Monday, November 16, 2015

पुरुषार्थ और भाग्य पर जोरदार बहस

चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय में चल रहे व्यास समारोह में रविवार को पुरुषार्थ और भाग्य पर प्रतिभागियों ने जोरदार बहस की। संस्कृत विभाग की ओर से बृहस्पति भवन में आयोजित अंतरविद्यालय वाद-विवाद प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने संस्कृत में अपनी बात रखी।
पहले सत्र में आयोजित प्रतियोगिता में दयावती मोदी अकादमी के उमंग बालियान, तेजस श्रीवास्तव, केएल इंटरनेशनल की शताक्षी, ऋषिका, दीवान पब्लिक स्कूल की सुरभि, नव्या जैन, नानकचंद शिक्षा सदन की सोनिया, श्रुति ने हिस्सा लिया। विषय 'निश्चय ही पुरुषार्थ के द्वारा भाग्य का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता है' रहा। जिस पर पक्ष में बोलते हुए प्रतिभागियों ने संस्कृत के श्लोक व तथ्यों के आधार पर बताया कि अगर मनुष्य का भाग्य प्रबल नहीं है तो पुरुषार्थ व्यर्थ है, जबकि विपक्ष में बोलते हुए प्रतिभागियों ने कहा कि मनुष्य ही अपने भाग्य का निर्माता है, पुरुषार्थ से वह भाग्य को बदल सकता है। इस अवसर पर डा. द्विवेदीनाथ त्रिपाठी, डा. सूर्यनारायण गौतम, डा. सुमंत दास, डा. सरिता रस्तोगी, डा. हरिप्रसाद दूबे, डा. राजबीर मौजूद रहे। संचालन अलका ने किया।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में केएल इंटरनेशनल की टीम विजेता रही। प्रथम स्थान पर शताक्षी, दूसरे पर ऋषिका और तीसरे स्थान पर उमंग बालियान रहे।
व्यास समारोह में दूसरे सत्र में शोध संगोष्ठी पर महाभारत पर चर्चा की गई। इसमें सुधकराचार्य त्रिपाठी ने महाभारत के दीर्घ जीवनम पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। डीजे कालेज बड़ौत की डा. रुचि गुप्ता ने महाभारत में नीति तत्व की विवेचना की। डा. कृष्ण नारायण पांडेय ने उस काल के भूभाग और राजाओं का उल्लेख करते हुए अखंड भारत के स्वरूप को बताया। डा. द्वारिका नाथ त्रिपाठी ने महाभारत में संगीत के तत्वों को खोजा। डा. हरिप्रसाद ने भी शोध प्रस्तुत किया।

व्यास समारोह के तीसरे सत्र में मध्यप्रदेश के रीवा से आए डा. सूर्यनारायण गौतम ने घंटानाद की कथा सुनाई। एमए की छात्रा ज्योति ने द्रोपदी के चीरहरण, श्रीकृष्ण के बारे में बताया। व्यास समारोह में शाम को कवि समवाय को प्रस्तुत किया गया। डा. पूनम लखनपाल ने दंडक छंद प्रस्तुत किया।

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