Friday, October 30, 2015

मेरठ मंडल के खिलाड़ियों को पुरस्कार

मेरठ और सहारनपुर मंडल के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले 71 खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया गया। कैलाश प्रकाश स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में खेल और युवा कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव डा. अनिता भटनागर जैन ने इन खिलाड़ियों को 20 लाख 90 हजार रुपये की राशि का चेक दिया।
वर्ष 2010 से 2014 तक कामनवेल्थ, एशियन, नेशनल में स्वर्ण, रजत, कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को उत्तर प्रदेश शासन की ओर से पुरस्कार दिया गया। इसमें 49 लड़कों और 22 लड़कियों को चेक देकर सम्मानित किया गया। प्रमुख सचिव खेल ने कुश्ती, टेबल टेनिस, जूडो, पावर लिफ्टिंग, साइक्लिंग, नेट बाल, कबड्डी आदि खेलों में पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार वितरण के दौरान डा. अनिता भटनागर जैन ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वह छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर बड़ा लक्ष्य जीते। पुरस्कार वितरण के दौरान क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी मुद्रिका पाठक सहित खेल से जुड़े अन्य अधिकारी, कोच, खिलाड़ी और उनके अभिभावक मौजूद रहे।
मेरठ मंडल के खिलाड़ियों को पुरस्कार
20 वें कामनवेल्थ गेम में साइकिलिंग में प्रतिभाग करने वाले मेरठ के अरविंद पंवार को पांच लाख रुपये का चेक दिया गया। टीटी में अभिनव को 15 हजार रुपये, जूडो में रीना पाल को 25 हजार रुपये, विशाल को 25 हजार रुपये, कुश्ती में दीक्षा को दस हजार रुपये, पिंकी रानी को दस हजार रुपये, काजल को दस हजार रुपये, साक्षी को 25 हजार रुपये, इंदू तोमर को 25 हजार रुपये, पूजा को 35 हजार, नेट बाल में अमित शर्मा को 20 हजार रुपये, गिरीश चौहान को 20 हजार, निर्दोष शर्मा को 20 हजार, अजय सिंह को 20 हजार, गिन्नी सिंह को 20 हजार, अतिम नागर, जितेंद्र सिंह, अनुज चौधरी, राहुल शर्मा को 20-20 हजार, जूडो में पारुल वर्मा को 15 हजार, कबड्डी में विनय, विक्रांत, विशाल को पांच -पांच हजार, टीटी में सौंदर्या पाठक को पांच हजार रुपये, सार्थक शर्मा को पांच हजार रुपये, सार्थक सेठ को पांच हजार रुपये का चेक मिला। जूडो में रीना पाल को 25 हजार रुपये, लक्ष्य वेद को पावर लिफ्टिंग में 15 हजार रुपये, नेट बाल में हिमांशु को 20 हजार रुपये, जूडो में दीपक त्यागी को पांच हजार रुपये, जोनू सिंह को 35 हजार रुपये, कुश्ती में इंदू चौधरी को 25 हजार रुपये, रिशु नागर को 15 हजार रुपये, अंशु तोमर को पांच हजार रुपये का चेक मिला।
सहारनपुर मंडल के इन खिलाड़ियों को पुरुस्कार

साउथ एशियन गेम में चार सौ मीटर एथलेक्टिस में पदक जीतने पर प्रियंका पंवार को दो लाख रुपये का चेक दिया गया। कबड्डी में निशांत कुमार को पांच हजार रुपये, विक्रांत मलिक को पांच हजार रुपये, अक्षय बालियान को पांच हजार रुपये, गौरव चौहान को तीस हजार रुपये, कपिल कुमार को 30 हजार रुपये, वालीबाल में प्रशांत कुमार को 30 हजार रुपये, बैडमिंटन में कपिल चौधरी को 25 हजार रुपये, पावर लिफ्टिंग में सनी शर्मा को 25 हजार रुपये, नेटबाल में मोहित कश्यप को 20 हजार रुपये, जूडो में शीतल चौहान को 25 हजार रुपये, आकाश को निर्धारित पुरस्कार राशि का चेक दिया गया।

Wednesday, October 28, 2015

करवाचौथ पर्व

दो दिन बाद करवाचौथ पर्व है। इसको लेकर तैयारियां जोरों पर है। शहर के छोटे बड़े सभी तरह के शोरूम सज चुके हैं। आबूलेन स्थित बलदेव दी हट्टी के मालिक गुलशन जुनेजा का कहना है कि नवरात्र से खरीददारी की शुरुआत हो चुकी है। इस साल भी करवाचौथ पर फैशन के कई रंग देखने को मिलेंगे। वहीं, बॉम्बे बाजार स्थित मिली कलेक्शन की मालिक मिली शेखरी का कहना है कि खरीददारी करने वालों में नव-विवाहिताओं का अनुपात सबसे अधिक है। इनके द्वारा हमेशा लेटेस्ट की डिमांड की जाती है।
साड़ियों में प्लेट्स का झंझट नहीं
इस करवाचौथ इंडो वेस्टर्न ड्रेसेज का काफी क्रेज है। यह भारतीय और पश्चिमी परिधानों का मिश्रण होता है। यह ड्रेस जैकेटनुमा व जमीन से छह इंच ऊपर होती है। देखने में लुक काफी हैवी होता है। ये ड्रेस वाइन, मैरून, पेस्टल कलर्स में उपलब्ध है। अब साड़ियां पहनना ज्यादा झंझट का काम नहीं है। बाजार में ऐसी वैरायटी उपलब्ध है जो इस काम को आसान बना रही है। साड़ियों में प्लेट्स बनाने की जरूरत नहीं होगी। यह रेडी टू वियर होती है।
फ्लोर लेंथ अनारकली सूट
जमीन तक की लंबाई के अनारकली सूट भी काफी पसंद किए जा रहे है। यह चूड़ीदार लेगिंग के साथ आता है। पहले नेट चलन में था, लेकिन इस साल सिल्क और जॉर्जेट की काफी मांग है। इसमें रेड, मैरून, ग्रीन, पिंक और पैरेट कलर्स उपलब्ध है।
इंपोर्टेड कपड़े की साड़ी
सामान्य जार्जेट व नेट से हटकर इस बार इम्पोर्टेड कपड़े की साड़ी डिमांड में है। इसकी क्वालिटी लाइक्रा है। जो बढि़या फील व शानदार लुक देती है। इसके अलावा हैंडलूम साड़ियों पर भी गौर किया जा सकता है। इसे बनारस और कांजीवरम से मंगवाया जाता है।
मीना और गोटे वर्क की थाली और करवे
इस बार जहां डिजाइनर थाली का क्रेज महिलाओं में देखने को मिल रहा है। वहीं कम बजट में मीना और गोटे वर्क में भी थाली और करवे बाजार में उपलब्ध है। सदर सर्राफा बाजार स्थित पटवा जी एम्पोरियम के मालिक अभय कहते है कि पिछले कुछ सालों में गोटे के वर्क वाले करवे और मीना वर्क की थाली की काफी डिमांड है।
अलग समाज,अलग रिवाज
जैन समाज
परंपरागत रिवाज : जैन समाज में चांद को नहीं बल्कि सूर्य को अ‌र्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। जैन समाज की महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा की थाली में पूरी और पुए रखकर दोपहर में ही कहानी सुन लेती हैं। इसके बाद सास के लिए साड़ी, चूड़ी, बिंदी और दक्षिणा रखकर बायना निकाला जाता है। जिसमें कच्चे चावल और बताशे रखना अनिवार्य होता है। इसके बाद छलनी से सूर्य को देखकर अ‌र्घ्य दिया जाता है, उसके बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं। जैन समाज में सूर्य को अ‌र्घ्य देने के साथ पति का चेहरा देखना अनिवार्य नहीं होता है।
अग्रवाल समाज
करवाचौथ पर अग्रवाल समाज की महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रखती है। शाम को सूरज ढलने से पहले करवा माता की कहानी सुनकर सास के लिए साड़ी और श्रृंगार की वस्तुओं के अलावा दक्षिणा देकर बायना निकालती है। जिसमें कच्चे चावल और मिठाई देना अनिवार्य होता है। पूजा में रखे गए दो करवों में से एक का जल चलते (ढलते) हुए सूरज को दिया जाता है, और दूसरे करवे का जल चंद्रमा को देना होता है। छन्नी से चांद को देखने का भी रिवाज नहीं था। अब आधुनिकता ने पैर पसारे हैं और अब चांद को छन्नी से देखकर पति का चेहरा देखने का रिवाज चला है। पति ही पानी व मिठाई खिलाकर व्रत खुलवाते हैं।
मारवाड़ी समाज
न्यूदेव पुरी निवासी कांता गुप्ता मारवाड़ी बताती हैं कि मारवाड़ी समाज में सभी सुहागिनें करवाचौथ के दिन सुबह चार बजे उठकर सरगी खाती हैं। सरगी में चूरमें का विशेष महत्व है। इसके साथ ही मिठाई व परांठा भी खाया जा सकता है। इसके बाद सभी सुहागिनें सुबह पूजा करती हैं और शाम को चार बजे के करीब पूड़ों का बायना निकालती हैं और सभी महिलाएं पूरा श्रृंगार करके व्रत की कहानी सुनती हैं। शाम को चांद निकलने पर सभी चांद को जल देती हैं और खाना खाकर व्रत खोलती हैं।
पंजाबी समाज
वसंत कुंज निवासी सुगंधा सचदेवा बताती हैं कि पंजाबियों में करवाचौथ के दिन सभी सुहागिनें सुबह सूरज निकलने से पहले अपनी सास के साथ बैठकर सरगी खाती हैं और सास बहू को मीठी सेवैंया खिलाती है। इसके बाद शाम को सभी महिलाएं सज-धज कर व्रत की कहानी सुनती हैं। व्रत की कहानी सुनने के दौरान सभी महिलाएं अपनी पूजा की थाल को एक दूसरे को देकर घुमाती रहती हैं। इस थाल में जल का पात्र और बहू द्वारा सास को दिया जाने वाला उपहार होता है। चांद निकलने पर सभी चांद को अ‌र्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।
हम बने, तुम बने एक दूजे के लिए ..
आपस में बढ़ता है प्यार और विश्वास
अक्षय जैन अरिहंत अपनी पत्नी के लिए हर साल व्रत रखते हैं। वे बताते हैं उनकी शादी को दो साल हो गए है, और वे अपनी पत्नी की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत करते हैं। उनके मुताबिक जिस प्रकार महिला अपने पति की दीर्घायु की कामना करती है, वैसे ही पुरुष भी जीवनसंगिनी के प्रति यही भाव रखें तो दांपत्य की डोर और मजबूत होती है।
दोनों रखते है करवाचौथ का व्रत
मेहा सिन्हा कहती है कि करवाचौथ उनके लिए खास त्यौहार है। इसमें वे तो पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती ही है। उनके पति भी हर साल उनकी लंबी उम्र के लिए व्रत करते है। नेहा निगम ने करवाचौथ के बाद शिमला घूमने का प्लान बना रखा है।
पहले करवाचौथ की याद आज भी है ताजा
श्वेता सचिन कुमार की शादी को भले ही तीन साल हो गए हो। लेकिन आज भी पहले करवाचौथ की यादें उनके जहन में ताजा है, और हो भी क्यों न उस बार वे पति सचिन के साथ घूमने मलेशिया जो गई थी।
फोटो देखकर पूरा होगा व्रत
साकेत में रहने वाली इंदू गर्ग के पति उमेश कुमार इस साल करवाचौथ पर उसके साथ नहीं है। इंदू कहती है कि ऐसा पहली बार हो रहा है। व्रत करने के बाद फोटो देखकर व्रत पूरा करना होगा।
हर साल स्काइप पर होता है दीदार
पल्लवपुरम में रहने वाली अर्चना रस्तोगी की शादी को पच्चीस साल हो गए। लेकिन उन्होंने अधिकतर करवाचौथ का व्रत अकेले ही किया है। नेवी में कैप्टन उनके पति पुनीत कुमार को अधिकतर घर से बाहर ही रहना पड़ता है।
पति से दूर रहकर बनाना होगा करवाचौथ
रूड़की रोड स्थित इंद्रप्रस्थ की रहने वाली सोनिया कश्यप कहती है कि शादी के बाद ऐसा कई बार हुआ है जब करवाचौथ पर पति घर से बाहर हो। इस बार चांद में होगा मेरे चांद का चेहरा लेकिन ऐसा होने पर भी पूजा और व्रत तो करना ही पड़ता है।
पति के बिना अधूरा लगता है पर्व
सदर में रहने वाली शिल्पी गोयल के पति कैलाश गुप्ता का बिजनेस है। वे इस साल करवाचौथ पर बिजनेस डील के लिए मुंबई जा रहे हैं। शिल्पी बताती है कि जब पति ही साथ न हो तो यह पर्व अधूरा सा लगता है।
द्वापर युग से चली आ रही करवाचौथ की परंपरा

करवाचौथ का व्रत कब शुरू हुआ कैसे यह चलन में आया इसे लेकर कई किवदंतियां हैं। इसे द्वापर युग से जुड़ा हुआ माना जाता है। पूरी महाभारत के बाद पांडव ही शेष बचे, इसके पीछे द्रौपदी का तप बताया जाता है। कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर महाभारत शुरू होने से पहले द्रौपदी ने ये व्रत सबसे पहले किया और उन्हें चौथ माता ने अखंड सौभाग्य प्रदान किया।

Monday, October 26, 2015

मेरठ के दोनों पैर गंदगी में धंसे हुए

स्मार्ट सिटी की रेस भरने के लिए तैयार मेरठ के दोनों पैर गंदगी में धंसे हुए मिले। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट ने मेरठ की हकीकत से पर्दा हटा दिया। इसे देश के सबसे प्रदूषित शहरों में आंका गया है। सड़कों पर कूड़े के ढेर, बजबजाती नालियां और तमाम दुश्वारियों वाला मेरठ संक्रामक बीमारियों की भी राजधानी बन चुका है। सूची में मेरठ के साथ ही बुलंदशहर भी शामिल है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली ने मेरठ को गले तक गंदगी में डुबो दिया। जो शहर स्मार्ट सिटी की रेस में तमाम बड़े शहरों को मात देने का दावा कर रहा है, उसमें शहर के दामन पर गंदगी कोढ़ बनकर दर्ज हो गई है। दशकों से जाम नाले, बजबजाती नालियां, जलभराव, सीवर की पाइपों से लीकेज और कूड़ाघरों से उठती भयंकर बदबू शहर के खुरदरे चेहरे को और दागदार बना रहे हैं। गंदगी की सफाई के लिए जेसीबी एक बार गरजकर दो कदम बढ़ती है तो विरोध के बाद मीलों पीछे जा खड़ी होती है। पुराने शहर में गंदगी एक नासूर बनकर महानगर की साख को डसने लगी है।
सिर्फ दो डंपिंग ग्राउंड
महानगर की आबादी करीब 20 लाख आंकी जा रही है, किंतु कूड़ा उठाने के लिए महज दो डंपिंग ग्राउंड हैं। एक मेवला फाटक के पास तो दूसरा किला रोड स्थित गांव गाबड़ी में। गाबड़ी में ही कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ था जो परवान नहीं चढ़ सका। तीन वर्ष पहले इसी गाबड़ी में सालिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कवायद चली थी जो चंद कदम बाद ढेर हो गई।
सूची में यूपी के पांच शहर
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से वर्ष 2013-14 में देश में कराए गए सर्वे में ए श्रेणी के और एक लाख से ज्यादा आबादी के शहरों की सफाई व्यवस्था की कलई खुल गई। देश के पौने पांच सौ सबसे गंदे शहरों की सूची में मेरठ समेत राज्य के पांच शहरों को शामिल किया गया है।
पीएम से भी नहीं ली सीख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर 2014 को खुद झाडू संभालते हुए लोगों को सफाई के लिए जागरूक किया था, जो बेअसर रहा। अभियान के नाम पर खानापूर्ति कर फोटो तो खिंचवाए गए लेकिन शहर का चेहरा मुरझाया ही रह गया।
नगर निगम को रोने की लत
नगर निगम सफाई पर हर बार संसाधनों के अभाव का रोना रोता है। निगम के पास 3342 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें 1127 स्थाई और बाकी संविदा के हैं। संविदा कर्मचारी बर्खास्त किए गए थे, जो फिलहाल ड्यूटी कर रहे हैं। निगम की दलील है कि फंड और कर्मचारी दोनों की तंगी में सफाई कैसे हो?
देश के कुछ सबसे गंदे शहर
शहर रैंक
मेरठ 465
बुलंदशहर 471
सुल्तानपुर 458
देवरिया 456
आजमगढ़ 452
गुड़गांव 466
भिवानी 473
रेवाड़ी 469
भरतपुर 462
रुद्रपुर 451
नोट : ये सभी देश के पौने पांच सौ गंदे शहरों की सूची में निचले पायदान पर आने वाले सबसे गंदे शहर माने गए हैं।
एक नजर मेरठ शहर पर
आबादी...करीब 20 लाख
रोजाना का कूड़ा 850 मीट्रिक टन
सफाई कर्मचारी 3342
जरूरत 5000 की

Friday, October 23, 2015

गुब्बारे बेचकर जमा करेंगे बच्चों की फीस

दशहरा मेला सिर्फ श्रद्धा और उत्साह का मेला भर नहीं है। ये कुछ लोगों के लिए सपनों का मेला भी है। आप और हम भले इस मेले के उत्साह का हिस्सा हों, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस मेले के माध्यम से अपने सपने पूरे कर रहे हैं। उनके लिए दशहरे का मेला वो साधन है, जो उन्हें उनके सपनों के करीब ले जाएगा। मेले में आठ साल का कपिल मुखौटे बेच रहा है, जिससे उसके परिवार का खर्च चल सके, वहीं अभिनव ने कोचिंग का खर्च निकालने के लिए मेले में जूतों की दुकान लगाई है। पुनीत ने मेले में इसलिए खिलौनों की दुकान लगाई है जिससे इस बार उसका परिवार अच्छे से दीपावली मना सकें। आप भी मिलिए मेरठ के मेले के इन 'सपनों के सौदागरों' से।
मां के बाद बहनों की जिम्मेदारी का फर्ज निभाना है
कपिल के हाथों में मुखौटे, तीर और गदा से भरी छड़ी है। उम्र आठ साल से ज्यादा न होगी। कपिल ने सुबह जल्दी ही अपनी छड़ी मेले में लगा ली है, ताकि अधिक से अधिक कमाई हो जाए और उसका और उसकी दो बहनों का कुछ समय तक खर्च आसानी से चल जाए। मां की मृत्यु के बाद दो बहनों की जिम्मेदारी अब कपिल के कंधों पर जो आ गई है।
गुब्बारे बेचकर जमा करेंगे बच्चों की फीस
मेले में दुकान लगाने के बाद पुनीत ने जल्दी-जल्दी गुब्बारों में हवा भरी ताकि अधिक से अधिक रुपये कमा सकें। वे घर चलाने के लिए फेरी का काम करते है। कहते है कि पिछले साल दशहरे में छह सात हजार रुपये की ब्रिकी हो गई थी, जिससे बच्चों के साल भर के पढ़ाई का खर्च निकल गया था। उम्मीद है इस साल भी अच्छी कमाई हो जाए तो बच्चों की फीस का खर्च निकल जाएगा।
खर्च के लिए लगाई पोस्टर की दुकान
मयंक अपने दोस्त राकेश के साथ मेले में पोस्टर बेच रहे हैं। असल में ये दोनों दोस्त घंटाघर पर आर्टिफिशियल ज्वैलरी की दुकान लगाते है। पिछले कुछ समय से दुकान में घाटा उठा रहे मयंक और राकेश बताते है कि मेले में पोस्टर बेचकर जो भी आमदनी होगी वे उसे दुकान का घाटा पूरा करेंगे। जिससे उन्हें किसी से उधार न लेना पड़े।
जूते बेचकर जमा करेंगे कोचिंग की फीस
कोशिश करने वाले कभी नहीं हारते ये बात बी. कॉम की पढ़ाई कर रहे अभिनव पर बिल्कुल सटीक बैठती है। पिता ने जब आगे पढ़ने की बजाए उसे जूतों की दुकान पर बैठने के लिए मजबूर किया तो उसने भी कोचिंग की फीस भरने के लिए मेले में जूतों की दुकान लगा ली। दशहरे मेले से जो भी कमाई होगी वह उससे कोचिंग की फीस भरकर आगे की पढ़ाई करेगा।
मेले की कमाई से खरीदूंगा जरूरी चीज

दशहरे मेले में बर्तनों की दुकान लगाने वाला अभिनव 11वीं कक्षा में पढ़ता है। घर का खर्च तो सामान्य दिनों की कमाई से चल जाता है। वह बताता है कि जल्द ही बहन की शादी होने वाली है। इसलिए घर के लिए कुछ जरूरी वस्तुएं खरीदनी है। पिछले साल मेले में अच्छी खासी कमाई हो गई थी। इस बार भी हो जाए तो मेरा काम बन जाएगा।

Tuesday, October 20, 2015

गिरफ्तारी का आश्वासन

पुलिस ऑफिस में सोमवार को उस समय लोगों की नजर साढ़े तीन साल की एक बच्ची पर टिक गई, जब उसने अपने पिता की गिरफ्तारी का ज्ञापन एसपी देहात को सौंपा। बच्ची के माता-पिता में कई वर्ष से कोर्ट में विवाद चल रहा है। पेश न होने की वजह से कोर्ट ने पिता के खिलाफ वारंट जारी कर रखा है। इसी आधार पर आरोपी पिता की गिरफ्तारी को बच्ची अपने नाना और मामा के साथ एसएसपी दफ्तर स्थित एसपी देहात के कार्यालय पहुंची और ज्ञापन दिया।
गंगानगर निवासी सीमा की शादी सरधना में कपसाड़ निवासी संजीव शर्मा से हुई है। संजीव शर्मा गाजियाबाद की श्रीराम पिस्टन कंपनी में नौकरी करता है। शादी के बाद से ही दंपती में विवाद हुआ और गर्भवती सीमा अपने मायके आ गई। मायके में ही सीमा ने एक बच्ची को जन्म दिया। तभी से दंपती के बीच घरेलू ¨हसा का विवाद कोर्ट में चल रहा है। बताया जाता है कि भरण-पोषण केस की तारीखों पर कोर्ट में सीमा के पति के न पहुंचने की वजह से उसके खिलाफ वारंट जारी हो गया। आरोप है कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार तक नहीं कर रही। थाने से लेकर सीओ ऑफिस तक पीड़ित परिवार चक्कर लगा रहा है और पुलिस उसे टरका रही है। सोमवार को सीमा खुद पुलिस ऑफिस नहीं पहुंची, मगर अपने अधिवक्ता के कहने पर उसने अपनी साढ़े तीन वर्ष की बच्ची मानवी शर्मा को उसके नाना शांति स्वरूप शर्मा, मामा रोहित के साथ एसपी देहात के ऑफिस में भेजा। एसपी देहात ने आरोपी की गिरफ्तारी का आश्वासन पीड़ित को दिया।

Thursday, October 15, 2015

लूट के बाद गला रेत कर हत्या

सुभाषपुरी में रिटायर्ड महिला स्टेनो की हत्या कर लूटपाट की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। हत्या में महिला के बेटे के दोस्त संदीप त्यागी को गिरफ्तार कर लिया है। संदीप ने खुलासा किया कि सट्टे के 95 हजार रुपये मृतका के बेटे पर थे, जिन्हें लेने गया तो महिला से विवाद हो गया, जिसके चलते महिला की चाकू से गला रेत कर हत्या कर दी। बाद में तीन लाख कीमत की ज्वैलरी और नगदी लूट ली थी। लूटा गया सामान और हत्या में प्रयुक्त चाकू पुलिस ने बरामद कर लिया है।
सोमवार सुबह सुभाषपुरी निवासी त्रिलोक कौर की घर में लूट के बाद गला रेत कर हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। 198 शाक्यपुरी निवासी संदीप त्यागी उर्फ जूली पुत्र र¨वद्र त्यागी सीडीए में सीनियर ऑडिटर है, जो मृतका के बेटे हरदीप के साथ सट्टा लगता था। सट्टे में 95 हजार रुपये जीतने के बाद हरदीप ने रकम नहीं दी थी। हरदीप कमेटी का काम भी करता है। सोमवार को संदीप त्यागी हरदीप के घर अपनी कमेटी के पंद्रह हजार रुपये देने गया था। त्रिलोक कौर को रकम दी गई, तो उसने संदीप त्यागी के सामने ही रकम को अलमारी में रख दिया। रकम रखते देख संदीप का मन बदल गया। उसने ज्वैलरी और नगदी को लूटने के लिए त्रिलोक कौर की हत्या कर दी गई। इंस्पेक्टर सुरेंद्र राणा ने बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद संदीप ने हत्या में प्रयोग किया चाकू स्टेशन मार्ग पर नाले में फेंक दिया था। मृतका के पुत्र ने संदीप पर शक जाहिर करते हुए मामले में नामजद किया था। पुलिस ने संदीप को सोमवार शाम को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पुलिस की पूछताछ में संदीप ने अपना गुनाह कबूल करते हुए लूटे गए 45 हजार और ढाई लाख की ज्वैलरी बरामद करा दी। साथ ही नाले से आलाकत्ल भी बरामद किया।
अवैध शराब बेचने का भी कारोबारी
मेरठ : हत्यारोपी संदीप त्यागी उर्फ जूली सीडीए में वरिष्ठ आडिटर होने के बावजूद नशीले पदार्थो का सेवन करता था। इसके साथ ही वह अवैध शराब का भी कारोबारी है। पैसों के लालच में उसने एक निर्दोष महिला की हत्या कर दी। लूट का माल बेचने के लिए उसने अपने साथ कर्मचारी से भी संपर्क किया था, लेकिन उसने माल को वापस ले जाने के लिए कह दिया था। पुलिस उससे भी पुछताछ में लगी है।
हरदीप ने निभाया था साथ?

संदीप त्यागी को थाने में बुलाकर पूछताछ की गई, जिसमें संदीप त्यागी ने बताया था कि हत्या में उसके साथ हरदीप भी मौजूद था। बाद में पुलिस ने दोबारा से मामला में पूछताछ की तो मामला बदल गया। संदीप त्यागी ने फिर हरदीप का नाम हटाकर पूरे मामले को अपने सिर ले लिया है। पुलिस ने हरदीप को क्यों बचाया है। इस पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए है।

Monday, October 12, 2015

जयप्रकाश नारायण की 113वीं जयंती - मुकुंदी देवी धर्मशाला

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 113वीं जयंती पर भाजपा महानगर इकाई ने रविवार को मुकुंदी देवी धर्मशाला में कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि उनका आंदोलन गुजरात से शुरू हुआ और बिहार से होते हुए देशभर में फैल गया। उन्होंने वामपंथ से शुरुआत की, और बाद में वह दक्षिणपंथ के समर्थक बन गए। राजेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि लोकनारायण संघ के प्रशंसक बन गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू के डीएनए में तानाशाही थी, जो इंदिरा गांधी के वक्त खुलकर सामने आ गई और देश को आपातकाल से जूझना पड़ा। रवीन्द्र भड़ाना ने कहा कि मोदी देश के सभी महापुरुषों को सम्मान देकर उनका हक दिला रहे हैं। जेपी को भुलाया नहीं जा सकता। महापौर हरिकांत ने कहा कि जेपी ने भ्रष्टाचार को खत्म करने की जोरदार अलख जगाई थी। इस अवसर पर कृष्ण गोपाल, नरेन्द्र उपाध्याय, रमेशचंद नागर, अशोक चौधरी, सुरेश अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, गिरीश मोहन गुप्ता, विजय गुप्ता, राखी त्यागी, हेमा पंत, कुसुम गोस्वामी, गजेन्द्र शर्मा एवं हर्ष गोयल समेत कई अन्य शामिल रहे।