Tuesday, October 14, 2014

समय पर पैसा मिल गया तो उनके बच्चों की दिवाली मन जाएगी

गन्ना पेमेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के किसानों के हक में दिए गए फैसले के बाद किसानों को बेहतर दिवाली मनाने की उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों की याचिका खारिज कर नीलाम की जाने वाली चीनी का बकाया पैसा 31 अक्टूबर तक किसानों को देने के लिए कहा है। मेरठ के डीसीओे का कहना है कि किसानों को दिवाली से पहले भुगतान मिल जाए इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस मामले को लेकर जल्द ही जिलाधिकारी सभी शुगर मिल प्रबंधकों को बुलाकर उन्हें समय से भुगतान के निर्देश देने वाले हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राइवेट शुगर मिलों को चीनी की नीलामी कर उसका पैसा किसानों को देने के आदेश दिए थे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पीनएबी ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका तर्क था कि शुगर मिलों पर उनके लोन का 8 हजार करोड़ रुपए बकाया है, इसलिए चीनी पर पहला हक उनका है। उनका यह भी तर्क था कि अगर उनका पैसा नहीं मिला तो लोन एनपीए हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने बैंको की इस दलील को खारिज करते हुए चीनी के पैसे पर पहला हक किसानों का बताया। कोर्ट ने कहा कि चीनी मिलों पर किसानों का 5440 करोड़ बकाया है। अगर उनका भुगतान नहीं हुआ तो किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने का डर है। कोर्ट ने डीएम के माध्यम से किसानों का भुगतान 31 अक्टूबर तक क्लियर करने के लिए कहा है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से किसान खुश हैं। सरधना के किसान दयाल सिंह का कहना है कि अगर समय पर पैसा मिल गया तो उनके बच्चों की दिवाली मन जाएगी, नहीं तो हमारे लिए दिवाली का कोई मतलब नहीं होगा। बीकेयू के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कलंजरी ने भी कोर्ट के इस फैसले को सही फैसला बताया है। उनका कहना है कि किसान अगर मिल को गन्ना नहीं देता तो क्या बैंक उसे कर्ज देते?

मेरठ के डिस्ट्रिक्ट केन ऑफिसर राजीव राय का कहना है कि उन्होंने किसानों को दिवाली से पहले गन्ना मूल्य दिलाने की लिए कोशिशें शुरू कर दी हैं। वैसे तो वे पहले से ही इस दिशा में प्रयास कर रहे थे , डीएम के माध्यम से लगातार मिलों को नोटिस भेजे जा रहे थे। मवाना, किनौनी और नगलामल शुगर मिलों के खिलाफ तो एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है। उनका कहना है कि अब वे तेजी से मिलों की चीनी बिकवा कर किसानों का भुगतान कराएंगे। चीनी के अलावा मिलों से अन्य संसाधनों के द्वारा भी भुगतान करने का दबाव बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही डीएम भी चीनी मिलों के प्रबंधकों के साथ बैठक कर उनसे समयबद्ध तरीके से भुगतान करने के लिए आदेश देंगे। जो मिलें निर्देश का पालन नहीं करेंगी उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। डीसीओ ने बताया कि मेरठ जनपद की शुगर मिलों पर किसानों का अभी 371 करोड़ बकाया है, जिसमें से अकेले मवाना शुगर मिल पर 191 करोड़ की देनदारी है। जनपद की सभी चीनी मिलों द्वारा भुगतान करने पर जनपद के करीब डेढ़ लाख किसानों के परिवार लाभान्वित होंगे।

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