Wednesday, August 14, 2013

ट्रेन भी आसानी से

दिल्ली में ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में जितना भी डिवेलपमेंट हुआ, उसका फायदा सिर्फ दिल्ली और उससे सटे एनसीआर के एक बेहद सीमित इलाके में रहने वाले लोगों को ही मिला। रैपिड रेल प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यही होगी कि इसके जरिए दिल्ली और एनसीआर के दूरदराज के इलाके भी एक वर्ल्ड क्लास ट्रांसपोर्ट सिस्टम के जरिए आपस में सीधे कनेक्ट हो जाएंगे। इतना ही नहीं, दिल्ली एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अन्य साधनों से भी इसका बेहतर ढंग से इंटिग्रेशन किया जाएगा, ताकि रैपिड रेल से आने जाने वाले लोगों को आगे की जर्नी के लिए मेट्रो, इंटर स्टेट बसें, डीटीसी बसें और ट्रेन भी आसानी से मिल जाएंगे। 
दिल्ली एनसीआर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम की सूरत बदलने वाले इस प्रोजेक्ट के फेज-1 के लिए शुरुआत में तीन प्रायॉरिटी कॉरिडोर की पहचान की गई है। दिल्ली-पानीपत, दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर। ये तीनों ही कॉरिडोर दिल्ली को यूपी, हरियाणा और राजस्थान जैसे तीन पड़ोसी राज्यों के उन इलाकों से जोड़ेंगे, जो वैसे तो एनसीआर के तहत आते हैं लेकिन अभी उनके साथ डायरेक्ट कनेक्टिविटी मुहैया कराने के लिए ऐसा कोई मजबूत और मॉडर्न रीजनल ट्रांजिट सिस्टम मौजूद नहीं है, जो कम समय और कम पैसों में आरामदायक तरीके से लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचा सके। रैपिड रेल इसी कमी को दूर करेगी। रीजनल रैपिड रेल प्रोजेक्ट के वैसे तो कई पहलू हैं, लेकिन हम सबसे पहले इस प्रोजेक्ट के उन तीन कॉरिडोर पर रोशनी डालेंगे, जिनसे दिल्ली-एनसीआर के आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। 
मेरठ से दिल्ली नौकरी, बिजनेस और दूसरे कामों के सिलसिले में आने वालों की तादाद अभी भी काफी संख्या में है। इसके भविष्य में भी काफी तेजी से बढ़ने के चांस हैं। इस वक्त लोग ट्रेन या बसों से दिल्ली आते हैं जिसमें 2 से 2.5 घंटे लगते हैं। सड़क से आने में अक्सर जाम में फंसकर लोग कई-कई घंटे फंसे रहते हैं। रैपिड रेल के पहले फेज में मेरठ और दिल्ली की कनेक्टिविटी बेहतरीन होने के पूरे चांस हैं। 


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