आकांक्षानिरुद्ध फाउंडेशन की ओर से चौ. चरण सिंह विवि के नेताजी सुभाष चंद
बोस प्रेक्षागृह में 'गंगा नदी संरक्षण में समाज की भूमिका' विषय पर हुए राष्ट्रीय संगोष्ठी में गंगा संरक्षण के लिए सभी के सहयोग का
आह्वान हुआ। केंद्रीय कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी ने गंगा प्लान की मौजूदा स्थिति
व स्वच्छता के बाद के मॉडल को प्रस्तुत किया। वहीं जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा
संरक्षण मंत्री उमा भारती ने दो टूक कहा कि सरकार गंगा नदी को साफ कर भी दे तो तब
भी इसका स्वच्छता को बनाए रखना सभी के सहयोग के बिना संभव नहीं है। उन्होंने हर
क्षेत्र व हर वर्ग से सहयोग की अपील की।
आकांक्षा निरुद्ध फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष अनिता सिंह ने गंगा के साथ
उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण व समस्याओं को गिनाया। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने
दोनों मंत्रियों का स्वागत करते हुए क्षेत्र की समस्याएं गिनाई। उन्होंने कहा कि
काली नदी का जल छूना बीमारियों को आमंत्रित करने जैसा हो गया है। मेरठ से जुड़ी
विकास योजनाओं पर गडकरी से तस्वीर साफ करने का निवेदन किया।
महामंडलेश्वर भैय्या दास महाराज ने कहा कि नदी किनारे स्तुति शांति देती
है। स्नान से पुण्य मिलता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम अपने धर्म की प्रति समर्पित
रहते हैं। उनसे ¨हदुओं को सीखना होगा। विवि कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने सभी
का अभिनंदन किया। संचालन रमन त्यागी ने किया। कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल टोल
समस्या, परतापुर पर गोल सर्किल निर्माण, भोला रोड व खिर्वा रोड चौराहे पर अंडर पास या फ्लाई ओवर निर्माण आदि
मांगों को लेकर ज्ञापन दिया। महापौर हरिकांत अहलूवालिया, विधायक
रविंद्र भड़ाना, सोमेंद्र तोमर, विनीत
शारदा अग्रवाल, सुधीर चौहान, आलोक
सिसौदिया, वीनस शर्मा, ललित नागदेव आदि
उपस्थित रहे।
विद्यार्थी खुशी शर्मा, अक्षिता बहुगुणा को सम्मानित भी किया
गया। यहां से नितिन गडकरी चाणक्यपुरी स्थित सांसद के आवास पर पहुंचे। यहां करुणेश
नंदन गर्ग, अजय गुप्ता, हर्ष गोयल,
सुरेश जैन रितुराज, डा. चरण सिंह लिसाड़ी,
नरेंद्र राष्ट्रवादी, सुनील शर्मा, ललित नागदेव, ऋषभ, अंकित आदि
ने स्वागत किया।
शुरुआत में संबोधन के दौरान फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष अनिता सिंह की
तबियत बिगड़ गई। वह गिरने लगीं, जिस पर रमन त्यागी आदि ने उन्हें
संभाला। उमा भारती ने अनिता सिंह के माथे पर हाथ रखकर दिलासा दी। उमा भारती ने
बताया कि अनिता की पुत्री आकांक्षा व दामाद अनिरुद्ध की एकाएक हुई मौत ने उन्हें
तोड़ दिया। बेटी की मृत्यु के समाचार के वक्त अनिता हरिद्वार में मेरे साथ थीं।
मेरे कहने पर ही वह गंगा स्वच्छता अभियान से जुड़ीं।