Tuesday, July 14, 2009

हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिम और सिख भी कांवड़ियों की सेवा करके पुण्य कमाने का मौका नहीं चूक रहे

शहर में विभिन्न जगहों पर लगाए गए कांवड़ शिविरों में सर्वधर्म समभाव की झलक देखने को मिल रही है। हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिम और सिख भी कांवड़ियों की सेवा करके पुण्य कमाने का मौका नहीं चूक रहे हैं। इन्हें ऐसा करते देख बहुत से लोगों को हैरत सी होती है। लेकिन अधिकतर लोग इसमें भारतीय संस्कृति की असली तस्वीर देखते हैं। चिल्ला रेगुलेटर पर पिछले 13 साल से कांवड़ सेवा शिविर लगा रही शिव कांवड़ सेवा समिति में कई मुस्लिम और सिख कार्यकर्ता हैं। समिति में न्यू अशोक नगर निवासी जुल्फिकार अली, मोहम्मद लतीफ अहमद, इरफान खान और सायरा बानो सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में जुड़े हुए हैं। वहीं सरदार कुलदीप सिंह, गुरजीत सिंह और कुलजीत सिंह भी सक्रिय सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। अलग-अलग पेशों से जुड़े सभी लोग सावन का महीना आते ही भगवान भोले के भक्तों की सेवा में जुट जाते हैं। नोएडा के सेक्टर-5 में वायर की दुकान चलाने वाले और पूर्वी दिल्ली जिला कांग्रेस कमिटी के महासचिव जुल्फिकार अली बताते हैं कि 3 साल पहले समिति से जुड़े कुछ हिंदू दोस्तों ने कहा कि कांवड़ शिविर का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने उनसे आर्थिक सहयोग की अपील की, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। शुरुआत में शिविर में आने पर उन्हें कुछ अजीब सा लगा। अब यहां आने पर एक आध्यात्मिक शांति मिलती है। घरवाले भी हिंदू भाइयों के दुख-सुख में शामिल होने के लिए उन्हें प्रेरित करते हैं और कांवड़ शिविर के दौरान दुकान की जिम्मेदारी खुद संभाल लेते हैं। सरदार गुरजीत सिंह बताते हैं कि समिति सदस्यों ने अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग शिफ्ट तय की हुई है। प्रत्येक सदस्य अपनी सुविधा के अनुसार शिविर में आकर कांवड़ियों की सेवा में जुट जाता है। कांवड़ियों के पैरों में पड़े छालों की मरहम-पट्टी की जाती है और उन्हें ताजा भोजन कराया जाता है। अगर कोई कांवड़िया बीमार हो जाए तो समिति सदस्य उसे अपनी गाड़ी से उसके घर तक छोड़ आते हैं। समिति के लिए सभी सदस्य अपनी श्रद्धानुसार दान भी देते हैं। पेंटर का काम करने वाले मोहम्मद लतीफ अहमद कहते हैं कि सभी धर्मों का सार एक ही है, और वह है इंसानियत। इसी धर्म का पालन करने के लिए वे हर साल कांवड़ियों की सेवा में खिंचे चले आते हैं। वैसे भी कुरान शरीफ में साफ लिखा है कि अपने पड़ोसियों की मदद करो, फिर चाहे वे हिंदू हो या कोई और। छाले पड़े पैरों के साथ कांवड़ लेकर आने वाले लोगों की सेवा करके वे अल्लाह ताला के उसी हुक्म की तामील कर रहे हैं।

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