Friday, November 6, 2015

तिलकपुरम कसेरू बक्सर में पंचायत

प्रतिकर की मांग को लेकर आंदोलनरत तीनों योजनाओं के किसानों के सब्र का बांध अब टूट गया है। गुरुवार शाम को खराब मौसम के दौरान तिलकपुरम कसेरू बक्सर में पंचायत की गई। इसमें किसानों ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया। किसान एमडीए परिसर व अफसरों के आवास पर तालाबंदी व धरना देंगे तो वहीं महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारी एमडीए अफसरों को विरोध स्वरूप चूडियां भेंट करेगी।

गुरुवार को तिलकपुरम कसेरू बक्सर में किसानों ने पंचायत की। इसमें लोहियानगर, वेदव्यासपुरी व गंगानगर के किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों ने कहा कि एमडीए व प्रशासन ने दीपावली से पहले तोहफा देने का वादा दिया था। लेकिन दीपावली में अब कुछ ही दिन बाकी हैं लेकिन अभी तक बोर्ड बैठक कर निर्णय नहीं हो पाया है। आरोप लगाया कि प्रशासन किसानों के साथ वादाखिलाफी कर रहा है। पदाधिकारी तेजपाल ¨सह, मास्टर वीरबल, जयप्रकाश, हरविन्द्र ¨सह, नसीम अहमद उर्फ चंदन, टीनू बंसला, किरनपाल आदि मौजूद रहे।

Wednesday, November 4, 2015

'जांबाज' टीम बुलेट पर करतब दिखाने में माहि

सरहद के पहरेदार ये असल जांबाज। जान हथेली पर रखना और हौसलों की आदत के चलते इनकी टीम को ही जांबाज टीम के नाम से पुकारा जाता है। मुल्क की सरहद पर हल हाल में पहरेदारी के अलावा इन जांबाजों की एक और खतरे से लिपटी हुई अहम जिम्मेदारी होती है। सरहद के कई दुर्गम इलाकों में रेडियो संपर्क तक नहीं हो पाता। इन हालात में ये जांबाज गोपनीय संदेश एक चौकी से दूसरी चौकी तक पहुंचाते हैं। जांबाज टीम का हिस्सा बने 76 जवानों की इस टोली का जुनून और जज्बा सलाम ठोकने लायक है।
सीमा सुरक्षा बल की 'जांबाज' टीम बुलेट पर करतब दिखाने में माहिर है। राजपथ पर अद्वितीय प्रदर्शन कर अमेरिका के राष्ट्रपति की शाबासी हासिल कर चुके 'जांबाज' इतने तक ही सीमित नहीं है। बार्डर पर भी इस टीम का देश की सुरक्षा और सीमा सुरक्षा बलों के संदेशों को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका होती है। सीमा सुरक्षा बल में 25 वर्ष पूर्व 'जांबाज' टीम का गठन इसी उद्देश्य के लिए किया गया था। बीएसएफ इंस्पेक्टर और टीम लीडर इंस्पेक्टर अवशेष सिंह ने बताया कि सरहद पर कई जगह वायरलेस रेडियो काम नहीं करती है। इसके अलावा कई गोपनीय संदेश रेडियो के माध्यम से नहीं भेजे जाते। सरहद के दुर्गम इलाकों में बनी चौकियों तक इन गोपनीय संदेशों को पहुंचाने के लिए इस टीम को बनाया गया था। बीएसएफ के चुने हुई राइडर को चयन के बाद इन्हें 'जांबाज' के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है और इसके बाद सरहद पर लगाया जाता है। इस तरह से 'जांबाज' टीम देश की सुरक्षा और गोपनीयता में अहम है।
'जांबाज' टीम में ज्यादातर ऐसे राइडर हैं, जिनका बाइक राइडिंग शौक और जुनून है। बीएसएफ में आने के बाद उन्हें देशसेवा का भी मौका मिल गया। टीम में शामिल इंस्पेक्टर अवधेश सिंह निवासी गोरखपुर, कांस्टेबल दुर्बेश बाबू निवासी मैनपुरी यूपी, कांस्टेबल अर्जुन सिंह निवासी इंदौर, कांस्टेबल अशोक दीक्षित निवासी भिंड(मध्यप्रदेश), कांस्टेबल उदय प्रताप निवासी भिंड और कांस्टेबल मुत्थू कुमार निवासी तमिलनाडु इसी कड़ी का हिस्सा हैं।
चार नवंबर यानी बुधवार को होने वाले अपने कार्यक्रम के लिए जवानों ने मंगलवार को भी पुलिस लाइन फिल्ड में जमकर पसीना बहाया। इस दौरान डॉग ब्रोजो(ट्रेकर) ने अपना जलवा दिखाया। ब्रोजो किसी भी गंध को सूंघकर उसका पीछा करने में माहिर है। सीमा पर ब्रोजो ने कई बार आतंकियों को ट्रेक किया है। सात डॉग की ये टीम सीमा पर रहती है और इसे विशेष रूप से यहां कार्यक्रम के लिए बुलवाया गया है।

पुलिस लाइन में बीएसएफ के कार्यक्रम का समय चार नवंबर यानी बुधवार को शाम चार से 5.30 बजे होगा। पांच नवंबर यानी गुरुवार को सुबह नौ बजे से 10.30 बजे स्कूली बच्चों के लिए प्रदर्शन होगा। इसके अलावा शाम को 4 से 5.30 बजे कार्यक्रम होगा। स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में बीएसएफ के एडीजी रजनीकांत मिश्र भी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

Monday, November 2, 2015

जनता ने उठाया खुद सफाई का बीड़ा

नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के प्रयास में प्रत्येक वर्ष चलने वाले दैनिक जागरण के विशेष सफाई अभियान का श्रीगणेश रविवार को शहर की सबसे पुरानी कालोनी साकेत व उससे सटी मानसरोवर कालोनी से हुआ। अभियान के माध्यम से दोनों कालोनियों में विशेष सफाई हुई। सड़कें व नालियां साफ हो गई। खराब स्ट्रीट लाइटें जलने लगीं। अन्य समस्याओं के समाधान का महापौर व निगम अफसरों ने आश्वासन दिया। उन्होंने पूरे क्षेत्र में रैली निकालकर लोगों से स्वच्छता की अपील की।
दैनिक जागरण के विशेष सफाई अभियान के तहत रविवार को दिन निकलते ही नगर निगम के सफाई कर्मचारियों का विशेष दस्ता साकेत और मानसरोवर की गलियों में फैल गया। कुछ देर में ही उन्होंने सभी सड़कों को झाड़ू लगाकर चमका डाला। कूड़े के ढेर गायब कर दिए गए। सभी प्रमुख चौराहों और गलियों के मोड़ पर चूना डलने के बाद कालोनियां दमक उठी। पथ प्रकाश विभाग की टीम ने दोनों कालोनियों की खराब स्ट्रीट लाइटों को जला दिया। महापौर हरिकांत अहलूवालिया के नेतृत्व में नगर निगम के मुख्य अभियंता कुल भूषण वाष्र्णेय, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह, प्रभारी उप नगर आयुक्त दिनेश यादव समेत तमाम अफसरों, साकेत सोसायटी के निदेशक व विभिन्न पदाधिकारियों के साथ कालोनी के निवासियों व दैनिक जागरण की टीम ने दोनों कालोनियों में रैली निकालकर लोगों से अपने आसपास स्वच्छता रखने की अपील की। दैनिक जागरण के संपादकीय प्रभारी मनोज झा, महाप्रबंधक विकास चुघ, सिटी इंचार्ज दिनेश दिनकर व ब्रांड हेड अरुण तिवारी ने महापौर व निगम अफसरों का स्वागत किया।
महापौर के सामने रखी समस्याएं
इस दौरान मेरठ सहकारी आवास समिति के निदेशक शशांक शर्मा, संतोष पंवार, बीना रस्तोगी, अभिनव यादव, अजय रस्तोगी, डा. एस के त्यागी, दिनेश चौधरी, राजीव आनंद आदि ने ज्ञापन सौंपकर साकेत कालोनी की विभिन्न समस्याएं महापौर के सामने रखी। उन्होंने कालोनी की सड़कों को दो मीटर चौड़ा करके उनका सुदृढ़ीकरण कराने, सड़कों पर रात में चमकने वाली सफेद पंट्टी व रिफ्लेक्टर (कैट आई) लगवाने, खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक कराने तथा विभिन्न पार्को व अन्य स्थानों पर नई लाइटें लगवाने, चोक सीवर लाइनों की सफाई कराने की मांग की। मानसरोवर की ओर से पूर्व पार्षद ललित नागदेव ने बताया कि कालोनी की मुख्य सड़क टूटी बदहाल है। उसका निर्माण आवश्यक है, कालोनी में सफाई नियमित नहीं होती। कूड़े के ढेर लगा रहते हैं। सीवर लाइनों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। मानसरोवर की खराब स्ट्रीट लाइटें भी ठीक कराने की उन्होंने मांग की। महापौर ने सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
मानसरोवर की सड़क बनेगी
महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि साकेत की कुछ सड़कें बनाने के प्रस्ताव प्रक्रिया में हैं। उन्होंने मानसरोवर की मुख्य सड़क के निर्माण कराने की घोषणा की। धनवंतरी अस्पताल के बराबर वाली सड़क पर कूड़ाघर बन जाने की समस्या का समाधान कराने भी महापौर ने वादा किया।
जल निगम ने किया नरक
सीवर लाइन के लिए पूरे शहर की सड़कों को खोदकर डाल देने वाले जल निगम ने फिर से साकेत में गोल मार्केट के सामने गहरी खुदाई करके रास्ता बाधित कर दिया है। नागरिकों की शिकायत पर महापौर ने जल्द जल निगम के अफसरों को तलब करने तथा सुधार कराने का वादा किया।
डी ब्लाक बना मिसाल
साकेत कालोनी की कई सड़कों का नगर निगम ने निर्माण कराया है। लेकिन डी ब्लाक के लोगों ने उसमें चार चांद लगा दिए। वहां के लोगों ने आपस में धनराशि एकत्र करके ब्लाक की सड़कों पर रात में चमकने वाली रेडियम की सफेद पंट्टी, रेडियम लाइटें लगवा दी तथा अन्य सौंदर्यीकरण का कार्य कराया। यह ब्लाक मिसाल बना है।
जनता ने उठाया खुद सफाई का बीड़ा
 विशेष सफाई अभियान से आए बदलाव से खुश साकेत व मानसरोवर की जनता ने सफाई का बीड़ा खुद उठाने की घोषणा की। संतोष पंवार ने कहा कि दैनिक जागरण के प्रयास सफल होंगे। शहर की जनता सफाई के लिए जागरूक होगी। बीना रस्तोगी ने कहा कि स्वच्छता के माध्यम से ही अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना की जा सकती है। शशांक शर्मा ने कहा कि साकेत में सड़कों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की जरूरत है। नंदकुमार ने कहा कि एक दिन के अभियान ने ही कालोनी की रंगत बदल डाली। पंकज जैन ने कहा कि जनता को खुद भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। नागरिक यदि कूड़े को एकत्र करके रखें और निगमकर्मियों को सौंप दें तो गंदगी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है। जवाहर लूथरा ने कहा कि धनवंतरी अस्पताल के बराबर में पूरी कालोनी का कूड़ा डाल दिया जाता है। कालोनी में कूड़ाघर बनाने की उन्होंने मांग की। मानसरोवर निवासी पूर्व पार्षद ललित नागदेव ने कहा कि आपसी सहयोग से ही गंदगी की समस्या से निजात पाई जा सकती है। पूरी जिम्मेदारी नगर निगम पर ही डाल देने से काम चलने वाला नहीं है। कालोनी की सीवर लाइनों की सफाई की उन्होंने मांग की। एमएस जैन ने कहा कि खराब स्ट्रीट लाइटों ठीक होने की बात कही। चमकेगी कंकरखेड़ा की डिफेंस एन्क्लेव कालोनी

दैनिक जागरण के विशेष सफाई अभियान का दूसरा पड़ाव सोमवार को कंकरखेड़ा की डिफेंस एन्क्लेव कालोनी में होगा। अभियान के दौरान यहां विशेष सफाई कार्य होगा। महापौर, नगर निगम के अफसर, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी इस अभियान में शामिल होंगे।

Friday, October 30, 2015

मेरठ मंडल के खिलाड़ियों को पुरस्कार

मेरठ और सहारनपुर मंडल के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले 71 खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया गया। कैलाश प्रकाश स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में खेल और युवा कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव डा. अनिता भटनागर जैन ने इन खिलाड़ियों को 20 लाख 90 हजार रुपये की राशि का चेक दिया।
वर्ष 2010 से 2014 तक कामनवेल्थ, एशियन, नेशनल में स्वर्ण, रजत, कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को उत्तर प्रदेश शासन की ओर से पुरस्कार दिया गया। इसमें 49 लड़कों और 22 लड़कियों को चेक देकर सम्मानित किया गया। प्रमुख सचिव खेल ने कुश्ती, टेबल टेनिस, जूडो, पावर लिफ्टिंग, साइक्लिंग, नेट बाल, कबड्डी आदि खेलों में पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार वितरण के दौरान डा. अनिता भटनागर जैन ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वह छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर बड़ा लक्ष्य जीते। पुरस्कार वितरण के दौरान क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी मुद्रिका पाठक सहित खेल से जुड़े अन्य अधिकारी, कोच, खिलाड़ी और उनके अभिभावक मौजूद रहे।
मेरठ मंडल के खिलाड़ियों को पुरस्कार
20 वें कामनवेल्थ गेम में साइकिलिंग में प्रतिभाग करने वाले मेरठ के अरविंद पंवार को पांच लाख रुपये का चेक दिया गया। टीटी में अभिनव को 15 हजार रुपये, जूडो में रीना पाल को 25 हजार रुपये, विशाल को 25 हजार रुपये, कुश्ती में दीक्षा को दस हजार रुपये, पिंकी रानी को दस हजार रुपये, काजल को दस हजार रुपये, साक्षी को 25 हजार रुपये, इंदू तोमर को 25 हजार रुपये, पूजा को 35 हजार, नेट बाल में अमित शर्मा को 20 हजार रुपये, गिरीश चौहान को 20 हजार, निर्दोष शर्मा को 20 हजार, अजय सिंह को 20 हजार, गिन्नी सिंह को 20 हजार, अतिम नागर, जितेंद्र सिंह, अनुज चौधरी, राहुल शर्मा को 20-20 हजार, जूडो में पारुल वर्मा को 15 हजार, कबड्डी में विनय, विक्रांत, विशाल को पांच -पांच हजार, टीटी में सौंदर्या पाठक को पांच हजार रुपये, सार्थक शर्मा को पांच हजार रुपये, सार्थक सेठ को पांच हजार रुपये का चेक मिला। जूडो में रीना पाल को 25 हजार रुपये, लक्ष्य वेद को पावर लिफ्टिंग में 15 हजार रुपये, नेट बाल में हिमांशु को 20 हजार रुपये, जूडो में दीपक त्यागी को पांच हजार रुपये, जोनू सिंह को 35 हजार रुपये, कुश्ती में इंदू चौधरी को 25 हजार रुपये, रिशु नागर को 15 हजार रुपये, अंशु तोमर को पांच हजार रुपये का चेक मिला।
सहारनपुर मंडल के इन खिलाड़ियों को पुरुस्कार

साउथ एशियन गेम में चार सौ मीटर एथलेक्टिस में पदक जीतने पर प्रियंका पंवार को दो लाख रुपये का चेक दिया गया। कबड्डी में निशांत कुमार को पांच हजार रुपये, विक्रांत मलिक को पांच हजार रुपये, अक्षय बालियान को पांच हजार रुपये, गौरव चौहान को तीस हजार रुपये, कपिल कुमार को 30 हजार रुपये, वालीबाल में प्रशांत कुमार को 30 हजार रुपये, बैडमिंटन में कपिल चौधरी को 25 हजार रुपये, पावर लिफ्टिंग में सनी शर्मा को 25 हजार रुपये, नेटबाल में मोहित कश्यप को 20 हजार रुपये, जूडो में शीतल चौहान को 25 हजार रुपये, आकाश को निर्धारित पुरस्कार राशि का चेक दिया गया।

Wednesday, October 28, 2015

करवाचौथ पर्व

दो दिन बाद करवाचौथ पर्व है। इसको लेकर तैयारियां जोरों पर है। शहर के छोटे बड़े सभी तरह के शोरूम सज चुके हैं। आबूलेन स्थित बलदेव दी हट्टी के मालिक गुलशन जुनेजा का कहना है कि नवरात्र से खरीददारी की शुरुआत हो चुकी है। इस साल भी करवाचौथ पर फैशन के कई रंग देखने को मिलेंगे। वहीं, बॉम्बे बाजार स्थित मिली कलेक्शन की मालिक मिली शेखरी का कहना है कि खरीददारी करने वालों में नव-विवाहिताओं का अनुपात सबसे अधिक है। इनके द्वारा हमेशा लेटेस्ट की डिमांड की जाती है।
साड़ियों में प्लेट्स का झंझट नहीं
इस करवाचौथ इंडो वेस्टर्न ड्रेसेज का काफी क्रेज है। यह भारतीय और पश्चिमी परिधानों का मिश्रण होता है। यह ड्रेस जैकेटनुमा व जमीन से छह इंच ऊपर होती है। देखने में लुक काफी हैवी होता है। ये ड्रेस वाइन, मैरून, पेस्टल कलर्स में उपलब्ध है। अब साड़ियां पहनना ज्यादा झंझट का काम नहीं है। बाजार में ऐसी वैरायटी उपलब्ध है जो इस काम को आसान बना रही है। साड़ियों में प्लेट्स बनाने की जरूरत नहीं होगी। यह रेडी टू वियर होती है।
फ्लोर लेंथ अनारकली सूट
जमीन तक की लंबाई के अनारकली सूट भी काफी पसंद किए जा रहे है। यह चूड़ीदार लेगिंग के साथ आता है। पहले नेट चलन में था, लेकिन इस साल सिल्क और जॉर्जेट की काफी मांग है। इसमें रेड, मैरून, ग्रीन, पिंक और पैरेट कलर्स उपलब्ध है।
इंपोर्टेड कपड़े की साड़ी
सामान्य जार्जेट व नेट से हटकर इस बार इम्पोर्टेड कपड़े की साड़ी डिमांड में है। इसकी क्वालिटी लाइक्रा है। जो बढि़या फील व शानदार लुक देती है। इसके अलावा हैंडलूम साड़ियों पर भी गौर किया जा सकता है। इसे बनारस और कांजीवरम से मंगवाया जाता है।
मीना और गोटे वर्क की थाली और करवे
इस बार जहां डिजाइनर थाली का क्रेज महिलाओं में देखने को मिल रहा है। वहीं कम बजट में मीना और गोटे वर्क में भी थाली और करवे बाजार में उपलब्ध है। सदर सर्राफा बाजार स्थित पटवा जी एम्पोरियम के मालिक अभय कहते है कि पिछले कुछ सालों में गोटे के वर्क वाले करवे और मीना वर्क की थाली की काफी डिमांड है।
अलग समाज,अलग रिवाज
जैन समाज
परंपरागत रिवाज : जैन समाज में चांद को नहीं बल्कि सूर्य को अ‌र्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। जैन समाज की महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा की थाली में पूरी और पुए रखकर दोपहर में ही कहानी सुन लेती हैं। इसके बाद सास के लिए साड़ी, चूड़ी, बिंदी और दक्षिणा रखकर बायना निकाला जाता है। जिसमें कच्चे चावल और बताशे रखना अनिवार्य होता है। इसके बाद छलनी से सूर्य को देखकर अ‌र्घ्य दिया जाता है, उसके बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं। जैन समाज में सूर्य को अ‌र्घ्य देने के साथ पति का चेहरा देखना अनिवार्य नहीं होता है।
अग्रवाल समाज
करवाचौथ पर अग्रवाल समाज की महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रखती है। शाम को सूरज ढलने से पहले करवा माता की कहानी सुनकर सास के लिए साड़ी और श्रृंगार की वस्तुओं के अलावा दक्षिणा देकर बायना निकालती है। जिसमें कच्चे चावल और मिठाई देना अनिवार्य होता है। पूजा में रखे गए दो करवों में से एक का जल चलते (ढलते) हुए सूरज को दिया जाता है, और दूसरे करवे का जल चंद्रमा को देना होता है। छन्नी से चांद को देखने का भी रिवाज नहीं था। अब आधुनिकता ने पैर पसारे हैं और अब चांद को छन्नी से देखकर पति का चेहरा देखने का रिवाज चला है। पति ही पानी व मिठाई खिलाकर व्रत खुलवाते हैं।
मारवाड़ी समाज
न्यूदेव पुरी निवासी कांता गुप्ता मारवाड़ी बताती हैं कि मारवाड़ी समाज में सभी सुहागिनें करवाचौथ के दिन सुबह चार बजे उठकर सरगी खाती हैं। सरगी में चूरमें का विशेष महत्व है। इसके साथ ही मिठाई व परांठा भी खाया जा सकता है। इसके बाद सभी सुहागिनें सुबह पूजा करती हैं और शाम को चार बजे के करीब पूड़ों का बायना निकालती हैं और सभी महिलाएं पूरा श्रृंगार करके व्रत की कहानी सुनती हैं। शाम को चांद निकलने पर सभी चांद को जल देती हैं और खाना खाकर व्रत खोलती हैं।
पंजाबी समाज
वसंत कुंज निवासी सुगंधा सचदेवा बताती हैं कि पंजाबियों में करवाचौथ के दिन सभी सुहागिनें सुबह सूरज निकलने से पहले अपनी सास के साथ बैठकर सरगी खाती हैं और सास बहू को मीठी सेवैंया खिलाती है। इसके बाद शाम को सभी महिलाएं सज-धज कर व्रत की कहानी सुनती हैं। व्रत की कहानी सुनने के दौरान सभी महिलाएं अपनी पूजा की थाल को एक दूसरे को देकर घुमाती रहती हैं। इस थाल में जल का पात्र और बहू द्वारा सास को दिया जाने वाला उपहार होता है। चांद निकलने पर सभी चांद को अ‌र्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।
हम बने, तुम बने एक दूजे के लिए ..
आपस में बढ़ता है प्यार और विश्वास
अक्षय जैन अरिहंत अपनी पत्नी के लिए हर साल व्रत रखते हैं। वे बताते हैं उनकी शादी को दो साल हो गए है, और वे अपनी पत्नी की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत करते हैं। उनके मुताबिक जिस प्रकार महिला अपने पति की दीर्घायु की कामना करती है, वैसे ही पुरुष भी जीवनसंगिनी के प्रति यही भाव रखें तो दांपत्य की डोर और मजबूत होती है।
दोनों रखते है करवाचौथ का व्रत
मेहा सिन्हा कहती है कि करवाचौथ उनके लिए खास त्यौहार है। इसमें वे तो पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती ही है। उनके पति भी हर साल उनकी लंबी उम्र के लिए व्रत करते है। नेहा निगम ने करवाचौथ के बाद शिमला घूमने का प्लान बना रखा है।
पहले करवाचौथ की याद आज भी है ताजा
श्वेता सचिन कुमार की शादी को भले ही तीन साल हो गए हो। लेकिन आज भी पहले करवाचौथ की यादें उनके जहन में ताजा है, और हो भी क्यों न उस बार वे पति सचिन के साथ घूमने मलेशिया जो गई थी।
फोटो देखकर पूरा होगा व्रत
साकेत में रहने वाली इंदू गर्ग के पति उमेश कुमार इस साल करवाचौथ पर उसके साथ नहीं है। इंदू कहती है कि ऐसा पहली बार हो रहा है। व्रत करने के बाद फोटो देखकर व्रत पूरा करना होगा।
हर साल स्काइप पर होता है दीदार
पल्लवपुरम में रहने वाली अर्चना रस्तोगी की शादी को पच्चीस साल हो गए। लेकिन उन्होंने अधिकतर करवाचौथ का व्रत अकेले ही किया है। नेवी में कैप्टन उनके पति पुनीत कुमार को अधिकतर घर से बाहर ही रहना पड़ता है।
पति से दूर रहकर बनाना होगा करवाचौथ
रूड़की रोड स्थित इंद्रप्रस्थ की रहने वाली सोनिया कश्यप कहती है कि शादी के बाद ऐसा कई बार हुआ है जब करवाचौथ पर पति घर से बाहर हो। इस बार चांद में होगा मेरे चांद का चेहरा लेकिन ऐसा होने पर भी पूजा और व्रत तो करना ही पड़ता है।
पति के बिना अधूरा लगता है पर्व
सदर में रहने वाली शिल्पी गोयल के पति कैलाश गुप्ता का बिजनेस है। वे इस साल करवाचौथ पर बिजनेस डील के लिए मुंबई जा रहे हैं। शिल्पी बताती है कि जब पति ही साथ न हो तो यह पर्व अधूरा सा लगता है।
द्वापर युग से चली आ रही करवाचौथ की परंपरा

करवाचौथ का व्रत कब शुरू हुआ कैसे यह चलन में आया इसे लेकर कई किवदंतियां हैं। इसे द्वापर युग से जुड़ा हुआ माना जाता है। पूरी महाभारत के बाद पांडव ही शेष बचे, इसके पीछे द्रौपदी का तप बताया जाता है। कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर महाभारत शुरू होने से पहले द्रौपदी ने ये व्रत सबसे पहले किया और उन्हें चौथ माता ने अखंड सौभाग्य प्रदान किया।

Monday, October 26, 2015

मेरठ के दोनों पैर गंदगी में धंसे हुए

स्मार्ट सिटी की रेस भरने के लिए तैयार मेरठ के दोनों पैर गंदगी में धंसे हुए मिले। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट ने मेरठ की हकीकत से पर्दा हटा दिया। इसे देश के सबसे प्रदूषित शहरों में आंका गया है। सड़कों पर कूड़े के ढेर, बजबजाती नालियां और तमाम दुश्वारियों वाला मेरठ संक्रामक बीमारियों की भी राजधानी बन चुका है। सूची में मेरठ के साथ ही बुलंदशहर भी शामिल है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली ने मेरठ को गले तक गंदगी में डुबो दिया। जो शहर स्मार्ट सिटी की रेस में तमाम बड़े शहरों को मात देने का दावा कर रहा है, उसमें शहर के दामन पर गंदगी कोढ़ बनकर दर्ज हो गई है। दशकों से जाम नाले, बजबजाती नालियां, जलभराव, सीवर की पाइपों से लीकेज और कूड़ाघरों से उठती भयंकर बदबू शहर के खुरदरे चेहरे को और दागदार बना रहे हैं। गंदगी की सफाई के लिए जेसीबी एक बार गरजकर दो कदम बढ़ती है तो विरोध के बाद मीलों पीछे जा खड़ी होती है। पुराने शहर में गंदगी एक नासूर बनकर महानगर की साख को डसने लगी है।
सिर्फ दो डंपिंग ग्राउंड
महानगर की आबादी करीब 20 लाख आंकी जा रही है, किंतु कूड़ा उठाने के लिए महज दो डंपिंग ग्राउंड हैं। एक मेवला फाटक के पास तो दूसरा किला रोड स्थित गांव गाबड़ी में। गाबड़ी में ही कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ था जो परवान नहीं चढ़ सका। तीन वर्ष पहले इसी गाबड़ी में सालिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कवायद चली थी जो चंद कदम बाद ढेर हो गई।
सूची में यूपी के पांच शहर
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से वर्ष 2013-14 में देश में कराए गए सर्वे में ए श्रेणी के और एक लाख से ज्यादा आबादी के शहरों की सफाई व्यवस्था की कलई खुल गई। देश के पौने पांच सौ सबसे गंदे शहरों की सूची में मेरठ समेत राज्य के पांच शहरों को शामिल किया गया है।
पीएम से भी नहीं ली सीख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर 2014 को खुद झाडू संभालते हुए लोगों को सफाई के लिए जागरूक किया था, जो बेअसर रहा। अभियान के नाम पर खानापूर्ति कर फोटो तो खिंचवाए गए लेकिन शहर का चेहरा मुरझाया ही रह गया।
नगर निगम को रोने की लत
नगर निगम सफाई पर हर बार संसाधनों के अभाव का रोना रोता है। निगम के पास 3342 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें 1127 स्थाई और बाकी संविदा के हैं। संविदा कर्मचारी बर्खास्त किए गए थे, जो फिलहाल ड्यूटी कर रहे हैं। निगम की दलील है कि फंड और कर्मचारी दोनों की तंगी में सफाई कैसे हो?
देश के कुछ सबसे गंदे शहर
शहर रैंक
मेरठ 465
बुलंदशहर 471
सुल्तानपुर 458
देवरिया 456
आजमगढ़ 452
गुड़गांव 466
भिवानी 473
रेवाड़ी 469
भरतपुर 462
रुद्रपुर 451
नोट : ये सभी देश के पौने पांच सौ गंदे शहरों की सूची में निचले पायदान पर आने वाले सबसे गंदे शहर माने गए हैं।
एक नजर मेरठ शहर पर
आबादी...करीब 20 लाख
रोजाना का कूड़ा 850 मीट्रिक टन
सफाई कर्मचारी 3342
जरूरत 5000 की

Friday, October 23, 2015

गुब्बारे बेचकर जमा करेंगे बच्चों की फीस

दशहरा मेला सिर्फ श्रद्धा और उत्साह का मेला भर नहीं है। ये कुछ लोगों के लिए सपनों का मेला भी है। आप और हम भले इस मेले के उत्साह का हिस्सा हों, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस मेले के माध्यम से अपने सपने पूरे कर रहे हैं। उनके लिए दशहरे का मेला वो साधन है, जो उन्हें उनके सपनों के करीब ले जाएगा। मेले में आठ साल का कपिल मुखौटे बेच रहा है, जिससे उसके परिवार का खर्च चल सके, वहीं अभिनव ने कोचिंग का खर्च निकालने के लिए मेले में जूतों की दुकान लगाई है। पुनीत ने मेले में इसलिए खिलौनों की दुकान लगाई है जिससे इस बार उसका परिवार अच्छे से दीपावली मना सकें। आप भी मिलिए मेरठ के मेले के इन 'सपनों के सौदागरों' से।
मां के बाद बहनों की जिम्मेदारी का फर्ज निभाना है
कपिल के हाथों में मुखौटे, तीर और गदा से भरी छड़ी है। उम्र आठ साल से ज्यादा न होगी। कपिल ने सुबह जल्दी ही अपनी छड़ी मेले में लगा ली है, ताकि अधिक से अधिक कमाई हो जाए और उसका और उसकी दो बहनों का कुछ समय तक खर्च आसानी से चल जाए। मां की मृत्यु के बाद दो बहनों की जिम्मेदारी अब कपिल के कंधों पर जो आ गई है।
गुब्बारे बेचकर जमा करेंगे बच्चों की फीस
मेले में दुकान लगाने के बाद पुनीत ने जल्दी-जल्दी गुब्बारों में हवा भरी ताकि अधिक से अधिक रुपये कमा सकें। वे घर चलाने के लिए फेरी का काम करते है। कहते है कि पिछले साल दशहरे में छह सात हजार रुपये की ब्रिकी हो गई थी, जिससे बच्चों के साल भर के पढ़ाई का खर्च निकल गया था। उम्मीद है इस साल भी अच्छी कमाई हो जाए तो बच्चों की फीस का खर्च निकल जाएगा।
खर्च के लिए लगाई पोस्टर की दुकान
मयंक अपने दोस्त राकेश के साथ मेले में पोस्टर बेच रहे हैं। असल में ये दोनों दोस्त घंटाघर पर आर्टिफिशियल ज्वैलरी की दुकान लगाते है। पिछले कुछ समय से दुकान में घाटा उठा रहे मयंक और राकेश बताते है कि मेले में पोस्टर बेचकर जो भी आमदनी होगी वे उसे दुकान का घाटा पूरा करेंगे। जिससे उन्हें किसी से उधार न लेना पड़े।
जूते बेचकर जमा करेंगे कोचिंग की फीस
कोशिश करने वाले कभी नहीं हारते ये बात बी. कॉम की पढ़ाई कर रहे अभिनव पर बिल्कुल सटीक बैठती है। पिता ने जब आगे पढ़ने की बजाए उसे जूतों की दुकान पर बैठने के लिए मजबूर किया तो उसने भी कोचिंग की फीस भरने के लिए मेले में जूतों की दुकान लगा ली। दशहरे मेले से जो भी कमाई होगी वह उससे कोचिंग की फीस भरकर आगे की पढ़ाई करेगा।
मेले की कमाई से खरीदूंगा जरूरी चीज

दशहरे मेले में बर्तनों की दुकान लगाने वाला अभिनव 11वीं कक्षा में पढ़ता है। घर का खर्च तो सामान्य दिनों की कमाई से चल जाता है। वह बताता है कि जल्द ही बहन की शादी होने वाली है। इसलिए घर के लिए कुछ जरूरी वस्तुएं खरीदनी है। पिछले साल मेले में अच्छी खासी कमाई हो गई थी। इस बार भी हो जाए तो मेरा काम बन जाएगा।