Monday, August 31, 2009

महिलाओं समेत 6 लोगों की मौत

सरधना थाना क्षेत्र में हरिद्वार से दिल्ली जा रही एक इंडिका कार के गंगनहर में गिर जाने से 4 महिलाओं समेत 6 लोगों की मौत हो गई। शवों की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। सरधना थाना क्षेत्र मे चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर रविवार की शाम करीब सात बजे एक इंडिका कार हरिद्वार से दिल्ली की ओर जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मांदपुरी गांव के पास कार अचानक लहरा कर गंग नहर में समा गई। इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। गोताखोरों और क्रेन की मदद से कार को नहर से बाहर निकाला गया। निकाले जाने तक कार में सवार चार महिलाओं और दो पुरुषों की मौत हो चुकी थी। महिलाओं की उम्र 35 से 40 वर्ष के बीच, जबकि दोनों पुरुष लगभग 50 वर्ष के हैं। गाड़ी से मिले कागज के अनुसार गाड़ी दिल्ली के रहने वाले प्रमोद के नाम पर रजिस्टर्ड है। कार में मिला ड्राइविंग लाइसेंस संदीप के नाम है।

Tuesday, August 25, 2009

बडौत में स्थानीय लोंगो के विराधके कारण समलैंगिक युवक शादी नहीं रचा पाए

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थानीय लोगों के विरोध के चलते विवाह का पूरा साजो सामान लेकर मंदिर पहुंचे दो समलैंगिक युवक शादी नहीं रचा सके। घटना जिले के बड़ौत कस्बे की है, जहां सोमवार को एक प्राचीन मंदिर में 23 व 20 वर्षीय समलैंगिक युवक शादी रचाने गए थे। उस दौरान मंदिर में मौजूद रहे स्थानीय अमित सैनी ने मंगलवार को बताया कि दोनों युवक फूलों के हार, नये कपड़े और पूजा सामग्री के साथ मंदिर पहुंचे। पहले हमें लगा कि दोनों पूजा करने आए हैं। धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि मंदिर की परिक्रमा करने के बाद दोनों मंदिर के पुजारी के पास गए और कहा कि वे एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। दोनों ने पुजारी से शादी कराने के लिए कहा। यह सुनकर पुजारी ने शादी कराने से मना करते हुए कहा कि यह हिंदू मान्यताओं के खिलाफ होगा। कश्यप के मुताबिक कई बार अनुरोध करने पर जब पुजारी ने शादी कराने के लिए हां नहीं की तो दोनों समलैंगिक गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने लगे। इस पर पुजारी ने शोर मचा दिया जिससे मंदिर में पूजा करने वाले लोगों के अलावा आस-पास के लोग मौके पर पहुंच गये। उन्होंने दोनों की पिटाई कर वहां से भगा दिया। मंदिर परिसर से भगाये जाने के बाद दोनों समलैंगिक युवक स्थानीय पत्रकारों के पास पहुंचे और समलैंगिकता को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए मदद की गुहार लगाई। जिले के एसपी (रूरल)महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि स्थानीय पत्रकारों के माध्यम से घटना हमें पता चली है । घटना की जानकारी ली जा रही है। पुलिस की तरफ से इस मामले पर न्यायसंगत कार्रवाई की जाएगी।

Sunday, August 23, 2009

मेरठ के वकीलों को इसके लिए अपना शहर ही ठीक दिखाई दे रहा है।

वेस्टर्न यूपी में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना के मुद्दे पर आगरा और मेरठ के वकील आमने-सामने टकराव की मुद्रा में खड़े नजर आ रहे हैं। आगरा के वकीलों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट की अलग बेंच जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की सिफारिशों के अनुसार आगरा में स्थापित की जाए। जबकि मेरठ के वकीलों को इसके लिए अपना शहर ही ठीक दिखाई दे रहा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों के विरोधी तेवरों के बावजूद केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के आश्वासन से वकीलों का हौसला काफी बढ़ गया है। आगरा की दीवानी कचहरी में शुक्रवार को वकीलों ने अदालत के बाहर नारेबाजी की और न्यायिक कामकाज का बहिष्कार किया। वकील सोमवार तक हड़ताल पर रहेंगे। वहीं मेरठ के वकीलों का मानना है कि वेस्टर्न यूपी के लिए हाई कोर्ट की अलग बेंच मेरठ में ही बननी चाहिए। केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के आश्वासन के बाद शहर के वकील काफी उत्साहित हैं। हाल ही में मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल की अगुवाई में वकीलों का दल मोइली से मिला था। मंत्री ने उनकी मांग को जायज ठहराते हुए कहा था कि केंद्र सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। इसके बाद वकीलों का उत्साह दोगुना हो गया। शायद यही कारण है कि उन्होंने इस मुद्दे पर अपना आंदोलन फिर तेज कर दिया है। जन जागरूकता अभियान, रथयात्रा, वकीलों की क्रमिक भूख हड़ताल के अलावा मेरठ के मेयर और विधायकों ने भी आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। शनिवार को इस मुद्दे पर केंद्रीय संघर्ष समिति की बैठक में विचार किया जाएगा। अलबत्ता वकीलों के शुक्रवार को कोर्ट में न जाने से तमाम मुवक्किल इधर से उधर भटकते रहे। हाल ही में मेरठ के सांसद राजेंद अग्रवाल की अगुवाई में वकीलों का एक दल केंदीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली से मिला था। मंत्री ने उनकी मांग को जायज ठहराते हुए कहा था कि केंद सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। दिल्ली से लौटने के बाद पूरे क्षेत्र की जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए रथयात्रा निकालने का फैसला किया गया। वकीलों ने कचहरी परिसर में क्रमिक भूख हड़ताल का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। धरने के दूसरे दिन शुक्रवार को 21 वकील भूख हड़ताल पर बैठे। शहर की मेयर मधु गुर्जर व शहर से बीजेपी विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने भी आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। उधर आगरा हाई कोर्ट बेंच के लिए संघर्ष समिति की बैठक में आश्चर्य जताया गया कि जसवंत सिंह आयोग की सिफारिशों को दरकिनार कर हाई कोर्ट की बेंच किसी और शहर में बनाने के लिए कुछ लोग सक्रिय हो गए हैं। जबकि कमिशन ने आगरा में बेंच की स्थापना करने की खास सिफारिश की थी। आगरा के वकील पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की अलग बेंच लेकर शुक्रवार से आंदोलन शुरू करेंगे। बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि हाई कोर्ट खंड पीठ के मामले में उदासीन जन प्रतिनिधियों का अधिवक्ता संघर्ष समिति के बैनर तले घेराव किया जाएगा।

Wednesday, August 19, 2009

16 साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला


मुजफ्फरनगर जिले के धुगाग गांव में एक 16 साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि दलित लड़की एक सार्वजनिक हैंडपंप से पानी लेने गई थी। वहां दो युवकों ने लड़की के साथ गैंगरेप किया। युवकों ने लड़की को जान से मारने की भी धमकी दी। बाद में लड़की ने अपने घरवालों को सारी बातें बताईं। इसके बाद उन्होंने पुलिस में इस बाबत शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया है।

Tuesday, August 18, 2009

यूपी सरकार ने राज्य की जेलों में सजा काट रहे कैदियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का मौका दिया है।

खेल के मैदान पर कैदियों के सिक्सर पर जब जेलर बने अंपायर सिक्स का इशारा करेंगे तो यह नजारा बड़ा रोमांचक होगा। इस मौके पर आप जोरदार ताली बजाए बिना नहीं रह पाएंगे। यूपी सरकार ने राज्य की जेलों में सजा काट रहे कैदियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का मौका दिया है। आउटडोर व इनडोर खेलों में अपना जौहर दिखाने वाले कैदियों को स्टेट लेवल की टीम में भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए सभी जिला जेलों में एक कमिटी का गठन कर दिया गया है।
यूपी की 60 जेलों में इस समय करीब 87 हजार कैदी हैं। इनमें से कई खेल में रुचि रखते हैं। अगर इन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिले, तो ये एक बेहतर खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यूपी सरकार ने ऐसे कैदियों को मौका देने का फैसला किया है। पूरे राज्य की जेलों को इसके लिए नौ जोन में बांटा गया है। आईजी जेल के आदेश पर इन जेलों में बंद सजायाफ्ता कैदियों में से उनकी रुचि व क्षमता के अनुसार इनडोर व आउटडोर खेलों के लिए खिलाड़ियों का चयन किया जा रहा है। कैदियों के चयन के लिए एक पांच सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया है। इस कमिटी में जेल के डीआईजी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर व हेड वार्डन शामिल होंगे। कमिटी खिलाड़ियों का चयन करते समय खेल प्रतिभा के साथ ही कैदियों के अच्छे चालचलन पर भी ध्यान देगी। अंडर ट्रायल बंदियों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। चयन के मामले में कमिटी का निर्णय अंतिम माना जाएगा। सिलेक्टेड खिलाड़ियों को पहले जिलास्तर पर मौका दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने पर कैदियों को जोन की टीम में खेलने का मौका मिलेगा। फिर यहां के प्रदर्शन के आधार पर स्टेट लेवल टीम में खेलने का मौका मिलेगा। खेल प्रतियोगिता के दौरान अंपायर व रेफरी बनने का जिम्मा जेलर व डिप्टी जेलर को दिया जाएगा। जेल अधीक्षक संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि कैदियों में खिलाडि़यों के चयन का काम शुरू कर दिया गया है। अधिकांश कैदियों ने अपनी रुचि क्रिकेट, वॉलिबॉल, बैडमिंटन, चेस व कैरम में दिखाई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के इस आदेश की जानकारी मिलने पर कैदियों में खेल को लेकर जबर्दस्त उत्साह है। इससे कैदियों को अपनी प्रतिभा निखारने के साथ ही उनके बीच आपसी भाईचारा भी बढ़ेगा। साथ ही वे सेहतमंद भी होंगे।

Sunday, August 16, 2009

मेरठ जिले का हापुड भी शहीदों का साक्षी है

देश की आजादी में हापुड़ के सैकड़ों शहीदों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहां की गलियों-गलियों में उनकी जांबाजी के किस्से आज भी सुने जा सकते हैं। यहां के लोग बताते हैं कि हापुड़ में ऐसी कई जगहें हैं जहां क्रांतिकारियों ने सभाएं की थीं। तहसील मैदान में होने वाली सभा को महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भी संबोधित किया था। हापुड़ के शहीदों में चौ. जबदत्त खां, चौ. रघुबीर नारायण सिंह, बाबू लक्ष्मी नारायण, सरयू प्रसाद, लाला मुकुट लाला संपादक, जगदीश प्रसाद तापडि़या, महाशय प्यारेलाल, कैलाश चंद्र मित्तल का नाम बड़ी शिद्दत से लिया जाता है। स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और 1920 में हापुड़ कांग्रेस कमिटी के संस्थापक स्व. लाला मुकुट लाल संपादक के पोते सुरेश संपादक ने बताया कि देश की आजादी में हापुड़ के शहीदों की शहादत को भुलाया नहीं जा सकता।

क्रांतिकारियों का प्रमुख अड्डा
मेरठ के कालीपलटन के मंदिर से 10 मई 1857 को अंगेजों के खिलाफ आवाज उठाई गई। इसमें हापुड़ और आसपास के सैकड़ों गांवों के लाल शामिल थे। हापुड़ तहसील क्रांतिकारियों का प्रमुख अड्डा थी। यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी समेत कई नेता सभाएं करते थे। हालांकि, अंग्रेजों के विरुद्ध आवाज उठाने और खुलकर लोहा लेने की हापुड़वालों ने कीमत भी चुकाई। हापुड़ तहसील के 26 गांवों के गुर्जरों और अन्य लोगों को बड़ी बेरहमी से पैरों में कील गाढ़कर जिंदा जला दिया गया और कुछ को पेड़ों से बांधकर गोली से उड़वा दिया। ये पेड़ आज भी शहीदों की शहादत की याद दिलाते हैं।
जेल भी गए आजादी के परवाने
3 अगस्त 1942 को जब मुंबई में ऑल इंडिया कांग्रेस वर्किन्ग कमिटी की बैठक में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किया गया, तब 9 अगस्त 1942 को हापुड़ में जुलूस निकालने की योजना बनाई गई। इस योजना की भनक अंग्रेजों को लग गई और उन्होंने हापुड़ के कद्दावर नेता बाबू लक्ष्मी नारायण, लाला बख्तावर लाल और बाबू सरजू प्रसाद को मेरठ जेल में डाल दिया। इसके विरोध में हापुड़ में अगले दिन बाजार बंद कर हड़ताल की गई। जुलूस निकालने पर अंग्रेजी हुकूमत ने लाला परमानंद, अमोलक चंद्र, रतन लाल गर्ग, बाबू मुरारी लाल और खलीफा मंजूर हसन को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें बड़ी यातनाएं दीं।
' मिनी जलियांवाला बाग' ने झकझोरा
आजादी की लड़ाई के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कहने पर देशभक्त अंग्रेजों के विरुद्ध जुलूस निकालने और तिरंगा फहराने आजाद पार्क टाउन हॉल के निकट जुलूस के रूप में पहुंचे। वहां मौजूद अंग्रेजों के डिप्टी कलेक्टर गय्यूब अहमद जलील ने भारी पुलिस बल की मदद से निहत्थे आंदोलनकारियों को चारों तरफ से घेर लिया। उन्होंने बिना चेतावनी दिए देशभक्तों पर लाठी-डंडे चलवाए और 14 राउंड गोलियां चलवाईं। इसमें कई लोगों की जानें गई और सैकड़ों घायल हुए। घायल होने के बावजूद लाला सेवाराम ने तिरंगे को झुकने नहीं दिया। इससे खफा होकर अंग्रेजों ने उनकी जीभ कटवा दी और बाकी लोगों पर भी कहर बरपाया। इस कांड को 'मिनी जलियांवाला बाग' का नाम दिया गया। बाद में इस घटनास्थल को शहीद स्मारक घोषित कर दिया गया।
शहीद स्मारक पर कब्जा
अब पुलिस वाले और दुकानदारों ने इस जगह पर कब्जा कर रखा है। सुरेश संपादक ने बताया कि हाई कोर्ट ने शहीद स्मारक स्थल पर स्थित पुलिस चौकी को खाली करने के आदेश दिए थे, लेकिन पुलिस वालों ने ऐसा नहीं किया। कमिटी भी यह जगह खाली करवाने में असफल रही है।

Friday, August 14, 2009

एनएच-58 यानी मेरठ रोड पर लोगों को गुरुवार को जबर्दस्त जाम से जूझना पड़ा।

एनएच-58 यानी मेरठ रोड पर लोगों को गुरुवार को जबर्दस्त जाम से जूझना पड़ा। घूकना में चाकू लगने से गंभीर रूप से घायल युवक की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने शव रोड पर रखकर ट्रैफिक रोक दिया तो कहीं लोगों ने बिजली की किल्लत के विरोध में जाम लगाया तो । यही नहीं, नाराज लोगों ने आते-जाते वीकल्स पर पथराव भी किया। इससे कई वीकल्स के शीशे भी टूट गए और कई लोग घायल हो गए। जाम के कारण मेरठ तक गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। हालत यह थी कि लोगों को 12 किमी तक का रास्ता तय करने में 5 से 6 घंटे से भी अधिक का समय लगा। हाइवे पर लगे जाम ने पूरे शहर के जनजीवन को अस्तव्यस्त कर दिया। आंबेडकर रोड, जीटी रोड और एनएच-24 पर विजयनगर चौक के पास हालात सबसे बुरे रहे। जाम की वजह से महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी हुई। वाहनों की लंबी कतारों के बीच कई ऐंब्युलंस भी फंसी रहीं।

दिन में 2 बजे शुरू हुई समस्या
मेरठ रोड पर जिले की सीमा में प्रवेश करते ही मोदीनगर में लोगों को जाम से रूबरू होना पड़ा। मुरादनगर में रावली रोड पर दिन में लगभग 2 बजे बिजली की किल्लत के विरोध में क्षेत्रवासियों ने रोड पर जाम लगाया। इसके कारण मेरठ रोड पर वीकल्स की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। करीब आधा घंटे तक जाम के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह लोगों को शांत किया।

4 बजे हाइवे पर बैठे
शाम 4 बजे जब रावली रोड का जाम खत्म होने लगा तभी घूकना के सामने कुछ लोग एक युवक का शव लेकर मेरठ रोड पर पहुंच गए। इससे दोनों ओर का ट्रैफिक फिर से बाधित हो गया। कीर्ति नाम के इस युवक को शनिवार को कुछ लोगों ने चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इसकी गुरुवार को जीटीबी हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। जाम करने वाले लोग हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। इस दौरान मेरठ की ओर से आ रही रोडवेज बस के ड्राइवर ने जाम देखकर जैसे ही बस को मोड़ना चाहा वैसे ही लोगों का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने बस पर पथराव कर दिया। इससे बस में सवार कई यात्री घायल हो गए।

करीब साढ़े पांच बजे खोला जाम
मेरठ रोड पर जाम और पथराव की सूचना पर डिप्टी एसपी राजेश समेत भारी संख्या में पुलिस मौके पर पहुंच गई। उन्होंने जाम लगाने वाले लोगों को समझाने का प्रयास किया परंतु वे सुनने को तैयार नहीं थे। उनका आरोप था कि शनिवार को युवक को चाकू मारने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी परंतु पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। डीएसपी ने नाराज लोगों को आश्वासन दिया कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे बाद लोगों ने जाम खोलने के लिए तैयार हुए।
छुट्टियां भी बनीं कारण
सरकारी कार्यालयों में 3 दिन लगातार छुट्टियां हैं। आउटिंग और घर जाने वाले लोग गुरुवार को निकले। जाम में घिरने से ऐसे लोगों का मजा भी किरकिरा हो गया। शुक्रवार को जन्माष्टमी होने के कारण भी गुरुवार को मेरठ रोड पर ट्रैफिक अधिक था। इससे रोड पर पहले से ही वीकल की स्पीड कम थी। देर रात तक हालात सामान्य नहीं हो पाए थे।

Wednesday, August 12, 2009

मेरठ से विभाजित बागपत में बच्चों पर पुलिस आतंक

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में छेड़खानी के आरोप में 16 साल के किशोर को अर्धनग्न कर बाजार में घुमाने के आरोप में दो सब इंस्पेक्टरों समेत तीन पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया गया है। जिले के एसपी दीपक कुमार ने मंगलवार को बताया कि मामला सामने आने के बाद इस घटना की जांच कराई गई। जांच के बाद प्रथम दृष्टया तीन पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। इसके बाद मंगलवार को बड़ौत थाने के सब इंस्पेक्टर मोहन श्याम सारस्तव और एक अन्य सब इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया गया। जानकारी के अनुसार जिले के बड़ौत कस्बे में रविवार को एक युवती की कार से किशोर की मोटरसाइकिल टकरा गई, इसके बाद पुलिस छेड़खानी के आरोप में किशोर को पकड़कर थाने ले आई। छात्र ने आरोप लगाया है कि थाने में सब इंस्पेक्टर मोहन श्याम सारस्वत की मौजूदगी में पुलिसकर्मियों ने उसके सीने और पीठ पर 'मैं लड़कियों को छेड़ता हूं' लिख दिया और शहर के कई इलाकों में पैदल घुमाया।

Saturday, August 8, 2009

पति उसके साथ पिछले कुछ महीनों से अननेचरल सेक्स करता है।

एक महिला ने अपने पति के खिलाफ मारपीट कर अननेचरल सेक्स करने का आरोप लगाया है। इस मामले में तहरीर थाना दौराला पुलिस को दी गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार आरोपी पति की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, पल्लवपुरम निवासी एक महिला का आरोप है कि उसका पति उसके साथ पिछले कुछ महीनों से अननेचरल सेक्स करता है। इनकार करने पर उसके साथ बुरी तरह भी मारपीट करता है। थाना प्रभारी ए. के. सिंह ने बताया कि महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर पुलिस जब आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उसके घर पहुंची तो वह फरार हो गया। पीड़ित महिला का आरोप है कि उसका पति अपराधिक प्रवृत्ति का है जिसके कारण उसकी जान का खतरा भी है। पुलिस ने महिला को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा है।

Wednesday, August 5, 2009

फिल्म सिटी के आसपास खाली एरिया भी हरा-भरा दिखाई देने लगा

यमुना किनारे डिवेलप हो रहे सेंट्रल पार्क प्लाजा में हरियाली बढ़ाने की कोशिशें दिन-रात जारी हैं। गुरुवार को यहां सेंट्रल एंपावर्ड कमिटी की टीम विजिट करने पहुंचेगी। इसे लेकर पुलिस-प्रशासन व प्राधिकरण के अफसर घबराए हुए हैं। मंगलवार को जिस जगह पर ऊबड़-खाबड़ जमीन और गड्ढे दिखाई दे रहे थे, वहां बुधवार की शाम होते-होते नजारा बदल गया। यहां लगभग डेढ़ एकड़ जमीन में घास बिछा दी गई। इससे फिल्म सिटी के आसपास खाली एरिया भी हरा-भरा दिखाई देने लगा है। गौरतलब है कि मंगलवार को प्रशासन का इमरजेंसी फरमान जारी होते ही इस जगह पर हरियाली बिछाने का काम 24 घंटे लगातार हुआ है। ऑथॉरिटी के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब फिल्म सिटी फ्लाईओवर के नीचे अलग-अलग किस्म के पौधे दिखाई देने लगे हैं। इसे लेकर 2 दिन से सीनियर अफसर चिंतित थे। मंगलवार की सुबह ही यह फरमान जारी कर दिया गया था कि बचे हुए इलाके को जल्द से जल्द डिवेलप कर दिया जाए। इसके लिए दिन और रात में लगभग सौ के करीब मजदूरों को लगाया गया। अब पूरा फोकस फ्लाईओवर के पास डॉ. आंबेडकर की मूर्ति के इर्द-गिर्द के इलाके पर है। यहां चारों तरफ हाथी की प्रतिमूर्ति वाले स्तंभ लगा दिए गए हैं। मेन बिल्डिंग के आसपास के एरिया में भी घास लगाने पर जोर दिया जा रहा है।

Sunday, August 2, 2009

मेरठ सहित अन्य ११ शहरों में १५०० रोडवेज बसें दौडेगी

स्टेट के सात बडे़ शहरों में रोडवेज सिटी बसें चलाएगी। केंद्र सरकार की जेएनयूआरएमएस (जवाहर
लाल नेहरू अर्बन रिवॉलविंग मैनेजमेंट स्कीम) योजना के तहत यूपी को 1500 बसें दी जाएगी। इस प्लान पर केंद सरकार यूपी में करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपया खर्च करेगी। कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले स्कीम लागू होगी। रोडवेज सूत्रों के मुताबिक तीस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में रोडवेज सिटी बस का इंफ्रा स्ट्रक्चर तैयार करेगा। इन शहरों में मेरठ, मथुरा, आगरा, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी शामिल है। इनमें से अभी कुछ शहरों में ही सिटी बसें है, मगर उनका संचालन प्राइवेट ट्रांसपोर्टरों के हाथों में ही है। प्राइवेट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को लेकर तमाम शिकायतें सामने आ रही हैं। केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक है इन सभी बडे़ शहरों में सिटी बस का संचालन रोडवेज करेगा। इन बसों के लिए रूट नगर निगम तय करेगी। इनको ज्यादा से ज्यादा 40 किलोमीटर के रूट पर चलाया जा सकता है। इन बसों का संचालन नगर निगम के सुझाए गए रूटों पर होगा। बसों का संचालन यूपी रोडवेज करेगा। बसों के रखरखाव और ऑपरेशन पर नजर रखने के लिए यूपी रोडवेज, नगर निगम और डिवेलपमंट ऑथॉरिटी की एक होगी। सूत्रों का कहना है कि बसों से होने वाली आमदनी और घाटे का जोखिम डिवेलपमंट ऑथॉरिटी उठाएगी। बसों के संचालन में आर्थिक घाटे के कारण आने वाली रुकावटों को दूर करने का प्रबंध भी कर लिया गया है। केंद्र सरकार से सिटी बस के तौर पर मिलने वाली सभी बसें 27 सीटर होगी। बसों का डिजाइन इस तरह से होगा कि वह कम चौड़ी सड़कों से भी गुजर सकेगी।