Wednesday, October 28, 2015

करवाचौथ पर्व

दो दिन बाद करवाचौथ पर्व है। इसको लेकर तैयारियां जोरों पर है। शहर के छोटे बड़े सभी तरह के शोरूम सज चुके हैं। आबूलेन स्थित बलदेव दी हट्टी के मालिक गुलशन जुनेजा का कहना है कि नवरात्र से खरीददारी की शुरुआत हो चुकी है। इस साल भी करवाचौथ पर फैशन के कई रंग देखने को मिलेंगे। वहीं, बॉम्बे बाजार स्थित मिली कलेक्शन की मालिक मिली शेखरी का कहना है कि खरीददारी करने वालों में नव-विवाहिताओं का अनुपात सबसे अधिक है। इनके द्वारा हमेशा लेटेस्ट की डिमांड की जाती है।
साड़ियों में प्लेट्स का झंझट नहीं
इस करवाचौथ इंडो वेस्टर्न ड्रेसेज का काफी क्रेज है। यह भारतीय और पश्चिमी परिधानों का मिश्रण होता है। यह ड्रेस जैकेटनुमा व जमीन से छह इंच ऊपर होती है। देखने में लुक काफी हैवी होता है। ये ड्रेस वाइन, मैरून, पेस्टल कलर्स में उपलब्ध है। अब साड़ियां पहनना ज्यादा झंझट का काम नहीं है। बाजार में ऐसी वैरायटी उपलब्ध है जो इस काम को आसान बना रही है। साड़ियों में प्लेट्स बनाने की जरूरत नहीं होगी। यह रेडी टू वियर होती है।
फ्लोर लेंथ अनारकली सूट
जमीन तक की लंबाई के अनारकली सूट भी काफी पसंद किए जा रहे है। यह चूड़ीदार लेगिंग के साथ आता है। पहले नेट चलन में था, लेकिन इस साल सिल्क और जॉर्जेट की काफी मांग है। इसमें रेड, मैरून, ग्रीन, पिंक और पैरेट कलर्स उपलब्ध है।
इंपोर्टेड कपड़े की साड़ी
सामान्य जार्जेट व नेट से हटकर इस बार इम्पोर्टेड कपड़े की साड़ी डिमांड में है। इसकी क्वालिटी लाइक्रा है। जो बढि़या फील व शानदार लुक देती है। इसके अलावा हैंडलूम साड़ियों पर भी गौर किया जा सकता है। इसे बनारस और कांजीवरम से मंगवाया जाता है।
मीना और गोटे वर्क की थाली और करवे
इस बार जहां डिजाइनर थाली का क्रेज महिलाओं में देखने को मिल रहा है। वहीं कम बजट में मीना और गोटे वर्क में भी थाली और करवे बाजार में उपलब्ध है। सदर सर्राफा बाजार स्थित पटवा जी एम्पोरियम के मालिक अभय कहते है कि पिछले कुछ सालों में गोटे के वर्क वाले करवे और मीना वर्क की थाली की काफी डिमांड है।
अलग समाज,अलग रिवाज
जैन समाज
परंपरागत रिवाज : जैन समाज में चांद को नहीं बल्कि सूर्य को अ‌र्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। जैन समाज की महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा की थाली में पूरी और पुए रखकर दोपहर में ही कहानी सुन लेती हैं। इसके बाद सास के लिए साड़ी, चूड़ी, बिंदी और दक्षिणा रखकर बायना निकाला जाता है। जिसमें कच्चे चावल और बताशे रखना अनिवार्य होता है। इसके बाद छलनी से सूर्य को देखकर अ‌र्घ्य दिया जाता है, उसके बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं। जैन समाज में सूर्य को अ‌र्घ्य देने के साथ पति का चेहरा देखना अनिवार्य नहीं होता है।
अग्रवाल समाज
करवाचौथ पर अग्रवाल समाज की महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रखती है। शाम को सूरज ढलने से पहले करवा माता की कहानी सुनकर सास के लिए साड़ी और श्रृंगार की वस्तुओं के अलावा दक्षिणा देकर बायना निकालती है। जिसमें कच्चे चावल और मिठाई देना अनिवार्य होता है। पूजा में रखे गए दो करवों में से एक का जल चलते (ढलते) हुए सूरज को दिया जाता है, और दूसरे करवे का जल चंद्रमा को देना होता है। छन्नी से चांद को देखने का भी रिवाज नहीं था। अब आधुनिकता ने पैर पसारे हैं और अब चांद को छन्नी से देखकर पति का चेहरा देखने का रिवाज चला है। पति ही पानी व मिठाई खिलाकर व्रत खुलवाते हैं।
मारवाड़ी समाज
न्यूदेव पुरी निवासी कांता गुप्ता मारवाड़ी बताती हैं कि मारवाड़ी समाज में सभी सुहागिनें करवाचौथ के दिन सुबह चार बजे उठकर सरगी खाती हैं। सरगी में चूरमें का विशेष महत्व है। इसके साथ ही मिठाई व परांठा भी खाया जा सकता है। इसके बाद सभी सुहागिनें सुबह पूजा करती हैं और शाम को चार बजे के करीब पूड़ों का बायना निकालती हैं और सभी महिलाएं पूरा श्रृंगार करके व्रत की कहानी सुनती हैं। शाम को चांद निकलने पर सभी चांद को जल देती हैं और खाना खाकर व्रत खोलती हैं।
पंजाबी समाज
वसंत कुंज निवासी सुगंधा सचदेवा बताती हैं कि पंजाबियों में करवाचौथ के दिन सभी सुहागिनें सुबह सूरज निकलने से पहले अपनी सास के साथ बैठकर सरगी खाती हैं और सास बहू को मीठी सेवैंया खिलाती है। इसके बाद शाम को सभी महिलाएं सज-धज कर व्रत की कहानी सुनती हैं। व्रत की कहानी सुनने के दौरान सभी महिलाएं अपनी पूजा की थाल को एक दूसरे को देकर घुमाती रहती हैं। इस थाल में जल का पात्र और बहू द्वारा सास को दिया जाने वाला उपहार होता है। चांद निकलने पर सभी चांद को अ‌र्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।
हम बने, तुम बने एक दूजे के लिए ..
आपस में बढ़ता है प्यार और विश्वास
अक्षय जैन अरिहंत अपनी पत्नी के लिए हर साल व्रत रखते हैं। वे बताते हैं उनकी शादी को दो साल हो गए है, और वे अपनी पत्नी की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत करते हैं। उनके मुताबिक जिस प्रकार महिला अपने पति की दीर्घायु की कामना करती है, वैसे ही पुरुष भी जीवनसंगिनी के प्रति यही भाव रखें तो दांपत्य की डोर और मजबूत होती है।
दोनों रखते है करवाचौथ का व्रत
मेहा सिन्हा कहती है कि करवाचौथ उनके लिए खास त्यौहार है। इसमें वे तो पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती ही है। उनके पति भी हर साल उनकी लंबी उम्र के लिए व्रत करते है। नेहा निगम ने करवाचौथ के बाद शिमला घूमने का प्लान बना रखा है।
पहले करवाचौथ की याद आज भी है ताजा
श्वेता सचिन कुमार की शादी को भले ही तीन साल हो गए हो। लेकिन आज भी पहले करवाचौथ की यादें उनके जहन में ताजा है, और हो भी क्यों न उस बार वे पति सचिन के साथ घूमने मलेशिया जो गई थी।
फोटो देखकर पूरा होगा व्रत
साकेत में रहने वाली इंदू गर्ग के पति उमेश कुमार इस साल करवाचौथ पर उसके साथ नहीं है। इंदू कहती है कि ऐसा पहली बार हो रहा है। व्रत करने के बाद फोटो देखकर व्रत पूरा करना होगा।
हर साल स्काइप पर होता है दीदार
पल्लवपुरम में रहने वाली अर्चना रस्तोगी की शादी को पच्चीस साल हो गए। लेकिन उन्होंने अधिकतर करवाचौथ का व्रत अकेले ही किया है। नेवी में कैप्टन उनके पति पुनीत कुमार को अधिकतर घर से बाहर ही रहना पड़ता है।
पति से दूर रहकर बनाना होगा करवाचौथ
रूड़की रोड स्थित इंद्रप्रस्थ की रहने वाली सोनिया कश्यप कहती है कि शादी के बाद ऐसा कई बार हुआ है जब करवाचौथ पर पति घर से बाहर हो। इस बार चांद में होगा मेरे चांद का चेहरा लेकिन ऐसा होने पर भी पूजा और व्रत तो करना ही पड़ता है।
पति के बिना अधूरा लगता है पर्व
सदर में रहने वाली शिल्पी गोयल के पति कैलाश गुप्ता का बिजनेस है। वे इस साल करवाचौथ पर बिजनेस डील के लिए मुंबई जा रहे हैं। शिल्पी बताती है कि जब पति ही साथ न हो तो यह पर्व अधूरा सा लगता है।
द्वापर युग से चली आ रही करवाचौथ की परंपरा

करवाचौथ का व्रत कब शुरू हुआ कैसे यह चलन में आया इसे लेकर कई किवदंतियां हैं। इसे द्वापर युग से जुड़ा हुआ माना जाता है। पूरी महाभारत के बाद पांडव ही शेष बचे, इसके पीछे द्रौपदी का तप बताया जाता है। कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर महाभारत शुरू होने से पहले द्रौपदी ने ये व्रत सबसे पहले किया और उन्हें चौथ माता ने अखंड सौभाग्य प्रदान किया।

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