Friday, October 23, 2015

गुब्बारे बेचकर जमा करेंगे बच्चों की फीस

दशहरा मेला सिर्फ श्रद्धा और उत्साह का मेला भर नहीं है। ये कुछ लोगों के लिए सपनों का मेला भी है। आप और हम भले इस मेले के उत्साह का हिस्सा हों, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस मेले के माध्यम से अपने सपने पूरे कर रहे हैं। उनके लिए दशहरे का मेला वो साधन है, जो उन्हें उनके सपनों के करीब ले जाएगा। मेले में आठ साल का कपिल मुखौटे बेच रहा है, जिससे उसके परिवार का खर्च चल सके, वहीं अभिनव ने कोचिंग का खर्च निकालने के लिए मेले में जूतों की दुकान लगाई है। पुनीत ने मेले में इसलिए खिलौनों की दुकान लगाई है जिससे इस बार उसका परिवार अच्छे से दीपावली मना सकें। आप भी मिलिए मेरठ के मेले के इन 'सपनों के सौदागरों' से।
मां के बाद बहनों की जिम्मेदारी का फर्ज निभाना है
कपिल के हाथों में मुखौटे, तीर और गदा से भरी छड़ी है। उम्र आठ साल से ज्यादा न होगी। कपिल ने सुबह जल्दी ही अपनी छड़ी मेले में लगा ली है, ताकि अधिक से अधिक कमाई हो जाए और उसका और उसकी दो बहनों का कुछ समय तक खर्च आसानी से चल जाए। मां की मृत्यु के बाद दो बहनों की जिम्मेदारी अब कपिल के कंधों पर जो आ गई है।
गुब्बारे बेचकर जमा करेंगे बच्चों की फीस
मेले में दुकान लगाने के बाद पुनीत ने जल्दी-जल्दी गुब्बारों में हवा भरी ताकि अधिक से अधिक रुपये कमा सकें। वे घर चलाने के लिए फेरी का काम करते है। कहते है कि पिछले साल दशहरे में छह सात हजार रुपये की ब्रिकी हो गई थी, जिससे बच्चों के साल भर के पढ़ाई का खर्च निकल गया था। उम्मीद है इस साल भी अच्छी कमाई हो जाए तो बच्चों की फीस का खर्च निकल जाएगा।
खर्च के लिए लगाई पोस्टर की दुकान
मयंक अपने दोस्त राकेश के साथ मेले में पोस्टर बेच रहे हैं। असल में ये दोनों दोस्त घंटाघर पर आर्टिफिशियल ज्वैलरी की दुकान लगाते है। पिछले कुछ समय से दुकान में घाटा उठा रहे मयंक और राकेश बताते है कि मेले में पोस्टर बेचकर जो भी आमदनी होगी वे उसे दुकान का घाटा पूरा करेंगे। जिससे उन्हें किसी से उधार न लेना पड़े।
जूते बेचकर जमा करेंगे कोचिंग की फीस
कोशिश करने वाले कभी नहीं हारते ये बात बी. कॉम की पढ़ाई कर रहे अभिनव पर बिल्कुल सटीक बैठती है। पिता ने जब आगे पढ़ने की बजाए उसे जूतों की दुकान पर बैठने के लिए मजबूर किया तो उसने भी कोचिंग की फीस भरने के लिए मेले में जूतों की दुकान लगा ली। दशहरे मेले से जो भी कमाई होगी वह उससे कोचिंग की फीस भरकर आगे की पढ़ाई करेगा।
मेले की कमाई से खरीदूंगा जरूरी चीज

दशहरे मेले में बर्तनों की दुकान लगाने वाला अभिनव 11वीं कक्षा में पढ़ता है। घर का खर्च तो सामान्य दिनों की कमाई से चल जाता है। वह बताता है कि जल्द ही बहन की शादी होने वाली है। इसलिए घर के लिए कुछ जरूरी वस्तुएं खरीदनी है। पिछले साल मेले में अच्छी खासी कमाई हो गई थी। इस बार भी हो जाए तो मेरा काम बन जाएगा।

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