सुभाषपुरी में रिटायर्ड महिला स्टेनो की हत्या कर लूटपाट की वारदात का
पुलिस ने खुलासा कर दिया है। हत्या में महिला के बेटे के दोस्त संदीप त्यागी को
गिरफ्तार कर लिया है। संदीप ने खुलासा किया कि सट्टे के 95 हजार
रुपये मृतका के बेटे पर थे, जिन्हें लेने गया तो महिला से
विवाद हो गया, जिसके चलते महिला की चाकू से गला रेत कर हत्या
कर दी। बाद में तीन लाख कीमत की ज्वैलरी और नगदी लूट ली थी। लूटा गया सामान और
हत्या में प्रयुक्त चाकू पुलिस ने बरामद कर लिया है।
सोमवार सुबह सुभाषपुरी निवासी त्रिलोक कौर की घर में लूट के बाद गला रेत कर
हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। 198 शाक्यपुरी निवासी
संदीप त्यागी उर्फ जूली पुत्र र¨वद्र त्यागी सीडीए में
सीनियर ऑडिटर है, जो मृतका के बेटे हरदीप के साथ सट्टा लगता
था। सट्टे में 95 हजार रुपये जीतने के बाद हरदीप ने रकम नहीं
दी थी। हरदीप कमेटी का काम भी करता है। सोमवार को संदीप त्यागी हरदीप के घर अपनी
कमेटी के पंद्रह हजार रुपये देने गया था। त्रिलोक कौर को रकम दी गई, तो उसने संदीप त्यागी के सामने ही रकम को अलमारी में रख दिया। रकम रखते
देख संदीप का मन बदल गया। उसने ज्वैलरी और नगदी को लूटने के लिए त्रिलोक कौर की
हत्या कर दी गई। इंस्पेक्टर सुरेंद्र राणा ने बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद
संदीप ने हत्या में प्रयोग किया चाकू स्टेशन मार्ग पर नाले में फेंक दिया था।
मृतका के पुत्र ने संदीप पर शक जाहिर करते हुए मामले में नामजद किया था। पुलिस ने
संदीप को सोमवार शाम को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पुलिस की पूछताछ में संदीप ने
अपना गुनाह कबूल करते हुए लूटे गए 45 हजार और ढाई लाख की
ज्वैलरी बरामद करा दी। साथ ही नाले से आलाकत्ल भी बरामद किया।
अवैध शराब बेचने का भी कारोबारी
मेरठ : हत्यारोपी संदीप त्यागी उर्फ जूली सीडीए में वरिष्ठ आडिटर होने के
बावजूद नशीले पदार्थो का सेवन करता था। इसके साथ ही वह अवैध शराब का भी कारोबारी
है। पैसों के लालच में उसने एक निर्दोष महिला की हत्या कर दी। लूट का माल बेचने के
लिए उसने अपने साथ कर्मचारी से भी संपर्क किया था, लेकिन उसने माल को वापस
ले जाने के लिए कह दिया था। पुलिस उससे भी पुछताछ में लगी है।
हरदीप ने निभाया था साथ?
संदीप त्यागी को थाने में बुलाकर पूछताछ की गई, जिसमें
संदीप त्यागी ने बताया था कि हत्या में उसके साथ हरदीप भी मौजूद था। बाद में पुलिस
ने दोबारा से मामला में पूछताछ की तो मामला बदल गया। संदीप त्यागी ने फिर हरदीप का
नाम हटाकर पूरे मामले को अपने सिर ले लिया है। पुलिस ने हरदीप को क्यों बचाया है।
इस पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए है।
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