अक्षय बंसल के हत्या के मामले में पुलिस के हाथ कातिलों तक पहुंच गए हैं। पुलिस आधा दर्जन लोगों से इस मामले में पूछताछ कर रही है। इनमें से दो युवक एक कांग्रेसी नेता के बेटे हैं। कांग्रेसी नेता के बेटे को पुलिस द्वारा उठाए जाने की सूचना पर कांग्रेसियों ने आईजी और एसओजी के कार्यालय पर जमकर हंगामा किया। शहर के प्रमुख उद्योगपति और मेरठ कॉलिज की प्रबंध समिति के पूर्व अध्यक्ष योगेश बंसल के पोते अक्षय बंसल का 3 जुलाई को अपहरण कर लिया गया था। अपहरण करने वालों ने फोन कर एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की थी। पहले तो पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन शहर में बढ़ते गुस्से को देख उसने जल्द ही अक्षय को सकुशल बरामद करने का दावा किया था। 9 जुलाई को अक्षय का शव गाजियाबाद की नहर से मिलने के बाद पुलिस के सभी दावों की हवा निकल गई। अपनी किरकिरी होते देख पुलिस नए सिरे से इस केस को हल करने में जुट गई थी। पुलिस ने अपना ध्यान उस मोबाइल फोन केबर पर लगाया जिससे फोन कर फिरौती की रकम मांगी गई थी। यह सिम फर्जी आईडी पर 22 जून को एक्टिवेट हुआ था। इससे 58 कॉल और 18 एसएमएस हुए। अक्षय से इस नंबर से 16 बार बातें हुई। अक्षय की गर्ल फ्रेंड के मोबाइल पर 20 कॉल्स हुई थीं। अक्षय के अपहरण के बाद इसी फोन से फिरौती मांगी गई। उसी दिन से यह सिम बंद हो गया था। इसी सिम से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने रविवार को छह लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें दो सगे भाई हैं जो एक कांग्रेसी नेता के बेटे हैं। गिरफ्तार युवकों में एक मोबाइल व्यापारी व एक विधायक का रिश्तेदार भी है। पुलिस इन सभी से पूछताछ कर रही है। सूत्र बताते हैं कि पूछताछ में पुलिस को अहम जानकारियां मिल रही हैं।
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