Wednesday, January 15, 2014

खुफिया विभाग अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने में लगा रहा

मुजफ्फरनगर दंगा को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही यूपी सरकार और स्थानीय खुफिया एजेंसी एक बार फिर कटघरे में है। महज 2-3 दिन पहले मुजफ्फरनगर में सैटेलाइट फोन की मौजूदगी की जानकारी ने जहां स्थानीय खुफिया विभाग की लापरवाही को एक बार फिर उजागर किया है, वहीं यह बात भी सामने आई है कि जिस समय दंगा पीड़ितों के बीच आतंकवादी संगठन अपनी घुसपैठ बनाने की कोशिश कर रहे थे, उस समय समाजवादी पार्टी के ईशारे पर स्थानीय खुफिया एजेंसी अपने राजनीतिक आकाओं के चुनावी समीकरण के लिए जातिगत आधार पर गांवों की जनगणना करने में लगी थी। प्रदेश सरकार और स्थानीय खुफिया एजेंसी की नींद तब खुली जब केन्द्रीय जांच एजेंसियों और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दंगा पीड़ितों से आतंकवादी संगठनों के तार जुड़ने की खबरों का खुलासा किया। बताया जा रहा है कि राहुल और सोनिया गांधी के मुजफ्फरनगर के पहले दौरे के समय से ही आईबी दंगा पीड़ित क्षेत्र में सक्रिय हो गई थी। 
बता दें कि मुजफफरनगर दंगा पीड़ितों से आतंकवादी संगठनों के संपर्क साधे जाने से संबंधित राहुल गांधी के बयान ने सियासत में तूफान खड़ा कर दिया था। उस पर सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने ढंग से टिप्पणी की थी। आरोप है कि इसके बावजूद मुजफ्फरनगर का खुफिया विभाग अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने में लगा रहा। सूत्रों के मुताबिक, सत्ता में राजनीतिक नेता यह चाहते थे कि आगामी चुनाव से पहले उनके पास जिले के हर गांव की जनगणना की जातिवार तस्वीर हो। उनके ईशारे पर स्थानीय खुफिया एजेंसी इस काम में जुट गई।
 
सूत्र बतातें है कि जब राहुल गांधी पहली बार सोनिया गांधी के साथ मुजफफरनगर आए थे, तभी से आईबी के अधिकारी वहां सक्रिय हो गए थे। उन्हें आतंकी संगठनों की पीड़ितों से तार जुड़े होने की भनक मिली तो वे और गहराई से जांच पड़ताल में जुट गए। जबकि स्थानीय खुफिया एजेंसी इस हकीकत से बेखबर होकर अपने राजनीतिक आकाओं के निर्देश पर गांवों के जातिवार जनगणना के काम में जुटी रही। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया विभाग न्यामू, ज्ञान माजरा, घिसू खेड़ा, कुटेसरा, नंगला राई, कुल्हेडी, बलवा खेड़ी, बहादरपुर, डूरा, सरवट, बामन हेड़ी, रथेड़ी आदि दर्जनों गांवों में जाति के आधार पर जनगणना का काम पूरा कर चुका है।
 
दूसरी
 तरफ , घुसपैठ को लेकर स्थानीय खुफिया एजेंसी की नींद तो तब टूटी जब दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने इसबात से पर्दा उठाया कि मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों से आतंकी संगठनों के तार जुड़े हैं। इसी दौरान मेरठ सेनक्सलपंथी चंदनजी की गिरफ्तारी ने भी मुजफ्फरनगर के खुफिया विभाग की कार्यशौली पर सवालिया निशानखड़े कर दिए। चंदनजी को मेरठ के भैंसाली बस स्टैंड से जिस समय एसटीएफ ने गिरफ्तार किया वह उस समयखतौली से दिल्ली के लिए जा रहा था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया था कि वह मुजफ्फरनगर में काफी समयतक रहा। 
इन
 खुलासों से बौखलाई स्थानीय खुफिया एजेंसी अभी ठीक से संभल भी नहीं पाई थी कि उस पर एक वज्रपातऔर हो गया। मुजफ्फरनगर के बाईपास पर सैटलाइट फोन की सूचना ने मानों उसकी कार्यशैली की पूरी तरह सेपोल खोल कर रख दी। अब खुफिया एजेंसी और जिले के अधिकारी इस बारे में बात करने से कतरा रहें हैं।हालांकि , खुफिया एजेंसी और अधिकारी दबी जुबान से चूक की बात स्वीकार करतें है , लेकिन ऑफिशियली इसमसले पर कोई बयान देने को तैयार नहीं हैं।

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