनकर दर्ज हो गई है। दशकों से जाम नाले, बजबजाती नालियां, जलभराव, सीवर की पाइपों से लीकेज और कूड़ाघरों से उठती भयंकर बदबू शहर के खुरदरे चेहरे को और दागदार बना रहे हैं। गंदगी की सफाई के लिए जेसीबी एक बार गरजकर दो कदम बढ़ती है तो विरोध के बाद मीलों पीछे जा खड़ी होती है। पुराने शहर में गंदगी एक नासूर बनकर महानगर की साख को डसने लगी है।
सिर्फ दो डंपिंग ग्राउंड
महानगर की आबादी करीब 20 लाख आंकी जा रही है, किंतु कूड़ा उठाने के लिए महज दो डंपिंग ग्राउंड हैं। एक मेवला फाटक के पास तो दूसरा किला रोड स्थित गांव गाबड़ी में। गाबड़ी में ही कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ था जो परवान नहीं चढ़ सका। तीन वर्ष पहले इसी गाबड़ी में सालिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कवायद चली थी जो चंद कदम बाद ढेर हो गई।
सूची में यूपी के पांच शहर
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से वर्ष 2013-14 में देश में कराए गए सर्वे में ए श्रेणी के और एक लाख से ज्यादा आबादी के शहरों की सफाई व्यवस्था की कलई खुल गई। देश के पौने पांच सौ सबसे गंदे शहरों की सूची में मेरठ समेत राज्य के पांच शहरों को शामिल किया गया है।
पीएम से भी नहीं ली सीख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर 2014 को खुद झाडू संभालते हुए लोगों को सफाई के लिए जागरूक किया था, जो बेअसर रहा। अभियान के नाम पर खानापूर्ति कर फोटो तो खिंचवाए गए लेकिन शहर का चेहरा मुरझाया ही रह गया।
नगर निगम को रोने की लत
नगर निगम सफाई पर हर बार संसाधनों के अभाव का रोना रोता है। निगम के पास 3342 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें 1127 स्थाई और बाकी संविदा के हैं। संविदा कर्मचारी बर्खास्त किए गए थे, जो फिलहाल ड्यूटी कर रहे हैं। निगम की दलील है कि फंड और कर्मचारी दोनों की तंगी में सफाई कैसे हो?
देश के कुछ सबसे गंदे शहर
शहर रैंक
मेरठ 465
बुलंदशहर 471
सुल्तानपुर 458
देवरिया 456
आजमगढ़ 452
गुड़गांव 466
भिवानी 473
रेवाड़ी 469
भरतपुर 462
रुद्रपुर 451
नोट : ये सभी देश के पौने पांच सौ गंदे शहरों की सूची में निचले पायदान पर आने वाले सबसे गंदे शहर माने गए हैं।
एक नजर मेरठ शहर पर
आबादी...करीब 20 लाख
रोजाना का कूड़ा 850 मीट्रिक टन
सफाई कर्मचारी 3342
जरूरत 5000 की

Friday, October 23, 2015

गुब्बारे बेचकर जमा करेंगे बच्चों की फीस

दशहरा मेला सिर्फ श्रद्धा और उत्साह का मेला भर नहीं है। ये कुछ लोगों के लिए सपनों का मेला भी है। आप और हम भले इस मेले के उत्साह का हिस्सा हों, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस मेले के माध्यम से अपने सपने पूरे कर रहे हैं। उनके लिए दशहरे का मेला वो साधन है, जो उन्हें उनके सपनों के करीब ले जाएगा। मेले में आठ साल का कपिल मुखौटे बेच रहा है, जिससे उसके परिवार का खर्च चल सके, वहीं अभिनव ने कोचिंग का खर्च निकालने के लिए मेले में जूतों की दुकान लगाई है। पुनीत ने मेले में इसलिए खिलौनों की दुकान लगाई है जिससे इस बार उसका परिवार अच्छे से दीपावली मना सकें। आप भी मिलिए मेरठ के मेले के इन 'सपनों के सौदागरों' से।
मां के बाद बहनों की जिम्मेदारी का फर्ज निभाना है
कपिल के हाथों में मुखौटे, तीर और गदा से भरी छड़ी है। उम्र आठ साल से ज्यादा न होगी। कपिल ने सुबह जल्दी ही अपनी छड़ी मेले में लगा ली है, ताकि अधिक से अधिक कमाई हो जाए और उसका और उसकी दो बहनों का कुछ समय तक खर्च आसानी से चल जाए। मां की मृत्यु के बाद दो बहनों की जिम्मेदारी अब कपिल के कंधों पर जो आ गई है।
गुब्बारे बेचकर जमा करेंगे बच्चों की फीस
मेले में दुकान लगाने के बाद पुनीत ने जल्दी-जल्दी गुब्बारों में हवा भरी ताकि अधिक से अधिक रुपये कमा सकें। वे घर चलाने के लिए फेरी का काम करते है। कहते है कि पिछले साल दशहरे में छह सात हजार रुपये की ब्रिकी हो गई थी, जिससे बच्चों के साल भर के पढ़ाई का खर्च निकल गया था। उम्मीद है इस साल भी अच्छी कमाई हो जाए तो बच्चों की फीस का खर्च निकल जाएगा।
खर्च के लिए लगाई पोस्टर की दुकान
मयंक अपने दोस्त राकेश के साथ मेले में पोस्टर बेच रहे हैं। असल में ये दोनों दोस्त घंटाघर पर आर्टिफिशियल ज्वैलरी की दुकान लगाते है। पिछले कुछ समय से दुकान में घाटा उठा रहे मयंक और राकेश बताते है कि मेले में पोस्टर बेचकर जो भी आमदनी होगी वे उसे दुकान का घाटा पूरा करेंगे। जिससे उन्हें किसी से उधार न लेना पड़े।
जूते बेचकर जमा करेंगे कोचिंग की फीस
कोशिश करने वाले कभी नहीं हारते ये बात बी. कॉम की पढ़ाई कर रहे अभिनव पर बिल्कुल सटीक बैठती है। पिता ने जब आगे पढ़ने की बजाए उसे जूतों की दुकान पर बैठने के लिए मजबूर किया तो उसने भी कोचिंग की फीस भरने के लिए मेले में जूतों की दुकान लगा ली। दशहरे मेले से जो भी कमाई होगी वह उससे कोचिंग की फीस भरकर आगे की पढ़ाई करेगा।
मेले की कमाई से खरीदूंगा जरूरी चीज

दशहरे मेले में बर्तनों की दुकान लगाने वाला अभिनव 11वीं कक्षा में पढ़ता है। घर का खर्च तो सामान्य दिनों की कमाई से चल जाता है। वह बताता है कि जल्द ही बहन की शादी होने वाली है। इसलिए घर के लिए कुछ जरूरी वस्तुएं खरीदनी है। पिछले साल मेले में अच्छी खासी कमाई हो गई थी। इस बार भी हो जाए तो मेरा काम बन जाएगा।

Tuesday, October 20, 2015

गिरफ्तारी का आश्वासन

पुलिस ऑफिस में सोमवार को उस समय लोगों की नजर साढ़े तीन साल की एक बच्ची पर टिक गई, जब उसने अपने पिता की गिरफ्तारी का ज्ञापन एसपी देहात को सौंपा। बच्ची के माता-पिता में कई वर्ष से कोर्ट में विवाद चल रहा है। पेश न होने की वजह से कोर्ट ने पिता के खिलाफ वारंट जारी कर रखा है। इसी आधार पर आरोपी पिता की गिरफ्तारी को बच्ची अपने नाना और मामा के साथ एसएसपी दफ्तर स्थित एसपी देहात के कार्यालय पहुंची और ज्ञापन दिया।
गंगानगर निवासी सीमा की शादी सरधना में कपसाड़ निवासी संजीव शर्मा से हुई है। संजीव शर्मा गाजियाबाद की श्रीराम पिस्टन कंपनी में नौकरी करता है। शादी के बाद से ही दंपती में विवाद हुआ और गर्भवती सीमा अपने मायके आ गई। मायके में ही सीमा ने एक बच्ची को जन्म दिया। तभी से दंपती के बीच घरेलू ¨हसा का विवाद कोर्ट में चल रहा है। बताया जाता है कि भरण-पोषण केस की तारीखों पर कोर्ट में सीमा के पति के न पहुंचने की वजह से उसके खिलाफ वारंट जारी हो गया। आरोप है कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार तक नहीं कर रही। थाने से लेकर सीओ ऑफिस तक पीड़ित परिवार चक्कर लगा रहा है और पुलिस उसे टरका रही है। सोमवार को सीमा खुद पुलिस ऑफिस नहीं पहुंची, मगर अपने अधिवक्ता के कहने पर उसने अपनी साढ़े तीन वर्ष की बच्ची मानवी शर्मा को उसके नाना शांति स्वरूप शर्मा, मामा रोहित के साथ एसपी देहात के ऑफिस में भेजा। एसपी देहात ने आरोपी की गिरफ्तारी का आश्वासन पीड़ित को दिया।

Thursday, October 15, 2015

लूट के बाद गला रेत कर हत्या

सुभाषपुरी में रिटायर्ड महिला स्टेनो की हत्या कर लूटपाट की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। हत्या में महिला के बेटे के दोस्त संदीप त्यागी को गिरफ्तार कर लिया है। संदीप ने खुलासा किया कि सट्टे के 95 हजार रुपये मृतका के बेटे पर थे, जिन्हें लेने गया तो महिला से विवाद हो गया, जिसके चलते महिला की चाकू से गला रेत कर हत्या कर दी। बाद में तीन लाख कीमत की ज्वैलरी और नगदी लूट ली थी। लूटा गया सामान और हत्या में प्रयुक्त चाकू पुलिस ने बरामद कर लिया है।
सोमवार सुबह सुभाषपुरी निवासी त्रिलोक कौर की घर में लूट के बाद गला रेत कर हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। 198 शाक्यपुरी निवासी संदीप त्यागी उर्फ जूली पुत्र र¨वद्र त्यागी सीडीए में सीनियर ऑडिटर है, जो मृतका के बेटे हरदीप के साथ सट्टा लगता था। सट्टे में 95 हजार रुपये जीतने के बाद हरदीप ने रकम नहीं दी थी। हरदीप कमेटी का काम भी करता है। सोमवार को संदीप त्यागी हरदीप के घर अपनी कमेटी के पंद्रह हजार रुपये देने गया था। त्रिलोक कौर को रकम दी गई, तो उसने संदीप त्यागी के सामने ही रकम को अलमारी में रख दिया। रकम रखते देख संदीप का मन बदल गया। उसने ज्वैलरी और नगदी को लूटने के लिए त्रिलोक कौर की हत्या कर दी गई। इंस्पेक्टर सुरेंद्र राणा ने बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद संदीप ने हत्या में प्रयोग किया चाकू स्टेशन मार्ग पर नाले में फेंक दिया था। मृतका के पुत्र ने संदीप पर शक जाहिर करते हुए मामले में नामजद किया था। पुलिस ने संदीप को सोमवार शाम को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पुलिस की पूछताछ में संदीप ने अपना गुनाह कबूल करते हुए लूटे गए 45 हजार और ढाई लाख की ज्वैलरी बरामद करा दी। साथ ही नाले से आलाकत्ल भी बरामद किया।
अवैध शराब बेचने का भी कारोबारी
मेरठ : हत्यारोपी संदीप त्यागी उर्फ जूली सीडीए में वरिष्ठ आडिटर होने के बावजूद नशीले पदार्थो का सेवन करता था। इसके साथ ही वह अवैध शराब का भी कारोबारी है। पैसों के लालच में उसने एक निर्दोष महिला की हत्या कर दी। लूट का माल बेचने के लिए उसने अपने साथ कर्मचारी से भी संपर्क किया था, लेकिन उसने माल को वापस ले जाने के लिए कह दिया था। पुलिस उससे भी पुछताछ में लगी है।
हरदीप ने निभाया था साथ?

संदीप त्यागी को थाने में बुलाकर पूछताछ की गई, जिसमें संदीप त्यागी ने बताया था कि हत्या में उसके साथ हरदीप भी मौजूद था। बाद में पुलिस ने दोबारा से मामला में पूछताछ की तो मामला बदल गया। संदीप त्यागी ने फिर हरदीप का नाम हटाकर पूरे मामले को अपने सिर ले लिया है। पुलिस ने हरदीप को क्यों बचाया है। इस पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए है।

Monday, October 12, 2015

जयप्रकाश नारायण की 113वीं जयंती - मुकुंदी देवी धर्मशाला

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 113वीं जयंती पर भाजपा महानगर इकाई ने रविवार को मुकुंदी देवी धर्मशाला में कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि उनका आंदोलन गुजरात से शुरू हुआ और बिहार से होते हुए देशभर में फैल गया। उन्होंने वामपंथ से शुरुआत की, और बाद में वह दक्षिणपंथ के समर्थक बन गए। राजेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि लोकनारायण संघ के प्रशंसक बन गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू के डीएनए में तानाशाही थी, जो इंदिरा गांधी के वक्त खुलकर सामने आ गई और देश को आपातकाल से जूझना पड़ा। रवीन्द्र भड़ाना ने कहा कि मोदी देश के सभी महापुरुषों को सम्मान देकर उनका हक दिला रहे हैं। जेपी को भुलाया नहीं जा सकता। महापौर हरिकांत ने कहा कि जेपी ने भ्रष्टाचार को खत्म करने की जोरदार अलख जगाई थी। इस अवसर पर कृष्ण गोपाल, नरेन्द्र उपाध्याय, रमेशचंद नागर, अशोक चौधरी, सुरेश अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, गिरीश मोहन गुप्ता, विजय गुप्ता, राखी त्यागी, हेमा पंत, कुसुम गोस्वामी, गजेन्द्र शर्मा एवं हर्ष गोयल समेत कई अन्य शामिल रहे। 

Friday, October 9, 2015

कालेज प्रशासन खुद लाचार

गोटका गांव स्थित किसान इंटर कालेज छात्र गुटों के बीच रोजाना होने वाले संघर्ष के चलते कुरुक्षेत्र बना हुआ है। ग्रामीण भी इस संग्राम में कूदकर उसे धार दे रहे हैं। इन हालात में कालेज प्रशासन खुद को लाचार महसूस कर रहा है। गुरुवार को एक बार फिर कई गांवों के छात्र आमने-सामने आ गए। जमकर हाकी, बेल्ट व चाकू का प्रयोग किया गया। अवैध हथियार भी लहराए गए। कई थानों की पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति संभाली।
मेरठ-करनाल हाईवे पर सरूरपुर थाना क्षेत्र के गोटका गांव स्थित किसान इंटर कालेज में स्थानीय छात्रों की गुंडई के आगे आसपास के गांवों से आने वाली छात्राएं आतंकित हैं। दरअसल, कालेज में बपारसी, मुल्हेड़ा, पांचली बुजुर्ग व नगवा आदि गांवों के साथ गोटका के छात्र मारपीट कर आए दिन हंगामा खड़ा कर रहे हैं। गुरुवार को भी छात्र गुटों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें नगवा गांव निवासी कुलदीप, अमन, विक्रांत तथा मोनू सहित कई छात्र घायल हो गए।
वहीं, छात्रों के एक गुट ने कालेज में घुसकर शिक्षकों के साथ भी मारपीट की। झगड़े की सूचना पर सीओ सरधना बृजेश कुमार के साथ कई थानों की पुलिस व पीएसी घटनास्थल पर पहुंच गई। हंगामा कर रहे युवकों व छात्रों को लाठी फटकार कर खदेड़ा गया। स्थानीय थाना पुलिस से पहले कंकरखेड़ा व सरधना थाना पुलिस पहुंच गई थी। सरूरपुर थाना पुलिस सबसे बाद में पहुंची। बुधवार देर रात मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
इन्होंने कहा ..

हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जाएगी। मामला कालेज के छात्रों के बीच का है, जिसमें पुलिस सीधे हस्तक्षेप नहीं कर रही है।

Thursday, October 8, 2015

ज्ञान महायज्ञ के साथ अध्यात्म का संचार

औघड़नाथ मंदिर में बुधवार को श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ के साथ अध्यात्म का संचार हुआ। बिहारगढ़, बुलंदशहर से पधारे ˜यम्बकेश्वर चैतन्य महाराज ने भगवान, भक्त और भक्ति पर गूढ़ मंथन कर मधुर प्रवचन दिए। ज्ञान महायज्ञ में देव-वृतांत व लीलाओं से भक्तिरस की वर्षा की तो श्रद्धालु मुग्ध हो गए।

महाराजश्री ने कहा कि जिसकी रक्षा भगवान करते हैं, उसका कोई नाश नहीं कर सकता। वह सभी पर बिना भेदभाव के कृपा करते हैं। देवताओं में सत्य तत्व की रक्षा हेतु स्वयं ऊर्जा बनकर देवताओं में स्थित रहते हैं। देवताओं का प्रमाद नष्ट करने को राक्षसों को बलवान बनाते हैं। उन असुरों का वध कर फिर देवत्व की स्थापना करते हैं। उन्होंने कहा कि शिशुपाल वध के बाद जो तीर वापस आया तो वह भगवान के तेज में विलीन हो गया। भावनावतार, प्रह्लाद की भक्ति का वर्णन करते हुए भगवान के सर्वत्र उपस्थित होने की बात कही। उन्होंने कहा कि भगवान भक्ति के प्यासे हैं, सच्चे हृदय से की गयी भक्ति पर वह स्वयं भक्त के पास खिंचे चले आते हैं। वह भक्त के अधीन हैं। संचालन आचार्य सुदेश ने किया। धर्म संघ के अध्यक्ष भारत भूषण गुप्ता, सुशील सिंहल, चंद्रमणि शर्मा, चरणदत्त कात्यायन का सहयोग रहा।